शिगात्से में राजधानी से आये डॉक्टरों का प्यार

2019-06-10 14:54:13
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शिगात्से में राजधानी से आये डॉक्टरों का प्यार


शिगात्से तिब्बत स्वायत्त प्रदेश का एक महत्वपूर्ण शहर है, जो जूमूलांगमा यानी एवेरेस्ट पर्वत के नजदीक स्थित है। शिगात्से शहर के अधीन यातूंग, चांगमू और चीलूंग तीन सीमांत बंदरगाह भी हैं। सीमांत व्यापार से विकास से तिब्बत के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है। पर चार हजार मीटर ऊंचे पठार पर रहने वाले लोग अक्सर गंभीर रोगों से ग्रस्त होते रहे हैं।

खराब प्राकृतिक वातावरण की वजह से शिगात्से क्षेत्र में रहने के बहुत से लोग गठिया और गर्दन स्पोंडिलोसिस जैसी पुरानी बीमारियों से ग्रस्त होते रहे हैं। लेकिन इस क्षेत्र में लिमिटेड स्थिति के कारण बहुत से बीमार अस्पताल में इलाज लेने के लिए असमर्थ हैं। तिब्बती लोगों की मदद के लिए राजधानी पेइचिंग के अनेक अस्पतालों के तीन सौ से अधिक डॉक्टरों ने तिब्बती पठार में "साथ साथ चाइना हार्ट" शीर्षक अभियान शुरू किया। उन्होंने शिगात्से सहित अनेक क्षेत्रों में बीमार लोगों का निशुल्क इलाज किया। पेइचिंग यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल हॉस्पिटल के यूरोलोजि विभाग के डॉक्टर ली ह्वेई ने बताया,“हमारा यह मिशन ग्यारह सालों के लिए चल रहा है। हमें भी आशा है कि स्थानीय लोगों की जरूरतों के अनुसार कुछ ठोस काम किया जाएगा। हमें सावधानी और गहराई से काम करना पड़ेगा और इससे और अधिक सकारात्मक प्रभाव संपन्न हो जाएगा।”

शिगात्से शहर में स्थापित एक वृद्धाश्रम में डॉक्टर ली ने अपने सहपाठियों के साथ बूढ़ों का निशुल्क इलाज किया और उन्हें मुफ्त दवाइयां तैयार कीं। इस वृद्धाश्रम में रहने वाले 68 वर्षीय बूढ़े ली जू श्वून ने कहा,“हम डॉक्टरों और विशेषज्ञों को बहुत आभारी हैं। उन्हों ने हमारी समस्याओं और चिन्ताओं को दूर किया है। पार्टी और सरकार के नेताओं ने वृद्धाश्रम पर ध्यान रख दिया है, जिससे हमें बहुत खुशी हुई है।”

बूढ़ों को निशुल्क इलाज और दवाइयां प्रदान करने के लिए "साथ साथ चाइना हार्ट" मिशन में भाग लेने वाले डॉक्टरों ने बूढ़ों में स्वास्थ्य ज्ञान के प्रसार के लिए सेमिनार आयोजित किया। क्योंकि आम लोगों की स्वास्थ्य जागरूकता में सुधार लाने से इस क्षेत्र में स्थानीय चिकित्सा सर्विस के स्तर को उन्नत किया जाएगा। पेइचिंग के चीनी पारंपरिक चिकित्सा विश्वविद्यालय के अधीन नम्बर तीन अस्पताल के उप प्रधान ल्यू ची वांग ने कहा,“हमें यहां आकर केवल तिब्बती लोगों को एक मछली देना नहीं, बल्कि उन्हें मछली पकड़ना भी सिखाना चाहिये। इसका मतलब है कि हमें तिब्बती डॉक्टरों का प्रशिक्षण करना चाहिये और उन के तकनीकी स्तरों को उन्नत करना चाहिये। और साथ ही तिब्बती लोगों में चिकित्सा प्रसार भी करने की जरूरत है।”

पेइचिंग यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल हॉस्पिटल की बी-अल्ट्रासाउंड डॉक्टर वांग ज्योंग ने कहा कि स्थानीय अस्पताल में प्रयोगित बी-अल्ट्रासाउंड साधन काफी पुराना है। स्थानीय डॉक्टरों के लिए पुराने मशीनों से रोगियों की जांच करना मुश्किल है। उन्होंने कहा, “यहां प्रयोगित मशीनों का नवीकरण करना चाहिये। पर इन के डॉक्टर काफी प्रशिक्षित हैं। इसलिए स्थानीय अस्पताल के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों में अधिक सुधार लाने की बड़ी आवश्यकता है।”

वास्तव में इधर के वर्षों में भीतरी इलाकों की सहायता से तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के अनेक अस्पतालों के हार्डवेयर में उल्लेखनीय सुधार आया है। लेकिन डॉक्टरों के ज्ञान का अभाव होने के कारण बहुत से साधनों का प्रयोग नहीं किया गया है। और यह भी तिब्बत में चिकित्सा स्थिति का पिछड़ापन होने का महत्वपूर्ण कारण माना गया है। पेइचिंग यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल हॉस्पिटल के यूरोलोजि विभाग के डॉक्टर ली ह्वेई ने बताया,“मुझे गहरी छाप लगी है कि भीतरी इलाकों की सहायता से तिब्बती क्षेत्र में अस्पतालों के हार्डवेयर काफी विकसित हैं। लेकिन खेदजनक बात है कि यहां के डॉक्टरों को काफी प्रशिक्षित नहीं किया गया है। तिब्बती डॉक्टरों के बुनियादी उपचार के स्तर को उन्नत करने की बड़ी जरूरत है, ताकि अधिकांश रोगियों के आम रोगों का समय पर इलाज किया जा सके।”

डॉक्टर ली ने बताया कि केवल उपकरण और सर्विस प्रदान करने से तिब्बती क्षेत्रों में चिकित्सा के पिछड़ापन को दूर नहीं किया जा सकेगा। भविष्य में स्थानीय डॉक्टरों के प्रशिक्षण पर और अधिक जोर लगाना चाहिये। यानी प्रतिभा विनिमय, ज्ञान संगोष्ठी प्रशिक्षण और रिमोट मेडिकल के जरिये स्थानीय डॉक्टरों के स्तर को उन्नत किया जाना चाहिये। ली ने कहा,“स्थानीय डॉक्टरों को प्रशिक्षित करना सबसे महत्वपूर्ण बात है। आशा है कि हमारा प्रशिक्षण लेने से स्थानीय डॉक्टरों की रोगियों का इलाज करने की क्षमता में सुधार आएगा। अगर आम बीमारियों को सामुदायिक और बुनियादी अस्पताल में इलाज किया जा सकता है, तब तो अधिकांश रोगियों को बड़े अस्पताल में जाने की जरूरत नहीं है।”

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