तिब्बती किसानों और चरवाहों तक कृषि तकनीशियनों की डिलीवरी सेवाएं

2020-04-26 09:58:08
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हाल ही में आयोजित तिब्बती किसानों और चरवाहों तक कृषि तकनीशियनों की डिलीवरी सेवाएं सभा में प्राप्त खबर है कि इस वर्ष कई हजार कृषि तकनीशियन ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और चरवाहों को तकनीकी सेवाएं प्रदान करने जाएंगे। ये तकनीशियन काउंटी नगर में रहेंगे और प्रति वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम सौ दिनों तक सेवा करते रहेंगे।

तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के कृषि कार्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि कृषि कार्य विभाग, कृषि विज्ञान अकादमी तथा तिब्बत कृषि और पशुपालन संस्थान के कुल दो हजार छह सौ से अधिक कृषि तकनीशियन भी इस अभियान में भाग लेंगे। इस साल तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में कृषि और पशुपालन के विकास के सामने अनेक चुनौतियां नजर आ रही हैं। तकनीकी शक्तियों के माध्यम से कृषि और पशुपालन के विकास तथा किसानों और चरवाहों की आय वृद्धि को बढ़ाने की बड़ी आवश्यकता है। प्रदेश के ये 2600 से अधिक तकनीशियन मुख्य तौर पर तिब्बती जौ, याक, पशुपालन, दूध, ब्जियां और चारा घास आदि उद्योंगों के विकास में किसानों व चरवाहों को सेवा प्रदान करेंगे। साथ ही वे किसानों और चरवाहों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण का आयोजन भी करेंगे।

इधर के वर्षों में तिब्बत में बुनियादी कृषि तकनीकी सेवा की व्यवस्था कायम की गयी है। कृषि उत्पादन में तकनीक की योगदान दर 51 प्रतिशत तक जा पहुंची है। अभी तक प्रदेश में कुल 875 कृषि तकनीक प्रसार संस्थाएं स्थापित हैं जिन में कुल 8843 कर्मचारी कार्यरत हैं। प्रदेश के तहत कृषि विज्ञान अकादमी ने अनेक क्षेत्रीय कृषि तकनीक आदर्श अड्डे स्थापित किये हैं। जो भिन्न भिन्न तरीकों से किसानों और चरवाहों के लिए तकनीकी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। मिसाल के तौर पर न्यिंग-ची क्षेत्र के बाच्यूंग गांव में एक पारंपरिक दवा सहकारी स्थापित है। जहां विशेष रूप से गैस्ट्रोडिया और गानोडर्मा आदि चीनी पारंपरिक जड़ी बूटियों का रोपण किया जाता है। गांववासियों ने कहा कि पारंपरिक जड़ी बूटियों का रोपण करने से उन के जीवन में बहुत सुधार आया है। इस के चलते तकनीक के विकास के प्रति किसानों की इच्छा भी बढ़ी है। किसान गासूंग के घर में इन्क्यूबेटर तथा सभी प्रकार की भिकर्मक और योगिक उपकरण रखे हुए हैं। वर्ष 2008 में गासूंग को सरकार की मदद से ल्हासा शहर में तकनीक प्रशिक्षण में भाग लिया। जहां उन्हों ने 4 महीने के लिए रोपण की तकनीक सीखी। इस के बाद गासूंग ने अपनी जन्मभूमि में पारंपरिक जड़ी बूटियों की कृत्रिम खेती में भारी सफलता हासिल की। और गासूंग ने गांव वासियोंको अपने स्वयं के ग्रीनहाउस में आमंत्रित कर उन्हें तकनीक सिखायी और निःशुल्क तौर पर बीज प्रदान किये। वर्ष 2016 में गासूंग ने अपने गांव में पेशेवर सहकारी स्थापित की और गांव में कुछ गरीब परिवारों के लोगों को गठित कर जड़ी बूटियों का विकास किया। अब सहकारी के छह ग्रीन हाउस निर्मित हो चुके हैं और उन के उत्पादों का बाजार में बहुत स्वागत किया गया है।


हरित पारिस्थितिक गलियारे का निर्माण

तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की ग्यात्सा काउंटी में हरित पारिस्थितिक गलियारे का जोरों पर निर्माण किया जा रहा है। अखरोट ग्यात्सा काउंटी में विशेष संसाधनों में से एक माना जाता है। इस साल ग्यात्सा काउंटी में राज मार्ग के दोनों तटों पर अखरोट रोपण के माध्यम से हरित गलियारे का निर्माण किया गया। इसी तरह काउंटी में गुजरते दो राज मार्गों के दोनों तटों को पचास किलोमीटर लम्बा अखरोट पारिस्थितिक गलियारा बनाया गया है।

ग्यात्सा काउंटी के राज मार्ग मुख्य तौर पर यालूजांबू नदी घाटी के यातायात लाइन पर स्थित है। जहां लालीन रेलवे मार्ग तथा जांगमू पावर स्टेशन आदि बड़े पैमाने वाली परियोजनाएं भी मौजूद हैं। ग्यात्सा काउंटी के वानिकी और चारागाह ब्यूरो ने स्थानीय परिवहन विभागों के साथ समन्वय बिठाकर रोपण योजना, भूमि निर्माण, पौधे चुनने तथा पेड़ गड्ढे खोदने आदि की तैयारियां समाप्त कीं। इस के बाद आधिकारिक तौर पर वन रोपण का काम शुरू होने लगा। अभी तक इस हरित गलियारे में कुल कई हजार अखरोट पेड़ों तथा सैकड़ों हरित पेड़ों का रोपण किया जा चुका है। इस तरह राजमार्ग के दोनों तटों को हरित बनाने के साथ साथ आर्थिक लाभ भी मिल पाएगा। इस के साथ सिंचाई पाइप आदि उपकरण बिछाने और पेड़ों का संरक्षण करने आदि का काम भी किया जा रहा है। अनुमान है कि तीन साल बाद जब इन पेड़ों पर फल लगने के बाद तब ग्यात्सा काउंटी में प्रति वर्ष कम से कम तीन लाख युआन का आर्थिक लाभ मिल पाएगा। इसी के साथ साथ काउंटी की सरकार ने सभी इकाइयों को वृक्षारोपण करने का काम सौंप दिया और उन्हें निःशुल्क पौधे दिये।

उधर पारिस्थितिक निर्माण करने के जरिये तिब्बत के अनेक क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य भी साकार किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी विशेषता के आधार पर उद्योगों का विकास करने से लोगों का जीवन अमीर बनाया गया है। मिसाल के तौर पर ल्हासा शहर के उपनगर में स्थित निम्मू काउंटी में तिब्बती पारंपरिक अगरबत्ती बनाने का मशहूर स्थल है। जहां सुगंधित सामग्रियों का निर्माण करने वाले गलियारे को राष्ट्र स्तरीय पर्यटन स्थल भी माना जाता है। निम्मू अगरबत्ती बनाने का एक हजार तीन सौ साल पुराना इतिहास है। और इसी उद्योग के विकास से स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में बहुत सुधार आया है। वर्ष 2016 में सरकार की मदद में निम्मू काउंटी के कई परिवारों ने संयुक्त रूप से निम्मू तिब्बती अगरबत्ती कंपनी स्थापित की। जिसमें सौ से अधिक परिवारों की भागीदारी होने लगी है और सभी निवासियों को इस का लाभ मिलता है।

उधर च्यांगत्सी काउंटी में सैफरॉन का रोपण करने की बात भी चर्चा करने योग्य है। वर्ष 2016 में जवान जंग आन पींग ने भीतरी इलाके से च्यांगत्सी काउंटी में स्थानीय किसानों को सैफरॉन बोने की तकनीक सिखायी। उन्हों ने किसानों के ग्रीन हाउस में सैफरॉन का रोपना करवाया और सैफरॉन बोने की तकनीक, बीज और खरीद आदि की जिम्मेदारी उठायी। अब उन की मदद में स्थानीय लोगों के दर्जनों ग्रीन हाउस में सैफरॉन का रोपण करना शुरू किया गया है। तीन सौ से अधिक परिवारों को गरीबी से छुटकारा पाया गया है। इस के बाद जंग आन पींग ने सैफरॉन के आधार पर केक, हानि और एसेंशियल तेल आदि का निर्माण करना शुरू किया है।




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