एक ही परिवार में समृद्धि की ओर बढ़ रहे हैं

2019-10-08 15:25:28
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40 वर्षीय श्ये च्वन छंग देखने में एक आम तिब्बती किसान के जैसे हैं। लेकिन वास्तव में वह हान जातीय के हैं। एक तिब्बती महिला दावा द्रोकर से शादी करने के बाद अब वह ल्हासा शहर के उपनगर में स्थित बालीन गांव में खेती का काम कर रहा है। इस दंपत्ति को जातीय एकता का द्योतक माना जाता है।

यह वर्ष 1996 में हुई कहानी थी जब श्ये च्वन छंग एक सिपाही की हैसियत से बालीन गांव में तैनात हुए, तब उन का लड़की द्रोकर से प्रेम हुआ। अपनी प्यार कहानी की याद करते हुए द्रोकर ने कहा, "उस समय मैं खुद से कुछ काम करती थी। उसने मेरी तस्वीरें देखीं और बार बार मेरे माता-पिता से पूछा।" श्ये की जन्मभूमि उत्तरी चीन के गैनसू प्रांत के थिएनश्वेई शहर में स्थित है। शादी करने से पहले तिब्बती पठार पर कई साल रहने के बावजूद वह स्थानीय मौसम, खानपान और रहन सहन के लिए आदत नहीं थे। पर श्ये ने चुनौतियों को दूर कर स्थानीय जीवन शैली में एकीकृत किया। अथक प्रयास कर अब श्ये तिब्बती भाषा में दैनिक संचार कर सकते हैं और उन्होंने बहुत सी स्थानीय रीति-रिवाज सीखी हैं। उन के अपने पड़ोसियों के साथ बहुत अच्छे संबंध बरकरार हैं। गांव वासियों ने भी उन्हें शुभकामनाएं व्यक्त की हैं। श्ये ने कहा,“यहां के लोगों ने मेरा स्वीकार किया है। वे मुझे हान जातीय ताशी कहते हैं, मुझे यहाँ के लोग पसंद हैं, तिब्बती लोग ईमानदार भी हैं। जब सेना और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर सह-निर्माण की गतिविधि आयोजित हुई तब हम ने लोगों के लिए कड़ी मेहनत की। यह लगती है कि स्थानीय लोग बहुत छुआ है। वे हार्दिक तौर पर हम से व्यवहार करते हैं। वे हमें अक्सर सबसे अच्छा पकवान खिलाते हैं लेकिन वे खुद नहीं खाते हैं।”

उधर पत्नी दावा द्रोकर की नजर में श्ये एक परिवार वाला आदमी ही है। चाहे पति जी ने कैसा भी निर्णय लिया हो, वह इस का समर्थन करती है। दो बेटे के जन्म होने के बाद उन के परिवार की खुशी और बढ़ी है। दावा द्रोकर ने कहा,“मैं ने शादी करते समय जातीय फर्क पर विचार नहीं किया। मेरे पति के पड़ोसियों के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं, चाहे घर में या आस-पड़ोस में, मुझे विश्वास है कि हमारा जीवन बेहत्तर बनेगा।”शादी करने के बाद के दसेक सालों में इस युगल ने कठिनाइयों का साझा किया है अपने जीवन में सुधार लाने के लिए अथक प्रयास किया है। उन्होंने दुकानें और चाय घर का संचालन किया। कुछ पैसा कमाने के बाद उन्हों ने खेती और पशुपालन सहकारी स्थापित की। अपना खुद का जीवन अच्छा बनाने के बाद दूसरे लोगों को अमीर बनाना भी नहीं भुला। 2016 में श्ये ने 200 मू जमीन किराये पर लेकर चीनी जड़ी-बूटियों का रोपण किया जिससे आसपास किसानों के रोजगार की समस्याएं हल हुईं। और बाजार में उन की जड़ी-बूटियों का बहुत स्वागत किया गया। टाउनशिप के उप प्रमुख लाबा द्रोमा ने कहा, "अमीर बनने के बाद वे दूसरे गांववासियों को नहीं भूला। और उन्हों ने आसपास के किसानों को अमीर बनाने के लिए उन का नेतृत्व किया।"

बालीन गांव में जमीन सूखा और बंजर भी है, जो जड़ी-बूटी का रोपण करने में सही है। क्योंकि इससे आर्थिक विकास करने के साथ-साथ पारिस्थितिकी पर्यावरण की रक्षा भी की जा सकती है। अभी तक लगभग नब्बे प्रतिशत गांववासियों को श्ये की सहकारी में रोजगार मौका मिल पाया है। गांववासी बासांग ने कहा कि घर के आसपास में ही काम करने और पैसा करने से खुशी है। और श्ये बहुत दिमागदार आदमी है। उन की सहकारी से सभी गांववासियों को मदद की गयी है। बासांग ने कहा, "क्योंकि मैं बूढ़ा हो गयी हूं, मैं काम करने के लिए बाहर नहीं जा सकती। इसलिए मैं यहां काम करने आयी हूं। पिछले साल मुझे दस हजार युआन की आय प्राप्त हुई।"

इधर दसेक सालों के जीवन की याद करते हुए श्ये ने कहा कि उनकी सभी उपलब्धियों का श्रेय अपनी पत्नी को जाता है। क्योंकि सफलता या असफलता के बावजूद, पत्नी हमेशा उनके साथ रही और उनका समर्थन कर रही थी। वर्ष 2017 में श्ये के परिवार को ल्हासा शहर में जातीय एकता के आदर्श परिवार के रूप में नामित किया गया। और इस दंपत्ति को स्वायत्त प्रदेश स्तरीय जातीय एकता और प्रगति के लिये मॉडल के रूप में दर्जा किया गया। श्ये अपने भविष्य के लिए भी काफी आशावान हैं। उन्होंने कहा, "पार्टी और सरकार ने हमें बहुत उत्तम नीतियां तैयार की हैं। इन नीतियों के माध्यम से हमें अपने हाथों से अपना सुखमय जीवन तैयार करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिये। मैं सहकारी का आगे विस्तार करूंगा और आसपास के लोगों को साथ-साथ अमीर बनाऊंगा।"

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