झीलों और नदियों का अच्छी तरह संरक्षण

2019-09-09 15:09:29
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हाल में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के शाननान शहर की जन प्रतिनिधि सभा की स्थानी कमेटी ने यमद्रोक झील का संरक्षण नियम पारित किया। जिससे इस झील में जल संरक्षण और प्रदूषण की रोकथाम के लिए मददगार होगा।

यमद्रोक झील तिब्बती पठार के दक्षिण में स्थित है जो तिब्बत की राजधानी ल्हासा शहर से 70 किलोमीटर दूर है। इस झील का तिब्बती नाम है यमद्रोक त्सो, वह तिब्बत में तीन प्रमुख पवित्र झीलों में से एक है। यमद्रोक झील का क्षेत्रफल 675 वर्ग किलोमीटर है और झील की ऊंचाई समुद्र तल से 4,441 मीटर होती है। अभी प्रकाशित संरक्षण नियम के मुताबिक इस झील के जल संरक्षण और जल प्रदूषण की रोकथाम के कार्यों को और सख्त बनाया जाएगा। नियम के अनुसार यमद्रोक झील के संरक्षण कार्यों के लिए एक प्रमुख भी नियुक्त किया जाएगा जो इस झील के जल क्षेत्रों के प्रबंधन, संरक्षण और देखभाल की जिम्मेदारी उठाएंगे। संरक्षण क्षेत्रों में सभी निर्माण परियोजनाओं को खत्म किया जाएगा और पारिस्थितिक संरक्षण, बाढ़ व आपदा की रोकथाम और पानी की गुणवत्ता की निगरानी जैसी सार्वजनिक सुविधाओं से असंबंधित परियोजनाओं को सब बन्द किया जाना चाहिये। झील में फिशिंग करना भी निषिद्ध है। यमद्रोक झील के संरक्षण नियम के मुताबिक सभ्यतापूर्ण पर्यटन को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रति वर्ष के 25 मई को यमद्रोक झील का संरक्षण दिवस तय किया जाएगा और सभी लोगों को इस झील के संरक्षण कार्यों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस झील के क्षेत्र में पर्यटन का अच्छी तरह विकास करने के लिए स्थानीय सरकार ने सछ्वान प्रांत तथा दूसरे क्षेत्र के कारोबारों के साथ समझौता संपन्न किया जिसके मुताबिक यमद्रोक झील के पर्यटन क्षेत्र में भारी निवेश लगाकर पर्यटन उद्योग का उन्नयन किया जाएगा ताकि पर्यटन के विकास से गरीबी उन्मूलन को बढ़ाया जाए।

यमद्रोक झील का संरक्षण कार्य तिब्बत में तमाम प्राकृतिक संरक्षण कार्यों का एक भाग है। अभी तक तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में 47 प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र स्थापित किये गये हैं जो इस क्षेत्र में जैव विविधता की खूब बहाली के लिए मददगार है। चीनी सरकार द्वारा प्रकाशित एक श्वेत पत्र के मुताबिक तिब्बत में पारिस्थितिक सभ्यता निर्माण में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त हो चुकी हैं। वर्तमान में तिब्बत में प्राकृतिक घास के मैदान तथा वनस्पतियों की कवरेज दर 45.9% तक पहुंच गई। 2018 के अंत तक तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में प्राकृतिक घासमैदान का क्षेत्रफल 8.89 करोड़ हेक्टर रहा है, जो पूरे देश में सबसे विशाल है। आर्द्रभूमि का क्षेत्रफल 65.29 लाख हेक्टर तक रहा है जो देश में दूसरे स्थान पर है। सन 1988 में चीन सरकार ने जूमूलांगमा पर्वत संरक्षण क्षेत्र स्थापित किया। तबसे अभी तक तिब्बत में कुल 47 प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र स्थापित हो चुके हैं। इन का कुल क्षेत्रफल 4.12 लाख वर्ग किलोमीटर होता है और यह संख्या भी पूरे देश में सबसे अधिक है। तिब्बती मृग की संख्या भी सन 1990 की 60 हजार से बढ़कर 2 लाख तक पहुंच गयी है। वर्तमान में, तिब्बत में जंगल की कवरेज 12.14% रहती है। वन स्टॉक की मात्रा 2.28 अरब क्यूबिक मीटर रही है। प्राकृतिक वातावरण को जोर लगाने के लिए तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की सरकार ने जलवायु प्रदूषण रोकथाम जैसे सिलसिलेवार नियम जारी किये। वर्ष 2017 से तिब्बत की स्थानीय सरकार ने तमाम लोगों से वनरोपण की मुहिम करने का आह्वान किया। जिसका नारा है "प्रति व्यक्ति के लिए 5 पेड़ लगाओ, सभी गांवों में पेड़ लगाओ"।

वर्ष 2001 से सरकार ने तिब्बत में जंगल, घास के मैदान, वेटलैंड और पारिस्थितिक क्षेत्रों के निर्माण में 31.6 अरब युआन की पूंजी डाली है। आंकड़े बताते हैं कि अभी तक तिब्बत में 6,600 से अधिक उच्च पौधों का पता लगाया गया है जिनमें 40 को संरक्षित पौधों में सूचीबद्ध किया गया है। जंगली याक की संख्या दस हजार तक बढ़ गयी है। तिब्बत की प्रचुर जैव विविधता पूरे देश और यहां तक पूरी दुनिया में भी उल्लेखनीय साबित है।

सानच्यांगयुवान राष्ट्रीय प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र

छींगहाई-तिब्बत पठार के उत्तर में चीन का सबसे विशाल वेटलैंड सानच्यांगयुवान फैलता है। जहां चीन की तीन प्रमुख नदियां यानी यांगत्सी नदी, पीली नदी और लैनत्सांग नदी जन्म होती हैं। इस क्षेत्र को "चीन का जल मीनार" माना जाता है। सानच्यांगयुवान न केवल चीन बल्कि दक्षिण पूर्वी एशिया की जल आपूर्ति कर रहा है। इस क्षेत्रफल का संरक्षण करने का अत्यंत महत्व रहता है। सानच्यांगयुवान क्षेत्र में जैव विविधता का संरक्षण करने के लिए चीन सरकार ने इस क्षेत्र में 1.23 लाख वर्ग किलोमीटर विशाल नेशनल पार्क स्थापित किया।

छींगहाई-तिब्बत पठार पर स्थित गोलोक स्टेट में पीली नदी का जल स्रोत माना जाता है। स्थानीय सरकार ने पार्टी की केंद्रीय कमेटी के आदेश के मुताबिक पारिस्थितिक सुरक्षा के संदर्भ में सख्त नीतियों का कड़ाई से पालन किया, उच्च मानक लागू किया और सख्त उपाय अपनाया। उन्होंने पारिस्थितिक संरक्षण को प्राथमिकता देकर जिम्मेदारी व्यवस्था भी स्थापित की। सरकार ने पारिस्थितिक संरक्षण को गरीबी उन्मूलन कार्यों के साथ जोड़कर राष्ट्रीय पार्क के निर्माण में भाग लेने के लिए चरवाहों को प्रोत्साहित किया। राष्ट्रीय पार्क के निर्माण में कई हजार पारिस्थितिक रक्षक और प्रबंधक नियुक्त किये गये जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार का मौका मिला है। स्थानीय लोगों को प्राकृतिक संरक्षण के कार्यों में सक्रियता से भाग लेने से आर्थिक लाभ मिला है। इस क्षेत्र में स्थित मातो काउंटी में इलेक्ट्रिक बॉयलर से पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले कोयले बॉयलर का स्थान लिया गया है। हरित विकास और जीवन शैली सभी लोगों की आम सहमति और कार्रवाई बन गयी है। अच्छे पर्यावरण से उच्च गुणवत्ता का विकास और जीवन स्तर उत्पन्न किया गया है। सरकार ने "हरित पहाड़ स्वर्ण पहाड़ ही होता है" के विचार से आर्थिक विकास करने का प्रयास किया है।

निरंतर कोशिश से सानच्यांगयुवान क्षेत्र के संरक्षण में उल्लेखनीय प्रगतियां हासिल की गयी हैं। हाल में चीनी विकास और सुधार आयोग ने सानच्यांगयुवान पारिस्थितिक संरक्षण और निर्माण कार्यों के मूल्यांकन का परिणाम जारी किया। जिसके मुताबिक यह पता लगा है कि इस क्षेत्र में पारिस्थितिक पर्यावरण में काफी सुधार हुआ है, पारिस्थितिक संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत किया गया है, स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को उन्नत किया गया है और पारिस्थितिक सुरक्षा की गारंटी को भी सुव्यवस्थित किया गया है। वर्ष 2005 से सरकार ने "सानच्यांगयुवान पारिस्थितिक संरक्षण और निर्माण योजना" लागू करना शुरू किया। वर्ष 2017 के अगस्त से "सानच्यांगयुवान राष्ट्रीय पार्क विनियम" औपचारिक तौर पर प्रचलित होने लगा। इस कानून के मुताबिक सानच्यांगयुवान के सभी प्राकृतिक संसाधन जैसे पहाड़, जंगल और घास के मैदानों का सख्ती से संरक्षण किया जाने लगा और पारिस्थितिक संरक्षण के तंत्र के नवाचार में भारी प्रगतियां प्राप्त हुई हैं।

इधर के वर्षों में सानच्यांगयुवान संरक्षण क्षेत्र में सरकार ने कई अरब युवान की पूंजी डालकर मिट्टी गुण में सुधार, कृत्रिम वनीकरण, वेटलैंड संरक्षण, ग्रासलैंड कीट नियंत्रण, वन अंकुर आधार निर्माण, पारिस्थितिक निगरानी, व्यक्तियों का प्रशिक्षण और प्रचार आदि का काम किया। हाल में शीनिंग शहर में आयोजित सानच्यांगयुवान संरक्षण कार्य मीटिंग में प्राप्त खबर है कि सरकार के प्रयासों का परीणाम न सिर्फ प्राकृतिक वातावरण में सुधार पर नज़र आ रहा है, बल्कि सानच्यांगयुवान क्षेत्र में किसानों व चरवाहों के विचार में भी भारी परिवर्तन आया है। सानच्यांगयुवान में रहने वाले थांगची, जो प्राकृतिक वातावरण का रक्षक भी हैं, ने बताया कि अतीत में हम जो रखना चाहते थे वह अधिक मवेशी और भेड़ थे। आज हमें जो सुरक्षित करना चाहिये वह सुन्दर सुन्दर झीलें, नदियां और घास के मैदान हैं।

 

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