श्रद्धालुओं और पर्यटकों की वापसी के इंतजार में है "पवित्र पर्वत" ग्रेट कैलाश

2020-09-14 08:44:30
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तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के आली प्रिफेक्चर की भूलैन काउंटी में स्थित "पवित्र पर्वत" ग्रेट कैलाश और मानसरोवर झील प्रति वर्ष हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करते रहे हैं। पर्यटन के विकास से स्थानीय लोगों के जीवन में काफी सुधार आया है। 69 वर्षीय बूढ़े दोर्गी ने कहा कि मुझे बहुत खुशी है कि यहां हर वर्ष बहुत से पर्यटक और तीर्थयात्री आते रहे हैं।

ग्रेट कैलाश का तिब्बती भाषीय नाम है कांगरिनपोछे। तिब्बती बौद्ध धर्म, तिब्बती बॉन धर्म, हिंदू धर्म और जैन धर्म सब इस पर्वत को विश्व का केंद्र मानते हैं। तीर्थयात्रियों का मानना है कि इस पवित्र पर्वत का एक बार चक्कर लगाने से साल भर के पापों को धो सकता है और इस के 13 बार चक्कर लगाने से पूरी जिन्दगी के पापों को धो सकता है। इधर के सालों में कैलाश पर्वत की तीर्थयात्रा करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। वर्ष 2019 में भूलैन काउंटी का दौरा करने वाले देशी विदेशी पर्यटकों की संख्या 1 लाख 90 हजार तक जा पहुंची और उनमें 54 हजार विदेशी पर्यटक भी हैं। विदेशी पर्यटकों में 73 प्रतिशत भारतीय और 10 प्रतिशत नेपाली हैं।

भूलैन काउंटी सरकार के एक कार्यकर्ता बासांग ने कहा कि अब कैलाश पर्वत की चक्कर लगाने के लिए 54 किलोमीटर लम्बे मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त किया गया है। आसपास कुल तीन आधुनिक होटल भी निर्मित हो चुके हैं। और यहां कई साल पहले याक परिवहन दल भी गठित किया गया जो बाहर के तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को सेवा तैयार करता है। सभी स्थानीय लोगों ने पर्यटन की सेवा में भाग लिया है।

24 वर्षीय लड़का पोंगत्सोक भी याक परिवहन दल में काम कर रहा है। उन्हों ने कहा कि उन के दल में एक हजार से अधिक कर्मचारी हैं और एक हजार घोड़े तथा दो हजार याक भी हैं। यात्रियों को एक बार पर्वत की चक्कर लगाने की सेवा तैयार से दो हजार से अधिक युआन की आय प्राप्त हो सकती है। और उन की मानसिक आय दस हजार युआन तक जा पहुंचती है। उधर बासांग ने कहा कि भूलैन काउंटी में "पवित्र पर्वत" ग्रेट कैलाश और मानसरोवर झील में पर्यटन का विकास करने से गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य साकार किया गया है। अब सरकार का लक्ष्य है कि अधिक पर्यटन संसाधन का विकास कर सभी स्थानीय लोगों की आय में सुधार लाया जाएगा।

उधर लड़के पोंगत्सोक ने इधर दो तीन सालों में कुल एक हजार से अधिक विदेशी अतिथियों को सत्कार किया है। पर महामारी फैलने के कारण इस साल सीमावर्ती व्यापार और पर्यटन और स्थानीय लोगों की आय पर प्रभाव पड़ा है। इस वर्ष की पहली छमाही में भूलैन काउंटी में केवल दस हजार पर्यटकों ने दौरा किया है और पर्यटन की आय 90 लाख युआन तक रही। आशा है कि महामारी की समाप्ति के बाद और अधिक भारतीय और नेपाली तीर्थयात्री यहां आएंगे। और भूलैन काउंटी की सरकार जरूर ही पर्यटकों की अच्छी तरह सेवा करेगी।

तिब्बती सीमा पर गश्ती करने वाले सिपाही की प्रेम कहानी

37 वर्षीय वांग यूंग चीन-नेपाल सीमा पर तैनात चीनी सीमावर्ती टुकड़ियों के अफसर हैं। अब वांग यूंग तिब्बती सैन्य क्षेत्र में सीमावर्ती सेना का मॉडल अफसर बने हैं और उन का 7 वर्षीय एक बेटा भी है।

वांग यूंग तिब्बत की सीमावर्ती सेना में दसेक सालों के लिए सेवा कर चुके हैं। और कहने योग्य बात है कि वांग यूंग के पिता जी भी सीमावर्ती सेना में सेवा करने वाले अफसर थे। अपने पिता जी के प्रभाव से वांग यूंग ने एक सैनिक कालेज में से स्नातक होने के बाद सेना में सेवा करने का जीवन चुना।

वर्ष 2006 में वांग यूंग को एक लड़की से मिला और दोनों प्यार की नदी में पड़ गये। इस के बाद वांग यूंग को तिब्बत के शिगात्से में तैनात किया गया। उस समय सीमावर्ती स्टेशन में मोबाइल फोन का कोई संकेत नहीं था, निश्चित टेलीफोन स्थापित नहीं था और डाकिया केवल आधे महीने के लिए एक बार आते रहते थे। चार महीने के बाद वांग यूंग को लड़की का एक पत्र मिला जिसमें ऐसा लिखा गया, "मैं इस प्यार की भावना को मूल्यवान समझती हूं, लेकिन मैं महीनों तक अलग से रहने के दर्द को बर्दाश्त नहीं कर सकती हूं। आशा है कि आप एक और बेहत्तरीन लड़की खोज सकेंगे।"

एक साल बाद वांग यूंग को एक और लड़की से मिला और उसके साथ शादी कर ली। पत्नी के पिता जी भी सीमावर्ती सेना में सेवा करते थे। उन्हों ने अपनी बेटी के एक सीमावर्ती सिपाही के साथ शादी करने का पूरा समर्थन किया। लेकिन दूरी से भावना को चुनौती फिर भी मौजूद है। बाद में सीमावर्ती स्टेशन में उपग्रह फोन रखा गया, पर इस का उपयोग करने का खर्च भी ज्यादा है। सीमावर्ती सैनिकों के लिए एक साल में 77 दिनों की छुट्टियां मिलती हैं। और सैनिकों के रिश्तेदारों को सेना में छुट्टियां लेने का मौका भी है। पर वांग यूंग की पत्नी ने केवल एक बार दौरा किया, क्योंकि वे पठार की ऊंचाई के वातावरण से अनुकूल नहीं रहीं। अब वांग यूंग का बेटा प्राइमरी स्कूल में पढ़ रहा है और बेटे की देखभाल भी माता-पिता को सौंपा गया है।

प्यार की भावना भेजने के लिए वांग यूंग अक्सर अपनी पत्नी और माता-पिता को पत्र लिखते रहे हैं। और पत्नी के जन्मदिन या प्रमुख त्योहारों पर वे पत्नी को आश्चर्यचकित करने के लिए ऑनलाइन के माध्यम से फूल भी भेजवाते हैं। और वांग यूंग ने अपने बेटे के साथ रहने के लिए हर संभवतः मौके को मूल्यवान समझते हैं। क्योंकि वे अपने बेटे को अधिक प्यार और देखभाल देना चाहते हैं।

वांग योंग की सीमावर्ती सेना 482 किलोमीटर की सीमा की रक्षा और गश्त के लिए जिम्मेदार है। टुकड़ियों के कमान स्टेशन की ऊंचाई 4560 मीटर है और कई सीमावर्ती स्टेशनों की ऊंचाई लगभग पांच हजार मीटर रहती है। वहां औसत तापमान शून्य से नीचे 4 डिग्री तक रहता है और हवा में ऑक्सीजन की मात्रा समुद्र के स्तर से 50% से भी कम है। और वहां एक वर्ष में दो सौ दिनों के लिए 8 स्तरीय तेज़ हवा भी चलती है। उच्च ठंड और हाइपोक्सिया के वातावरण में सीमावर्ती सिपाही अपने उपकरणों के साथ साथ एक वर्ष में 140 से अधिक बार पहाड़ी राह पर गश्त करते रहे हैं। गश्त करने के अलावा सीमावर्ती सैनिक भूकंप जैसे प्राकृतिक आपदाओं में राहत करने और बुनियादी उपकरणों का निर्माण करने का काम भी करते हैं।

शांति और युद्ध की बात करते हुए वांग यूंग ने कहा कि हम सीमावर्ती सैनिक हैं। हम युद्ध से नहीं डरते हैं और अपनी मातृभूमि की शांति के लिए लड़ने को तैयार हैं। लेकिन हम भी युद्ध नहीं चाहते हैं। क्योंकि युद्ध होने से कई परिवारों और खूबसूरत चीजों को नष्ट कर दिया जाएगा। परिवारजनों के समर्थन से मैं सीमावर्ती टुकड़ियों में 19 साल काम कर चुका हूं। और मुझे अपनी मातृभूमि के दक्षिण-पश्चिम द्वार के रक्षक होने के लिए बहुत गौरव लगता है। मेरे जीवन में सबसे अनमोल अनुभव भी यहाँ हैं। यहां मैं ने बहुत से जीवन के उद्देश्य साकार किये हैं। मुझे इस भूमि से गहरी प्यार है।


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