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हिम पर्वत के संरक्षण के लिए स्वयंसेवक

2019-07-22 08:53:02
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हिम पर्वत तिब्बती पठार पर सबसे सुन्दर प्राकृतिक दृश्य माना जा रहा है। पर हिम पर्वत पर प्राकृतिक वातावरण को बनाये रखने की भी बड़ी आवश्यकता है। इधर के वर्षों में पर्यटन के विकास के चलते अनेक हिम पर्वतों पर कचरे बचे हुए हैं। अपनी जन्मभूमि के वातावरण की रक्षा के लिए हिम पर्वत के आसपास रहने वाले लोगों ने पहाड़ों पर कचरे की सफाई करने की स्वयंसेवा शुरू की है।

सछ्वान प्रांत के गानत्सी प्रिफेक्चर में स्थित कूंगा हिम पर्वत ज़िले में रहने वाली गांववासी चिमेद सुबह ही अपनी तीन पोतियों को लेकर कचरे साफ करने के लिए 4500 मीटर ऊंचे माउंटेन के पास पहुंची। यहां का दृश्य अद्भुत है, कूंगा हिम पर्वत बादलों में चमकते रहते हैं। चिमेद और तीन बच्चों ने कचरे हटाने के लिए पूरे सुबह काम किया। 13 वर्षीय लड़की यूंगद्रोन हर दो हफ्ते स्कूल से घर वापस आती है। हर बार वह परिवारजनों के साथ पहाड़ पर कचरे साफ करने जाती है। कूंगा हिम पर्वत ज़िले में रहने वाले सभी गांववासी वातावरण संरक्षण के स्वयंसेवक हैं। इस ज़िले के नौ गांव है जो कूंगा हिम पर्वत के नीचे फैलते हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी गांववासी पहाड़ों और झीलों के बीच के घास के मैदान पर रहते हैं। हर वर्ष वसंत के मौसम में रंगबिरंगे फूल खिलते रहे हैं और सर्दियों के दिन भारी बर्फ गिरता है। लोग इस स्वर्ग के जैसे क्षेत्र में रहते हैं। वे अपनी जन्मभूमि से प्यार करते हैं। लेकिन इधर के वर्षों में कूंगा हिम पर्वत का दौरा करने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। इन के आने से रोजगार का मौका तैयार करने के साथ-साथ प्रदूषण की परेशानी भी पैदा की गई है। प्रदूषण की रोकथाम करने के लिए गांववासियों ने हिम पर्वत की सफाई करने की स्वयंसेवा शुरू की। गांव के बूढ़ों और बच्चों ने सब इस कार्य में भाग लिया है। प्रति दिन वे पहाड़ में से दसेक बैग कचरे निकाल सकते हैं। गांववासी इतनी मेहनती से क्यों काम करते हैं, इस का जवाब देते हुए 58 वर्षीय बूढ़ी चिमेद ने कहा, क्योंकि यह हमारा पवित्र पहाड़ ही है।

हिम पर्वत के पास रहने वालों का मानना है कि पर्यटन का विकास करना अच्छा है, पर कचरे बढ़ने की समस्या को भी हल करना है। कूंगा हिम पर्वत ज़िले के उप प्रमुख रेनचेन दोर्गी ने कहा कि वर्ष 2016 के बाद कचरे की समस्या गंभीर बनती रही है। क्योंकि इससे पहले यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या बहुत कम थी। और कूंगा हिम पर्वत ज़िले के हरेक गांव को अपना असाधारण प्राकृतिक दृश्य प्राप्त है, जो बाहर के पर्यटकों को आकर्षित हैं। लेकिन कुछ व्यक्तियों को सुन्दर दृश्य का आनन्द उठाने के बाद कचरे छोड़ने की आदत भी है। उन के कचरे को पहाड़ से निकाल करने के लिए गांव वासियों को सफाई का विशेष काम करना पड़ा। आज कूंगा हिम पर्वत ज़िले के हरेक गांव में विशेष क्लीनर तथा वन और घास रक्षक रखे हुए हैं, जो जंगल में आग की रोकथाम करने के साथ-साथ कचरे की सफाई की जिम्मेदारी भी उठाते हैं। गांववासियों का कहना है कि कचरे छोड़ने से न केवल प्रदूषण पैदा करते हैं, बल्कि पशुओं की जान को भी खतरे में डाला गया है। उदाहरण के लिए गांव में एक याक प्लास्टिक थैली खाकर मर गया। दूसरे गांव में जहरीले कचरे खाने के कारण एक हिरण की मौत भी हुई। गांववासियों ने कहा कि ये पशु जंगल के मालिक ही हैं। सभी पर्यटकों को उन चीज़ों, जो हिम पर्वत से संबंधित नहीं है, को बाहर लाना चाहिए। 7556 मीटर ऊँचा कूंगा हिम पर्वत सछ्वान प्रांत में सबसे ऊँचा पर्वत है। इस हिम पर्वत में विशाल ग्लेशियर और जंगल भी फैलते हैं। गांव वासियों का जीवन इस पहाड़ के संसाधनों पर निर्भर है। जैसे कूंगा हिम पर्वत के जंगल में कैटरपिलर कवक नामक एक किस्म के चीनी जड़ी-बूटी का उत्पादन भी होता है। चीनी भाषा में यह कहता है छूंगत्साऊ। प्रति वर्ष अप्रैल से मई माह तक गांववासी इस जड़ी बूटी की तलाश करने के लिए पहाड़ों में जाते हैं। हर वर्ष छूंगत्साऊ पकड़ने से प्रति व्यक्ति के लिए दस हजार युआन की आय प्राप्त हो सकती है। और गांववासियों को यह आदत भी है कि मिट्टी के छेद में से इस जड़ी बूटी की खुदाई करने के बाद वे जमीन की सतह के मूल स्वरूप को बहाल करते हैं। गांववासी पहाड़ में जाते समय एक बैग भी लेते हैं। कोई भी चीज़ जो पहाड़ से संबंधित नहीं है, उसे वापस ले जाना चाहिए। और जंगली पशुओं का सख्त संरक्षण किया जाना पड़ता है।

कूंगा हिम पर्वत ज़िले के हरेक गांव में कूड़ेदान कभी नहीं दिखता है। पर गांवों की सड़कें बहुत साफ-सुथरी है। गांववासियों को कचरे छोड़ने का आदत नहीं है। खाद्य सब्जियों में जो बचे हुए हैं, उन्हें पशुओं को खिलाया जाता है। जो घुलनशील नहीं हो सकता है, तो उन्हें जलाया जाता है। हरेक गांव में कचरे जलाने का विशेष स्थल है। पर आजकल पर्यटकों की संख्या बढ़ती रही है, कचरे के ढेर सारे भी बनते रहे हैं। कचरे की सफाई करने के लिए गांववासियों ने भरसक कोशिश की है। हरेक गांव में लोग छुट्टियों के दिन पहाड़ों में कचरे की सफाई करने जाते हैं। और यह काम उन की स्वयंसेवा है। यह कोई आसान काम नहीं है, इन पहाड़ों की ऊँचाई आम तौर पर चार हजार मीटर से अधिक है। ऐसे ऊंचे पहाड़ में सांस लेना भी मुश्किल है। कचरे साफ करने में बहुत से शरीरिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। पहाड़ों की झील में नीली लहरें आईना की तरह बर्फ से ढके पहाड़ों को दर्शाती हैं, पर वहां भी कचरे तैरते हुए हैं। लोगों को लाठी के जरिये कचरे को बाहर निकालने की कोशिश करनी पड़ती है।

साफ सुथरे वातावरण से गांववासियों के लिए अधिक पर्यटक पहुंचाये गये हैं। और इस तरह इन्हें पर्यटन के विकास से रोजगार का मौका भी मिलता है। उदाहरण के लिए गांव में रहे लोनांग के घर में एक मोटर गाड़ी और पाँच घोड़े हैं। लोनांग और पिता जी हर दिन अपनी गाड़ी और घोड़ों से पर्यटकों को पहाड़ों का दौरा करने ले जाते हैं। दूसरे गांववासी यांगज़ोम का एक होम होटल स्थापित है, जहां प्रति वर्ष हजारों पर्यटकों को आकर्षित है। टाउनशिप के प्रमुख के अनुसार कचरे बढ़ने से यह जाहिर है कि पर्यटन रिसेप्शन की क्षमता कमजोर है और बुनियादी उपकरणों का निर्माण करने की बड़ी जरूरत है। पर्यटन के विकास में विशेष ज्ञान और बुनियादी उपकरणों की आवश्यकता है। वातावरण को बनाये रखने के लिए केवल गांववासियों की कर्तव्य पर निर्भर रहना काफी नहीं है। कूंगा हिम पर्वत ज़िले ने अभी तक पर्यटन उद्योग के विकास में डेढ़ अरब युआन की पूंजी डाली है। नव निर्मित बुनियादी उपकरणों में सफाई के अलावा पर्यटकों की रक्षा और प्रबंधन आदि भी शामिल हैं। और यह खुशीजनक बात है कि अधिकाधिक स्वयंसेवक सफाई के लिए भीतरी इलाकों से तिब्बती बहुल क्षेत्र आ जाते हैं। मिसाल के लिए इस वर्ष छुट्टियों के दिन कुछ स्वयंसेवक भीतरी इलाके से कूंगा हिम पर्वत ज़िले आकर कचरे की सफाई करना शुरू किया। मिसाल के तौर पर सछ्वान प्रांत के ली थिएन तींग ने वाइबसाइट पर कूंगा जिले में कचरे की सफाई करने के लिए स्वयंसेवकों को बुलाने का मुहिम किया। अंत में दो लड़कियों ने इन के आह्वान का जवाब दिया। ली ने अपने सहपाठियों के साथ अनेक बार ऐसा काम किया है और इन के अभियान में शामिल होने वालों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। उन्होंने यह आशा जतायी है कि सरकार पर्यटकों में वातावरण संरक्षण का अधिक प्रसार करेगी। और जो प्राकृतिक वातावरण को नष्ट करते हैं, उन्हें दंडित किया जाएगा। वर्ष 2018 में स्थानीय सरकार ने बर्फ पहाड़ों में वातावरण संरक्षण के संदर्भ में अनेक नियम जारी किये हैं और आधुनिक उपकरणों के माध्यम से कचरे निपटान को बढ़ाने के लिए अनेक कदम भी उठाये हैं।



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