गांव वालों द्वारा अभिनय चलाया गया नाट्य "राजकुमारी वेनछंग"

2019-10-08 15:16:40
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राजकुमारी वेनछंग की कहानी पूरे चीन में प्रचलित और लोकप्रिय है। ईसा 7वीं शताब्दी में तिब्बती पठार के शासक तिब्बती राजा सॉन्गज़न गैंबू ने केंद्र शासन के थांग राजवंश के साथ परम मित्र संबंध कायम किये थे और इसके बदले में थांग राजवंश के महाराजा ने राजकुमारी वेनछंग को तिब्बती राजा सॉन्गज़न गैंबू से शादी करवाने के लिए भेजा। इस राजनीतिक शादी से थांग राजवंश और तिब्बती पठार के राज्य के बीच संबंधों को बहुत नजदीक खींचा गया था और बाद में इस कहानी से आधारित बहुत से नाटकों, उपन्यासों और फिल्मों की रचनाएं रचित की गयी हैं। और आज तक भी तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में बहुत से लोग "राजकुमारी वेनछंग" का नाटकीय प्रदर्शन कर रहे हैं।

नाटक "राजकुमारी वेनछंग" में ऐसे गाते हैं कि "दुनिया में कोई सूदूर जगह नहीं है, सभी निवास क्षेत्र गृह-नगर ही है।" लोगों को यह सुहावना गीत सुनने के बाद बहुत गहरी छाप लगी है। नाटक "राजकुमारी वेनछंग" चीन के थांग राजवंश के समय में राजकुमारी वेनछंग और तिब्बती राजा सॉन्गज़न गैंबू की शादी की कहानी से आधारित है। थांग राजवंश की शैली वाली गीत-नृत्य, तिब्बती नृत्य और तिब्बती ओपेरा समेत दर्जनों अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की शामिली हो गयी है। और इस नाटक के प्रदर्शन में पारंपरिक गीत-संगीत और आधुनिक नृत्य के तत्व भी नजर आ गये हैं। नाटक चीन के भीतरी इलाके तथा ल्हासा शहर के सांस्कृतिक समूह के द्वारा संयुक्त रूप से रचित किया गया है। और यह भी चर्चित है कि नाटक के प्रदर्शन से न केवल पारंपरिक संस्कृति का विकास किया गया है, बल्कि तिब्बत में गरीबी उन्मूलन के कार्यों में भी बड़ी मदद मिली है। क्योंकि इस नाटक के अभिनेताओं में कई सौ स्थानीय लोग भी शामिल हैं। सांस्कृतिक कंपनी के प्रचारक ली चाओ-ह ने कहा कि नाटक के प्रदर्शन में भाग लेने वाले तिब्बती लोग पेशेवर तो नहीं हैं, पर उनका गाना नाचना पसंद होने के लिए प्राकृतिक स्वभाव है। "राजकुमारी वेनछंग" नाटक के प्रदर्शन में कई सौ एक्स्ट्रा अभिनेताओं की भागीदारी चाहिए। जो मंच पर गाते, नाचते और पृष्ठभूमि के पात्र निभाते हैं। एक्स्ट्रा अभिनेता होने के नाते मजबूत कौशल की आवश्यकता नहीं है, और वे अपने अवकाश के समय यह काम कर सकते हैं। इसलिए नाटक के प्रदर्शन में भाग लेने वाले तिब्बती लोग अपने परिवार के लिए कुछ इंकम कमा सकते हैं। ली ने कहा,“नाटक के प्रदर्शन में भाग लेना यहां के आम लोगों के लिए आसान है। और यह काम करने के लिए तकनीकी कौशल की आवश्यकता भी नहीं चाहिये। नाटक के प्रदर्शन से बहुत सारे रोजगार के मौके पैदा किये गये हैं, लोगों की आय भी स्थिर है। इसमें एक और फायदा है कि लोग दिन के समय श्रम कर सकते हैं, रात को मंच में अभिनेता का काम कर सकते हैं। इस तरह उन्हें डबल इंकम कमा सकते हैं।”

वर्ष 2013 के अगस्त में "राजकुमारी वेनछंग" का प्रदर्शन ल्हासा शहर के त्सेछोकलिंग गांव के पास स्थापित पर्यटन पार्क में शुरू किया गया। बहुत सारे दर्शकों ने यहां आकर इस नाटक का दर्शन किया है। सांस्कृतिक उद्योग के विकास से गांव वासियों के गरीबी उन्मूलन को मदद मिली है। 53 वर्षीय त्सेटेन दावा हमेशा त्सेछोकलिंग गांव में रहते हैं। नाटक के प्रदर्शन से उन का जीवन भी बदल गया है। उन्होंने कहा,“मैं चराई और खेती का काम करता था। आज मैं कुछ व्यवसाय और परिवहन के बिज़नेस कर रहा हूं, और नाटक राजकुमारी वेनछंग के यहां कुछ काम कर रहा हूं। मेरा जीवन बहुत बदल गया है।”त्सेटेन दावा नाटक-क्रू के साथ-साथ छह साल तक काम कर चुके हैं। साथ ही वे गांव में तिब्बती ओपेरा की सांस्कृतिक विरासत के उत्तराधिकारी भी हैं। वे तिब्बती ओपेरा और तिब्बती संस्कृति से बहुत प्यार करते हैं।

27 वर्षीय लापू त्सेरिंग ने राजकुमारी वेनछंग के प्रदर्शन में भाग लेते समय तिब्बती ओपेरा जैसे कई गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत के नृत्यों में महारत हासिल की है। और उन्हें नए अभिनेताओं का प्रशिक्षण करने की जिम्मेदारी भी निभानी है। राजकुमारी वेनछंग के अलावा वे दूसरे ऐतिहासिक नाटक के प्रदर्शन में भी हिस्सा लेते हैं। प्रदर्शन में भाग लेने से उन्हें प्रति माह छह हजार युआन की आय प्राप्त होती है। जिससे वे परिवार का सहारा करते हैं, और घर में अपने छोटे भाई और बहिन आदि का खर्च भी देते हैं। लापू ने कहा,“मेरी मासिक आय छह हजार युआन है। मैं इस का आधा भाग वापस भेजता हूं और शेष भाग रहने के खर्च के लिए है।”लापू ने कहा कि वे पैसे के लिए नाटक प्रदर्शन में भाग लेते नहीं हैं। इससे और महत्वपूर्ण बात है तिब्बती नृत्य का संरक्षण और उत्तराधिकार करना। उन्होंने कहा,“हम जो प्रदर्शन कर रहे हैं वे सब प्राचीन काल के तिब्बती लोक नृत्य हैं, और पर्यटक भी जातीय विशेषता वाली चीज़ें देखना चाहते हैं। मेरी उम्मीद है कि पारंपरिक संस्कृति और नृत्य का अच्छी तरह उत्तराधिकार किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यागा लोग इसे देख पाएं।”लापू त्सेरिंग, जो एक सुनसान सुदूर गाँव से आये युवक है, आज सपनों से भरा मंगलमय जीवन बिते रहे हैं। और आज उन्होंने तिब्बती नृत्य कला में महारत हासिल की है। भविष्य के लिए उन की पूरी उम्मीद भी है। उन्होंने कहा,“मुझे तिब्बती नृत्य और कला बहुत पसंद है। मैं और ज्यादा सीखूंगा। और यहां का पेमेंट आदि भी ठीक है। सब अच्छा लगता है। मैं यहाँ अच्छी तरह काम करना जारी रखूंगा।”

उधर 22 वर्षीय लड़की दचेन द्रोकर मध्य चीन के हूनान प्रांत के नॉनफेरस मेटल्स टेक्निकल कॉलेज से स्नातक हुई है। गांव में वापस होने के बाद अब वह सिविल सेवक की परीक्षा के लिए तैयारी कर रही है। अवकाश के समय वह भी थिएटर में अभिनेता के रूप में काम कर रही है। दचेन ने कहा, "मुझे नाचना पसंद है, और दोस्तों के साथ खेलने में बहुत खुशी है। इस के अलावा प्रति माह कई हजार युआन की आय भी है।" पता चला है कि नाटक राजकुमारी वेनछंग में गांव वालों के याक, घोड़े और बकरी आदि जानवरों की शिरकत भी चाहिये। और जानवरों के प्रदर्शन के लिए भी गांव वालों को पेमेंट दी जाती है। बताया गया है कि नाटक "राजकुमारी वेनछंग" का प्रदर्शन शुरू होने के बाद से कुल चार हजार लोगों ने भिन्न भिन्न रूप में इस कार्य में भाग लिया है। सांस्कृतिक कंपनी के प्रचारक ली चाओ-ह ने कहा कि नाटक के प्रदर्शन से स्थानीय क्षेत्रों के रोजगार और गरीबी उन्मूलन को भी बहुत बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने कहा,“हमारे कार्य से स्थानीय रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है और अनुमान है कि एक युआन के बॉक्स ऑफिस से चार युआन का उत्पादन मूल्य उत्पन्न किया जा सकता है। मिसाल के तौर पर यातायात, टिकटिंग, अभिनेता का प्रदर्शन, खानपान और आवास इत्यादि, इस परियोजना के संचालन से कई हजार लोगों के रोजगार को बढ़ाया जा सकता है।”


राजकुमारी वेनछंग की कहानी

राजकुमारी वेनछंग की कहानी प्राचीन काल के थांग राजवंश के काल से आज तक पूरे चीन में बहुत प्रचलित है। ईसा 7वीं शताब्दी में तिब्बती पठार के शासक तिब्बती राजा सॉन्गज़न गैंबू ने केंद्र शासन के थांग राजवंश के साथ परम मित्र संबंध कायम किये थे और इसके बदले में थांग राजवंश के महाराजा ने राजकुमारी वेनछंग को तिब्बती राजा सॉन्गज़न गैंबू से शादी करवाने का फैसला लिया। इस राजनीतिक शादी से थांग राजवंश और तिब्बती पठार के राज्य के बीच संबंधों को बहुत नजदीक खींचा गया था।

राजकुमारी वेनछंग थांग राजवंश के समय महाराजा की एक पुत्री थी। ईसा सन 641 में थांग राजवंश के महाराजा थाईजूंग के आदेश के मुताबिक राजकुमारी को तिब्बती राजा सॉन्गज़न गैंबू से शादी करवाने के लिए तिब्बत भेजा। इस के बाद थांग राजवंश और तिब्बती राज्य के बीच दो सौ साल तक मैत्रीपूर्ण संबंध कायम किये गये। राजकुमारी वेनछंग और उन के दल थांग राजवंश की तत्कालीन राजधानी छांगआन नगर से रवाना होकर छींगहाई के जरिये ल्हासा नगर तक जा पहुंचे। तिब्बती राजा सॉन्गज़न गैंबू ने अपने मंत्रियों के साथ-साथ रास्ते में राजकुमारी वेनछंग की अगवानी करने के लिए छींगहाई गये। भव्य रस्म आयोजित होने के बाद राजकुमारी वेनछंग तिब्बती राजा की रानी बनी।

राजकुमारी वेनछंग के दहेज में बुद्ध की मूर्ति और ग्रंथ, भिन्न भिन्न खजाने, क्लासिक बुक, सभी प्रकार के सोने या जेड के आभूषण और कपड़े, खाना बनाने के बारे में किताबें, पेय पदार्थ, रंगबिरंगे पैटर्न्स की सजावट वाले रेशम, वास्तुकला और तकनीकी कार्य के बारे में पुस्तकें, अटकल ग्रंथ, मेडिकल ग्रंथ और चिकित्सा उपकरण और अनेक फसल बीज आदि शामिल हुए। राजकुमारी वेनछंग के साथ शादी करने से तिब्बत राज्य और थांग राजवंश के बीच सांस्कृतिक आदान प्रदान को आगे गहरायाय गया और तिब्बती राज्य कि रीति-रिवाज को भी बहुत बदला गया। उदाहरण के लिए तिब्बती राजा सॉन्गज़न गैंबू ने खुद भी थांग राजवंश की रीति-रिवाज सीखकर रेशम के कपड़े पहनना शुरू किया, और थांग राजवंश में अध्ययन करवाने के लिए कुलिन परिवार के बच्चों को भेजा था। तिब्बती राजा ने थांग राजवंश के महाराजा को पत्र लिख कर बधाई दी और उपहार के रूप में सोने का एक हंस भेज दिया।

तिब्बती राजा सॉन्गज़न गैंबू और राजकुमारी वेनछंग की शादी से दोनों पक्षों के बीच सांस्कृतिक आदान प्रदान और राजनीतिक मैत्री का नया युग खोला गया था। तिब्बती राजा ने राजकुमारी वेनछंग के लिए विश्व मशहूर पोताला पैलेस का निर्माण किया। जिसमें एक हजार कमरे थे। पोताला पैलेस की भित्ति चित्र में तिब्बती राजा और राजकुमारी वेनछंग की शादी का खूब वर्णन भी हुआ। और इस विशाल महल में तिब्बती राजा सॉन्गज़न गैंबू और राजकुमारी वेनछंग की मूर्तियां आज भी सुरक्षित हैं।

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