चीन और नेपाल के बीच पोर्टों में माल परिवहन की बहाली

2019-06-03 18:24:35
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चीन और नेपाल के बीच पोर्टों में माल परिवहन की बहाली

29 मई को चीन के चांगमू और नेपाल के कोदारी पोर्ट के बीच माल परिवहन बहाल किया गया। दोनों पोर्टों के बीच माल ढुलाई की बहाली के लिए एक रस्म आयोजित हुई।

चांगमू और कोदारी चीन और नेपाल के बीच सीमा व्यापार का सबसे बड़ा स्थलीय पोर्ट है। वर्ष 2015 के अप्रैल में आए गंभीर भूकंप से यह रास्ता नष्ट हो गया था। पोर्ट की बहाली रस्म में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के अध्यक्ष चिज़ाला ने कहा कि सीमा व्यापार की बहाली दोनों देशों के समान प्रयासों से प्राकृतिक आपदाओं की कठिनाइयों को दूर करने और व्यापार को पुनःस्थापित करने के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। सीमा व्यापार पोर्ट की बहाली के लिए चीन सरकार ने भूवैज्ञानिक आपदा का प्रबंधन करने, सड़क की मरम्मत करने, पोर्ट पुनर्निर्माण करने तथा जल संरक्षण परियोजना का निर्माण करने में भारी निवेश किया।

नेपाल स्थित चीनी राजदूत हाओ यैन छी के अनुसार कुछ समय पूर्व चीन और नेपाल ने पारगमन परिवहन समझौते के बाद एक प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किये। हिमालयन इंटरकनेक्शन नेटवर्क और चीन-नेपाली सीमा पार रेलवे को दूसरे "बेल्ट एंड रोड" अंतर्राष्ट्रीय सहयोग शिखर सम्मेलन के आउटकम दस्तावेज में शामिल किया गया है।

29 मई को आयोजित पोर्ट की बहाली रस्म में नेपाल के औद्योगिक, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्री मैत्रिका प्रसाद ने पोर्ट की बहाली के लिए चीन द्वारा दिये गये योगदान का उच्च मूल्यांकन किया। उन्होंने कहा,“पोर्ट बन्द होने से नेपाल के सीमांत क्षेत्रों में रहने वालों के जीवन पर भारी प्रभाव पड़ा और दोनों देशों के बीच व्यापार को भी रोक दिया गया। पर आज मैंने रास्ते पर खुशी से झूम उठे लोगों को देखा और उनकी खुशियों की भावना झलक रही थी। सीमा के दूसरे पक्ष में समान दृश्य भी नजर आएगा। इसलिए यह देखते हैं कि यह पोर्ट कितना महत्वपूर्ण है। मैं चीनी केंद्र सरकार, चीन के तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की सरकार और चीनी दोस्तों को पोर्ट की बहाली के लिए दिये गये समर्थन पर आभार प्रकट करता हूं।”

सीमा के नजदीक में रहने वाले नेपाली नागरिक फुर्पा तामांग को भी पोर्ट की बहाली के बाद नयी नौकरी मिली। उसने कहा,“पहले मैं कस्टम में लोडर का काम करता था। भूकंप के बाद मैं बेरोजगार हो गया और थोड़ी बहुत खेती करने लगा। आज पोर्ट में काम बहाल हो गया है और मुझे नयी नौकरी मिली है।”

चीन के तिब्बत की एक रसद कंपनी, दक्षिण एशिया अंतर्राष्ट्रीय उद्योग लिमिटेड कंपनी पोर्ट के व्यवसाय में लगी है। कंपनी के प्रमुख फूर्चोंग त्सेरिंग ने कहा, “हमारी कंपनी ने पोर्ट की बहाली से नेपाल में कुछ लोगों को नौकरी दी है। अभी हमारे यहां दस नेपाली श्रमिकों ने लोडर का काम किया। भविष्य में हम अधिक नेपालियों के लिए रोजगार के मौके तैयार करेंगे। यह भावी योजना है।”

माल ढुलाई की बहाली के साथ-साथ सीमा पर स्थित चीनी जांच-चौकी के कर्मचारियों ने अपना पुराना काम शुरू किया है। सीमा चौकी के चीनी इंस्पेक्टर ने नेपाली भाषा में सीमांत लोगों के साथ संपर्क किया। चांगमू और नेपाल के कोदारी पोर्ट के पास रहने वालों को आम तौर पर अंग्रेज़ी नहीं आती है। इसलिए चीनी सीमा चौकी के इंस्पेक्टरों ने नेपाली भाषा भी सीखी। वर्ष 2015 में आए गंभीर भूकंप से पोर्ट का नेपाली जांच स्टेशन भी नष्ट हो गया था। चीनी रेलवे समूह के अधीन नम्बर 14 विभाग ने इस स्टेशन का पुनर्निर्माण किया। परियोजना के मेनेजर हू ची क्वो ने कहा,“पुनर्निर्माण का काम 30 अप्रैल, 2018 को शुरू हुआ था और खत्म दूसरे साल की 30 अप्रैल को हुआ। हमने समय पर परियोजना का काम पूरा कर लिया और इससे पोर्ट की बहाली की नींव रखी गई है।”

पता चला है कि भूवैज्ञानिक स्थिति की वजह से वर्ष 2019 के अंत से पहले चांगमू-कोदारी पोर्ट में सिर्फ आम सीमा व्यापार किया जाता है। इसी दौरान सीमांत क्षेत्रों में रहने वालों के बीच व्यापार और व्यक्तियों के प्रवेश और निकास की सेवा तैयार नहीं है। इस बात की चर्चा करते हुए चीन के तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में पोर्ट प्रबंधन कार्यालय के प्रधान ली चाओ पींग ने कहा,“वर्ष 2015 में गंभीर भूकंप ने चांगमू पोर्ट और नेपाली पक्ष को भारी क्षति पहुंचायी है। नेपाल के पक्ष में आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में पुनर्निर्माण आज तक नहीं किया गया है, और हमारे पक्ष में पुनर्निमाण की योजना भी समाप्त नहीं है। इसलिए पोर्ट का पश्चात संचालन बहाल करने के लिए समय चाहिये। और यह चीन और नेपाल दोनों देशों की जनता की सुरक्षा के विचार में भी है।”

रस्म में उपस्थित तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के अध्यक्ष चिज़ाला ने कहा,“आज के इस विशेष दिन में मैं चांगमू – कोदारी पोर्ट की बहाली के लिए मेहनत से काम करने वाले सभी कामरेडों और दोस्तों का आभार प्रकट करता हूं। मेरी हार्दिक आशा है कि पोर्ट की फिर एक बार शानदार दिखती रहेगी। और चीन-नेपाल मैत्री सदाबहार रहेगी।”

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