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तिब्बत में शिक्षा कार्यों का ऐतिहासिक विकास

2019-06-26 15:36:58
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चीन के तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा शहर के पूर्व में वर्ष 2012 से एक नये नगर यानी ल्हासा शिक्षा नगर का निर्माण शुरू किया गया। वह तिब्बत में सबसे बड़ा आधुनिक शिक्षा केंद्र और आधार माना जाता है।

लोगों की यह सर्वसम्मिति है कि तिब्बत के विकास में शिक्षा आधार की स्थापना करना सबसे महत्वपूर्ण है। लोकतांत्रिक रुपांतर होने से अभी तक के साठ सालों में शिक्षा कार्यों का उल्लेखनीय विकास हो पाया है। इधर के वर्षों में ल्हासा शहर ने शिक्षा के विकास में भारी निवेश लगाया और विभिन्न जातियों के छात्रों को "15 साल निःशुल्क शिक्षा" से व्यवहार कायम किया गया है। नये शिक्षा नगर का निर्माण करने से पुराने नगर में शिक्षा संसाधन के अभाव और कम गुणवत्ता की समस्याओं को हल किया गया है। इसके साथ देश की राजधानी पेइचिंग शहर और च्यांगसू प्रांत समेत भीतरी इलाकों की सहायता से बहुत से तिब्बती छात्रों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा दी जा सकती है। उदाहरण के लिए ल्हासा शहर के शिक्षा नगर में स्थापित च्यांगसू प्रायोगिक मिडिल स्कूल च्यांगसू प्रांत की सहायता में स्थापित है। च्यांगसू प्रांत से आये अध्यापक वांग छी मींग ल्हासा में चार सालों के लिये काम कर चुके हैं। पठार की स्थितियों से आदत नहीं लगने के कारण वांग छी मींग को जीवन में बहुत कठिनाइयां हुई। और काम करते हुए उन्हें यह भी लगा कि तिब्बती छात्रों की नींव भी कमजोर थी। स्थानीय छात्रों की मदद के लिए वांग ने अपने शिक्षण के मोड में सुधार किया। छात्रों की अध्ययन करने की सक्रियता को उजागर करने के लिए वांग छी मींग ने प्रोत्साहन व्यवस्था भी स्थापित की। स्थानीय छात्रों ने वांग की शिक्षण स्टाइल की भुरि भुरि प्रशंसा करते हुए कहा कि मिस्टर वांग का क्लासरूम बहुत ज्ञानी और सक्रिय होता है। वांग ने भीतरी इलाके में प्राप्त अनुभव का प्रसार किया और उन के प्रयास से स्थानीय छात्रों के स्तर को बहुत उन्नत किया गया है। इस मिडिल स्कूल में वांग के अलावा और कई अध्यापक भीतरी इलाके से आये हैं। उन्हों ने कहा कि छात्रों को पढ़ाने के साथ साथ वे स्थानीय अध्यापकों को भी उन्नतिशील अनुभव का परिचय देते रहते हैं। उन का उद्देश्य है कि तिब्बत में वरिष्ठ अध्यापक दल की स्थापना की जाएगी।

तिब्बत के शिक्षण कार्य के विकास में व्यावसायिक शिक्षा के विकास को महत्व दिया जाता है। ल्हासा शहर के दूसरे माध्यमिक व्यावसायिक और तकनीकी स्कूल में पढ़ रहे छात्र थेनज़ीन ने बताया कि वह बचपन से ही एक चित्रकार बनना चाहता था। थेनज़ीन ने तीन महीनों से अपना एक थांगका चित्र समाप्त किया। तिब्बत में जातीय विशेषता वाली संस्कृति के विकास को महत्व दिया जाता है। ल्हासा के व्यावसायिक स्कूल में थांगका चित्र, तिब्बती चिकित्सा, मकानों की पेंटिंग, तिब्बती गीत-संगीत और नृत्य, तिब्बती पोशाक डिजाइन और फर्नीचर उत्पादन आदि के कोर्स सिखाये जाते हैं। पारंपरिक संस्कृति के शिक्षण में आधुनिक विचारधारा, माध्यम और मापदंड का प्रवेश भी लगाया गया है। जिससे तिब्बती पारंपरिक संस्कृति को आधुनिक बाजार के साथ भी जोड़ा गया है। व्यावसायिक स्कूल में अध्यापक दोर्गी ने छात्रों को पारंपरिक तिब्बती दवाइयां बनाने की कौशल सिखाते हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कौशल से उत्पादित दवाइयां मशीन के उत्पादों की तुलना में अधिक गुणवत्ता वाली हैं। थेनज़ीन ने कहा कि पारंपरिक दवा में तिब्बती संस्कृति की स्मृति जाहिर है। हम इससे और अधिक लोगों की सेवा करेंगे। और अपनी जिम्मेदारी लगने से हम अच्छी तरह से तिब्बती दवाइयां बनाने की कौशल सीखते रहे हैं।

ल्हासा के दूसरे माध्यमिक व्यावसायिक और तकनीकी स्कूल के रसद प्रशिक्षण कार्यशाले में आधुनिक कंपनियों में जो तकनीक और प्रबंधन उपाय का इस्तेमाल किया जाता है, उन कोर्सों का शिक्षण किया जा रहा है। रसद विभाग के जिम्मेदार नेता थाशी ने कहा कि स्कूल में जो प्रशिक्षण किया जाता है, वह सब उद्योगधंधों और बाजारों की आवश्यकता के अनुकूल है। और इस स्कूल में कारोबारों के आर्डर के अनुसार छात्रों का प्रशिक्षण किया जाता है। इसका मतलब है कि इस के सभी छात्रों के रोजगार सवाल को हल किया जा सकता है। थाशी ने कहा कि उन के रसद विभाग के सभी छात्रों को स्नातक होने से पहले भीतरी इलाकों के कारोबार में इंटर्नशिप करने का मौका सौंपा जाएगा। और बहुत से छात्रों ने इंटर्नशिप करते समय कारोबारों के साथ रोजगार समझौता संपन्न किया है। इस के अलावा व्यावसायिक स्कूल ने भीतरी इलाकों से प्रतिभाओं को आकर्षित किया है। फर्नीचर प्रशिक्षण कार्यशाले में भीतरी इलाके गये एक गुरु जी तिब्बती छात्रों को फर्नीचर निर्माण तकनीक सिखाते हैं और बाजारों की जानकारियों का परिचय देते हैं। वर्ष 2018 से व्यावसायिक स्कूल ने कारोबारों के साथ संयुक्त रूप से शिक्षण देने का समझौता संपन्न किया। कारोबारों की सहायता से ल्हासा शहर के दूसरे व्यावसायिक स्कूल ने संयुक्त रूप से प्रशिक्षण करने का रास्ता खोल दिया है।

वर्ष 1985 से केंद्र सरकार ने तिब्बत के किसानों और चरवाहों के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा के काल में निःशुल्क व्यवहार दिया। यानी कि इन छात्रों के खान पान, रहन सहन और पढ़ाई का खर्च सरकार से उठाया जाता है। इस के साथ ही शहर में मुश्किल परिवार के बच्चों को वित्तीय सहायता या सब्सिडी देने की नीति अपनायी गयी है। ल्हासा शहर के च्यांगसू प्रायोगिक मिडिल स्कूल में पढ़ रही 14 वर्षीया लड़की थाशी लामो एक अनाथ है। लेकिन परिवार की त्रासदी से लामो ने अपनी पढ़ाई से त्याग नहीं दिया। लामो ने बताया कि स्कूल में सब कुछ निःशुल्क है और सरकार की मदद से वह भविष्य में कालेज़ में भी पढ़ेगी। उसकी उम्मीद है कि एक दिन वह अंग्रेजी भाषा में हॉस्ट का काम कर सकेगी। निःशुल्क शिक्षा की नीति अपनाने के बाद तिब्बत में अधिकाधिक परिवारों को लाभ मिला है। अभी तक सभी किसानों, चरवाहों तथा शहर में रहने वाले गरीब परिवारों के बच्चे इस नीति का लाभ उठाते हैं। वर्ष 2012 से पूरे प्रदेश में राजमार्ग के रखरखाव विभागों के गरीब परिवारों को भी इस में शामिल कराया गया है।

केंद्र सरकार के निवेश से ल्हासा शहर के शिक्षा कार्यों के विकास और प्रतिभाओं के प्रशिक्षण की गारंटी की गयी है। साथ ही तिब्बत में रहने वाले विभिन्न जातीय लोगों के शिक्षा अधिकार की गारंटी की गयी है। ल्हासा शहर के दूसरे माध्यमिक व्यावसायिक और तकनीकी स्कूल के संस्कृति व कला विभाग के प्रधान आउजू ने कहा कि क्लासरूम में उपयोगी सभी सामग्रियां भी सरकार की तरफ से तैयार की गयी है। उधर ल्हासा शहर के शिक्षा नगर में स्थापित च्यांगसू प्रायोगिक मिडिल स्कूल के क्लासरूम में कई आधुनिक शिक्षण उपकरणों से लैस हो गया है। जिससे छात्रों के शिक्षा स्तर को बहुत उन्नत किया गया है। पुराने काल में तिब्बत में केवल कुलीन वर्ग के परिवार के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार होता था। लोकतांत्रिक सुधार शुरू होने से अभी तक के साठ सालों में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में शिक्षा कार्यों का उल्लेखनीय विकास हो पाया है। ल्हासा शहर में किंडरगार्टन शिक्षा, प्राइमरी एवं मिडिल स्कूल, पेशेवर और तकनीकी शिक्षा, उच्च शिक्षा, वयस्क शिक्षा और इंटरनेट शिक्षा समेत आधुनिक शिक्षा व्यवस्था कायम की गयी है। सभी जातीय लोगों के शिक्षा प्राप्त करने वाले अधिकार की गारंटी की गयी है।


तिब्बत में शिक्षा विकास होने की कहानियां


तिब्बती विश्वविद्यालय के साहित्य विभाग में पढ़ने वाले छात्र त्सेरिंग एक अँधा लड़का है। वह तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की साग्या काउंटी के एक गांव में जन्म हुआ। लोकतांत्रिक सुधार होने से पहले त्सेरिंग के दाता दाती जागीर में श्रम करने वाले भूदास थे और उन्हें स्कूल में पढ़ने का अधिकार नहीं था। लेकिन त्सेरिंग तीन साल की उम्र में अंधा हुआ। इस लड़के के भविष्य के प्रति परिवारजनों को चिन्ता रही। पर सरकार की मदद में त्सेरिंग ने किंडरगार्टन से हाईस्कूल तक की स्कूली पढ़ाई समाप्त की। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में 15 सालों के लिए निःशुल्क शिक्षा की नीति अपनायी गयी। इसके बाद त्सेरिंग को कालेज़ पढ़ते समय भी आर्थिक भत्ता मिल पाया है।

केंद्र सरकार की सहायता में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश ने किसानों और चरवाहे परिवारों के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा का व्यवहार दिया। और सरकार छात्रों के खाने, रहने और पढ़ने आदि का खर्च उठाती है। सरकार की सहायता से तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में भर्ती दर 99 प्रतिशत तक जा पहुंची है। प्रति व्यक्ति के लिए शिक्षा लेने का समय 9.55 साल रहा है। पुराने काल में तिब्बत में निम्न वर्ग के लोगों को शिक्षा प्राप्त होने का अधिकार नहीं था। शांतिपूर्ण मुक्ति और लोकतांत्रिक सुधार होने से तिब्बत में आधुनिक शिक्षा का विकास किया गया। सन 1951 में तिब्बत का प्रथम प्राइमरी स्कूल यानी छांगतु प्राइमरी स्कूल की स्थापना हुई। सन 1958 में ल्हासा शहर में तिब्बत का प्रथम मिडिल स्कूल स्थापित किया गया। और सन 1985 में तिब्बती विश्वविद्यालय की स्थापना भी हुई। आज तिब्बत में पूर्वस्कूली शिक्षा, बुनियादी शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, वयस्क शिक्षा और विशेष शिक्षा सहित आधुनिक शिक्षा प्रणाली स्थापित हो चुकी है। और पूरे देश में सर्वप्रथम तौर पर निःशुल्क 15 साल शिक्षा की नीति भी कायम हो गयी है। इस के अतिरिक्त भीतरी इलाकों के बहुत से प्रांतों और शहरों ने विशेष तिब्बती क्लास भी खोल दिया है, जो विशेष तौर पर तिब्बती छात्रों का शिक्षण करते हैं। छांगतु प्रथम प्राइमरी स्कूल के अध्यापक थाशी ने बताया कि केंद्र सरकार ने तिब्बती शिक्षा के विकास में भारी निवेश लगाया है और पूरे प्रदेश में सबसे सुन्दर मकान हमेशा स्कूल का ही होता है। लोकतांत्रिक सुधार होने से अभी तक के साठ सालों में तिब्बत में विभिन्न जातीयों के लोगों के शिक्षा लेने वाले अधिकारों की गारंटी की गयी है।

तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा शहर में पिछले छह सालों के भीतर छह अरब युआन की पूंजी डालकर 260 स्कूलों का निर्माण या पुनःनिर्माण किया गया है। शहर के शिक्षा विभाग से प्राप्त खबर के मुताबिक ल्हासा शहर में अभी तक कुल 342 स्कूल स्थापित हैं, जिनमें पढ़ने वाले छात्रों की संख्या एक लाख 38 हजार तक जा पहुंची है और अध्यापकों की संख्या 11 हजार तक रही है। ल्हासा शहर की सरकार ने शिक्षा के विकास को प्राथमिकता दे दी है और स्कूलों के निर्माण, नवाचार रुपांतर तथा अध्यापकों के प्रशिक्षण में भारी निवेश लगाया है। पिछले छह सालों में ल्हासा शहर में कुल 3800 नये अध्यापक नियुक्त किये गये हैं। उनमें पाँच सौ अध्यापक भीतरी इलाकों से आये हैं। अध्यापकों के प्रशिक्षण में प्रति वर्ष एक करोड़ युआन का खर्च किया जाता है और 1.2 करोड़ युआन से उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है। वर्ष 2018 में ल्हासा शहर के हाई स्कूल की भर्ती दर 91% तक रही, और इन के छात्रों में 96 प्रतिशत को कालेज़ में पढ़ने का मौका मिला। इसके साथ च्यांगसू प्रांत समेत भीतरी इलाकों ने ल्हासा शहर के 11 स्कूलों में 350 से अधिक अध्यापक भेजे हैं और पेइचिंग शहर तथा च्यांगसू प्रांत ने तिब्बत के शिक्षा विकास में लगभग 1.5 अरब युआन की पूंजी लगायी है।

इस के साथ ही तिब्बत ने देश के भीतरी इलाकों के उच्च शिक्षालयों के साथ दूरस्थ ई-शिक्षा का सहयोग भी शुरू किया है। उदाहरण के लिए दक्षिणी चीन अध्यापक विश्वविद्यालय ने इंटरनेट के माध्यम से तिब्बत के न्यिंग-ची शहर के साथ दूरस्थ ग्रामीण शिक्षक क्लासरूम की स्थापना की। इसतरह भीतरी इलाके के विशेषज्ञों और अध्यापकों ने तिब्बत के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले शिक्षकों का प्रशिक्षण किया है। अभी तक इस मंच के माध्यम से 26 कोर्स भेजे गये हैं और कुल आठ लाख लोगों ने इंटरनेट के जरिये इन कोर्सों का ग्रहण किया है। और यह भी उल्लेखनीय है कि ल्हासा आदि शहरों के सभी प्राइमरी स्कूल ई-लर्निंग उपकरणों से लैस हो चुके हैं जिससे छात्रों की सीखने वाली रुचि को प्रेरित किया गया है। 

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