तिब्बत में रुपांतर और खुली नीति अपनाने का चालीस साल

2019-01-03 16:51:44
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तिब्बत में रुपांतर और खुली नीति अपनाने का चालीस साल


चीन में रुपांतर और खुलेपन के चालीस सालों के बाद देश भर में भारी परिवर्तन नजर आया है। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश का भी देश के दूसरे क्षेत्रों की तरह उल्लेखनीय विकास किया गया है। मिसाल के तौर पर तिब्बत के शाननान क्षेत्र में आर्थिक विकास वर्ष 1978 की तुलना में लगभग अस्सी गुणा बढ़ा है। ऊर्जा, यातायात, जल संरक्षण और सूचना आदि बुनियादी उपकरणों के निर्माण में भी उल्लेखनीय प्रगतियां हासिल हो गयी हैं। इस प्रिफेक्चर की 12 काउंटियों में से सात को गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य साकार हो गया है।

शाननान क्षेत्र में आर्थिक विकास होने का श्रेय केंद्र सरकार और देश के दूसरे क्षेत्रों की भारी सहायता के अलावा स्थानीय लोगों की कड़ी मेहनत तक भी जाता है। 71 वर्षीय बूढ़े तावा ग्याट्स्न की कहानी सुनने योग्य है। तावा ने शाननान क्षेत्र में तीस सालों के लिए पेड़ लगाने का अथक प्रयास किया है। उन्होंने यालूजांगबू नदी के तट पर दस हजार मू पेड़ लगाया है। वर्ष 1980 में सरकार ने इस नदी के तट पर पारिस्थितिकी संरक्षण वन का निर्माण करने का फैसला किया। सरकार के आहवान में तावा ने वन रक्षक का पद संभाला। वन रक्षक का काम मुश्किल है, पर आय कम है। लेकिन तावा ग्याट्स्न ने अपने हाथों से यालूजांगबू नदी के तट पर एक विशाल जंगल स्थापित किया। सरकार की सहायता से बहुत से लोगों ने वनरोपण के दल में शामिल किया। आज यालूजांगबू नदी के मध्य भाग में कुल 4.5 लाख मू का वृक्षारोपण लगाया गया है। पेड़ लगाने से मौसम में सुधार आया और रेतीली हवा की रोकथाम भी की गयी है। स्थानीय किसानों को आर्थिक फसलों का रोपण करने से अधिक आय प्राप्त हुई है।

उधर तिब्बत की राजधानी ल्हासा में रुपांतर और खुलेपन की वजह से लोगों का जीवन भी बहुत बदल गया है। प्रदेश में आर्थिक व सामाजिक विकास के चलते ल्हासा में रहने वाले नागरिकों के जीवन में बहुत सुधार आया है। ल्हासा शहर में रहने वाले थाशी डंद्रोप अस्सी साल के बूढ़े हैं। अब वे रोज मोबाइलफोन के वी-चैट के जरिये अपने सहपाठियों के साथ बातचीत करते रहे हैं। कुछ दूसरे बूढ़े लोग भी वी-चैट से अपने बच्चों और पोतों के साथ संपर्क रखते हैं। उन्हें मोबाइल फोन के जरिये सुदूर जगहों के दृश्यों की जानकारियां भी प्राप्त हुई हैं। और इस के अतिरिक्त नागरिकों के लिए अधिकांश शॉपिंग ऑनलाइन के जरिये किया जा रहा है। ल्हासा शहर के उपनगर के दातुंग गांव के मुखिया दोर्गी ने कहा कि रुपांतर और खुलेपन से लोगों के जीवन में बहुत सुधार आया है। पहले गांव में बिजली की आपूर्ति एक छोटे जल विद्युत स्टेशन पर निर्भर रहता था। वर्ष 2005 में गांव प्रदेश के पावर ग्रिड से जुड़ा हुआ। आज गांव में सभी परिवार को भिन्न भिन्न घरेलू बिजली उपकरणों से लैस हुआ है। तिब्बत में प्राकृतिक वातावरण की वजह से सर्दियों में ताजा सब्जियों की आपूर्ति कम रहती थी। जाड़े के दिन लोगों को आम तौर पर मूली, गोभी, आलू आदि खाना पड़ता था। लेकिन आज यह सबकुछ बदल गया है। भिन्न भिन्न किस्म वाले मांस को छोड़कर ल्हासा शहर के नागरिकों को किस्म किस्म की सब्जियों की आपूर्ति होती है। क्योंकि सरकार ने सन 1988 से सब्जी टोकरी की परियोजना लागू की है, जिससे शहरों में सब्जियों की आपूर्ति में काफी सुधार आया है। और इस के साथ परिवहन क्षमता के बढ़ने से बहुत से खाद्य पदार्थ देश के दूसरे क्षेत्रों से तिब्बत में पहुंचाये जा रहे हैं। अब तिब्बती लोग भी झींगा, केकड़ा आदि समुद्री भोजन खा सकते हैं। तिबबत के बहुत से क्षेत्रों में ग्रीन हाउस के जरिये टमाटर, मटर,मशरूम, गाजर और हरी सब्जियों का रोपण किया जाता है। ल्हासा शहर में सब्जियों की आत्मनिर्भरता 60% तक जा पहुंची है।

पर्यटन के विकास से सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन लाया गया है। आज तिब्बत चीन में पर्यटकों के लिए एक मुख्य पर्यटन गंतव्य बना है। ल्हासा शहर की सड़कों में देश विदेश से गये पर्यटक केंद्रीत हैं। सांस्कृतिक अवशेषों का संरक्षण और विकास करने के लिए पार्टी व सरकार ने वर्ष 2012 में ल्हासा शहर की प्राचीन नगर प्रबंधन कमेटी स्थापित की, जो इस क्षेत्र के पर्यटन, सुरक्षा, सिटीस्केप और विकास योजना आदि कामकाजों के जिम्मेदार है। कमेटी ने इस प्राचीन नगर में 101 सड़कों के तीन हजार से अधिक दुकानों और बूथों को समायोजित किया । नगर में सभी बिजली आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट, पत्थर पथ और सीवर जैसे बुनियादी उपकरणों का नवीनकरण या पुनर्निर्माण किया गया है। पारंपरिक संस्कृति का अच्छी तरह संरक्षण किया जाने के साथ साथ प्राचीन नगर में रहने वालों को भी अधिक जीवन सुविधाएं मिल पायी हैं।

उधर तिब्बत के दक्षिण पश्चिमी भाग में स्थित शिगाज़े क्षेत्र में जीव खेती और ऑर्गानिक फल और सब्जी उद्योग का जोरों पर विकास किया जा रहा है। शिगाज़े की बाईलांग काउंटी में प्रदेश में सबसे बड़ा आधुनिक कृषि पार्क स्थापित किया गया है, जहां कुल 136 किस्म फल और सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। बाईलांग काउंटी तिब्बत प्रदेश से दक्षिण एशिया की ओर जाने वाला पुल माना जाता है। इधर के वर्षों में बाईलांग काउंटी में जीव खेती का विकास करने के चलते ऑर्गानिक फल और सब्जी उद्योग का भी विकास किया गया है। तिब्बत में 18 सालों के लिए काम करने वाले चांग ची मींग ने वर्ष 2000 से बाईलांग काउंटी में कृषि तकनीशियन का पद सँभाला। उन के सहपाठियों की कोशिश से आज बाईलांग काउंटी में दस हजार मू विशाल आधुनिक कृषि पार्क स्थापित किया गया है। और यह भी चर्चित है कि उन के कृषि पार्क में उत्पादित फल और सब्जी बिल्कुल ऑर्गानिक हैं। उन के यहां से उत्पादित अखरोट, कद्दू, टमाटर, मिर्च, बैंगन, तरबूज-खरबूज आदि सब धोये बिना खा सकते हैं। आज यहां उत्पादित सब्जियां मुख्य रूप से शिगाज़े शहर की आपूर्ति की जाती है, और बाद में तिब्बत के दूसरे शहरों में भी बाईलांग की सब्जियां मिल पाएंगी।

नग़ारी प्रिफेक्चर तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के पश्चिम में स्थित है जहां कृषि का विकास कमजोर पड़ता था। पर आज नग़ारी क्षेत्र में चरवाहों ने भी आधुनिक कृषि का विकास करना शुरू किया है। नग़ारी की औसत ऊँचाई 4500 मीटर होती है। यहां मिट्टी कम होने के कारण लोगों ने वर्ष 2016 में मिट्टी-रहित रोपण की तकनीक का आयात किया। भीतरी इलाके के शानशी और शानतुंग आदि प्रांतों के तकनीशियनों की मदद से नग़ारी क्षेत्र में बहुत से ग्रीन हाउस स्थापित किये गये जिन में दर्जनों किस्म वाले सब्जियों का रोपण किया गया। अब प्रिफेक्चर के पूलैन काउंटी में 140 ग्रीन हाउस निर्मित हो चुके हैं जहां सब्जी, पेड़-पौधे, फूल, घास के रोपण और यहां तक पशुपालन उद्योग आदि सबका विकास किया गया है। ग्रीन हाउस में उत्पादित सब्जियों और फलों की आसपास क्षेत्रों तक आपूर्ति की जा रही और स्थानीय लोगों की आय भी बहुत बढ़ी है। उन्नतिशील कृषि तकनीक के इस्तेमाल से स्थानीय लोगों को अधिक आय प्राप्त हुई है और नगारी क्षेत्र में "कंपनी + कृषि आधार + सहकारी + किसान" का मॉडल उभर रहा है। नगारी प्रिफेक्चर की सरकार का मानना है कि आधुनिक कृषि का विकास करने के लिए नये ढंग के किसानों और चरवाहों का प्रशिक्षण करना चाहिये। इधर के वर्षों में प्रिफेक्चर में आधुनिक कृषि के अतिरिक्त नये उद्योग, नये व्यवसाय, ग्रामीण पर्यटन और ग्रामीण ई-कॉमर्स आदि का बड़ी तेजी से विकास किया जा रहा है। वर्ष 2017 में किसानों व चरवाहों की औसत आय दस हजार युआन से बढ़ी है। पाँच सालों के भीतर कुल 15 हजार किसानों व चरवाहों का प्रशिक्षण किया गया और अधिकांश काउंटियों में गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य साकार किया गया है। सरकार के कर्मचारियों ने बताया कि आधुनिक कृषि का विकास करने के लिए किसानों और चरवाहों को पारंपरिक खेती के तरीके से मुक्त कराया जाना चाहिये। उधर बुनियादी संस्थाओं के कर्मचारियों को भी सहायता से निर्भर रहने वाले विचारों से छुटकारना चाहिये। आज के नग़ारी प्रिफेक्चर में पारिवारिक फार्म, पेशेवर सहकारी, उच्च तकनीक पार्क आदि नये उद्योग निरंतर उभरते जा रहे हैं। लोग अपने उज्जवल भविष्य की ओर अभियान कर रहे हैं।

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