तिब्बत में शिक्षा कार्य के विकास के लिए सरकार ने भारी निवेश किया

2019-03-26 15:53:17
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तिब्बत में शिक्षा कार्य के विकास के लिए सरकार ने भारी निवेश किया


चीनी प्रधानमंत्री ली ख्छ्यांग ने 5 मार्च को सरकार की कार्य रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि अल्पसंख्यक जातीय क्षेत्रों के विकास को विशेष समर्थन दिया जाना चाहिये।

चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन की राष्ट्रीय कमेटी के सदस्य, तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के छांगतु शहर के तिब्बती भाषा अध्यापक त्साक्शी ने कहा कि केंद्र सरकार ने प्रति वर्ष सीमांत क्षेत्रों के शिक्षा कार्यों के विकास में भारी निवेश किया है। अब तिब्बत में शिक्षा संबंधी नीतियों का कार्यांवयन अच्छी तरह किया जा रहा है। शिक्षा से गरीबी उन्मूलन के कार्यों में भी उल्लेखनीय प्रगतियां हासिल हुईं।

त्साक्शी को गत वर्ष सलाहकार सम्मेलन की राष्ट्रीय कमेटी का सदस्य निर्वाचित किया गया। सरकार की कार्य रिपोर्ट में जन जीवन के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा,“प्रधानमंत्री की कार्य रिपोर्ट में जन जीवन और बुनियादी इकाइयों के बारे में जो चर्चा की गई हैं, उससे मुझ पर गहरी छाप पड़ी है। कर-वसुली की कटौती, चिकित्सा और जनता के स्वास्थ्य आदि के कदम उठाने से समाज और देश को समृद्ध बनाया जाएगा। इससे यह भी जाहिर है कि हमारी सरकार ने जनता को कितना महत्व दिया है।”

52 वर्षीय त्साक्शी ने लगभग तीस सालों के लिए तिब्बती भाषा पढ़ाई का काम किया है। उन्हों ने कहा कि छांगतु शहर में नम्बर 1 प्राइमरी स्कूल की स्थापना 29 साल पहले हुई थी। स्कूल की स्थापना के समय केवल 8 अध्यापक और 108 छात्र थे। पर अभी तक स्कूल के 155 अध्यापक और 2112 छात्र हो गये हैं। इस के अतिरिक्त स्कूल में उच्चारण कक्ष, कंप्यूटर कक्ष और पुस्तकालय जैसी आधुनिक शिक्षण सुविधाएं सब मिलती हैं।

तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में वर्ष 1985 से किसानों और चरवाहों के छात्रों को खान-पान, रहन-सहन और पढ़ाई खर्च सब निशुल्क देने की नीति लागू की गयी। वर्ष 2018 में सरकार ने इन छात्रों के भत्ता स्तर को और उन्नत किया। इस बात को लेकर त्साक्शी ने कहा,“छात्रों को निशुल्क देने की नीति बहुत अच्छी है। केंद्र सरकार की इस नीति का पूरा कार्यांवयन किया गया है। छात्रों को प्राइमरी स्कूल से हाई स्कूल तक सब निशुल्क व्यवहार दिया जाता है। यह कितनी अच्छी नीति है।”

सरकार की कार्य रिपोर्ट के अनुसार शहरों और नगरों में बड़े कक्ष की समस्या को हल किया जाना चाहिये। इस के प्रति त्साक्शी ने कहा कि छांगतु के प्राइमरी स्कूल में भी ऐसी समस्या उभरने लगी है। पर छांगतु नम्बर 2 प्राइमरी स्कूल की स्थापना के बाद समस्या का समाधान किया गया है। उन्होंने कहा,“हमारे स्कूल में पहले एक क्लास में 70-80 छात्र पढ़ते थे। क्योंकि हमारा स्कूल मशहूर है, इसलिए बहुत से लोगों ने अपने बच्चों को हमारे स्कूल में भेजना चाहा। यह बड़े कक्ष होने का एक कारण है। गत वर्ष नम्बर 2 प्राइमरी स्कूल की स्थापना से एक ही क्लासरूम में लगभग पचास छात्र पढ़ते हैं।”

त्साक्शी ने बताया कि थिएनचिन, झूंगछींग आदि शहर और फूचैन प्रांत छांगतु शहर की सहायता करने के साझेदार हैं। इन तीन क्षेत्रों ने प्रति वर्ष क्रमशः पचास अध्यापक भेजे हैं, जो छांगतु शहर के तीन हाई स्कूलों में भाषा, गणित, संगीत, खेल और कला का अध्यापन करते हैं। आशा है कि वे अपने उन्नतिशील शिक्षा विचार छंगतु के स्कूलों में पहुंचाएंगे।

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