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जूमूलांमा पर्वत के पैरों के नीचे स्थित गांव

2020-03-16 16:12:55
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पर्यटकों और पर्वतारोहियों की नजर में, दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट यानी जूमूलांगमा चोटी एक दूरस्थ जगह है। लेकिन इस चोटी के पैरों के नीचे रहने वाले लोगों के लिए, एवरेस्ट उनका दैनिक जीवन है।

33 वर्षीय सोलांग का घर तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के शिगात्ज़े शहर के तोसांगलीन गांव में स्थित है। यह गांव दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट यानी जूमूलांगमा चोटी के पैरों के नीचे स्थित है। तोसांगलीन गांव से जूमूलांगमा चोटी के पर्वातारोहण शिविर तक जाने के लिए कार से केवल 40 मिनट का रास्ता है। सोलांग जूमूलांगमा चोटी के पर्वतारोही गाइड का काम कर रहा है। सोलांग के पिता जी स्कूल में पढ़ाई नहीं की थी। लेकिन आज शिक्षा का खूब विकास होने के चलते सोलांग की जन्मभूमि में सभी युवाओं को स्कूल में पढ़ने का मौका मिला है। सोलांग के कई भाई बहन हैं। उन के गांव में बहुत से युवाओं ने बाहर जाकर काम करना शुरू किया। सोलांग ने 17 साल की उम्र में घर छोड़ दिया और बाद में उसे तिब्बती पर्वतारोहण संघ के अधीन गाइड की नौकरी मिली। पर्यटन के विकास से गांव में लोग व्यस्त होने लगे। सोलांग की पड़ोसी, 51 वर्षीय कलसांग खेती का काम करती है। वह घर में पारंपरिक तिब्बती एप्रन "बांगडियन" की बुनाई करती हैं और उसे बेचती हैं। इसी कौशल के सहारे कलसांग ने अपने परिवार को गरीबी से मुक्त कराया। कलसांग का मानना है कि सरकार की सहायता पर निर्भर रहने के बजाये खुद पैसा कमाना सही है। लेकिन उन का गांव जूमूलांगमा चोटी नेशनल प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र में स्थित है। जहां आर्थिक निर्माणके लिये परीसीमित है। पारिस्थितिक संरक्षण और गरीबी उन्मूलन के बीच संतुलन बनाये रखने की बड़ी आवश्यकता है।

पर्यटन के विकास से जूमूलांगमा चोटी के पैरों के नीचे स्थित विभिन्न गांवों को आय बढ़ाने का सुअवसर मिला। गांववासियों ने अपने घर में होम स्टे की स्थापना की। टूरिस्ट सीज़न के दौरान वे पर्यटकों के लिए आवास तम्बू का संचालन करते हैं। इसी संचालन से विभिन्न गांवों की वार्षिक आय एक करोड़ युआन से अधिक रही है। और टंट संचालित करने वाली आय में कुछ भाग सभी गांववासियों को बांटा जाने का नियम भी है। सभी गांववासियों को अमीर बनाने के लिए गांवों में सहकारी स्थापित हैं। जो पशुधन, नर्सरी और परिवहन आदि सर्विस करते हैं। जूमूलांगमा पर्वत के पैरों के नीचे रहने वाले लोगों के लिए यह पर्वत उन के दिल में खड़ता है। सोलांग ने कहा कि जूमूलांगमा पर्वत हमारे लिए आजीविका लेकर आया है। क्योंकि गाइड का काम करने के सिवा यहां के लोग रोज याक से पर्वतारोहियों के लिए साजो सामान का परिवहन करते हैं। और वे पहाड़ पर कचरे उठाते हुए भी आय प्राप्त कर सकते हैं। गांववासियों की आय बढ़ने के साथ साथ सामूहित अर्थव्यवस्था का विकास भी होने लगा है।

दस साल पहले शिगात्से शहर के लाज़ी गांव में एक सहकारी स्थापित हुई। महिलाएं अपने घर में ही बैठकर बुनाई का काम कर रही हैं। सहकारी को उनकी वस्तुओं की बिक्री की जिम्मेदारी है। 68 वर्षीय महिला छोमू और उन की तीन बेटियां सहकारी में काम कर रही हैं। उन की वार्षिक आय एक लाख युआन तक रही है। छोमू ने कहा कि पहले केवल खेती करते थे तब जीवन मुश्किल था। आज बुनाई घर के लिए आय का प्रमुख स्रोत बन गया है। उधर मूला टाउनशिप के एक कार्यकर्ता का कहना है कि सहकारी स्थापित करने से बहुत से श्रमिकों का बचाव किया गया है। ये लोग शहर में काम करने जाते हैं और कुछ लोग दूसरे उद्योग चलाते हैं। तिब्बत की शेतूंगमेन काउंटी के कागा गांव का हॉट स्प्रिंग्स बहुत सुप्रसिद्ध है। इस गांव के लोगों ने हॉट स्प्रिंग्स के सहारे अपने होम होटल का आयोजन करना शुरू किया है। हॉट स्प्रिंग्स के होम होटल से बहुत से पर्यटकों को आकर्षित किया गया है। आय बढ़ने के बाद गांववासी आवास, भोजन और मनोरंजन आदि उद्योग भी चलाने लगे हैं।

इधर के वर्षों में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की सरकार ने गरीबी उन्मूलन को प्राथमिकता दे दी है और गरीबी उन्मूलन पर मार्गदर्शन समेत सिलसिलेवार दस्तावेज़ प्रकाशित की हैं। प्रदेश और काउंटी स्तरीय सरकारों के सभी कर्मचारियों को गरीबी उन्मूलन की ठोस जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2016 से तिब्बत स्वायत्त प्रदेश ने कुल 36 अरब युआन की पूंजी डालकर 2661 गरीबी उन्मूलन परियोजनाओं को लागू किया जिनसे सात लाख किसानों व चरवाहों को लाभ मिला है।

गरीबी उन्मूलन की योजना बनाते समय विभिन्न क्षेत्रों की विशेषता का समादर किया गया है। उदाहरण के लिए तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की निम्मू काउंटी में उत्पादित तिब्बती अगरबत्ती मशहूर है। तब काउंटी की सरकार ने गांववासियों को तिब्बती अगरबत्ती का उत्पादन करने के लिए प्रोसाहित किया। उधर ऊंचे ऊंचे पहाड़ में स्थित यादे गांव ने ऊन बुनाई सहकारी स्थापित कर सौ से अधिक लोगों को नौकरी तैयार हुई। गांव में सभी लोग गरीबी से मुक्त कराया गया। नये युग में चीनी विशेषता वाली समाजवादी विचारधारा के मार्गनिर्देशन में तिब्बती जनता ने गरीबी उन्मूलन का चमत्कार बनाया है।

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