तिब्बत में प्रवासी पक्षियों का संरक्षण

2020-04-20 10:20:48
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तिब्बती पठार प्रवासी पक्षियों के लिए अद्भुत जगह है, जहां विशाल घास के मैदान, स्वच्छ झील और नदियां तथा हरित जंगल फैलते हैं। सबसे अहम की बात है कि तिब्बती पठार पर मानव का विकास कम होता है और इसलिए जंगली जानवरों के लिए पर्याप्त प्राकृतिक वातावरण तैयार है। सर्दियों के दिन एशिया में प्रवासी पक्षी आम तौर पर उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवास करने जाते हैं। लेकिन तिब्बती पठार पर उन्हें रहने के लिए बहुत से आरामदायक आवास भी मिल सकते हैं।

तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की ल्हासा नदी के तटस्थ लीनचौ काउंटी में इधर के दिनों असंख्य जंगली बतख, जंगली कलहंस और काली गर्दन वाली क्रेन उड़ने आ रहे हैं। प्रति दिन सुबह ये पक्षी साथ-साथ उड़कर बर्फीले पहाड़, झील, आर्द्रभूमि या ग्रामीण क्षेत्रों के खेतों में भोजन तलाशने जा रहे हैं। काली गर्दन वाली क्रेन को चीन के प्रथम स्तर वाले संरक्षित जानवरों की सूची में कराया गया है। काली गर्दन वाली क्रेन तिब्बती लोगों में "शुभ पक्षी" माना जाता है। सर्दियों के दिन बड़ी मात्रा वाले क्रेन उत्तरी ओर से ल्हासा नदी और यालूजांगबू नदी के क्षेत्रों में प्रवास करने आये हैं। इन का संरक्षण करने के लिए लीनचौ काउंटी ने प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र में विशेष रक्षक भी नियुक्त किया है। 58 वर्षीय थेंज़िन भी उन में से एक हैं। पक्षियों की देखभाल के लिए थेंज़िन हर सुबह उठकर सुनसान फील्ड में गश्त करते रहे हैं। थेंज़िन ने कहा कि उन के संरक्षित क्षेत्र में कई सौ क्रेन रहते हैं। और यह संख्या भी निरंतर बढ़ती रही है। गांव वासियों ने कहा कि जौ के खेत में हर दो साल के लिए जुताई की जाती है और प्रति वर्ष काली गर्दन क्रेन फसल के बाद उड़ने आते हैं। यहां के क्षेत्र में आदमी और पक्षी सामंजस्य से साथ साथ रहते हैं। संरक्षण की मजबूती के साथ साथ अधिक से अधिक प्रवासी पक्षी सर्दियों में यहां आते हैं। काली गर्दन क्रेन का अच्छी तरह संरक्षण करवाने के लिए लीनचौ काउंटी के वानिकी ब्यूरो ने काले गर्दन क्रेन रक्षक नियुक्त किये और इन्हें प्रशिक्षित किया। सभी रक्षकों को पक्षियों का अवलोकन और बचाव करने का बुनियादी ज्ञान भी प्राप्त होना चाहिये। सर्दियों के दिन काली गर्दन क्रेन को खाद्य पदार्थ पूरक करने के लिए गेहूं भी दिया जाता है।

लीनचौ काउंटी के वानिकी ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि पहले यहां आने वाले पक्षी कम थे। लेकिन इधर वर्ष सर्दियों के दिन असंख्य जंगली बतख, जंगली कलहंस और काली गर्दन वाली क्रेन लीनचौ काउंटी के यहां आ रहे हैं। थेंज़िन ने कहा कि वे आम तौर पर मोटरसाइकिल से गश्त करते हैं। बाहर के खेत में कई आवारा कुत्ते चलते हैं, वे काले गर्दन क्रेन को प्रहार करते हैं। इससे बचने के लिए इन कुत्तों को भगाना पड़ता है। और काले गर्दन क्रेन में जो घायल हो, इन का बचाव भी रखना है। लीनचौ काउंटी के वानिकी ब्यूरो के उप प्रधान चांग कौ फंग ने कहा कि अभी तक लीनचौ काउंटी में स्थापित काले गर्दन क्रेन संरक्षण क्षेत्र का क्षेत्रफल 96.8 वर्ग किलोमीटर तक जा पहुंचा है। सर्दियों के दिन लगभग दो हजार काले गर्दन क्रेन लीनचौ काउंटी आते रहते हैं। इधर के वर्षों में लीनचौ काउंटी ने संरक्षण क्षेत्र की हरियाली को जोर लगाया। संरक्षण क्षेत्र ने बहुत से पेड़ लगाये, झील और नदियों के तटीय क्षेत्रों का संरक्षण किया और वन्यजीवों के आवास की जरूरतों को पूरा किया ताकि जानवरों के लिए आरामदायक घर बनाया जा सके। स्थानीय सरकार ने प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र की स्थापना में बहुत सी कठिनाइयों को दूर किया। मिसाल के तौर पर नदी के तटीय क्षेत्रों में पेड़ लगाना मुश्किल है। क्योंकि नदी के किनारे की मिट्टी ज्यादातर रेत है, जहां पेड़ पानी को अवशोषित नहीं कर सकती हैं। पर ल्हासा नदी पारिस्थितिक वातावरण की संरक्षण योजना चलायी जाने के बाद पेड़ लगाने की जीवित दर में बहुत सुधार हुआ है। आज नदियों के तटीय क्षेत्रों में चिनार, विलो और एल्म आदि पेड़ें लगी हुई हैं, चारों ओर पेड़ों और फूलों की क्यारियां हैं और सारी छवि मनमोहक हो जाती है। चांग कौ फंग ने कहा कि सिंचाई का सवाल हल होने के बाद नदी के किनारे पर हरियाली को भी बढ़ाया गया है।

हरियाली की योजना लागू करने से पक्षी संरक्षण के लिए मददगार है। अब लीनचौ काउंटी के प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र में काले गर्दन क्रेन को खिलाने के दस स्टेशन भी रखे हुए हैं। जहां कई विशेष रक्षक काले गर्दन क्रेन को खिलाने और संरक्षण करने का काम करते हैं। लीनचौ काउंटी में कुल नौ सौ ऐसे रक्षक हैं जो प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र में रहने वाले सभी जंगली जानवरों के संरक्षण के जिम्मेदार हैं। पक्षियों के लिए अधिक आवास क्षेत्र प्रदान करने के लिए लीनचौ काउंटी ने आर्द्रभूमि बहाली परियोजना शुरू की। ताकि पक्षियों के पाथवे और आवास क्षेत्रों का संरक्षण कर सके। प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र के आसपास एक किलोमीटर के फार्मलैंड में जो पक्षियों के कारण से नुकसान मिला है, उन्हें मुआवजा भी दिया जाता है।

लीनचौ काउंटी के अलावा तिब्बत के आली प्रिफेक्चर में भी काले गर्दन क्रेन के संरक्षण के लिए एक प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र स्थापित है। इस क्षेत्र में स्थित एक सीमावर्ती गांव देमछोक में कई दर्जन परिवार हैं। देमछोक गांव के पास एक आर्द्रभूमि पारिस्थितिक पार्क स्थापित हैं। वर्ष 2011 से देमछोक में सीमांत खुशहाल आदर्श गांव का निर्माण शुरू हुआ था। वर्ष 2018 तक गांव हरेक परिवार को 200 वर्ग मीटर विशाल एक दो मंजिला इमारत प्राप्त हुआ। गाँव पेड़ों की कतारों से घिरा हुआ है। गांव समिति के कार्यालय के सामने एक विशाल चौक और बास्केटबॉल कोर्ट आदि भी निर्मित हैं। गांव में सड़क लाइट, सार्वजनिक शौचालय, लैंडफिल, सौर ऊर्जा स्टेशन, बिजली व जल की आपूर्ति उपकरण, पॉस्ट तथा मोबाइलफोन संचार नेटवर्क आदि सभी सेवाएं उपलब्ध हैं। चारों ओर पेड़ों और फूलों की क्यारियां हैं। सड़कों के पास दुकान, चायघर, ई-कॉमर्स केंद्र और कृषि बैंक का सर्विस कार्यालय भी रखे हुए हैं। गांववासियों ने कहा कि सन 1980 के दशक में उन के मकान आम तौर पर मिट्टी से बनाया गया था। आज सभी परिवारों का आधुनिक उपकरण से लैस मकान निर्मित किया गया है। और बहुत से गांववासियों ने मोटर गाड़ी भी खरीदी है।

गांव के बाहर एक नदी कलकल करती हुई बहती है। वृक्षारोपण से जंगली पक्षियों को भी आकर्षित किया गया है। स्थानीय सरकार के अफसरों ने कहा कि इधर के सालों में अनेक काले गर्दन क्रेन दमछोक के आर्द्रभूमि आते हैं और सर्दियों के दिन भी नहीं जाएंगे। पर्यावरण के सुधार से लोगों का जीवन खुशहाल बनाया गया है, और इससे जंगली जानवरों के लिए भी एक उपयुक्त घर लाया गया है।

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