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तिब्बती भोजन का स्वाद लें

2020-03-23 14:42:04
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तिब्बती पठार पर भिन्न भिन्न किस्म कृषि और पशुधन उत्पादों की आपूर्ति है और वहां तिब्बती भोजन का स्वाद लेने का लम्बा इतिहास है। तिब्बत का दौरा करने वाले पर्यटकों को यह महसूस हुआ कि तिब्बत के अनेक शहरों में बहुत से आधुनिक और सूसज्जावट वाले रेस्त्रां मिल सकते हैं जहां प्रस्तुत तिब्बती भोजन भी बहुत स्वादिष्ट है। इधर के वर्षों में जन जीवन स्तर के बढ़ने के साथ-साथ अधिकाधिक लोगों ने यात्रा करके छुट्टियों के दिन बिताना चुना है। तिब्बत जाना और वहां विशेष फूड का स्वाद लेना बहुत अच्छा विकल्प है।

आम लोगों की समझ में तिब्बती भोजन में शामिल हैं मटन जैसे मांस, दही, बटर टी, चैंपा, मीठी चाय और जौ से बना वाइन आदि। सच है कि ये सब तिब्बत में जातीय विशेषता वाले भोजन हैं और इन का स्वाद लेना पर्यटकों के लिए प्रथम चयन है। पर राजधानी ल्हासा शहर में मिलने वाले तिब्बती भोजन बहुत विशेष हैं और इन का स्टाइल भी दूसरे क्षेत्रों से अलग है। ल्हासा शहर के रेस्त्रां में गुप्त कौशल से बनी दही, स्वादिष्ट मीठी चाय, मधुर जौ शराब और तिब्बती शैली होट पोट आदि सब मिल सकते हैं।

पठार के मनोहर दृश्यों में तिब्बती फूड खाने से बहुत विशेष सुनहरा महसूस लगता है। ल्हासा शहर का उपनाम है "सनलाइट सिटी" जहां लोग अपने मन को खाली बनाकर चुपचाप में दिल का महसूस छू सकते हैं। इसी वक्त पर अगर आप के मेज पर कोई तिब्बती फूड रखे, तो इस का भावना अद्भुत होगा। ल्हासा शहर में ऐसे बहुत से रेस्त्रां मिलते हैं। वहां सिर्फ दही नहीं, चाय, शराब, मांस और तरह तरह केक और ब्रेड सब की आपूर्ति होती रहती है।

ल्हासा शहर का दौरा करते हुए पर्यटकों को यह पता लगता है कि इस शहर की सड़कों में बहुत से विशेष रेस्त्रां हैं। उनमें सिर्फ आम भोजन नहीं, तिब्बती शैली वाली दही की आपूर्ति भी की जा रही है। ल्हासा में लोग अपना विशेष दही त्योहार यानी शेटन त्योहार की खुशी मनाते हैं। उसी दिन सभी लोगों के लिए पसंद का खाना दही है। और आज लोगों ने दही में फल के टुकड़े भी डालना शुरू किया है। और दही के आधार पर बने डेसर्ट और केक भी तैयार हैं। ल्हासा शहर के मशहूर बाक्वो सड़क में दही बनाने वाला शॉप भी है। इस शॉप की दीवार पर विश्व के विभिन्न देशों से गये पर्यटकों द्वारा लिखित शब्द या संक्षिप्त वाक्य दिखते हैं। पर्यटकों ने ये शब्द लिखकर तिब्बत में यात्रा करते समय प्राप्त अपनी भावना सुनायी। और इसी शॉप में लोग दही बनाने की पारंपरिक कौशल देख पाते हैं।

तिब्बती दही बनाने का अपना अनोखा नुस्खा है। तिब्बती दही बनाने में "पुराने दही" डालना ही पड़ता है। ल्हासा शहर के दही शॉप के कर्मचारी रोज देहाती क्षेत्र से आये ताजा दूध को उबाल कर इसमें पुराना दही डालते हैं। फिर इसे पूरी रात के लिये ढके रहते हैं, और अगली सुबह लोग बहुत स्वादिष्ट तिब्बती दही खा सकते हैं। ल्हासा शहर की सड़कों में खड़े छोटे छोटे रेस्त्रां में दही के अलावा मीठा चाय, बटर टी और तिब्बती नूडल्स आदि भी तैयार हैं। तिब्बती लोगों के लिए ये उन के पारंपरिक खाना है। ल्हासा शहर के क्वांगमींग मीठा चाय दुकान में हर रोज सैकड़ों लोग इकट्ठे होकर यह चाय पीते रहे हैं। तिब्बत का मीठा चाय दूसरे यहां के चाय के जैसे होता है जो याक का दूध, काला चाय और शूकर से बना है। तिब्बती चाय घर भी लोगों के लिए आदान प्रदान करने की जगह है। जहां लोक इकट्ठे होकर चाय पीते हुए चैटिंग करते हैं या धूप में बैठते रहते हैं, और कुछ समय वे पोकर और पासा भी खेलते रहते हैं। लेकिन तिब्बती लोगों के लिए त्योहार के दिनों में वे एक दूसरे के घर जाते हैं और जौ शराब और सूखे मांस से दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ मनोरंजन करते हैं। तिब्बती भाषा में जौ शराब को छियांग कहलाता है। इसे बनाने का बहुत पुराना इतिहास है। तिब्बत में पर्यटन के विकास के चलते बहुत से पर्यटकों को यह शराब पीने की आदत हुई है। जौ शराब दुकानदार के अनुसार यह शराब बनाने के लिए उपयोगी सामग्री यानी जौ को दो बार धोना चाहिए। जौ को दो बार धोकर पकने के बाद विशेष खमीर के साथ मिलाया जाता है। फिर इसे किसी पोटरी में बन्द किया जाता है। दो दिनों के बाद जौ शराब निकल आएगा। बहुत से तिब्बती लोग घर में खुद जौ शराब बनाते हैं और वे बाजार में भी शराब खरीद कर सकते हैं।

तिब्बती भोजन की सामग्रियों में भिन्न भिन्न मांस, सब्जियां और अनाज शामिल हैं। जो दूसरे भोजन से अलग नहीं है। जो अलग है, उसमें ज्यादा मिर्च, खट्टा सूप और मसाले शामिल हैं। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के अलावा यूननान प्रांत आदि क्षेत्रों में तिब्बती भोजन भी लोकप्रिय है। तिब्बती पठार पर रहने वाले लोगों को ठंड मौसम का प्रतिरोध करने के लिए अधिक मांस, दूध और दही खाना पड़ता है। मक्खन या घी हर तिब्बती के लिए अनिवार्य भोजन है। घी दूध में से बनाया गया है। जिसका उच्च पोषण होता है। तिब्बती लोग आम तौर पर घी के साथ चाय पीते हैं या चांबा खाते हैं। और त्योहार के दिनों तले हुए खाना बनाते समय भी घी का उपयोग होता है। चांबा तिब्बती लोगों का मुख्य भोजन है। जौ को फ्राई कराया गया, फिर इसे चक्की से आटा बनाया गया, तब तो लोग इसे घी चाय के साथ मिलकर चांबा बनाते हैं। आजकल ल्हासा शहर की सड़कों में केवल स्थानीय लोग नहीं, बाहर से आये पर्यटक भी इधर उधर खड़े रेस्त्रां में घी चाय पीते और चांबा खाते दिखते हैं।

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