तिब्बत में विकास का नया युग

2019-04-29 14:41:41
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तिब्बत में विकास का नया युग

तिब्बत में विकास का नया युग

सन 1959 में नये चीन की सरकार ने तिब्बत में लोकतांत्रिक रुपांतर शुरू किया। जिससे तिब्बत में राजनीतिक और धार्मिक एकीकरण की सामंती भूदास व्यवस्था को भंग किया गया और तिब्बती भूदासों, जो तिब्बती जनसंख्या के 95 प्रतिशत भाग रहता था, की मुक्ति की गयी। तिब्बती जनता एकता, समृद्धता और सभ्यता वाले नये तिब्बत का निर्माण करने वाले युग में प्रविष्ट हो गयी। उस समय से आज तक के साठ सालों में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में तिब्बत में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की गयी हैं।

तिब्बत में की गयी लोकतांत्रिक क्रांति चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में की गयी चीनी जनवादी क्रांति का भाग है। और इससे तिब्बत में पिछड़े हुए समाज रूप को उन्नतशील रूप से प्रतिस्थापित किया गया है। जो तिब्बत के इतिहस में मील का पत्थर जैसी प्रगति मानी जाती है। तिब्बत में लोकतांत्रिक सुधार होने से पहले राजनीतिक और धार्मिक एकीकरण की व्यवस्था कायम हुई थी। वास्तव में वह सामंती भूदास व्यवस्था मानी जाती थी। इसी व्यवस्था से तिब्बत में सामाजिक विकास को रोका जाता था। भूदासों का अत्यंत बेचारा जीवन था। कक्ष, कुलीन वर्ग और ऊपरी भिक्षुओं, जिन की मात्रा कुल जनसंख्या का पाँच प्रतिशत रहता था, को अधिकांश भूमि और पशु प्राप्त हुए थे। लेकिन भूदासों के पास उत्पादन सामग्री और व्यक्तिगत स्वतंत्रता नहीं थी, और नहीं प्राप्त था बुनियादी राजनीतिक अधिकार, सामाजिक अधिकार और सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार। भूदासों के खिलाफ राजनीतिक और आध्यात्मिक रूप से क्रूरता से अत्याचार किया गया था। इसलिये तिब्बत में इस पिछड़ी हुई सामंती व्यवस्था का खात्मा करने और लोकतांत्रिक सुधार करने की बड़ी आवश्यकता थी।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने तिब्बत मुद्दे को हल करने के लिए लोकतांत्रिक सुधार किया जिसे एक महान कदम माना गया। सन 1951 के मई में केंद्र सरकार ने तिब्बत की स्थानीय सरकार के साथ तिब्बत की शांतिपूर्ण मुक्ति पर समझौता संपन्न किया था। तिब्बत की ऐतिहासिक विशेषता पर ध्यान रखकर केंद्र सरकार ने तिब्बत में जनवादी रुपांतर के प्रति विवेकपूर्ण रुख अपनाया था। केंद्र सरकार ने तिब्बती स्थानीय सरकार से यह प्रस्तुत किया था कि उसे तिब्बती जनता की अभिलाषा के अनुकूल रुपांतर करना चाहिये। लेकिन तिब्बत के उच्च वर्ग ग्रुट ने साम्राज्यवाद की सहायता में विद्रोह किया था। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने तिब्बती जनता के समर्थन में सशस्त्र विद्रोह को शांत किया था और पूर्ण रूप से लोकतांत्रिक रुपांतर किया था। सन 1959 की 28 मार्च को केंद्र सरकार ने तिब्बती स्थानीय सरकार को भंग करने का फैसला किया था जिससे सैकड़ों सालों के लिए मौजूद सामंती भूदास व्यवस्था का खात्मा हुआ।

लोकतांत्रिक सुधार करने से तिब्बत में आर्थिक और सामाजिक विकास को बहुत बढ़ाया गया। जिसमें भूमि की क्रांति, मंदिर में सुधार, भू दासों की मुक्ति और सूदखोरी को खत्म करना आदि शामिल हुए। तिब्बती भूदासों को बांधे हुए हथकड़ियों को टुकड़े किये गये। और दस लाख तिब्बती भूदास देश के मालिक बन गये। लोकतांत्रिक रुपांतर करने से भूदासों को भूमि प्राप्त हुई। लोकतांत्रिक रुपांतर के जरिये उच्च वर्ग वाले भिक्षुओं और कुलीन की तानाशाही को खत्म किया गया, राजनीतिक और धार्मिक एकीकरण की व्यवस्था को भंग किया गया और सभी स्तरों की लोकतांत्रिक सरकार स्थापित की गयी।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और केंद्र सरकार ने तिब्बत में विभिन्न कार्यों पर बहुत महत्व दिया। पार्टी की केंद्रीय कमेटी ने तिब्बत में आर्थिक और सामाजिक विकास करने के लिए सिलसिलेवार नीतियां अपनायीं और आर्थिक विकास होने, सामाजिक प्रगतियां हासिल होने, जन जीवन में निरंतर सुधार आने तथा सामाजिक स्थिरता बनता रहने की स्थितियां कायम हो गयीं। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने मार्क्सवाद के मूल सिद्धांतों के मुताबिक तिब्बत में लोकतांत्रिक सुधार किया, साम्राज्यवाद की "तिब्बती स्वतंत्रता" की साजिश को तोड़ दिया। देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा में सफल किया। फिर तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की स्थापना कर आधुनिक निर्माण का नया युग शुरू किया। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 11वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के तीसरे पूर्णांधिवेशन के बाद चीन में रुपांतर और खुलेपन शुरू किया गया। केंद्र ने कई बार तिब्बती कार्य सम्मेलन आयोजित किये और तिब्बत के विकास के लिए अनुकूल होने की विशेष नीतियां अपनायीं। तिब्बती किसानों और चरवाहों के जीवन स्तर को बहुत उन्नत किया गया। पार्टी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद महासचिव शी चिनफिंग ने तिब्बत के सामने उभरती नई स्थितियों के मुताबिक अनेक नयी विचारधारा प्रस्तुत की। जिनमें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में जातीय स्वायत्त शासन की व्यवस्था का पालन करना, कानून के अनुसार प्रशासन करना, जन जीवन में सुधार लाना, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना, दलाई गुट के खिलाफ संघर्ष करना तथा प्रतिभाओं के प्रशिक्षण को मजबूत करना आदि शामिल हैं। पार्टी के नेतृत्व में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश ने उच्च गुणवत्ता के विकास में वास्तविक प्रगतियां प्राप्त की हैं। 12वीं और 13वीं पंचवर्षीय योजना लागू करने में केंद्र ने तिब्बत के विकास में भारी निवेश लगाया। केंद्र और देश के दूसरे क्षेत्रों की सहायता में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के आर्थिक विकास में दीर्घकाल तक दो अंकों की वृद्धि बनी रही। अभी तक तिब्बत के ग्रामीण और चरागाह क्षेत्रों में पेय जल और बिजली की आपूर्ति पर्याप्त हुई है। सन 2013 से पाँच लाख लोगों ने गरीबी से छुटकारा पाया। तथ्यों से यह साबित है कि तिब्बती कार्यों के प्रति पार्टी की विचारधारा और नीतियां बिल्कुल सही हैं। जो तिब्बत के विकास व स्थिरता, मातृभूमि की एकता और जातीय एकता को बनाये रखने के अनुकूल है।

आज चीनी विशेषता वाले समाजवाद का नया युग आया है। तिब्बती विकास की नयी ऐतिहासिक शुरुआत भी सामने आयी है। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के कर्मचारी पार्टी के नेतृत्व और जन हितों को प्राथमिकता देने के विचार पर डटा रहकर काम कर रहे हैं। जनता का समर्थन सबसे बड़ी राजनीति है और जन जीवन में सुधार करना तिब्बत की दीर्घकालिक स्थिरता की नींव है। कर्मचारियों का आम विचार है कि तिब्बत को समृद्ध करने का हमारा मूल लक्ष्य साकार किया जाएगा, शिक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी, राष्ट्रभाषा का प्रचार किया जाएगा और समाजवादी निर्माताओं और उत्तराधिकारियों का प्रशिक्षण किया जाएगा। इस के साथ-साथ अलगाववाद के खिलाफ स्पष्ट रूप से संघर्ष करना चाहिये ताकि तिब्बत में सुस्थिरता बनायी रखे। देश की एकता के सिद्धांत पर हमारा रूख अबदलनीय है। तिब्बत प्राचीन काल से ही चीन का एक भाग बना रहा है और चीन के अंदरूनी मामलों पर किसी भी विदेशी हस्तक्षेप की इजाजत नहीं की जाएगी। तिब्बत के विकास में नयी विचारधारा अपनाने के चलते नवाचार उद्योग, शिक्षा, प्रतिभा और रोजगार आदि के संदर्भ में तिब्बत की सहायता दी जा रही है। साथ ही तिब्बत में प्राकृतिक वातावरण को जोर लगाने ते विचार में पर्यटन समेत हरित उद्योगों का जोरों पर विकास किया जा रहा है।

पुराने युग में भूदास-स्वामियों को सभी संपत्ति प्राप्त हुई थी। सन 1959 तक यानी लोकतांत्रिक रुपांतर करने से पहले तिब्बत में कोई आधुनिक उद्योग नहीं था। कृषि, पशुपालन और पारंपरिक हस्तशिल्प का स्तर निम्न होता रहा था। लोकतांत्रिक सुधार होने के बाद भूदासों को प्रथम बार अपनी भूमि और घास के मैदान प्राप्त हुए। रुपांतर सुधार होने के बाद इधर साठ सालों में तिब्बत का अभूतपूर्व विकास हो पाया। सन 2018 में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में उत्पादन मूल्य लगभग डेढ़ खरब युआन तक रहा है जो सन 1959 से लगभग दो सौ गुणे अधिक रहा है। कृषि मशीनीकरण कायम होने के चलते अनाज का उत्पादन दस लाख टन तक रहा है और तिब्बत में अपनी प्रारंभिक औद्योगिक और सेवा कारोबार की प्रणाली भी स्थापित हो चुकी है। इस के साथ साथ तिब्बती पठार की विशेषता वाले श्रेष्ठ अनाज, खाद्य तेल, मांस, सब्जियों और खनिज पानी का देशभर में स्वागत होता है। वर्ष 2018 में तिब्बत का दौरा करने वाले पर्यटकों की संख्या 2 करोड़ 36 लाख तक जा पहुंची है, पर्यटन की आय भी 49 अरब युआन तक रही है।

उधर बुनियादी उपकरणों के निर्माण में उल्लेखनीय प्रगतियां हासिल की गयी हैं। तिब्बत में मार्ग, रेलवे, वायु और पाइपलाइन की एकीकृत परिवहन प्रणाली कायम हो चुकी है। सन 2018 तक तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में राज्य मार्गों की लंबाई लगभग एक लाख किलोमीटर तक जा पहुंचा है और 99 प्रतिशत गाँवों तक राजमार्ग प्रशस्त हो चुका है। इस के सिवा प्रदेश में जल विद्युत, पवन, सौर ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, तेल और गैस समेत एकीकृत ऊर्जा प्रणाली स्थापित की गयी है। सन 2017 तक मोबाइलफोन संचार के उपभोक्ताओं की संख्या 29 लाख तक जा पहुंची है और 65 प्रतिशत के परिवारों में ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल किया गया है।

तिब्बत में रहने वाले आम आदमियों की कुछ कहानियां

तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की शाननान प्रिफेक्चर के खासूंग गांव में रहने वाली तावा ने कहा,“मैं सन 1937 में जन्म हुई, पुराने युग में मैं 22 सालों के लिए भूदास बनी थी।”सन 1959 में खासूंग गांव तिब्बत में लोकतांत्रिक सुधार करने का प्रथम गांव बना। लोकतांत्रिक रुपांतर से तावा जैसे तिब्बती निवासियों को जीवन की रोशनी दिखती रही। आज तावा और दूसरे सभी गांववासियों को सुखमय जीवन संपन्न हुआ। वर्ष 2018 में गांव वासियों की औसत आय लगभग बीस हजार युआन तक रही, और उन सब को निशुल्क चिकित्सा और शिक्षा व्यवहार प्राप्त हुआ।

ल्हासा शहर के उपनगर में रहने की 80 वर्षीय बुजुर्ग लाबा ने कहा कि दो साल पहले उनको अस्पताल में दो महीनों के लिए भर्ती हुई और मेडिकल का खर्च एक लाख दस हजार युआन तक रहा। लेकिन सरकार ने उन का सभी चिकित्सा खर्च उठा लिया है। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में सभी निवासियों को चिकित्सा बीमा की कवरेज हो चुकी है। तिब्बतियों की औसत जीवन प्रत्याशा 35.5 वर्ष से बढ़कर 68.2 वर्ष तक जा पहुंची है।

उधर नाग्-री क्षेत्र में रहने वाले बूढ़े ईशी वांगजा ने कहा कि उन के क्षेत्र में बुनियादी उपकरणों के निर्माण से अब यातायात में बहुत सुधार आया है। बूढ़ों की अच्छी तरह देखभाल भी होने लगी है। बूढ़े ने बताया कि सरकार की मदद से उन का घर गांव से शहर में स्थानांतरित किया गया है और उन के परिवार को भी सरकार की भत्ता मिली है। उन के चार बच्चों में से दो बच्चे कालेज़ में पढ़कर स्नातक हो चुके हैं।

86 वर्षीय भूबू दोर्की पुराने युग में भूदास रहे थे। उन्हों ने बताया कि पुराना समाज नरक जैसा रहा था, भूदासों का जीवन अंधकार और निराशा से भरा हुआ था। लोकतांत्रिक रुपांतर से तिब्बती लोगों को स्वतंत्रता और नया जीवन संपन्न हुआ। साठ सालों के प्रयासों से तिब्बत सुखमय भूमि बन गया है। 34 लाख तिब्बती जनता सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ती जा रही है।

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