दामाग लोगों का नया जीवन

2019-07-09 14:41:44
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दामाग लोग तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के शिगात्ज़े शहर के अधीन चीलूंग काउंटी के चीलूंग टाउनशिप में रहते हैं। वर्ष 2003 में चीन और नेपाल के बीच सीमांत क्षेत्रों में घूमते 190 दामाग लोगों को आधिकारिक तौर पर चीन लोक गणराज्य की नागरिकता प्राप्त हुई और तबसे वे चीनी नागरिक बन गए। और उन्हें तिब्बती जाति की एक शाखा मानी जाती है। अभी तक दामाग गांव के कुल 89 परिवार हैं और गांववासियों की संख्या 299 रही है। सरकार की मदद से सभी दामाग लोगों को अपना मकान प्राप्त हुआ और उन्हें भी दूसरे लोगों की ही तरह गरीबी उन्मूलन, शिक्षा और चिकित्सा की सहायता मिल गयी है।

तिब्बती भाषा में दामाग का मतलब है "घुड़सवार सैनिकों के वंशज"। बताया गया है कि प्राचीन काल में दामाग लोगों के पूर्वज युद्ध में हार गए थे और इस क्षेत्र में रह गये थे। इसके बाद के लगभग दो सौ सालों में दामाग लोग हमेशा इस क्षेत में घूमते रहे और उन की संख्या भी बहुत कम रही है। वर्ष 2001 में एक स्थानीय पदाधिकारी ने चीलूंग काउंटी के चीलूंग घाटी का दौरा करते हुए दामाग लोगों का पता लगाया। वर्ष 2003 में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की सरकार की मदद से इन सभी दामाग लोगों को चीन लोक गणराज्य की नागरिकता सौंपी गयी। 39 वर्षीय महिला तावा ने कहा कि नागरिकता प्राप्त होने के बाद मुझे यह लगा कि मैं एक घर मिल गयी हूं। देश की नागरिकता प्राप्त होने से पहले दामाग लोगों को सरकारी कल्याण का लाभ नहीं मिल सकता था। उन्हें आसपास घूमकर पार्ट टाइम जॉब करना पड़ता था, और उन की आय भी बेचारी थी। वर्ष 2005 में दामाग लोगों को चीन सरकार से आईडी कार्ड प्राप्त हुआ। इस के बाद इन लोगों को भी सरकार के गरीबी उन्मूलन अभियान का लाभ मिला। स्थानीय सरकार ने इन लोगों को फर्नीचर से लैस नये मकानों का निर्माण किया। इसी से दामाग लोगों का अपना गांव भी स्थापित हुआ। सरकार की मदद से गांववासियों को नल का जल, ग्रीनहाउस और सब्जी खेत भी प्राप्त है। इससे अधिक महत्वपूर्ण बात है कि सभी गांववासियों को मेडिकल बीमा भी प्राप्त हो चुकी है।

चीन के तिब्बत में रहने के दो सौ साल के इतिहास में दामाग लोगों को भूमि और मकान प्राप्त होने का अधिकार नहीं था। इसलिए उन्हें लोहा मारने का काम करना पड़ता था और कभी कभी खेत में दूसरों की मदद करनी पड़ती थी। लेकिन पुराने समय लोहार का सामाजिक स्थान बहुत निम्न था और दामाग लोगों का वैधानिक स्थान नहीं प्राप्त था, वे अपनी मेहनती के लिए सही आय नहीं ले सकते थे। यहां तक कि उन्हें शिक्षा लेने का अधिकार भी सौंपा नहीं गया था। दामाग गांव के पूर्व मुखिया लोसांग ने कहा,“पहले हम चीलूंग में किराये पर मकान लेते थे। हमें अपना मकान और खेत नहीं था। हम लोहा मारने का काम करते थे और हमारी आय भी बहुत कम थी। इसलिए हम अकसर सैन्य शिविर में पुराने कपड़े, जूते और बचे हुए सामान तलाशने जाते थे।”

वर्ष 2003 में चीन सरकार ने दामाग लोगों की राष्ट्रीयता को पुष्ट किया। देश की नागरिकता प्राप्त होने से दामाग लोगों को बहुत खुशी हुई और उन का जीवन भी बहुत बदल गया। लोसांग ने कहा कि नागरिकता प्राप्त होने के बाद दामाग लोगों को मकान पाने के अलावा चिकित्सा और शिक्षा का सवाल भी हल किया गया है। उन की आय में भारी वृद्धि हुई है।

दामाग गांव में चीलूंग काउंटी का एक कार्य दल स्थित है जो गांववासियों का गरीबी उन्मूलन में नेतृत्व करता है। कार्य दल के प्रमुख के अनुसार काउंटी की लेबर डिस्पैच कंपनी ने दामाग गांव के लोगों को रोजगार मौका तैयार किया है। इसके साथ चीलूंग काउंटी में आर्थिक विकास के चलते दामाग लोगों को भी नौकरी मिल गयी। उदाहरण के लिए च्यांगछो के बेटे को आसपास के एक पशुपालन फार्म करता है, उस की मासिक आय 3 हजार युआन रही है और सरकार ने दामाग गांव में एक लोहा प्रसंस्करण सहकारी स्थापित किया है, जो विशेष तौर पर लौह कला के व्यवसाय में काम करेगा। वर्ष 2017 में लड़के तावा दोर्गी को वूहान विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया, और वह दामाग गांव में सबसे पहले कालेज पढ़ने वाले छात्रों में से एक बना। उन की भर्ती से सभी गांववासियों को बहुत खुशी हुई। तावा दोर्गी बचपन से ही चीलूंग टाउनशिप में रहता है। उसने अपनी आंखों से जन्मभूमि में परिवर्तन देखा। कई साल पहले नगर में आपूर्ति की स्थिति खराब थी। आज नगर में कई बड़े सुपरमार्केट खड़े हुए हैं और बड़े शहरों की जीवन शैली भी यहां फैलने लगी है। आज दामाग गांव के सभी बच्चों को अनिवार्य शिक्षा की प्रणाली में शामिल कराया गया है। दामाग गांव में नई पीढ़ी के लोग पूरी तरह से अपने पूर्वज के जीवन को अलविदा कह सकेंगे। क्योंकि आज वे दूसरों को यह बता सकते हैं कि मैं चीनी हूं, हम चीन के तिब्बती जाति के लोग हैं।

दामाग के विकास में मदद देने के लिए गांव में भेजे गये सरकारी कार्य दल के नेता यूंग जूंग ने कहा,“दामाग गांव में एक सहकारी भी स्थापित है जिसमें 61 सदस्य प्राप्त हैं। इनमें 25 लोहार हैं और कंबल की बुनाई करने की कुछ महिलाएं भी शामिल हैं। योजना है कि भविष्य में युवाओं को कौशल सिखाने के लिए कुशल गुरु आमंत्रित किया जाएगा। अभी तक सहकारी में बेल्ट, चाकू, वनस्पति पॉट और तिब्बती शैली कंबल आदि का उत्पादन किया जाता है। बाद में दामाग गांव के हस्तशिल्प उत्पादन को विशेष गरीबी उन्मूलन उद्योग बनाया जाएगा। ताकि गांव के सामूहिक अर्थतंत्र को मजबूत किया जाए।”सहकारी में काम करने वाली महिलाएं गरीब घर से आयी हैं। उन्होंने कहा कि सहकारी में काम करने के साथ साथ घर के बूढ़ों और बच्चों की देखभाल भी कर सकती हैं। और उन की आय में भी स्पष्ट रूप से बढ़ी है। यूंग जूंग ने बताया कि आज दामाग लोगों का विचार भी धीरे धीरे बदल गया है। पहले वे सरकार की सहायता से निर्भर रहते थे। आज वे अपनी कोशिश से सुखमय जीवन संपन्न करना शुरू किया है। साथ ही सरकार ने उन की बड़ी मदद की है। सरकार की सहायता से स्थापित सहकारी में बहुत से गरीब गांववासियों ने भाग लिया। कुछ लोगों ने गरीबी उन्मूलन के कार्यों में भारी प्रगतियां प्राप्त कर दूसरे गांववासियों के लिए आदर्श खड़ा दिया है। आर्थिक स्थितियों में परिवर्तन के साथ साथ गांववासियों के विचार में स्पष्ट परिवर्तन आया है। युवक द्रातूल ने उत्तरी चीन के चीलीन प्रांत के एक अध्यापक कालेज में अध्ययन किया। द्रातूल ने कहा,“नागरिकता प्राप्त होने से पहले हमारा जीवन बहुत बेचारा था। हम स्कूल में भी नहीं जा सकते थे। राष्ट्रीयता प्राप्त होने के बाद हमें सबकुछ हो गया है। आज हम भी चीनी हैं। हमें चीनी बनने से बहुत गौरव लगता है।”द्रातूल ने बताया कि वर्ष 2014 में अपना अध्ययन समाप्त करने के बाद उसने एक काउंटी के स्कूल में अध्यापक का काम किया। चार साल बाद उसने त्यागपत्र दिया। इसके बाद वह ल्हासा शहर में बेहत्तर मौके की तलाश करने जाएंगे। द्रातूल अकसर टिक टॉक में अपने वीडियो प्रोग्राम का प्रदर्शन करता रहा है। धीरे धीरे टिक टॉक में उस के प्रशंसकों की संख्या भी बढ़ी है। ल्हासा शहर की कुछ मनोरंजन कंपनियों ने द्रातूल के नाम पर ध्यार रखा है और उसे आमंत्रण भेजा है। निमंत्रण पाने के बाद द्रातूल ने ल्हासा शहर में अपना मौका तलाशने का फैसला कर लिया है। द्रातूल ने कहा कि उस के दोस्तों में अधिकांश लोगों को अपना पसंदीता नौकरी प्राप्त है। कुछ शहरों में काम कर रहे हैं, और कुछ ने चीनी मुक्ति सेना में हिस्सा लिया है। लोगों का विचार बदला है, आज दामाग लोगों को दूसरे की ही तरह समान अधिकार प्राप्त है और सब का जीवन मंगलमय है।

दामाग गांव चीन-नेपाल सीमा के चीलूंग बंदरगाह से नजदीक है। रुपांतर और खुलेपन से चीलूंग बंदरगाह का उल्लेखनीय विकास किया गया है। वर्ष 2011 में गंभीर भूकंप से पूरे चीलूंग क्षेत्र पर प्रभाव पड़ा। दामाग गांव के मकानों को भी गंभीर नुकसान हुआ। दामाग गांव के बरबाद मकानों के पुनर्निर्माण के लिए सरकार ने भारी निवेश लगाया। स्थानीय सरकार ने गांववासियों को सहायता के रूप में पशु, ग्रीनहाउस और फर्नीचर आदि भी प्रदान किये हैं। इधर के वर्ष दामाग गांव में प्रति व्यक्ति के लिए औसत आय कई हजार युआन तक रही है और सभी गांव के लिए गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य पूरा हो गया है। आज दामाग लोग स्थानीय समाज में पूर्ण रूप से शामिल हो गये हैं। वे अपनी मेहनत से नये जीवन का निर्माण कर रहे हैं। उन्हें विश्वास है कि भविष्य में उन का जीवन और अच्छा बन जाएगा।

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