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जल समस्या के समाधान से गरीबी उन्मूलन को बढ़ावा

2020-02-26 16:12:46
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जल से संबंधित सवाल का समाधान जन जीवन में सुधार लाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। तिब्बती पठार पर जल संसाधन का भंडार काफी समृद्ध है। लेकिन आर्थिक विकास के पिछड़े होने और खराब प्राकृतिक वातावरण की वजह से तिब्बती लोगों के लिए पेयजल और पानी की आपूर्ति की समस्या लंबे समय से मौजूद रही और सरकार ने समस्याओं के समाधान के लिए भी यथासंभवतः प्रयास किया।

तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के जल संसाधन विभाग के अनुसार अभी तक तिब्बत के देहातों में कुल 24304 पेयजल परियोजनाएं निर्मित हो चुकी हैं। लगभग 25 लाख लोगों को इस का लाभ मिल पाया है। यह बताया गया है कि अभी तक तिब्बत के ग्रामीण क्षेत्रों में नल जल की कवरेज दर 75.6% तक जा पहुंची है। पूरे स्वायत्त प्रदेश में कुल 15 पेयजल गुणवत्ता परीक्षण केंद्र स्थापित किये गये हैं। वर्ष 2019 तक तिब्बत में पेयजल की परियोजना के निर्माण में कुल 4.2 अरब युआन की पूंजी डाली गयी और कुल 15387 सुरक्षात्मक पेयजल परियोजनाओं का निर्माण किया गया। योजना है कि वर्ष 2020 तक तिब्बत में सभी गरीब लोगों के लिए सुरक्षात्मक पेयजल की आपूर्ति की जाएगी। उधर तिब्बती स्वायत्त प्रदेश के शाननान क्षेत्र के जल विभाग ने लोगों को पानी की आपूर्ति की गारंटी करने के लिए अनेक कदम उठाये हैं। शाननान क्षेत्र में वर्ष 2018 में कुल 11 करोड़ युआन की पूंजी डालकर 156 किलोमीटर लम्बी सिंचाई नहर का निर्माण किया गया। इन के अलावा 39 जलाशय तथा 2854 सिंचित स्टेशन और सहायक भवन भी निर्मित किये गये। वर्ष 2018 तक शाननान क्षेत्र में खेती की सिंचाई की गारंटी दर 82% तक तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षात्मक पेयजल की आपूर्ति दर 92% तक पहुंच गई।

उधर तिब्बती स्वायत्त प्रदेश के जल विभाग से मिली खबर के अनुसार वर्ष 2019 में सरकार ने तिब्बत के मुख्य जल संरक्षण परियोजनाओं के निर्माण को जोर लगा दिया और स्पष्ट प्रगतियां हासिल की हैं। स्वायत्त प्रदेश के जल विभाग के अनुसार अब तिब्बत में यालूंग जलाशय और च्यांगपेई सिंचाई क्षेत्र जैसे सिलसिलेवार जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया जा रहा है। उधर तिब्बती जनता को जल की आपूर्ति को हमेशा प्राथमिकता दी जा रही है। कुछ समय पूर्व ल्हासा में आयोजित तिब्बती जलीय कार्य सम्मेलन में प्राप्त खबर के अनुसार बीते पाँच सालों में तिब्बत में जल संरक्षण के कार्यों में 30 अरब युआन का निवेश लगाया गया है। इसी के साथ-साथ तिब्बत के देहातों में 3846 पेयजल सुरक्षा परियोजनाओं का निर्माण किया गया है जिनसे 4.8 लाख लोगों को लाभ मिला है। पूरे प्रदेश में सिंचित क्षेत्र 39 लाख मू तक पहुँच गया है। ग्रामीण क्षेत्र में बिजली प्रयोग की कवरेज दर 95% तक पहुंच गयी है। सम्मेलन में उपस्थित कर्मचारियों ने जल संरक्षण कार्यों की वर्तमान स्थितियों का मूल्यांकन किया और यह निष्कर्ष निकाला कि तिब्बत निवेश के पैमाने का विस्तार कर प्रमुख जल संरक्षण परियोजनाओं के निर्माण में तेजी लाएगा, जल संरक्षण के निर्माण के जरिये सटीक गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य साकार करेगा और आपदा रोकथाम की व्यवस्था में सुधार लाएगा।

जल संरक्षण का कार्य किसी भी क्षेत्र के लिए आर्थिक विकास का आधार ही है। नये चीन की स्थापना के 70 सालों में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में जल संरक्षण कार्यों का उल्लेखनीय विकास भी किया गया है। मिसाल के तौर पर मैनला जल संरक्षण परियोजना के निर्माण से न सिर्फ सिंचाई क्षेत्र का विस्तार किया गया, बल्कि मध्यम तिब्बत में बिजली की कमी को दूर किया गया, और न्यानचू नदी के निचले क्षेत्र में बाढ़ रोकथाम शक्तियों को भी बढ़ायी गयी है। शांतिपूर्ण मुक्ति से पहले तिब्बत में सिंचित क्षेत्र केवल 2.8 लाख मू तक रहा था। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ नियंत्रण की परियोजना बिल्कुल नहीं थी, लोगों और जानवरों के लिए पेयजल की आपूर्ति भी बहुत मुश्किल थी। पर पार्टी और सरकार के प्रयासों से तिब्बत में जल संरक्षण का उल्लेखनीय विकास किया गया है। वर्ष 1978 में स्वायत्त प्रदेश की सरकार ने न्यानचू नदी के जल संरक्षण में व्यापक सुधार की योजना पारित की। जिससे तिब्बती पठार पर बड़े पैमाने वाले जल संरक्षण का काम शुरू किया। वर्ष 1994 में केंद्र में आयोजित तीसरे तिब्बत की सहायता सम्मेलन में तिब्बत में 64 परियोजनाओं का निर्माण करने की योजना प्रस्तुत की गयी। उनमें मैनला जल संरक्षण परियोजना भी शामिल हुई। उसी साल में यह परियोजना कायम की गयी। वर्ष 1999 के दिसंबर में पहले जनरेटर ने बिजली का उत्पादन करना शुरू किया। आज मैनला जलाशय तिब्बत में सबसे बड़ी जल संरक्षण परियोजना है।  

उधर ल्हासा नदी क्षेत्र में निर्मित फांगडो जल संरक्षण परियोजना का तकनीकी स्तर सबसे उन्नत है, इस का निर्माण सबसे मुश्किल और इस का आर्थिक लाभ भी सबसे ज्यादा है। इस जल संरक्षण परियोजना का निर्माण समाप्त होने से जन्म सिंचित क्षेत्र 6.5 लाख मू और वार्षिक बिजली उत्पादन की मात्रा 59. 9 करोड़ किलोवाट प्रति घंटे तक जा पहुंचेगी। जो ल्हासा नदी क्षेत्र के गरीबी उन्मूलन, बाढ़ नियंत्रण तथा पारिस्थितिक संरक्षण के लिये बहुत मददगार होगा। नये युग में केंद्र और स्वायत्त प्रदेश की सरकार तिब्बत में जल संरक्षण के विकास को बहुत महत्व देती हैं। आंकड़े बताते हैं कि शांतिपूर्ण मुक्ति के बाद से तिब्बत में जल संरक्षण कार्य के निर्माण में लगायी गयी पूंजी 50 अरब युआन तक रही है। तिब्बत में तीन प्रमुख सिंचित क्षेत्रों का निर्माण किया गया है और सिंचित क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 39 लाख मू तक विकसित हो गया है। शिगात्से में निर्मित लालो जल संरक्षण परियोजना का निवेश सबसे ज्यादा है। लालो परियोजना का निर्माण करने से सिंचाई की गारंटी के अलावा पानी की आपूर्ति, बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण का भी समर्थन दिया जाएगा।


गरीबी उन्मूलन कार्यों का उल्लेखनीय विकास


हाल ही में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के प्रमुख की अध्यक्षता में आयोजित एक विशेष बैठक ने तिब्बत में गरीबी उन्मूलन के कार्यों पर विचार विमर्श किया। केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक स्वायत्त प्रदेश के प्रमुख नेताओं ने गरीब क्षेत्रों में लोगों के जीवन की गारंटी पर गहराई से शोध किया और अपनी अपनी रिपोर्टें निकालीं। वर्ष 2019 नये चीन की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ है, और तिब्बत में लोकतांत्रिक सुधार की 60वीं वर्षगांठ भी है। स्वायत्त प्रदेश की विभिन्न स्तरीय सरकारों ने जन जीवन में सुधार करने वाले कार्यों पर विशेष रूप से जोर दिया है।

तिब्बत में जल संसाधन समृद्ध है, लेकिन विशेष प्राकृतिक और भौगोलिक स्थिति की वजह से तिब्बत के कुछ क्षेत्रों में जल आपूर्ति की समस्याएं मौजूद हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की सुरक्षा परियोजना आम लोगों के हितों के लिए सबसे अधिक प्रासंगिक हैं और इसके बारे में लोग सबसे अधिक ध्यान देते हैं। स्वायत्त प्रदेश की सरकार इस कार्य पर भी सबसे अधिक महत्व देती है। इस साल की पहली छमाही में तिब्बत के 200 से अधिक गांवों में पेयजल सुरक्षा परियोजना लागू की गयी है, 18 हजार लोगों की पेयजल सुरक्षा समस्या में काफी सुधार आया है। यह चर्चित है कि गरीबी उन्मूलन के विकास के चलते पुरानी योजना में निर्धारित लक्ष्य आवश्यकताओं की पूर्ति से दूर है। स्वायत्त प्रदेश के जल विभाग ने वैज्ञानिक रूप से ग्रामीण पेयजल सुरक्षा का नया मापदंड तैयार किया। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की सुरक्षा खुशहाल समाज का निर्माण करने में कुंजीभूत सवाल माना जाता है। स्वायत्त प्रदेश के जल संसाधन विभाग के एक वरिष्ठ अफसर ने बताया कि सरकार ने तिब्बती लोगों को पेयजल की सुरक्षा की गारंटी के लिए भरसक कोशिश की है।

उधर शिक्षा का विकास करना गरीबी उन्मूलन कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। शाननान प्रिफेक्चर के एक अध्यापक लोसांग ने कहा कि पहले हमारे स्कूल में उपकरण पिछड़ा हुआ था। आज हमारे स्कूल में उज्ज्वल कक्षाएं, कंप्यूटर कमरे, पुस्तकालय और भिन्न भिन्न शिक्षण सुविधाएं सब उपलब्ध हैं। पहाड़ों में रहने वाले बच्चों को शहर के छात्रों की ही तरह अच्छी शिक्षा सुविधाएं भी मिलती हैं। स्वायत्त प्रदेश के व्यावसायिक प्रशिक्षण स्कूल में कई वर्षों तक मुफ्त शिक्षा उपलब्ध की गयी है। गरीब परिवारों के छात्रों और विकलांग छात्रों को विशेष देखभाल दिया जाता है। अब स्कूल में 90 छात्र थांगका चित्र कला, मेटल वर्क, पॉटरी और बुनाई की स्कील आदि पढ़ रहे हैं। स्कूल शिक्षा और रहन-सहन के लिए प्रति वर्ष प्रति छात्र को 28 हजार युआन का खर्च देता है। शिगात्से शहर में सभी छात्रों के लिए 15 साल की निशुल्क शिक्षा तथा "पोषण सुधार नीति" का कार्यांवयन की गयी है। शहर की सरकार प्रति वर्ष एक करोड़ युआन की पूंजी से गरीब परिवारों के कॉलेज छात्रों को सब्सिडी देती है। अभी तक 5500 छात्रों को ऐसी सब्सिडी मिल पायी है। अधिकारियों का मानना है कि शिक्षा कार्य का विकास करना गरीबी को रोक देने में सबसे महत्वपूर्ण है। स्वायत्त प्रदेश की सरकार ने अधिक सब्सिडी डालकर शिक्षा के माध्यम से गरीबी उन्मूलन को बढ़ाया और गरीब क्षेत्रों के स्कूलों में छात्रों के छोड़ने को रोका। 

उधर गरीबी उन्मूलन में चिकित्सा शर्तों की गारंटी एक अन्य महत्वपूर्ण बात है। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अनेक बार यह बताया कि "स्वास्थ्य के बिना खुशहाल का जीवन भी नहीं है।" स्वायत्त प्रदेश की सरकार ने गरीब लोगों को मेडिकल सेवाओं की गारंटी करने के लिए पूरी कोशिश की है। आज तिब्बत के कृषि और पशुचारण के क्षेत्रों में चिकित्सा बीमा की सौ प्रतिशत कवरेज हो चुकी है। बीते एक ही वर्ष में स्थानीय सरकार ने 200 बुनियादी स्वास्थ्य उपकरणों में सुधार किया और खासकर गरीब लोगों को चिकित्सा की सहायता दी। अब तिब्बत में 33 प्रमुख बीमारियों का केंद्रीय तौर पर उपचार किया जा रहा है, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी पुरानी बीमारियों से ग्रस्त रोगियों को पारिवारिक चिकित्सक की सेवा भी प्राप्त होने लगी है। गरीब लोगों का नये क्षेत्रों में स्थानांतरण करना गरीबी उन्मूलन कार्यों का अहम भाग माना जाता है। सरकार की योजना के अनुसार तिब्बत में 942 स्थानांतरण स्थल निर्मित किये गये हैं और इसी योजना के तहत बहुत से गरीबों को नये मकान प्राप्त हो चुके हैं। वर्ष 2016 से 2019 तक केंद्र सरकार और स्वायत्त प्रदेश की सरकार ने 78.8 करोड़ युआन की पूंजी डालकर कुल 43.6 हजार पुराने मकानों का नवीनीकरण किया।

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