तिब्बत में शिक्षा कार्य के विकास की कहानियां

2019-06-18 11:17:38
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ल्हासा शहर में स्थापित पेइचिंग प्रायोगिक मिडिल स्कूल के अध्यापक मेई त्सेरिंग ने अपने पद पर ग्यारह सालों के लिए काम किया है। अपने श्रेष्ठ कार्यों के कारण मेई त्सेरिंग को "ल्हासा शहर श्रेष्ठ शिक्षक" और "जातीय एकता आदर्श व्यक्ति" आदि पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। मिडिल स्कूल के छात्र अपने इस अध्यापक से बहुत प्यार करते हैं। मेई त्सेरिंग ने कहा कि मैं वर्ष 2015 से ल्हासा के पेइचिंग प्रायोगिक मिडिल स्कूल में काम करना शुरू किया। मुझे लगता है कि पार्टी और केंद्र सरकार ने तिब्बत के विकास में तेज़ी लाने के लिए भीतरी इलाकों से अध्यापक भेजा है। जो जातीय एकता और समान समृद्धि को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण है। हमें, जो यह पद संभालते हैं, भारी जिम्मेदारी उठानी चाहिये। वर्ष 2017 में अपना प्रथम कार्य काल समाप्त होने के बाद स्थानीय छात्रों और उन के परिवारजनों की मांग से मेई त्सेरिंग ने एक नया काल शुरू किया।

मेई त्सेरिंग ने अकसर यह कहा कि बच्चों की आंखों को पहाड़ से अवरुद्ध नहीं किया जाना चाहिये। इस का अर्थ है कि सुनसान क्षेत्रों में रहने के बावजूद छात्रों को बाह्य क्षेत्रों की जानकारियां और उन्नतिशील ज्ञान से अवगत कराया जाना चाहिये। मेई त्सेरिंग अपने छात्रों की ठोस स्थितियों के मुताबिक शिक्षण योजना और सामग्रियों का समायोजन किया करते हैं। वे कभी कभी अपने अवकाश के समय छात्रों को परामर्श प्रदान करते हैं। मेई त्सेरिंग की मेहनती से इन के क्लास में छात्रों का स्कोर हमेशा अग्रिम पंक्ति पर रहता है। छात्रों के द्वारा आयोजित श्रेष्ठ अध्यापक चुनाव में उन्होंने स्कूल के सभी अध्यापकों में सबसे अधिक वोट जीत लिये। मेई त्सेरिंग ने कहा कि हमें राजधानी पेइचिंग से उन्नतिशील शिक्षा विचार सीखकर ल्हासा के शिक्षा स्तर को उन्नत करना चाहिये। यह मेरा मिशन है। उन्होंने अपने क्लासरूम में बहुत सारे आधुनिक शिक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किया और छात्रों को ज्ञान के सागर में तैराने का प्रयास किया। साथ ही उन्होंने अपने अनुभवों और शिक्षण सामग्रियों का साझा भी किया ताकि उन्हें भी जल्दी से कुशल बनाया जा सके। मेई त्सेरिंग मेहनती से काम करते हैं। जब उन के क्लासरूम में कुछ छात्रों की बीमारी या परिवार में कठिनाई हो, तब तो वे जरूर ही उन की मदद करते हैं। साथ ही उन्होंने परोपकारी संगठनों के साथ संपर्क रखकर कई छात्रों की सहायता दी।

ल्हासा के पेइचिंग प्रायोगिक मिडिल स्कूल में भीतरी इलाके से गये कुल पचास अध्यापक हैं। मेई त्सेरिंग इन अध्यापकों और स्थानीय अध्यापकों के बीच में पुल की जैसी भूमिका अदा करते हैं। मेई त्सेरिंग एक मिलनसार, सीधा-साधा और गर्मजोशी आदमी हैं। वे अकसर स्कूल के अध्यापकों के साथ साथ तिब्बती नृत्य सीखते और गतिविधियों में भाग लेते रहते हैं। उन की स्नेहपूर्ण भावना से अध्यापकों के बीच दूरी को कम बनाया गया है। मेई त्सेरिंग हर सप्ताह में 20 घंटे पाठ सिखाते हैं। इस के अतिरिक्त वे मजदूर संघ तथा भीतरी इलाकों से आये 45 अध्यापकों के कामकाजों के जिम्मेदार भी हैं। उन के रोजाना कार्यों में गतिविधियों का आयोजन, फॉर्म भराई, कार्यों का प्रबंधन, उपस्थिति रिकॉर्ड और वित्तीय प्रतिपूर्ति आदि शामिल हैं। पर वे हमेशा गर्मजोशी से दूसरों की सेवा करते रहे हैं और सहपाठियों ने उन की भुरि भुरि प्रशंसा की है।


तिब्बत में शिक्षा विकास के बारे में कहानी


ल्हासा शहर की न्येमो काउंटी की पागोर टाउनशिप के कॉम्प्लेट प्राइमरी स्कूल के प्रमुख छ्यांगबा त्सेरिंग भी एक ऐसा आदमी हैं जिन्होंने अपने जिंदगी को तिब्बत के शिक्षा विकास के कार्यों में समर्पित किया है। छ्यांगबा त्सेरिंग वर्ष 1977 में जन्म हुआ था। और फिर ल्हासा टीचर्स कॉलेज में अध्ययन किया। वर्ष 1997 में उन्होंने ल्हासा शहर के अधीन न्येमो काउंटी के होर्ड गांव प्राइमरी स्कूल में अध्यापक का काम शुरू किया। अपनी आपबीती की याद करते हुए उन्होंने कहा कि कॉलेज में से स्नातक होने के बाद उन्होंने दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए कुछ करना चाहा। लेकिन न्येमो काउंटी में रहने और काम करने की स्थितियां बहुत खराब थीं। उस समय होर्ड गांव में केवल चार क्लासरूम और चार अध्यापक थे। जो बच्चों को तिब्बती भाषा, चीनी भाषा, गणित और नैतिकता आदि कोर्स सिखाते थे। और उस समय गांव में बिजली की आपूर्ति भी नहीं हुई। छात्र तेल दीपक के नीचे पढ़ते थे। यातायात की खराब स्थिति की वजह से स्कूल में अनाज की आपूर्ति भी मुश्किल थी। और अध्यापकों की रहन-सहन की स्थिति भी बहुत बेचारी थी। उस समय होर्ड के गांव वासियों को शिक्षा लेने का विचार नहीं था, कुछ लोगों ने अपने बच्चों को घर में श्रम करवाने के लिए उन्हें स्कूल में जाने को रोक दिया था।

स्थितियों को बदलने के लिए छ्यांगबा त्सेरिंग और दूसरे अध्यापकों ने एक एक घर में जाकर गांववासियों को समझाने का प्रयास किया था। साथ ही अध्यापकों ने अवकाश के समय में गांव वासियों को साक्षरता का काम किया। कई सालों के प्रयास से स्थानीय शिक्षा की स्थितियों में काफी सुधार आया। छ्यांगबा त्सेरिंग ने न्येमो काउंटी की पागोर टाउनशिप के कॉम्प्लेट प्राइमरी स्कूल में प्रमुख का पद संभाला। आज न्येमो काउंटी में शिक्षा की स्थितियों में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। छ्यांगबा त्सेरिंग के स्कूल के क्लासरूम पूर्ण रूप से आधुनिक उपकरणों से लैस हो गये हैं। स्कूल का अपना स्वास्थ्य कक्ष भी है, जहां टाउनशिप अस्पताल के डॉक्टर ड्यूटी पर काम कर रहे हैं। अब स्कूल के कुल 24 अध्यापक और 355 छात्र हैं। उनमें 244 छात्र स्कूल के छात्रावास में रहते हैं। सभी अध्यापकों को भी अपार्टमेंट में रहने के लिए कराया जा चुका है। छात्रों के खानपान, रहन-सहन और ट्यूशन आदि सब निःशुल्क हैं। इस के अतिरिक्त सरकार ने छात्रों के लिए "पोषण सुधार योजना" बनायी है, ताकि छात्रों के स्वास्थ्य की गारंटी की जाए। छुट्टियों के दिन छात्रों के लिए स्कूल बस की तैयारी भी की गयी है। आज गांव वासी अपने बच्चों को स्कूल में भर्ती करवाने के लिए सकारात्मक हैं। बच्चों की नामांकन दर 99.6% तक पहुँच गई है। विकलांग छात्रों की देखभाल में भी विशेष व्यक्ति तय किये गये हैं। जो बिमार की वजह से स्कूल में नहीं पढ़ सकते हैं, अध्यापक इन के घर में जाकर उन्हें पढ़ाते हैं। स्कूल ने छात्रों में शतरंज और पारंपरिक नृत्य आदि गतिविधियों को समृद्ध करने के लिए प्रयास भी किया। तथ्यों से यह साबित है कि अतिरिक्त पाठयक्रम गतिविधियों में भाग लेने से छात्रों की उपलब्धि भी बेहतर हो गयी है। वर्ष 2016 में सरकार ने पागोर टाउनशिप के प्राइमरी स्कूल में दो लाख युआन की पूंजी डालकर बच्चों का महल निर्मित किया। जहां छात्र वैचारिक, नैतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। छ्यांगबा त्सेरिंग ने कहा कि उन्होंने अपनी आंखों से न्येमो काउंटी में शिक्षा का लगातार विकास देखा है। आज पागोर टाउनशिप में प्रति वर्ष सात आठ छात्र कालेज में पढ़ने जाते हैं। उन की प्रगति का श्रेय पार्टी और सरकार की सहायता तक जाता है।


थाशी त्सेरिंग की आंखों में शिक्षा की प्रगतियां


तिब्बत के छांगतु शहर के नम्बर एक हाई स्कूल के थाशी त्सेरिंग दो साल पहले सेवानिवृत्त हुए। लेकिन सेवानिवृत्ति होने के बाद भी वे रोज स्कूल में जाते रहते हैं। आज स्कूल के सुंदर परिसर में विशाल खेल का मैदान और उज्ज्वल कक्षाओं में अत्याधुनिक सुविधाएं देखकर उन्हें बहुत खुशी हुई है। क्योंकि थाशी त्सेरिंग ने अपनी आंखों से छांगतु शहर में शिक्षा की प्रगतियां देखी हैं।

सन 1972 में थाशी त्सेरिंग ने छांगतु शहर के एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ना शुरू किया। उस समय स्कूल में उपकरणों का अभाव पड़ता था। क्लासरूम में बिजली की आपूर्ति भी नहीं थी, मेज़ और कुर्सी भी काफी नहीं हुई थी। छात्रों ने रैपिंग पेपर और बांस से बने कलम से लिखते थे, और उन का जो स्याही था, वह भी बर्तन की राख से बना हुआ था। और उस समय स्कूल में छात्रों की संख्या भी कम थी। अध्यापकों को अपना खुद सब्जियां बोनी पड़ती थी। सन 1972 में सरकार ने स्कूल में चार अध्यापक भेजे। सन 1981 में थाशी त्सेरिंग ने स्कूल में से स्नातक होकर तिब्बती विश्वविद्यालय में पढ़ना शुरू किया। सन 1986 में उन्हों ने छांगतु अध्यापक स्कूल में अध्यापक के रूप में काम करना शुरू किया। कई दशकों में छांगतु शहर में शिक्षा कार्यों का उल्लेखनीय विकास होने लगा है। सन 1951 में केवल दस अध्यापक, साठ छात्र से बढ़कर आज छांगतु शहर में 613 स्कूल, 8621 अध्यापक तथा 1 लाख 32 हजार छात्र विकसित हो चुके हैं। लेकिन परिवर्तन केवल हार्डवेयर के बारे में नहीं, इस के चलते किसानों व चरवाहों का विचार भी बहुत बदल गया है। पहले किसान और चरवाहे अपने बच्चों को स्कूल में भेजना नहीं चाहते थे। आज वे अपने बच्चों से अच्छी तरह से पढ़ने का आह्वान करते रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि छांगतु शहर में मिडिल स्कूल में छात्रों की भर्ती दर 98 प्रतिशत तक जा पहुंची है और शिक्षा कार्य की गुणवत्ता में भी स्पष्ट सुधार आया है। आज मिडिल स्कूल में नियुक्त जो नये अध्यापक हैं, वे सब कालेज़ स्नातक हैं। आज छांगतु शहर में पूर्वस्कूली शिक्षा, बुनियादी शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, विशेष शिक्षा और वयस्क शिक्षा सहित आधुनिक शिक्षा प्रणाली स्थापित हो चुकी है।

थाशी त्सेरिंग के तीन बच्चों में दो ने अपना कालेज अध्ययन समाप्त किया है, तीसरा बच्चा भी कालेज में पढ़ने जाएगा। और इन के सभी भतीजों और भतीजियों ने भी उच्च शिक्षा प्राप्त की है और उन सब को अच्छी नौकरी भी प्राप्त हैं। थाशी त्सेरिंग ने कहा कि आज छांगतु शहर का शिक्षा कार्य काफी विकसित है। और हर साल बहुत से युवा अध्यापक स्कूल में आते हैं।


पढ़ने से बच्चों का आशावान जीवन पैदा होगा


तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा में स्थापित नाग्छू हाई स्कूल में पढ़ने वाली लड़की डावा यूद्रोन ने बताया कि पढ़ने से अपना सपना साकार करता है, ज्ञान प्राप्त करने से जीवन में रोशन आता है। उन का स्कूल ल्हासा में स्थापित एक विशेष हाई स्कूल है जिसमें उत्तरी तिब्बत के नाग्छू से आये छात्र पढ़ते हैं। ल्हासा का वातावरण उत्तरी तिब्बत से अच्छा है। लेकिन डावा के लिए सबसे अधिक रोचक बात है कि स्कूल पुस्तकालय में हजारों पुस्तकें संरक्षित हैं। क्योंकि पढ़ने से बच्चों का आशावान जीवन पैदा होने लगा है।

इस स्कूल के कुलपत्ति ने कहा कि पुस्तकालय वर्ष 2014 में निर्मित था। स्कूल में दो तीन हजार छात्र पढ़ते हैं। पर पहले इसमें केवल सात हजार पुस्तकें संरक्षित थीं। भीतरी इलाके के प्रकाशन गृह, विश्वविद्यालय और परोपकारी व्यक्तियों ने इस स्कूल में बहुत सी पुस्तकों का दान प्रदान किया। इन पुस्तकों में शिक्षण और अनुसंधान उपयोगी पुस्तक, परीक्षण प्रश्न तथा आम साहित्य व जानकारी पुस्तक आदि सब शामिल हैं। आशा है कि छात्र पढ़ने का आनंद उठा सकते हैं और उन के अध्ययन स्तर को बढ़ाने में मदद मिल सकेगी। आज स्कूल के पुस्तकालय में संरक्षित पुस्तकों की संख्या चालीस हजार तक जा पहुंची है। अध्यापकों को विश्वास है कि पढ़ने से छात्रों को जानकारियां प्राप्त करने के साथ साथ उन की दिमाग में बुद्धि और महत्वाकांक्षा भी खड़ी हो सकेगी।

वास्तव में आज ल्हासा शहर में न केवल पुस्तकालय, बुक स्टोर, सांस्कृतिक स्टेशन, कैफे स्टोर, यात्रियों के लाउंज आदि हर जगह पढ़ने का रूझान नजर आ रहा है। उधर के ल्हासा शहर के स्कूलों में शिक्षा उपकरणों का निरंतर सुधार किया जा रहा है। साथ ही स्कूल में गुणवत्ता की शिक्षा और सांस्कृतिक निर्माण कार्य का प्रवेश भी होने लगा है। बहुत से छात्रों ने नियमित कोर्स का अध्ययन समाप्त करने के बाद सुलेख, संगीत, नृत्य, हस्त-निर्मित, ड्रम टीम और तिब्बती ओपेरा आदि अतिरिक्त पाठयक्रम गतिविधियों में भाग लिया है।

इधर साठ सालों में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में शिक्षा कार्यों का उल्लेखनीय विकास हो गया है। अभी बुनियादी शिक्षालयों का रिहायशी क्षेत्रफल 2.9 करोड़ वर्ग मीटर तक जा पहुंचा है। छात्रों की संख्या छह लाख तक जा पहुंची है और स्कूलों में संरक्षित पुस्तकों की संख्या 1.07 करोड़ तक रही है। प्रदेश में "सबसे सुन्दर मकान है वह स्कूल का होता है" यह वाक्य वास्तविक बन गया है। वर्ष 2017 तक तिब्बत के 496 प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में अपने कैंपस नेटवर्क स्थापित हो गये हैं। छात्रों के कार्स में "सूचना तकनीक पाठ्यक्रम" को बहुत बढ़ाया गया है। आज छात्रों को ई-पुस्तकें और ई-जर्नल आदि अत्याधुनिक उपकरणों से अधिकाधिक जानकारियां प्राप्त हो सकती हैं। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में निरक्षरता की दर 0.57% तक गिर पड़ी है और प्रति व्यक्ति को शिक्षा प्राप्त होने की अवधि 8.6 साल हो गये हैं। 


 


 

 


 



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