बच्चों के लिए सपने हासिल करने का मंच

2019-09-02 10:34:34
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तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा शहर में स्थापित पेइचिंग प्रायोगिक मिडिल स्कूल में 2400 छात्र पढ़ रहे हैं। छात्रों के साथ रहकर यह महसूस हुआ है कि प्यार से बच्चों को एकत्र किया गया है और वे अपने सपने को साकार करने के लिए कोशिश कर रहे हैं।

मिडिल स्कूल के सभी छात्र रोज मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराने की रस्म में भाग लेते हैं। ल्हासा शहर में स्थापित पेइचिंग प्रायोगिक मिडिल स्कूल पेइचिंग शहर की सहायता से निर्मित है। पेइचिंग शहर की सरकार ने इस मिडिल स्कूल की स्थापना में 25 करोड़ युआन की पूंजी लगायी। लगभग 14 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस मिडिल स्कूल में तमाम आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं। इधर के वर्षों में प्रायोगिक मिडिल स्कूल ल्हासा शहर में सबसे आधुनिक मिडिल स्कूल बन गया है। मिडिल स्कूल में पढ़ रही छात्रा त्सोकी ने कहा कि चारों ओर पेड़ों और फूलों से घिरे हुए स्कूल में पढ़ने से बहुत मंगलमय लगता है। लड़की ने कहा, “मैं इस स्कूल में पढ़ते हुए बहुत खुश हूं। मुझे तिब्बती भाषा की क्लास पसंद है। भविष्य में मैं एक तिब्बती भाषा की अध्यापिका बनना चाहती हूं और अपनी जातीय संस्कृति का विकास करना चाहती हूं।”

मिडिल स्कूल में अध्यापक छात्रों को बहुत प्यार करते हैं और उन पर ध्यान भी देते हैं। अध्यापक निम्मा फेन्दोक इस स्कूल में 15 साल से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें बच्चों के साथ रहना पसंद है और छात्र भी उन्हें प्यार करते हैं। उन्होंने कहा,“बच्चों के साथ रहकर मुझे बहुत अच्छा महसूस होता है। मैं अकसर छात्रों को बताती हूं कि हम न केवल अध्यापक और छात्र हैं, बल्कि दोस्त भी हैं। मैं ने देखा है कि इधर के पाँच सालों में बच्चों की मानसिक रुख बहुत बदला है जिससे मैं बहुत प्रभावित हुई हूं”

राजधानी पेइचिंग से आये अध्यापक ल्यांग शिन भी इस मिडिल स्कूल में पढ़ाते हैं। ल्यांग ने कहा कि मिडिल स्कूल के तिब्बती छात्र सब शिष्ट हैं और विनम्र भी। वे पूरी मेहनत से बच्चों की देखभाल करेंगे। ल्यांग ने कहा,“मैं पेइचिंग से ल्हासा के इस मिडिल स्कूल में अध्यापक का काम करता हूं। मुझे पता लगा है कि ये बच्चे बहुत सीधे साधे और प्यारे हैं। आशा है कि मेरे काम से बच्चों को अधिक खुशियां मिलेंगी।”

तिब्बत में छात्रों का जीवन सुखमय है। वे पार्टी, सरकार और स्कूल के अध्यापकों के प्यार में रहते हैं। वर्ष 1985 से केंद्र सरकार ने तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में सभी छात्रों को निशुल्क खानपान, रहनसहन और शिक्षा का व्यवहार देना शुरू किया। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में सभी किसानों, चरवाहों के बच्चों, तथा शहरों में रहने वाले मुश्किल नागरिकों के बच्चों को यही व्यवहार दिया गया है। इस का लाभ लेने वाले बच्चों की संख्या छह लाख तक जा पहुंची है। एक बच्चे की मां ने कहा,“हम सरकार की निशुल्क शिक्षा की नीति के बहुत बहुत आभारी हैं।”ल्हासा शहर में पढ़ने वाले अधिकांश छात्रों को भी निशुल्क शिक्षा की नीति से लाभ मिला है। एक तिब्बती लड़के ने बताया,“मुझे लगता है कि आज का जीवन अच्छा है। क्लास की समाप्ति पर हमें अतिरिक्त भोजन भी तैयार मिलता है। निशुल्क शिक्षा की नीति से बहुत से छात्रों को लाभ मिला है। और स्कूल में अध्यापक भी बहुत अच्छे हैं। मुझे उम्मीद है कि भविष्य में भैं भी एक कला अध्यापक बन सकूंगा।”

हरेक बच्चे का अपना सपना है। हरेक बच्चा सपने को साकार करने योग्य है। ल्हासा शहर का पेइचिंग प्रायोगिक मिडिल स्कूल बच्चों के लिए सपना साकार करने के लिए मंच बन चुका है।

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