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तिब्बती लोगों की सब्जियों की पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध

2020-01-20 14:40:46
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तिब्बती पठार पर रहने वाले लोग प्राचीन काल से तिब्बती जौ से बने ट्साम्पा और पशुओं के मांस खाने पर निर्भर रहे। पर इधर के वर्षों में आर्थिक विकास के चलते तिब्बती लोगों के खाद्य पदार्थों में बहुत परिवर्तन नजर आया है। उन के रोजाना जीवन में सब्जियों की आपूर्ति भी पर्याप्त होने लगी है। रिपोर्ट है कि आज तिब्बत के शहरों में प्रति व्यक्ति के लिए सब्जियों की दैनिक खपत लगभग एक किलो तक पहुंच गई है। तिब्बतियों की "सब्जी की टोकरी" समृद्ध हो रही है।

आली तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के पश्चिम में स्थित एक शहर है जिस की ऊँचाई चार हजार मीटर रहती है। पर आली के बाजारों में भिन्न भिन्न किस्मों की सब्जियां, फल, मांस और मुर्गी आदि सब मिलती हैं। 52 वर्षीय बूढ़ी छ्यूचेन ने बताया कि पहले परिवहन की कठिनाइयों से मांस और अंडे बहुत महंगे रहे। आज सब कुछ सस्ता हो गया है। तिब्बत का विशेष मौसम ग्रीन हाउस में सब्जियों का उत्पादन करने के अनुकूल है। आली के ग्रीन हाउस में आम तौर पर गोभी, मिर्च, टमाटर और खीरे जैसे दर्जन से अधिक सब्जियों का रोपण किया जाता है। कुछ लोग बाहर से आली के ग्रीन हाउस में सब्जियों का रोपण करने आये हैं। उन्हों ने बताया कि सन 1980 से पहले आली में सब्जियों का रोपण नहीं किया जाता था। लोगों को दूसरे शहरों और यहां तक दूसरे राज्यों से सब्जियों का परिवहन करना पड़ता था। जब भीतरी इलाकों के किसानों ने आली शहर में सब्जियों का उत्पादन करना शुरू किया, तब से हमारे यहां सब्जी खाने की समस्या हल हो गयी। उधर ल्हासा शहर के बाजारों में बेची गई सब्जियों की किस्में 70 से अधिक तक रही हैं। उनमें से 80% से अधिक सब्जियां स्थानीय होती हैं। ल्हासा शहर के बाजारों में स्थानीय फल दूसरे प्रांतों और यहां तक दूसरे देशों से आयातित फलों के साथ साथ ग्राहकों को आकर्षित हो रहे हैं। और आज ल्हासा शहर की सड़कों में कैंटोनीज़ भोजन, सिचुआन भोजन, हुनान भोजन और शानतुंग भोजन आदि तरह तरह रेस्त्रां खोले गये हैं। ल्हासा शहर ने प्रति वर्ष सब्जियों का उत्पादन और बढ़ाने की योजना भी बनायी है। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के कृषि और पशुपालन विभाग के एक वरिष्ठ अफसर ने कहा कि अब स्वायत्त प्रदेश में लगभग तीस लाख आबादी होती है। योजना है कि प्रति दिन प्रति व्यक्ति के लिए कम से कम एक किलो सब्जियों की आपूर्ति की जाएगी। और तिब्बत भी अपनी श्रेष्ठता के मुताबिक जैविक सब्जियों का जोरदार विकास करेगा। और उन में श्रेष्ठ ट्रेड मार्क वाले उत्पादों की दूसरे राज्यों में भी बिक्री करेगा। इस अफसर ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में सब्जियों की आपूर्ति भी अलग अलग है। मिसाल के तौर पर शहरों में हरे रंग की सब्जियां ज्यादा हैं जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अधिक तौर पर आलू आदि खाते हैं। ज्यादा सब्जियों की आपूर्ति करवाने के लिए तिब्बत में ग्रीन हाउस का जोरदार विकास किया जाएगा। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में किसानों के लिए प्रशिक्षण केंद्र आयोजित किये जाएंगे, ताकि कृषि तकनीकों का सब्जी की खेती में इस्तेमाल किया जा सके। खाद्य पदार्थों की आपूर्ति की गारंटी के लिए प्रशीतित परिवहन करने का विशेष महत्व होता है। ल्हासा शहर में नव निर्मित सबसे बड़े प्रशीतित स्टोरेज में एक हजार से अधिक टन मांस का स्टॉक किया गया है, जो इस जाड़े में ल्हासा नागरिकों की "सब्जी की टोकरी" की गारंटी करता है। तिब्बत की कोल्ड चेन लॉजिस्टिक कंपनी के प्रमुख लो चेन ने कहा कि मांस की गुणवत्ता पर लोगों का ध्यान आकर्षित है। तिब्बत ने दूसरे प्रांतों से आयातित मांस का सख्त निरीक्षण किया है। और नागरिकों की आपूर्ति की गारंटी के लिए ल्हासा शहर के प्रशीतित स्टोरेज में हमेशा एक हजार टन मांग का भंडार बनाये रखता है।

उधर आली क्षेत्र में ग्रीन हाउस के विकास से लोगों की सब्जी आपूर्ति को हल किया गया है। वर्ष 2014 से पहले आली क्षेत्र में कोई ग्रीन हाउन नहीं था। स्थानीय उत्पादित सब्जियों की आपूर्ति भी असंभव रही। पर वर्ष 2018 तक आली क्षेत्र में सब्जियों और फलों का उत्पादन 1200 टन तक रहा, जिससे लोगों की सब्जियों की गारंटी के लिए योगदान पेश किया गया है। वर्ष 2013 में इस क्षेत्र में पारिस्थितिक कृषि फार्म का विकास शुरू होने लगा। गार काउंटी के नव निर्मित पारिस्थितिक कृषि फार्म का क्षेत्रफल 730 मू तक विशाल है। जिसमें सब्जियों का रोपण करने के साथ साथ पशुपालन का उद्योग भी चलता है। कहना है कि ग्रीनहाउस में सब्जियों और फलों को सफलतापूर्वक उगाने के लिए ग्रीनहाउस का मानकीकरण होना अनिवार्य है। तिब्बत में ग्रीन हाउस के निर्माण को मदद देने के लिए शानशी और शानतुंग आदि प्रांतों से अनेक कृषि तकनीशियन भी भेजे गये। जिन्हों ने मिट्टी गुणवत्ता में सुधार, ग्रीनहाउस निर्माण, बीज चयन, डिजाइन और कार्य क्षमता की पदोन्नती के संदर्भ में बहुत योगदान पेश किया है। इन के अलावा स्थानीय लोगों ने भी कृषि आदर्श अड्डों के निर्माण में सक्रियता से भाग लिया है।

वर्ष 2014 तक आली क्षेत्र की पूलैन काउंटी में कुल 140 ग्रीन हाउस का निर्माण समाप्त किया गया। भीतरी इलाकों से गये कृषि तकनीशियनों की मदद से इन ग्रीन हाउस में पचास से अधिक किस्म सब्जियां और फलों का रोपण करना शुरू होने लगा। इस तरह पूलैन काउंटी में सब्जियां नहीं उगने का इतिहास समाप्त हुआ। पूलैन काउंटी में प्राप्त जो अनुभव है, इस का पूरे आली क्षेत्र में शीघ्र ही प्रस्तार किया गया। स्थानीय सरकार के प्रयास से दूसरी काउंटियों में भी ग्रीन हाउस का जोरदार विकास किया गया। ग्रीन हाउस के विकास से स्थानीय लोगों को रोजगारी का मौका तैयार हुआ। ग्रीन हाउस में कार्यरत मजदूर को आम तौर पर प्रति दिन दो सौ युवान का वेतन मिल सकता है। उधर आली प्रिफेक्चर के अधीन गार काउंटी में आधुनिक कृषि और पशुपालन के विकास में उल्लेखनीय प्रगतियां हासिल की गयी हैं। गार काउंटी में स्थापित पारिस्थितिक कृषि पार्क में अनेक आधुनिक स्वचालित सिंचाई वाले ग्रीनहाउस निर्मित हो चुके हैं। जिनमें खरबूज, तरबूज, ककड़ी, टमाटर और बैंगन आदि रंग-बिरंगे सब्जियों का रोपण किया जा रहा है। गार काउंटी के पारिस्थितिक कृषि पार्क के प्रमुख ने बताया कि उन का पार्क 730 मू विशाल है। पार्क के कुल चालीस ग्रीन हाउस निर्मित हैं जिनमें सब्जी और फूलों की खेती के अलावा पशुपालन भी किया जाता है। यह कृषि पार्क अपनी काउंटी में रहने वाले निवासियों की जरूरतों को पूरा कर सकता है।


चीन सरकार की "सब्जी टोकरी परियोजना"

चीन सरकार ने वर्ष 1988 में जन जीवन में सुधार लाने के लिए "सब्जी टोकरी परियोजना" लागू करने की घोषणा की और इस सफलतापूर्ण परियोजना से आज चीन में प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति के लिए 311 किलोग्राम सब्जियों की आपूर्ति होती है। जबकि विश्व का औसत स्तर 105 किलो तक रहता है।

सन 1990 के दशक से पहले उत्तरी चीन के निवासी सर्दियों के दिन आम तौर पर मूली, गोभी और आलू पर निर्भर रहते थे। पर आज इन के दैनिक मेन्यू में चिकन, बतख, मछली, मांस, झींगा और भिन्न भिन्न ताजा सब्जियां शामिल हैं। इधर के बीस सालों में चीनी कृषि उत्पादों की आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार आया है।

सन 1988 के मई में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और केंद्रीय सरकार ने जन जीवन में सुधार लाने के लिए "सब्जी टोकरी परियोजना" लागू करने को घोषित किया। सर्वोच्च नेताओं ने स्थानीय सरकारों से खाद्य बाजार की आपूर्ति सुनिश्चित करने का आदेश दिया। राज्य परिषद ने विशेष सभा आयोजित कर सिलसिलेवार कदम उठाये। केंद्र और स्थानीय सरकारों ने कारोबारों और निजी विभागों के साथ मल्टी-चैनल निवेश लगाया। स्वतंत्र बाजार, खुदरा विक्रेता और थोक बाजार से गठित प्रणाली कायम की गयी। विभिन्न स्तरीय सरकारों के प्रयासों से अनेक प्रांतों में "सब्जी की टोकरी" विकास कोष तथा जोखिम-समायोजित कोष स्थापित हुए। इधर के सालों में चीन में रुपांतर और खुलेपन के चलते निवासियों की आय में तेज़ वृद्धि होने से "सब्जी टोकरी परियोजना" के विकास के लिए विशाल बाजार तैयार किया गया है। सरकार ने नियोजित अर्थव्यवस्था के उपायों को बदलकर बाजार की मांग के अनुसार उत्पादों की कीमतें तय करना शुरू किया और किसान भी बाजार तंत्र के तहत स्वतंत्र उत्पादन कर सकते हैं। "सब्जी की टोकरी परियोजना" के विकास में सरकार, सामूहिक और निजी विभाग के बड़ी मात्रा वाले परिवहन और बिक्री कारोबार स्थापित हुए। देश भर में कुल चार हजार से अधिक कृषि उत्पाद थोक बाजार स्थापित किये गये हैं। इन थोक बाजारों की सूचना उन्मुख भूमिका और उत्पादों के वितरण की भूमिका को उजागर किया गया है।

"सब्जी टोकरी परियोजना" कायम करने से चीन के शहरी और ग्रामीण निवासियों का आहार स्तर बहुत तेज़ी से सुधर गया है। अनाज उत्पादन के बढ़ने के साथ साथ सब्जि, मांस, अंडे, दूध, जलीय उत्पादों और फलों सहित छह प्रकार कृषि उत्पादों का उत्पादन 7% से 13% की वार्षिक दर से बढ़ता रहा है। आज चीन में प्रति व्यक्ति के लिए अनाज, सब्जियां, खाद्य तेल, चीनी, मांस, अंडे, दूध और जलीय उत्पादों की मात्रा विश्व के औसत स्तर से बहुत अधिक रही है। आंकड़े बताते हैं कि आज चीन में सब्जी रोपण का क्षेत्र 1 करोड़ 33 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गया है और सब्जियों का उत्पादन 40 करोड़ टन तक रहा है। उधर उन्नतिशील तकनीकों के इस्तेमाल से सब्जियों के उत्पादन को बढ़ाया गया है। मिसाल के तौर पर उत्तरी चीन में ऊर्जा की बचत करने वाले ग्रीनहाउस का बड़े पैमाने पर प्रचार किया गया है। देश के प्रमुख शहरों के उपनगर में मानकीकृत सब्जी क्षेत्र के निर्माण तथा श्रेष्ठ सब्जी किस्मों के अनुप्रयोग में भी उल्लेखनीय प्रगतियां हासिल की गयी हैं।

आज चीन की सब्जी खेती में मिट्टी रहित खेती, संगीत की खेती, गैस उर्वरक और मैग्नेटिक ड्रिप सिंचाई जैसे नवीनतम तकनीकों का व्यापक रूप से उपयोग किया गया है। और बाजारों में अंतरिक्ष काली मिर्च, बादाम कद्दू, छोटे टमाटर और रंगीन बैंगन जैसे किस्में की नयी सब्जियां भी नजर आ रही हैं। सब्जियों की छँटाई, पैकेजिंग, प्रारंभिक प्रसंस्करण, भंडारण और ताजगी तकनीक के उपयोग से किसानों की आय को बढ़ाया गया है। "सब्जी की टोकरी" की आय किसानों की आय में एक तिहाई का भाग रहता है और बहुत से किसान इस योजना में भाग लेने से गरीबी से छुटकारा पाये हैं।

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