तिब्बत की राजधानी ल्हासा शहर में भी हीटिंग व्यवस्था का प्रयोग शुरू

2019-11-04 16:45:56
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तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा शहर में जलवायु का तापमान आम तौर देश के दूसरे क्षेत्रों से और ठंडा है। इसलिए ल्हासा शहर में प्रति वर्ष नवम्बर माह में हीटिंग व्यवस्था का प्रयोग शुरू किया गया है। शहर की सरकार के अनुसार 15 नवम्बर से 15 मार्च तक कमरे में हीटिंग की आपूर्ति होती है। हीटिंग व्यवस्था का प्रयोग करने वाला खर्च भी पहले साल की ही तरह बना रहा है।

ल्हासा हीटिंग व्यवस्था कंपनी की शहर के विभिन्न कस्बों में अपनी शाखाएं रखी हुई हैं। लोग या तो इन स्थल में जा सकते हैं या मोबाइल फोन से हीटिंग खर्च का भुगतान कर सकते हैं। संवाददाता ने कंपनी के सर्विज हॉल में यह देख लिया है कि बहुत से नागरिक कंपनी के सर्विस हॉल में परामर्श और भुगतान का काम करने जाते हैं। ल्हासह शहर में अधिकांश लोगों ने व्यक्तिगत हीटिंग व्यवस्था का उपयोग कायम किया है। इसलिए लोग अपनी स्थिति के अनुसार हीटिंग व्यवस्था का प्रयोग करने या न करने का फैसला कर सकते हैं। इधर के वर्षों में बाजार में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का काफी दबाव नजर आया है। पर ल्हासा कंपनी के जिम्मेदार अफसरों का कहना है कि वे प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की गारंटी के लिए यथासंभव कदम उठाएंगे। अभी तक ल्हासा शहर में प्राकृतिक गैस का प्रयोग लिमिटित है। प्राकृतिक गैस का दाम भी पिछले सालों की ही तरह बना हुआ है। यानि एक वर्ष के लिए प्रति परिवार को 1.50 युआन की कीमत से 1500 घन मीटर की आपूर्ति की जाती है। इस संख्या से ऊपर की कीमत 4.46 युआन रहेगी। गरीब परिवारों को 600 घन मीटर निशुल्क प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की जाती है। उपभोक्ता वी चैट, सिटी सर्विस व्यवस्था, बैंक और पोस्ट सेवा बैंक के माध्यम से भुगतान कर सकते हैं। इस के सिवा शहर के विभिन्न कस्बों में भी सेवा केंद्र भी रखे हुए हैं जहां भी लोग संबंधित व्यवसाय को संभाल सकते हैं।

12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान तिब्बत के शहरों में हीटिंग प्रोजेक्ट लागू किया गया। ल्हासा शहर में हीटिंग व्यवस्था का निर्माण करने में जन जीवन के सुधार पर ध्या दिया गया है। वर्ष 2018 के अंत तक शहर की सभी नौ काउंटियों तथा 68 टाउनशिपों में हीटिंग व्यवस्था लागू की गयी है। और जलवायु ठंडा होने की वजह से ल्हासा शहर में प्रति वर्ष जल्द ही हीटिंग व्यवस्था का प्रयोग किया जाता है। और पबलिक बस में भी समय पूर्व हीटिंग मोड शुरू होने लगा है। ल्हासा बस कंपनी के प्रधान ने कहा कि यात्रियों को आरामदायक और गर्म सवारी प्रदान करने के लिए ल्हासा शहर की बसों में प्रति दिन सुबह से रात तक हीटिंग व्यवस्था लागू की जा रही है। और यह व्यवस्था अप्रैल माह तक चलेगी।

उच्च ऊंचाई वाले काउंटियों में हीटिंग प्रोजेक्ट का निर्माण

इधर के वर्षों में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के शहरों में बुनियादी उपकरणों के निर्माण में तेज़ी लायी गयी है। सार्वजनिक सेवा का तेजी से विकास किया जा रहा है। अभी तक राजधानी ल्हासा से आधारित विभिन्न काउंटियों में फैली सार्वजनिक सेवा व्यवस्था कायम की गयी है।

सन 1960 के दशक से तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में कई वाटर प्लांट निर्मित किये गये हैं। 21वीं शताब्दी में प्रविष्ट होने से तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की काउंटियों में पेयजल सुविधाओं के निर्माण में अधिक निवेश लगाया गया है। जलापूर्ति उपकरण निर्माण के दो चरण समाप्त होने के बाद तिब्बती शहरों में जल की आपूर्ति में काफी सुधार नजर आया है। स्वायत्त प्रदेश के आवास और निर्माण ब्यूरो से प्राप्त खबर के अनुसार वर्ष 2018 के अंत तक तिब्बत में कुल 67 जल आपूर्ति संयंत्र निर्मित हो गये हैं। जिनके सहायक पाइप नेटवर्क की लंबाई 2733 किलोमीटर तक जा पहुंची है। शहरों में जल आपूर्ति की कवरेज दर 92.8% तक पहुंच गई है। इसी के साथ-साथ शहरों में जल निकासी व्यवस्था में भी सुधार आया है। सन 1970 के दशक में ल्हासा शहर में केवल 4400 मीटर लम्बा सीवर पाइप मौजूद था। सन 1985 की परियोनजा में दस किलोमीटर सीवर पाइप का निर्माण हुआ। सन 2000 से सरकार ने सभी काउंटी स्तरीय शहरों में जल की आपूर्ति और निकासी व्यवस्थाओं का जोरदार निर्माण किया। आज ल्हासा शहर में पांच सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्मित हो चुके हैं और सीवर पाइप लाइन की लंबाई 700 किलोमीटर तक जा पहुंची है।

स्वच्छ शहर की अवधारणा लोकप्रिय है

जब पूरे देश में स्वच्छ ऊर्जा का प्रयोग करने का रूझान नजर आ रहा है तब तिब्बत के शहरों में भी प्राकृतिक गैस का प्रसार होने लगा है। तिब्बत के शहरों में पूर्व में मुख्य तौर पर लकड़ी, कोयले और तेल जैसे ईंधन का इस्तेमाल किया जाता था। सन 1980 के दशक में पारंपरिक ईंधन का स्थान पेट्रोलियम गैस से लिया गया था। इधर के वर्षों में स्वायत्त प्रदेश में प्राकृतिक गैस का प्रसार किया जा रहा है। वर्ष 2018 के अंत तक तिब्बत में कुल 117 तरलीकृत गैस स्टेशन स्थापित हो गये हैं। प्राकृतिक गैस आर्थिक विकास और जन जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। ल्हासा शहर के सरकारी विभागों और प्रमुख समुदायों में प्राकृतिक गैस आधिकाधिक तौर पर पेटीएम गैस का स्थान ले रहा है।

उधर देश की 10वीं पंचवर्षीय योजना में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में कचरा अहानिकर उपचार सुविधाओं का प्रसार किया जाने लगा। अभी तक पूरे प्रदेश में 107 कचरा लैंडफिल तथा 89 कचरा स्थानांतरण स्टेशन निर्मित हो गये हैं। शहरों में 90 प्रतिशत कचरे का अहानिकर उपचार किया जा सकता है। 11वीं पंचवर्षीय योजना से तिब्बती शहरों में दर्जनों सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का निर्माण किया गया है। सीवेज पाइप नेटवर्क की लंबाई 1200 किलोमीटर तक जा पहुंची है। शहरों में सीवेज उपचार दर लगभग 90 प्रतिशत तक जा पहुंची है। व्यवस्था के निर्माण में भीतरी इलाकों की उच्च तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।

स्वच्छ शहर का निर्माण करने में ग्रीन स्पेस निर्माण और पारिस्थितिक बहाली का महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। वर्ष 2017 तक तिब्बती शहरों में कुल 104 पार्क निर्मित हो गये हैं। शहरों में हरित क्षेत्र की दर 34.16% तक पहुँच गई है। शहरी हरे क्षेत्र की संख्या 51 किलोमीटर तक रही है। इस के अलावा राजधानी ल्हासा, न्यिंग-ची और छांगतु इन तीन शहरों को गार्डन सिटी तय किया गया है।

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