तिब्बती साहित्य का नया वसंत

2019-08-19 09:21:15
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तिब्बत में लोकतांत्रिक रूपांतरण की 60वीं जयंती मनाते हुए यह बताये गये हैं कि तिब्बती साहित्य का भी उल्लेखनीय विकास भी हुआ है। पूर्व में साहित्य का विषय मुख्य रूप से धर्म की सेवा होता था। आज तिब्बती भाषा का साहित्य आम आदमियों के जीवन से जुड़ा हुआ है। भिन्न भिन्न युगों में तिब्बत के उत्कृष्ट रचनाएँ और लेखक उभरे हुए हैं, जिन्हों ने चीन के साहित्य को समृद्ध बनाने के लिए योगदान पेश कर दिया है।  

सन 1950 के दशक से तिब्बत में अनेक लेखकों ने चीनी हान भाषा और तिब्बती भाषा से अपनी साहित्य रचनाएँ बनाना शुरू की थी। उन्होंने अपनी साहित्य रचनाओं से तिब्बत का सामाजिक, आर्थिक और वैचारिक परिवर्तन का रिकॉर्ड किया। लेखकों ने अपने उपन्यासों में तिब्बत में शांतिपूर्ण मुक्ति के बाद हुए सामाजिक परिवर्तन को दर्शाते हुए नए तिब्बत के निर्माण में लोगों की बुलंद आकांक्षा और युवकों के प्रेम जीवन का वर्णन किया। लेखकों ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और जन मुक्ति सेना के तिब्बती जनता के साथ घनिष्ठ संबंधों की प्रशंसा कर तिब्बत में आधुनिक साहित्य का नया अध्याय जोड़ दिया। सन 1980 के दशक में स्थानीय लेखकों द्वारा तिब्बती भाषा से लिखित उपन्यास देश भर में ध्यानाकर्षक बने। तिब्बती लेखक येशिथेंज़िन द्वारा लिखित उपन्यास को चीन में प्रथम अल्पसंख्यक जातीय साहित्य पुरस्कार सौंपा गया। इस काल में तिब्बती साहित्य की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि स्थानीय लेखक साहित्य सृजन के अग्रिम मोर्चे पर उभरे हुए हैं। उन्होंने बड़ी मात्रा की उत्कृष्ट और प्रभावशाली साहित्य रचनाएँ रचित की हैं। उन में "फ़िरोज़ा" और "कल का मौसम आज से बेहतर होगा" को तिब्बत स्वायत्त प्रदेश तथा चीनी राष्ट्रीय साहित्य पुरस्कार भी अर्पित किया गया था। उनके उपन्यासों में पुराने काल के अंधेरे, भू-दासों के दुखद जीवन तथा शांतिपूर्ण मुक्ति के बाद तिब्बती किसानों की सुखमय जीवन के प्रति उम्मीदों का वर्णन किया गया। इन उपन्यासों ने यथार्थवादी ढ़ंग से राजनीतिक जीवन में हुए परिवर्तनों का वर्णन किया और तिब्बती साहित्य की अनूठी शैली दिखाने में सफल किया।

सन 1980 के दशक में तिब्बती भाषा साहित्य चीन के आधुनिक साहित्य के अग्रिम मोर्चे पर खड़ा हुआ है। थाशी दावा और दूसरे लेखकों के उपन्यासों में अग्रिम साहित्य की विशेषता दिखाई देती है। इन के अलावा लोसांग च्यात्सो आदि कवियों ने "हिमालय कविता" स्थापित किया। उधर हान जातीय लेखकों ने तिब्बत का वर्णन करने की अपनी रचनाओं से साहित्य के गार्डन में और अधिक फूल बोये। इधर के वर्षों में तिब्बती भाषा साहित्यकारों के कार्यों पर देश भर का ध्यान आया है। इन के कार्यों को अनेक बार राष्ट्रीय पुरस्कार सौंपा गया। "जनता साहित्य" समेत प्रमुख चीनी साहित्य पत्रिका में लगातार तिब्बती साहित्यकारों की रचनाएं प्रकाशित की गयी हैं। तिब्बती लेखकों ने अपने कार्यों में तिब्बत की पारंपरिक संस्कृति के कई उत्कृष्ट गुण जैसे मानवीय दया, साहस और जिम्मेदारी आदि को व्यक्त करने की कोशिश की। जिससे चीनी साहित्य में ताजा हवा उड़ने लगा है। इन के कार्यों का देश-विदेश में भी प्रभाव फैला हुआ है। इन के कार्य चीनी साहित्य को समृद्ध करते हुए बाहरी दुनिया के लिए तिब्बत की जानकारी लेने का अनिवार्य तरीका बन गये हैं। इधर के वर्षों में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की पार्टी कमेटी और सरकार ने साहित्य और कला के विकास को और अधिक समर्थन बढ़ा दिया है। तिब्बती साहित्य का विकास सबसे अच्छे काल में गुजर रहा है। तिब्बती लेखक भी पठार की विशेषता वाली उत्कृष्ट रचनाएं रचित करने में तैयार हैं।

तिब्बती साहित्य के विकास को बढ़ाने के लिए हाल ही में राजधानी पेइचिंग में एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। चीनी लेखक संघ, चीन लेखक प्रकाशन संघ तथा तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के लेखक संघ के कुछ सदस्यों ने संगोष्ठी में भाग लिया। उन्होंने रुपांतर से तिब्बती साहित्य के विकास पर विचार विमर्श किया और यह माना है कि आज साहित्य तिब्बत और भीतरी इलाकों के लोगों के बीच संपर्क रखने का पुल भी बना है। देश के आधुनिक साहित्य में तिब्बती साहित्य की भाषा, गुणवत्ता और शुद्ध शैली की साफ धाराएँ साबित हुई हैं। और इनमें यह भी चर्चित है कि तिब्बत में रहने वाले कुछ हान जातीय साहित्यकारों ने अपने दिल से तिब्बत का पर्यवेक्षण किया और अपने कलम से स्थानीय लोगों के जीवन का वर्णन किया। मिसाल के तौर पर तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की सरकार की उपमहासचिव ल्यू श्वान ने तिब्ब्त में रहने के बाद अपनी कविता की कल्पना को अधिक विशाल बनाया है। और उन की रचनाओं की अधिक विशेषता भी उभरने लगी है। तिब्बत विश्वविद्यालय के साहित्य स्कूल की प्रोफेसर फूबू छांगगी ने कहा कि शांतिपूर्ण मुक्ति के बाद के साठ सालों में तिब्बत में भारी परिवर्तन हुआ है जो साहित्य सृजन के लिए समृद्ध सामग्रियां प्रदान करता है। इस के साथ तिब्बत में बहुसांस्कृतिक एकीकरण के बहुत जटिल सामाजिक वातावरण तैयार हो गये हैं, जिससे लेखकों को साहित्य सृजन के लिए समृद्ध आयाम मिल गया है।


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