तिब्बती मशहूर डॉक्टर लोसांग थिन्जेंन की कहानी

2020-06-28 14:36:52
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                                                                                                           (फोटो : तिब्बत सीएन)

 

लेखक चेन डान ने हाल ही में चाइना तिब्बत ऑनलाइन के वेबसाइट पर तिब्बती डॉक्टर लोसांग थिन्ज़ेन के यहां इलाज लेने की अपनी कहानी सुनायी। वर्ष 2005 में चेन डान ने ल्हासा में "तिब्बत मानवीय भूगोल" पत्रिका में संपादक का काम करना शुरू किया। तबीयत की समस्या से वे मशहूर तिब्बती डॉक्टर किमू लोसांग थिन्जेंन के चिकित्सालय जाकर इलाज लेने गयी। यह उन की कहानी हैः

 

तिब्बत एक ऐसा पवित्र स्थल है जहां ऊंचे ऊंचे बर्फ के पहाड़ और विशाल घास के मैदान हैं। वहां की ताज़ी हवा में सांस लेते हुए मानव का मन भी शुद्ध बन जाता है। वर्ष 2005 के अक्तूबर में मैं ने पेइचिंग में स्थित मेरे घर से बिदा देकर तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा में पहुंचकर पत्रिका "तिब्बत मानवीय भूगोल" में संपादक का काम करना शुरू किया। लेकिन पठार पर रहने से मेरी तबीयत बिगड़ने लगी। रात को नहीं सो सकी और जब जुकाम हुआ तब दो महीनों तक ठीक नहीं हो सकी। मैं ने अस्पताल में डॉक्टरों से पूछा तबतो जवाब दिया गया कि यह पठार की बीमारी है। कुछ समय से आदत करने की जरूरत है। लेकिन कई महीनों के बाद मेरी स्थितियां और बिगड़ने लगी। मेरे ऑफिस के प्रमुख ग्यात्सो ने मुझे ल्हासा शहर में एक जाने माने तिब्बती डॉक्टर किमू लोसांग थिन्जेंन के यहां इलाज लेने का सुझाव दिया।  

एक दिन लंच टाइम के बाद ग्यात्सो जी के साथ मैं डॉक्टर थिन्जेंन के घर गयी। साठ उम्र से ऊपर होने वाले डॉक्टर जी बहुत दयालु और मिलनसार आदमी हैं। अपने रोगियों के साथ बैठते हुए दोस्त के जैसे लगते हैं। उन के मकान की दीवार पर कई पुरस्कार बोर्ड लगे हुए हैं। उनमें संयुक्त राष्ट्र शांति फाउंडेशन द्वारा वर्ष 2001 में उन्हें सम्मानित किये गये "वर्ल्ड फेमस डॉक्टर अवार्ड", "अंतर्राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा पुरस्कार" और "प्राकृतिक चिकित्सा पुरस्कार" आदि भी शामिल हैं। उसकी आँखें बहुत तेज़ हैं, जैसे कि वे न सिर्फ बीमारियों के शरीरिक कारक, बल्कि इन के दिल में मौजूद कारक को भी देख सकते हैं। डॉक्टर जी ने मेरी नाड़ी को महसूस किया और कुछ प्रश्न पूछने के बाद प्रिस्क्रिप्शन लिखा। दवा खाने के बाद मेरी तबीयत ठीक होने लगी।

डॉक्टर थिन्जेंन की चिकित्सा कौशल प्रशंसनीय है। इसलिए हम अकसर डॉक्टर जी के पास जाते रहे और हम ने कई बार अपने दोस्तों के लिए परामर्श लिया। इस के बाद हम डॉक्टर जी के दोस्त भी बने। हम अकसर साथ-साथ बातचीत करते रहे और फोटो खींचते रहे। डॉक्टर लोसांग थिन्जेंन का परिवार सदैव छांगतु शहर की कूंगच्वेइ काउंटी में रहते रहे हैं। इन के परिवार ने नौ पीढ़ियों से डॉक्टर का काम किया है। डॉक्टर थिन्जेंन के पिता जी और दादा जी सब तिब्बत के मशहूर डॉक्टर थे। डॉक्टर थिन्जेंन बचपन से ही पिता जी के साथ-साथ पहाड़ों में जड़ी-बूटी का ग्रहण करने जाते थे। पांच साल की उम्र में उन्हों ने एक मंदिर में अभ्यास करना शुरू किया था। नौ साल की उम्र में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति सीखना शुरू किया। पिता जी ने अपने निधन होने से पहले थिन्जेंन को इलाज करने के अनुभव, निदान और नुस्खे की तमाम जानकारियां सिखायीं। 29 साल की उम्र में थिन्जेंन अपने शहर के अस्पताल में एक डॉक्टर बने। इस के बाद वे राजधानी ल्हासा में काम करने गये। बाद में वे ल्हासा शहर में रोगियों का इलाज करने के अलावा चिकित्सा विभाग के प्रधान आदि के पद भी संभाले। बीते चालीस सालों में उन्हों ने पांच लाख रोगियों का इलाज किया है। उच्च रक्तचाप, कोरोनरी हृदय रोग, मधुमेह, पाचन तंत्र के अल्सर तथा गठिया आदि बीमारियों के उपाचर में डॉक्टर थिन्जेंन बहुत मशहूर हैं। रिटायर्ड होने के बाद डॉक्टर थिन्जेंन हर साप्ताहांत में अस्पताल में स्वयं सेवा करने जाते हैं। बहुत से रोगी, उनमें कुछ दूरस्थ क्षेत्रों से आये हैं, डॉक्टर थिन्जेंन के क्लिनिक में इलाज लेने के लिए आते रहते हैं। बहुत से रोगी डॉक्टर थिन्जेंन के यहां इलाज लेने के लिए सुबह चार पाँच बजे लाइन में खड़े हुए आते रहते हैं और वे प्रति दिन लगभग सौ से अधिक रोगियों का इलाज कर सकते हैं।

एक दिन डॉक्टर थिन्जेंन ने मुझे बताया, "मैं ने अपने दशकों के नैदानिक अभ्यास के आधार पर संक्षेपित अनुभवों तथा अनेक परिपक्व नुस्खों का संपादन किया है। मैं इसे एक किताब का प्रकाशन करना चाहता हूं।" उन की बातें सुनकर मुझे बहुत आश्चर्यचकित हुआ। थोड़ी देर बाद मैं ने जवाब दिया, "ये नुस्खे आप के परिवार के लिए मूल्यवान संपत्ति है। इसे प्रकाशित करने के बाद सब लोग यह गुप्तचार जानेंगे।" डॉक्टर जी ने मुस्कराते हुए कहा, "तब तो अच्छा होगा! चिकित्सा और दवा लोगों को बचाने के लिए है। मैं कितने रोगियों का इलाज कर सकता हूं ? अगर दूसरे डॉक्टर भी इन नुस्खों का प्रयोग करें, तो और ज्यादा रोगियों को बचा सकेंगे।" इन की बातों से मुझे गहरी छाप लगी। ये उपचार अनुभव और नुस्खे डॉक्टर जी के परिवार की नौ पीढ़ियों के चिकित्सकों द्वारा संचित किये गये हैं। डॉक्टर थिन्जेंन ने अपने नुस्खे को किसी दवा कंपनी को बेचाने के बजाये उन्हें मुफ्त में सार्वजनिक करना चुना। दुनिया में हर कोई आदमी छोटा है, लेकिन मानवता की असीम शक्ति साबित होती है।


तिब्बत के चिकित्सा और स्वास्थ्य कार्यों में उल्लेखनीय सुधार

सन 1959 में तिब्बत में लोकतांत्रिक रुपांतर किया गया और इस के बाद तिब्बत में चिकित्सा और स्वास्थ्य कार्यों में उल्लेखनीय सुधार आया है। आम लोगों के स्वास्थ्य स्तर को बहुत उन्नत किया गया है। चिकित्सा और स्वास्थ्य कार्यों के बुनियादी उपकरणों का भी लगातार निर्माण किया जा रहा है।

लोकतांत्रिक रुपांतर होने से पहले तिब्बत में कोई आधुनिक चिकत्सा संस्था नहीं हुई थी। भू-दासों को कोई भी किचित्सा सेवा नहीं प्राप्त हो सकती थी। चेचक, हैजा, टाइफाइड बुखार जैसे रोगों की महामारी फैलती रही थी। तिब्बती लोगों की औसत जीवन प्रत्याशा केवल 35.5 वर्ष रही थी।

लोकतांत्रिक रुपांतर किया जाने के बाद पार्टी और सरकार के प्रयासों से तिब्बत में चिकित्सा और स्वास्थ्य कार्यों की संपूर्ण व्यवस्था कायम की गयी है। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में अनेक आधुनिक अस्पताल निर्मित हो चुके हैं। स्वायत्त प्रदेश के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य अस्पताल का विस्तार भी किया गया है। पूरे प्रदेश में सभी निवासियों को चिकित्सा बीमा व्यवस्था के तहत रखा गया है। और इधर के वर्षों में तिब्बत में "इंटरनेट + मेडिकल" स्मार्ट चिकित्सा सेवाओं का प्रसार किया जा रहा है। आधुनिक चिकित्सा कार्यों का विकास करने के साथ-साथ पारंपरिक तिब्बती चिकित्सा का अच्छी तरह उम्मीदवार किया गया है। पारंपरिक तिब्बती चिकित्सा पद्धति को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की नाम सूची में शामिल किया गया है।

तिब्बत में चिकित्सा कार्यों में सुधार लाने के लिए केंद्र सरकार और भीतरी इलाकों ने इधर के दशकों में तिब्बत की भारी शक्ति से सहायता दी है। विश्वास है कि पूरे देश के समर्थन और सभी जातीयों की जनता के संयुक्त प्रयासों से तिब्बती स्वायत्त प्रदेश में चिकित्सा कार्यों का उज्जवल भविष्य जरूर हो जाएगा।

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