द-ग सूत्र मुद्रण गृह

2019-01-14 14:19:41
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द-ग सूत्र मुद्रण गृह

दक्षिण पश्चिमी चीन के सिचुआन प्रांत के गार्ज़े तिब्बती स्वायत्त प्रीफेक्चर की द-ग काउंटी में एक बहुत मशहूर छापाख़ाना है, जो प्रिंटिंग हाउस, प्रकाशन घर, पुस्तकालय, संग्रहालय और धार्मिक स्थान आदि सब की भूमिका अदा कर रहा है। जिसका नाम है द-ग सूत्र मुद्रण गृह और उसे राष्ट्र स्तरीय सांस्कृतिक अवशेष संरक्षण इकाई के रूप में निर्धारित किया गया है।


चीन के छींग राजवंश यानी सन 1729 में द-ग काउंटी के शासक ने द-ग सूत्र मुद्रण गृह की स्थापना की। इस का निर्माण करने में लगभग तीस साल का समय लगा था। इस तीन मंजिले वाली इमारत का निर्माण क्षेत्रफल दस हजार वर्ग मीटर तक जा पहुंचता है। इस छापाखाने में अभी तक तीन लाख से अधिक प्रिंटिंग प्लेट सुरक्षित हैं। छापाखाने में 830 से अधिक प्राचीन ग्रंथ या सूत्र संरक्षित हैं, जो बौद्ध ग्रंथ, दर्शन, खगोल विज्ञान, पंचांग, भूगोल, इतिहास, संगीत, ललित कला, दवा और शिल्प आदि के बारे में हैं। उनमें जो कुछ प्राचीन बौद्ध ग्रंथ हैं, वह सौ से अधिक कारीगर की कई सालों की कोशिशों के जरिये छापे गये थे। प्राचीन प्रिंटिंग प्लेट का संरक्षण करने के लिए आजकल ऐसे बौद्ध ग्रंथों की छपाई बहुत कम की जाती है। द-ग छापाख़ाने में प्रकाशित सूत्र आम तौर पर चीन के तिब्बती बहुल क्षेत्रों और दूसरे देशों व क्षेत्रों में बेचते हैं। इधर के तीन सौ सालों में द-ग छापाख़ाने ने पारंपरिक संस्कृति का उत्तराधिकार करने के लिए भारी योगदान पेश किया है। दसवें पंचन लामा ने सन 1986 में द-ग छापाख़ाने को "बर्फदार पर्वत के नीचे संस्कृति का खजाना" से शीर्षक किया। सन 1996 में इसे चीनी राष्ट्र स्तरीय सांस्कृतिक अवशेष संरक्षण इकाई की नामसूची में निर्धारित किया गया और सन 2009 में इसे संयुक्त राष्ट्र संघ की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल भी हुआ।

द-ग छापाख़ाना एक विशेष तीर्थस्थल है और इस में विशेष नियम भी मौजूद है। मिसाल के तौर पर छापाख़ाने के मकानों में कोई इलेक्ट्रिक लाइट स्थापित नहीं है, और न ही आग लगती है। क्योंकि छापाखाने में संरक्षित प्राचीन ग्रंथों और प्रिंटिंग प्लेट की कड़ी रक्षा की जानी पड़ती है। छापाख़ाने में प्रिंटिंग प्लेट का साइज़ भी तरह तरह है। इनमें सबसे बड़े वाले का साइज़ है 110 सेमी लंबा, 70 सेमी चौड़ा और 5 सेमी मोटा। उनमें जो छोटा है, वह सिर्फ 33 सेमी लंबा और 6 सेमी चौड़ा होता है। द-ग छापाख़ाने के प्रिंटिंग प्लेट सेंटी पेड़ की लकड़ी से बने हैं। ये प्लेट बनाने के लिए भी कई साल समय लगता है। लकड़ी को पानी से उबला होने, सूखा बनाने, समतल बनाने के बाद इस पर शब्दों की खुदाई की जाती है। द-ग छापाख़ाने की मुद्रण कौशल दुनिया के लिए सांस्कृतिक खजाना है। तिब्बती बहुल क्षेत्रों में द-ग छापाख़ाने को छोड़कर और दो सूत्र मुद्रण गृह हैं यानी ल्हासा छापाख़ाना और लाब्रांग छापाख़ाना। द-ग छापाख़ाने का सूत्र देश विदेश में व्यापक रूप से फैल गया है और बहुत प्रसिद्ध है। द-ग छापाख़ाना दस हजार आबादी वाले गंग-छींग कस्बे में स्थित है। जहां बौद्ध अनुयायियों और विश्वासियों का तीर्थ स्थल माना जाता है। लोग हर रोज़ यहां के गंग-छींग मंदिर में प्रार्थना करने जाते हैं। वे मंदिर में पूजा करने के बाद चाय पीते रहते हैं और ऐसा जीवन इन के लिए बहुत आरामदेह है।

द-ग काउंटी में एक और बात उल्लेख करने योग्य है, यानी कि तिब्बती चिकित्सा अस्पताल। द-ग क्षेत्र में तिब्बती चिकित्सा की दक्षिणी शाखा का केंद्र स्थित है, जिस का भी बहुत लम्बा इतिहास है। कुछ प्राचीन तिब्बती चिकित्सा पद्धति ग्रंथों का प्रकाशन भी द-ग में किया गया है और मूल्यवान तिब्बती पारंपरिक दवाइयों का उत्तराधिकार किया गया है। केंद्र सरकार ने द-ग काउंटी तिब्बती चिकित्सा अस्पताल को राष्ट्र स्तरीय अनुसंधान केंद्र नामांकित किया है। द-ग काउंटी तिब्बती चिकित्सा अस्पताल सन 1959 में मंदिर चिकित्सालय के आधार पर स्थापित किया गया था। सन 1959 से द-ग काउंटी तिब्बती चिकित्सा अस्पताल का तीन बार जीर्णोद्धार किया गया है। सन 2010 में सरकार ने 1.8 करोड़ युआन की पूंजी से इस का एक जातीय अस्पताल के रूप में विस्तार किया। अब इस अस्पताल में क्लिनिक इमारत, रोगी विभाग, दवा कारखाना, दवा स्नान केंद्र, तिब्बती चिकित्सा शिक्षण और तिब्बती चिकित्सा अनुसंधानशाले आदि की स्थापना सब हो गयी है। द-ग काउंटी तिब्बती चिकित्सा अस्पताल की स्थापना से पूरे गार्ज़े क्षेत्र में चिकित्सा के विकास के लिए उल्लेखनीय आधार तैयार हो गया है। इस अस्पताल के डाक्टर भी दूसरे काउंटी के अस्पतालों की सहायता के लिए जाते रहते हैं। और उन की मदद में अनेक तिब्बती चिकित्सालय भी स्थापित किये गये हैं। इस के साथ ही गार्ज़े क्षेत्र के चिकित्सा स्कूल के छात्र भी अकसर यहां अभ्यास करने आते हैं। अस्पताल के उप डाइरेक्टर के अनुसार गार्जे चिकित्सा स्कूल के 35 छात्रों ने अपना अभ्यास समाप्त कर भिन्न भिन्न पदों पर काम किया है। इन के अलावा दूसरे 45 छात्र भी अस्पताल में अभ्यास कर रहे हैं। द-ग काउंटी की सरकार पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के उत्तराधिकार और विकास को महत्व देती है। सरकार के आयोजन से गार्ज़े क्षेत्र में तिब्बती चिकित्सा प्रतिभाओं का कई बार प्रशिक्षण किया गया है। द-ग काउंटी तिब्बती चिकित्सा अस्पताल ने वर्ष 2017 में पारंपरिक चिकित्सा प्रसार का एक मुद्दा चलाना शुरू किया। इस मुद्दे के चलने से तिब्बती चिकित्सात के प्रतिभाओं के प्रशिक्षण के साथ साथ गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य भी साकार किया गया है।


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