माउंट चोमोलंगमा का सदैव संरक्षण

2019-04-16 10:53:22
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माउंट चोमोलंगमा का सदैव संरक्षण


हिमालय पर्वत की रिज पर खड़े माउंट चोमोलंगमा, जिसका दूसरा नाम है माउंट एवरेस्ट, को विश्व में सबसे ऊँचा पहाड़ माना जाता है। और वह चीन और नेपाल के बीच की सीमा पर स्थित है। 8848 मीटर ऊंची यह चोटी अपने अद्भुत दृश्यों से विश्व भर के पर्वतारोहियों को आकर्षित है। लेकिन हर वर्ष हजारों पर्वतारोहियों और आम यात्रियों की कार्यवाहियों से इस पवित्र पहाड़ में गंभीर प्रदूषण पैदा किया गया है। माउंट चोमोलंगमा के प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र में छोड़े गये असंख्य कचरों से हमें यह पता रहा है कि माउंट चोमोलंगमा का अच्छी तरह संरक्षण करने की बड़ी आवश्यकता है।

हाल में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के शिगाज़े शहर की डिन्ग्री काउंटी ने माउंट चोमोलंगमा के प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र के प्रबंधन को सख्त बनाने के लिए सूचित किया और इस प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र के कुछ भागों को पर्यटकों के लिए बन्द किया। चीनी विज्ञान अकादमी के छींगहाई-तिब्बत पठार अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञ वांग जूंग यान ने कहा कि माउंट चोमोलंगमा क्षेत्र के संरक्षण को सख्त बनाने की बड़ी आवश्यकता है। अब पर्यटक 5100 मीटर ऊंचे रूंगभू मंदिर तक जा पहुंचते हैं, जहां वे आसानी से माउंट चोमोलंगमा का दर्शन कर सकते हैं, पर इस से ऊंचे के माउंट चोमोलंगमा के पर्वतारोहण शिविर तक नहीं जा सकते हैं। इस शिविर में कचरे प्रबंधन के कड़े नियम हैं। सभी कचरों को गाड़ियों से बाहर तक पहुंचाया जाना पड़ता है। लेकिन ज्यादा पर्यटकों के प्रवेश से इस क्षेत्र के प्राकृतिक वातावरण को अधिकाधिक दबाव का सामना करना पड़ता है। नये नियम के मुताबिक पर्यतक आम तौर पर रूंगभू मंदिर में वैज्ञानिक दर्शन आदि गतिविधियों में भाग ले सकते हैं। क्योंकि माउंट चोमोलंगमा के आसपास क्षेत्र में प्राकृतिक वातावरण बहुत नाजुक है, आदमी की गतिविधियों से पर्यावरण की वहन क्षमता कमजोर बनती जा रही है। अनियमित पर्वतारोहण की गतिविधियों को मना करना पड़ेगा।

वर्ष 2006 में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश द्वारा प्रकाशित पर्वतारोहण नियम के मुताबिक पर्वतारोहण की गतिविधि चलाने में पारिस्थितिकी, संसाधन और सार्वजनिक सुरक्षा की जरूरतों का पालन करना पड़ता है। और प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र में पर्वतारोहण करने के लिए आवेदन का अनुमोदन लेना पड़ता है। वर्ष 2018 से माउंट चोमोलंगमा का पर्वतारोहण केवल वसंत के मौसम में किया जाता है। और उसी साल तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के खेल ब्यूरो ने माउंट चोमोलंगमा के पर्वतारोहण शिविर के क्षेत्र में कचरों की पूर्ण सफाई की। इस संस्था के एक पदाधिकारी के अनुसार माउंट चोमोलंगमा के पर्वतारोहण के लिए कचरा प्रबंधन नियम भी तैयार किया जाएगा और हर वर्ष केवल तीन सौ पर्वतारोहियों के आवेदन को पुष्ट किया जाएगा। माउंट चोमोलंगमा के प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र ने भी कचरा और प्रदूषित पानी के प्रबंधन नियम जैसे सिलसिलेवार नियम प्रकाशित किये हैं। कुछ समय पूर्व तिब्बती बहुल छींगहाई प्रांत ने भी घोषित किया कि सानच्यांगयुवान और छींगहाई झील जैसे प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्रों के कुछ भागों में पर्यटन करना मना दिया गया है। क्योंकि चीनी कानून के मुताबिक प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्रों के कोर क्षेत्र, बफर क्षेत्र और प्रायोगिक क्षेत्र बांटे हुए हैं। केवल बफर क्षेत्र और प्रायोगिक क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रयोग, पर्यटन और जंगलात जानवरों का पालन करने और वनस्पतियों का रोपण करने की इजाजत दी जाती है। लेकिन अनेक प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्रों को मानव गतिविधयों से बरबाद किया गया है। प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्रों के संरक्षण को कड़ा बनाने के लिए चीन सरकार ने वर्ष 2017 से ही विशेष कार्यावाहियां शुरू की हैं और कुल 14 हजार मामलों को बर्खास्त किया गया है।

पेइचिंग के वानिकी विश्वविद्यालय के एक विशेषज्ञ का मानना है कि कुछ क्षेत्रों में लोगों को प्राकृतिक संरक्षण करने का विचार कमजोर है, उन्होंने आर्थिक लाभ के लिए प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र में आर्थिक निर्माण किया है। और यह सवाल भी है कि प्राकृतिक संरक्षण कानून में पर्याप्त धाराएं निर्धारित हैं, लेकिन अवैध कार्यवाहियों के खिलाफ जो दंडित कदम है, वह काफी जबरदस्त नहीं है। और माउंट चोमोलंगमा के प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र में कई काउंटी नगरों को भी वर्गीकृत किया गया है, जिससे लोगों के सामान्य जीवन को प्रभावित किया गया है। ऐसी समस्याओं का समाधान भी कदम ब कदम किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज सबसे फोरी बात है कि नेशनल पार्क की प्रधानता से प्राकृतिक संरक्षण व्यवस्था कायम की जाएगी। और मौजूदा प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र कानून का संशोधन किया जाएगा। मिसाल के तौर पर माउंट चोमोलंगमा के प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र में पारिस्थितिकी कमजोर होने का दबाव उभर रहा है। वर्ष 2018 के वसंत मौसम में कर्मचारियों ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी के पर्वतारोहण शिविर में 8400 किलो कचरे साफ किये। माउंट चोमोलंगमा के संरक्षण को कड़ा बनाने और मानव गतिविधियों से बचाने के लिए पर्वतारोहण शिविर को थोड़ा नीचे रखने की जरूरत है। माउंट चोमोलंगमा के पाँव पर कुछ स्वयंसेवक पर्वतारोहियों के कचरे की सफाई किया करते हैं। उन की पवित्र भावना से तिब्बत में सही वातावरण सुरक्षित करने की गारंटी की जाती है। क्योंकि तिब्बती पठार पर प्राकृतिक वातावरण का अच्छी तरह संरक्षण करना हमारा समान कर्तव्य है। महासचिव शी चिनफिंग ने कहा कि तिब्बती पठार का अच्छी तरह संरक्षण करना चीनी राष्ट्र के अस्तित्व और विकास के लिए सबसे बड़ा योगदान है। इसलिए हमें अपनी आंखों के जैसे प्राकृतिक वातावरण की रक्षा करनी चाहिये और देश की पारिस्थितिक सुरक्षा बाधा को मजबूत करना चाहिये।

आर्थिक लक्ष्य कायम करने और प्राकृतिक संरक्षण करने के बीच सही संबंध कायम करना चाहिये। माउंट चोमोलंगमा का संरक्षण करने से पर्यटन उद्योग के विकास के लिए नींव रखी जाती है। तिब्बत की राजधानी ल्हासा शहर ने शाननान आदि दूसरे शहरों के साथ साथ बुटीक पर्यटन का विकास करने में उल्लेखनीय प्रगतियां हासिल की हैं। पर्यटन के विकास में तिब्बती संस्कृति का भी विकास किया जा रहा है। क्योंकि संस्कृति पर्यटन के विकास की विशेषता साबित है, संस्कृति के विकास से पर्यटकों का ध्यान आकर्षित किया जाता है। इसी दृष्टि से माउंट चोमोलंगमा के संरक्षण का दायरा और बढ़ेगा।

माउंट चोमोलंगमा प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र

8848 मीटर ऊंचा माउंट चोमोलंगमा हिमालय पर्वत की चीन-नेपाल सीमा पर खड़ा हुआ है। इस का दूसरा नाम है माउंट एवरेस्ट, जो विश्व में सबसे ऊँचा पहाड़ माना जाता है। माउंट चोमोलंगमा के आसपास क्षेत्र अपने अद्भुत प्राकृतिक दृश्यों से हर वर्ष हजारों पर्वतारोहियों और पर्यटकों को आकर्षित है, पर ये क्षेत्र प्राकृतिक वातावरण की दृष्टि से बहुत नाजुक है। माउंट चोमोलंगमा के संरक्षण के लिए चीन सरकार ने 1988 में माउंट चोमोलंगमा प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र स्थापित करने का फैसला किया, जिसका दायरा तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की डिन्ग्री, न्येलाम, चीलूंग और डिन्गग्ये काउंटियों तक फैलता है। इस प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र में माउंट चोमोलंगमा के अलावा और कई चोटियां भी शामिल हैं। प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र के नवीनतम नियम के मुताबिक आम पर्यतक 5100 मीटर ऊंचे रूंगभू मंदिर तक जा पहुंचते हैं। अनुमति प्राप्त पर्वतारोहण नियम के अनुसार किया जा सकता है।

माउंट चोमोलंगमा प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र विश्व की सबसे ऊंची चोटी के उत्तरी ढलान में स्थित है। इस क्षेत्र की औसत ऊँचाई चार पाँच हजार मीटर तक होती है। यहां का मौसम ठंडा और अर्द्ध शुष्क होता है। इस क्षेत्र की औसत वार्षिक वर्षा केवल 270 मिली मीटर है, जबकि वाष्पीकरण की औसत वार्षिक मात्रा वर्षा से बहुत दूर ज्यादा है। माउंट चोमोलंगमा प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र की पाँच नदियां गंगा नदी में बहती जा रही हैं। प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र में सैकड़ों ग्लेसियर और झील जन्म हैं जो नदियों को पानी की आपूर्ति कर रही हैं। माउंट चोमोलंगमा प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र का क्षेत्रफल 33810 वर्ग किलोमीटर विशाल है। इस का 30.33 प्रतिशत भाग कोर संरक्षण क्षेत्र कहलाता है, और इस के सिवा 18.64 प्रतिशत बफर क्षेत्र और 51.03 प्रतिशत प्रायोगिक क्षेत्र भी शामिल हैं। वर्ष 2004 के सर्वेक्षण के अनुसार माउंट चोमोलंगमा प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र में 53 किस्म की स्तनधारियों, 206 किस्म पक्षियों, 8 किस्म उभयचरों, 6 किस्म सरीसृपों तथा 10 किस्म मछलियों का पता लगाया गया है। इस क्षेत्र में 160 किस्म की औषधीय जड़ी-बूटियों का पता भी लगाया गया है। वर्ष 2013 तक इस क्षेत्र में बंदर, भेड़िया, लोमड़ी, भालू, हिम तेंदुआ, जंगली गधा तथा जंगली सूअर जैसे सैकड़ों पशुओं, पक्षियों और हजारों किस्म वाले वनस्पतियों का पता लगाया गया है।

वर्ष 1989 के अगस्त में शिगाज़े शहर के तहत माउंट चोमोलंगमा प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र का प्रबंधन ब्यूरो स्थापित किया गया। जो इस संरक्षण क्षेत्र के संरक्षण कार्य, तालमेल, संसाधन के संर्वेक्षण, कार्य योजना, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा दूसरे मिशन के जिम्मेदार है। वर्ष 2009 तक प्रबंधन ब्यूरो के चार विभाग, आठ स्टेशन स्थापित हुए हैं, जिनमें कुल 140 कर्मचारी कार्यरत हैं।

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