सूचना:चाइना मीडिया ग्रुप में भर्ती

परोपकारी की सहायता से तिब्बती हाइडैटिड रोगियों के लिए खुशखबरी

2020-03-13 10:56:55
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

हाइडैटिड रोग चीन के शिच्यांग, छींगहाई और तिब्बत आदि चरागाह क्षेत्रों में बहुत चलित रोग है। ऐसे क्षेत्रों में आबादी के दस प्रतिशत भाग हाइडैटिड रोग से ग्रस्त हैं। और उच्च मृत्यु दर होने के कारण इसे "कृमि कैंसर" भी कहलाता है। ऐसी बीमारी का संक्रमण पशु, कुत्ते और आदमी के बीच विस्तृत होता है।

चीनी चैरिटी फेडरेशन के द्वारा आयोजित एक चिकित्सक दल ने हाल ही में छींगहाई-तिब्बत पठार पर स्थित बानमा काउंटी में हाइडैटिड रोग की जांच की। पूरी काउंटी में कुल आठ सौ रोगियों का पता लगाया और उनमें दो सौ रोगियों का तुरंत ही ऑपरेशन करवाया। रोग लगने से लोगों को सिर्फ दर्द होता है ही नहीं, बल्कि उन का जीवन को भी मुश्किल बना है। जो छींगहाई-तिब्बती पठार के आर्थिक विकास को रोकने और लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से खतरे में डालने की समस्या बनी है। इस रोग से ग्रस्त तिब्बती लोगों को जल्द ही मुक्त कराने के लिए चीनी चैरिटी फेडरेशन ने वर्ष 2015 के नवम्बर से ही छींगहाई प्रांत में हाइडैटिड रोगियों का उपचार अभिनय शुरू किया। देश के दूसरे राज्यों के अनेक अस्पतालों ने भी इस अभिनय में भाग लिया है। मिसाल के तौर पर शितायी अस्पताल यानी शिनच्यांग प्रदेश के शिहज़ी विश्वविद्यालय के मेडिसिन स्कूल के तहत पहले अस्पताल ने छींगहाई प्रांत के कुल 34 रोगियों को अपने यहां भर्ती कराकर उपचार किया। उन में अधिकांश लोगों को सर्जरी लेने के बाद स्वास्थ होकर अपना नया जीवन शुरू किया है। यही नहीं, शि-ह-त्सी अस्पताल ने इन सभी तिब्बती रोगियों को यातायात, रहन-सहन की सुविधाएं और रोजमर्रे के साजसामान भी तैयार किया है। वर्ष 2019 के अक्तूबर में चीनी चैरिटी फेडरेशन ने शितायी अस्पताल के साथ एक समझौता संपन्न किया जिस के तहत दोनों पक्ष भावी पांच सालों में एक हजार तिब्बती हाइडैटिड रोगियों का निःशुल्क उपचार करेंगे।

शितायी अस्पताल एक सैनिक अस्पताल से आधार पर विकसित मशहूर अस्पताल है। जिसे हाइडैटिड बीमारी के इलाज में 70 साल का अनुभव प्राप्त है और इसकी चिकित्सा तकनीक भी विश्व स्तरीय है। शितायी अस्पताल के डॉक्टरों ने अपनी तकनीक से बहुत से तिब्बती रोगियों की मदद की है। 36 वर्षीय प्यानबा की स्थिति गंभीर थी। हाइडैटिड रोग लगने से उन्हें अत्यंत दर्द हुआ और उस का जीवन भी खराब बना था। चीनी चैरिटी फेडरेशन की मदद से उन्हें शितायी अस्पताल में निःशुल्क इलाज लेने का मौका मिला। दस घंटे की सर्जरी के जरिये लगभग इन के शरीर से 10 किलोग्राम हाइडैटिड्स को हटा दिया गया। अब प्यानबा का स्वास्थ्य सामान्य हो गया है। इन तिब्बती रोगियों के अनुवादक कंगा ग्यात्सो ने संवाददाता को बताया कि सभी रोगियों का शितायी अस्पताल में अच्छी तरह उपचार किया गया है। यहां तक कि रोगियों की जान बचाने के लिए कुछ डॉक्टरों ने खुद भी रोगियों को रक्तदान किया। और डॉक्टरों ने अकसर रोगियों और उन के बच्चों के लिए दूध पाउडर, कपड़े और खिलौना आदि खरीद देते हैं। रोगियों को मातृभूमि के बड़े परिवार की गर्माहट महसूस होती है।

चीनी चैरिटी फेडरेशन के एक पदाधिकारी के अनुसार वर्ष 2015 के नवम्बर से चीनी चैरिटी फेडरेशन के संगठन से कुल 15 बैच के चिकित्सा विशेषज्ञों ने तिब्बत, छींगहाई, सछ्वान और कानसू आदि प्रांतों में हाइडैटिड रोगियों की जांच और उपचार किया है। उन्हों ने अभी तक कुल 330 रोगियों का निशुल्क सर्जिकल उपचार किया है। शितायी अस्पताल के प्रमुख ने भी कहा कि तिब्बती पठार पर हाइडैटिड रोग का गंभीरता से फैलाव होता है। जो रोगियों, इन के परिवारों और समाज पर बहुत दुख और भारी आर्थिक बोझ डाला है। भावी पांच सालों में शितायी अस्पताल अपने चिकित्सा संसाधन के माध्यम से तिब्बत और सछ्वान प्रांत के एक हजार रोगियों का इलाज करेगा। स्वास्थ्य बनाए रखने से गरीबी उन्मूलन की नींव तैयार की जाएगी। शितायी अस्पताल के डॉक्टर के अनुसार तिब्बत और सछ्वान प्रांत में हाइडैटिड रोग को नियंत्रित करने से पूरे देश में ऐसे रोग को दूर किया जाएगा और भविष्य में हाइडैटिड रोग की रोकथाम और उपचार में चीन का अनुभव पड़ोसी देशों में निर्यात किया जा सकेगा।

ल्हासा शहर में निवासियों को अधिक चिकित्सा सुविधाएं

वर्ष 2019 में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा शहर में सरकार ने निवासियों को अधिक चिकित्सा सुविधा तैयार करने के लिए अथक प्रयास किया है और उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।

बड़े अस्पताल में डॉक्टर देखने के लिए काफी समय चाहिये। इसलिए ल्हासा शहर में सामुदायिक अस्पताल के विकास को महत्व दिया जा रहा है। ल्हासा शहर के लोग हल्के रोग लगने पर बड़े अस्पताल के बजाय सामुदायिक अस्पताल जाते हैं। और बहुत से निवासियों को फैमिली डॉक्टर की सर्विस मिलती है। ल्हासा शहर के छंगक्वान जिले के स्वास्थ्य केंद्र के प्रमुख का मानना है कि सामुदायिक अस्पताल भविष्य की शहरी स्वास्थ्य सेवा में मुख्य भूमिका निभाएंगे। बड़े अस्पताल मुख्य रूप से गंभीर रोगियों का इलाज करेंगे। वर्ष 2017 के मई में छंगक्वान जिले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना हुई जिसमें बीस बिस्तर और कई विभाग भी हैं। उनमें टीकाकरण, गर्भवर्ती महिलाओं की सेवा, शिशु स्वास्थ्य कक्ष और पारंपरिक चिकित्सा की सेवा आदि प्रशंसनीय है।

उधर फैमिली डॉक्टर सर्विस का उल्लेखनीय विकास भी किया गया है। जभी फोन कर दो तो फैमिली डॉक्टर रोगियों के घर में देखने आएंगे। और अस्पतालों के डॉक्टर अकसर समुदाय में निवासियों का नि: शुल्क उपचार करने आते हैं। इस के अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निवासियों में महिला स्वास्थ्य, मधुमेह की रोकथाम, रहन-सहन की बेहत्तर आदत और व्यायाम आदि का प्रसारण करता है। ताकि लोगों के स्वास्थ्य को बढ़ाया जाए।

आंकड़े बताते हैं कि अब तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में लोगों की औसत जीवन प्रत्याशा 70.6 वर्ष रही है। उधर प्रसुती महिलाओं की मृत्यु दर 56.52 प्रति लाख और शिशुओं की मृत्यु दर 11.59 प्रति हजार तक गिर गयी है। जो तिब्बत में स्वास्थ्य कार्य के विकास का मजबूत सबूत है।

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories