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तिब्बती एयरलाइंस का 54 वर्षों के लिये सुरक्षित उड़ान भरने का रिकॉर्ड

2019-05-24 17:40:26
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तिब्बती एयरलाइंस का 54 वर्षों के लिये सुरक्षित उड़ान भरने का रिकॉर्ड

नये चीन की स्थापना के बाद स्थापित तिब्बती एयरलाइंस ने 54 वर्षों के लिए सुरक्षित उड़ान का रिकॉर्ड कायम किया है जहां की प्राकृतिक स्थितियां विश्व में सबसे ऊंची और मुश्लिक हैं।

तिब्बती पठार की औसत ऊँचाई चार हजार मीटर से ऊपर है। जहां के प्राकृतिक वातावरण में हिम पर्वत, ग्लेसियर, रेतीली हवा, ओले और भारी बरसात आदि से भरा हुआ है। इस क्षेत्र को विश्व में सबसे मुश्किल उड़ान क्षेत्र माना जाता है। सन 1956 के मई में चीनी वायु सेना ने ल्हासा के हवाई अड्डे पर प्रथम उड़ान शुरू किया और तिब्बत तक जाने वाला वायु मार्ग खोल दिया। इस के बाद के दस सालों के प्रयासों से सन 1965 में पेइचिंग-छंगतु-ल्हासा रूट औपचारिक तौर पर खोला गया। अभी तक तिब्बत में ल्हासा, छांगतु, न्यिंग-ची, न्गाली और शिगाज़े पाँच शहरों में हवाई अड्डों का निर्माण किया गया है।

चीनी नागरिक उड्डयन निगम के अधीन तिब्बत स्वायत्त प्रदेश प्रबंधन विभाग के रिटायर्ड तिब्बती कर्मचारी वूज़ीन ने दामशूंग हवाई अड्डे के निर्माण में भाग लिया था, अपनी आपबीती की याद करते हुए उन्होंने कहा,“दामशूंग क्षेत्र में हवाई अड्डे का निर्माण करना अत्यंत मुश्किल था। इस क्षेत्र की ऊँचाई अधिक है और जलवायु बहुत खराब है। सभी सामग्रियों का हाथ ट्रॉली के जरिये परिवहन करना पड़ता था। पर अपनी जन्मभूमि का निर्माण करने के लिए हम ने बहुत मेहनती से श्रम किया था।”

अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन मानक के मुताबिक 2,438 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर निर्मित हवाई अड्डे को पठारी हवाई अड्डा बताया जाता है। इस मानक के मुताबिक तिब्बत में निर्मित सभी हवाई अड्डों को सब उच्च पठार का हवाई अड्डा बताया जा सकता है। एयर चाइना की दक्षिण-पश्चिमी शाखा के कप्तान वांग यूंग ने कहा,“उच्च ऊंचाई के हवाई अड्डे पर विमान का प्रदर्शन भी घटेगा। चाहे वायुगतिकी या इंजन प्रदर्शन के घटने से विमान को उड़ान भरने में तनाव मिलेगा। इसके अलावा हवाई अड्डे के आसपास कई पहाड़ हैं जहां की स्थितियां अधिक जटिल हैं। पठार पर मौसम जटिल और विविध है और इससे उड़ान भरने पर भी प्रभाव पड़ता है।”

सामान्य हवाई अड्डे की तुलना में ऊंचे हवाई अड्डे का वातावरण अधिक जटिल है। इसलिए नागरिक उड्डयन विभाग का प्रबंधन भी अधिक सख्त है। सन 1965 से अभी तक तिब्बती एयरलाइंस ने 54 वर्षों के लिए सुरक्षित उड़ान बनाये रखा है। चीनी नागरिक उड्डयन निगम के तिब्बत स्वायत्त प्रदेश प्रबंधन विभाग के सुरक्षा निगरानी कार्यालय के उप प्रधान वांग श्याओ वेई ने कहा कि सुरक्षा की गारंटी के लिए एयरलाइंस और ग्राउंड सपोर्ट स्टाफ दोनों पक्षों की कोशिशों की आवश्यकता है। उन्हों ने कहा,“तिब्बत मार्ग का उड़ान भरने के लिए एयरलाइंस आम तौर पर सबसे अच्छी तकनीक के इकाई और सबसे अच्छा प्रदर्सश के विमान भेजते हैं। वर्तमान में तिब्बत मार्ग तक उड़ान भरने वाले विमानों पर डबल चीनी नागरिक उड्डयन निगम की तिब्बत शाखा ने सुरक्षा की गारंटी के लिए नव तकनीकों के इस्तेमाल को महत्व दिया है। तिब्बत में बहुत से पहाड़ हैं जिससे संचार नेविगेशन संकेत प्रभावित हैं। नयी तकनीकों के इस्तेमाल से विमानन क्षेत्र की गतिशील निगरानी की जा सकती है। जिससे परिचालन दक्षता और सुरक्षा का स्तर काफी बढ़ गया है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस से अभी तक तिब्बत में नागरिक उड्डयन का उल्लेखनीय विकास होने लगा है। तिब्बती एयरलाइंस की सर्विस लेने वाले यात्रियों की वार्षिक वृद्धि दर 15 प्रतिशत पर बनी रही है। वर्ष 2018 में तिब्बती हवाई अड्डों में आने जाने वाले यात्रियों की संख्या 53.2 लाख तक रही। बेल्ट एंड रोड के निर्माण के साथ साथ तिब्बत के खुलेपन में भी तेज़ी लायी गयी है। बहुत से विदेशी पर्यटक तिब्बत का दौरा करने वाले हैं। चीनी नागरिक उड्डयन निगम के तिब्बत प्रबंधन विभाग की प्रधान बाईचेन के अनुसार नागरिक उड्डयन को तिब्बत जाने के लिए सबसे तेज रास्ता माना जाता है। नागरिक उड्डयन के विकास से तिब्बत के निवेश वातावरण में सुधार लाया गया है और तिब्बत के वैदेशिक संपर्क को भी बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा,“शांतिपूर्ण मुक्ति से अभी तक के दर्जनों सालों में तिब्बत में भारी परिवर्तन आया है। वर्तमान में हम विदेशी पर्यटकों का सत्कार भी करने रहे हैं। आशा है कि विदेशी पर्यटक अपनी आंखों से तिब्बती सच्चाई को देख पाएंगे।”

बेल्ट एंड रोड के निर्माण के साथ-साथ तिब्बत में द्वार खुलने में भी तेज़ी लायी गयी है। ल्हासा हवाई अड्डे में बहुत से विदेशी पर्यटक दिखते रहे हैं। एक जर्मन पर्यटक ने कहा,“मैं ने पूर्व में तिब्बत का दौरा नहीं किया था। इस बार हम ने पोताला पैलेस और जूमूलांगमा पर्वत के बेस कैंप का दौरा किया है। वापस लौटकर मैं अपने दोस्तों को बताऊंगा कि तिब्बत को देखने के लिए जरूर जाइये, क्योंकि वहां की संस्कृति अलग है और वहां के आदमी बहुत फ्रेंडली हैं।”

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