तिब्बत में जातीय एकता की अच्छी स्थिति बनी हुई है

2018-11-19 15:02:37
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तिब्बत में जातीय एकता की अच्छी स्थिति बनी हुई है

 

तिब्बती पठार पर दीर्घकाल तक एक गीत की आवाज़ गुंज रही है कि सूर्य और चंद्रमा एक मां की बेटियां हैं, हान जाति और तिब्बती जाति भी एक मां की बेटियां ही हैं। उन की मां का नाम है चीनी राष्ट्र। प्राचीन काल से ही तिब्बती पठार एक बहुजातीय क्षेत्र रहता था। पठार पर तिब्बती जाति के अलावा हान, ह्वेई, मेनबा, लोबा और नाशी आदि अनेक जातियां रही हैं। तिब्बती जनता ने मातृभूमि के एकीकरण के लिए अद्भुत योगदान पेश किया है।  

पार्टी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के आयोजन से तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की पार्टी कमेटी और सरकार ने जातीय एकता को अत्यंत महत्व दिया। वर्ष 2012 में ल्हासा शहर की सरकार ने कानून बनाकर 17 सितंबर को जातीय एकता और प्रगति दिवस तय किया। यह पहली बार है कि किसी शहर ने जातीय एकता और प्रगति के कार्यों के लिए कानून बनाया है। सितंबर माह में ल्हासा शहर के कम्युनिटी में तिब्बती, हान, ह्वेई, वेईवूर, साला और पाई आदि जातियों के लोगों ने खुशी से समारोह का आयोजन किया। एक दूसरे का समादर करना और समानता से रहना जातीय एकता का आधार है। पार्टी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की जन प्रतिनिधि सभा ने कुल 61 स्थानीय कानूनों का संशोधन या पुष्टि कर विभिन्न जातियों के अधिकारों की गारंटी की है। तिब्बत के नये साल और  शॉन डुन त्यौहार को स्वायत्त प्रदेश के वैधानिक त्यौहार के रूप में तय किया। वर्ष 2017 तक तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की जन प्रतिनिधि सभा ने कुल 297 स्थानीय कानून बनाकर तिब्बत में जातीय नीति, आर्थिक विकास, सांस्कृतिक शिक्षा, भाषा, चिकित्सा और स्वास्थ्य, सांस्कृतिक अवशेष संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक प्रबंधन आदि पहलुओं में वैधानिक व्यवस्था कायम की है।

देश की जन प्रतिनिधि सभा और राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन में तिब्बती समेत अल्पसंख्यक जातियों का अपना अपना प्रतिनिधि निर्वाचित है। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में रहने वाले मेनबा, लोबा और नाशी आदि जातियों को भी अपने अपने जातीय स्वायत्त जिले भी सुरक्षित हैं। पार्टी और सरकार के समर्थन से तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में जातीय सांस्कृतिक विरासत और विशिष्ट संस्कृति का संरक्षण, उत्तराधिकार और विकास को बहुत महत्व दिया गया है। पार्टी के महासचिव शी चिनफिंग ने देश के द्वितीय केंद्रीय सिंच्यांग कार्य सम्मेलन में कहा था कि चीन में सभी जातियों को एक दूसरे की समझ करना, एक दूसरे का समादर करना और एक दूसरे से समावेश करना चाहिये। देश में भिन्न भिन्न जातियों के लोगों को अनार के बीज की तरह एकजुट होकर रहना चाहिये। अनार को चीन की पारंपरिक संस्कृति में शुभंकर समझा जाता है। चीनी राष्ट्र में विभिन्न जातियों के लोग भी एक अनार के एक एक बीज के जैसे हैं। अब तिब्बत में विभिन्न जातियों के लोग भी दूसरे वासियों को अपने भाई जैसे समझते हैं। मिसाल के तौर पर तिब्बत के शाननान शहर की गूंगा काउंटी के लांगच्येलीन कस्बे में 298 परिवार रहते हैं। उन में 24 तिब्बती-हान परिवार भी हैं। ऐसे घर में या पत्ती या पत्नी अलग जातियों के होते हैं। पर वे बहुत खुशी से रह रहे हैं। तिब्बती पठार पर जातीय एकता की कहानियां हर दिन पैदा हो रही हैं।    

यह कहा जा सकता है कि तिब्बत में जातीय एकता होने की स्थिति पार्टी व सरकार के अथक प्रयासों का परीणाम है। स्थानीय सरकार ने पृथकतावाद के विरूद्ध निरंतर प्रसारण किया। और जनता को देशभक्ति और समाजवाद शिक्षण दिया। विभिन्न जातियों के लोगों में चीनी राष्ट्र एकीकरण का विचार बढ़ाया गया। साथ ही अल्पसंख्यक जातीय कर्मचारियों, छात्रों तथा मंदिर के साधुओं को कानून प्रशासन का विचार बढ़ा दिया। पार्टी के कर्मचारियों तथा आम लोगों में जातीय व धार्मिक सिद्धांतों का प्रसार भी किया गया है। आंकड़ों के अनुसार हाल के वर्षों में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में कुल 19 जातीय एकता आदर्श इकाइयां, छह जातीय एकता शिक्षा अड्डे तथा दस जातीय एकता व प्रगति गतिविधियों के लिए मॉडल यूनिट तय किये गये हैं। ल्हासा शहर को राष्ट्रीय जातीय एकता व प्रगति आदर्श शहर का नाम भी समर्पित किया गया है। प्रदेश में कुल 998 व्यक्तियों को भी जातीय एकता पुरस्कार सौंपा गया है। आज "जातीय एकता से सुख आना, विभाजन से आपदा पैदा होना" का नारा, तिब्बत में सभी लोगों का आम विचार बन गया है।  

जातीय एकता को बनाये रखने का उद्देश्य, देश में विभिन्न जातियों के लोगों को खुशहाल जीवन दिलाना है। पार्टी की सौहार्दपूर्ण देखभाल तथा सरकार की अधिमानी नीतियों के कार्यान्वयन से तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में विभिन्न जातियों के बीच में सामंजस्य होने की स्थितियां पैदा हुई हैं। केंद्र में द्वितीय तिब्बत कार्य सम्मेलन के आयोजन से बहुत से कर्मचारियों, मजदूरों और व्यापारियों  ने भीतरी इलाकों से तिब्बत की सहायता में पठार में काम करना शुरू किया। उन्हों ने अपने नये विचारों और तरीकों से तिब्बत और भीतरी इलाकों के बीच आदान प्रदान को बढ़ाने के लिए सकारात्मक कोशिश की है।

 

एक मां की दो बेट्टियां

 

तिब्बत में यह गीत इधर उधर सुनता जा रहा है,“हान जाति और तिब्बती जाति एक मां की दो बेट्टियां हैं। दोनों की मां है चीन।” जातीय एकता का गीत तिब्बती पठार के चारों ओर गूंज रहा है। इधर के दशकों में तिब्बती पठार पर रहने वाले लोगों ने देश के दूसरे क्षेत्रों के साथ साथ आर्थिक व सामाजिक विकास के संदर्भ में निरंतर प्रगतियां हासिल की हैं। विभिन्न जातियों के बीच एक दूसरे से सीखकर आपस में गहरी भावना भी पैदा हो गयी है। समानता, एकता, आपसी मदद और सामंजस्य वाले समाजवादी जातीय संबंधों को निरंतर मजबूत किया गया है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के आयोजन से पार्टी की केंद्रीय कमेटी ने तिब्बत के निर्माण को अधिक सहायता प्रदान करने की नीति बनायी। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में गांवों और मंदिरों में कर्मचारी दल भेजा गया है, शहरों व टाउनशिपों के प्रबंधन को मजबूत किया गया है और एकीकृत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था लागू की गयी है। जिनसे तिब्बत की स्थिरता और जातीय एकता की गारंटी की गयी है। पता चला है कि वर्ष 2012 से आज तक तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में आपराधिक मामलों और सार्वजनिक सुरक्षा मामलों की स्पष्ट गिरावट आई है। त्यौहारों और धार्मिक पर्वतों के समय समाज सामंजस्यपूर्ण और स्थिर बना रहा है। तिब्बत में लोगों के लिए सुरक्षा की भावना पूरे देश की अग्रिम पंक्ति पर रही है।   

आंकड़े बताते हैं कि अब तिब्बती जन प्रतिनिधि सभा में 70 प्रतिशत भाग अल्पसंख्यक जातीय ही हैं। स्वायत्त प्रदेश के कर्मचारियों में 57 प्रतिशत भाग भी अल्पसंख्यक जातीय हैं। अधिकांश संस्थाएं भी बहुजातीय कर्मचारियों से गठित हैं। मिसाल के तौर पर अख़बार तिब्बती दैनिक में हान, तिब्बती, ली, तूंग, ह्वेई और थूच्या आदि जातियों के संवाददाता साथ साथ काम करते रहे हैं। साथियों ने एक दूसरे की मदद कर बहुत से महत्वपूर्ण प्रसारण मिशन समाप्त किया और अनेक बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। जातीय एकता को और अधिक मजबूत करने के लिए स्वायत्त प्रदेश की सरकार ने 42 नये नियम भी बना दिये और जातीय एकता सम्मेलन के आयोजन से जातीय एकता के लिए वातावरण तैयार किया है। उधर बहुत से पूंजीनिवेशकों ने भी भीतरी इलाकों से तिब्बत जाकर विशेष रोपण, पर्यटन और पारंपरिक हस्तशिल्प आदि उद्योगों का विकास किया। उन के प्रयासों से स्थानीय अर्थतंत्र को बढ़ाने के साथ साथ तिब्बती लोगों को गरीबी से छुटकारा पाया है।   

जातीय एकता को बढ़ाने वाली गतिविधियों के आयोजन से विभिन्न जातियों के लोगों में मातृभूमि, कम्युनिस्ट पार्टी तथा चीनी विशेषता वाले समाजवाद के प्रति सहमतियों को भी मजबूत किया गया है। तिब्बत में जातीय एकता के सुधार से धार्मिक सद्भाव को भी बढ़ावा मिला है। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के समाजवादी संस्थान के उप प्रधान डॉक्टर रोदान ने जेनेवा के संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में कहा कि आज तिब्बत का आर्थिक निर्माण सुभीते से किया जा रहा है, जन जीवन में निरंतर सुधार आया है, प्राकृतिक वातावरण का अच्छी तरह संरक्षण किया जा रहा है और विभिन्न जातियों के लोग अपने जीवन के प्रति काफी संतुष्ट हैं। रोदान के अनुसार तिब्बत में बौद्ध धर्म के अलावा इस्लाम और कैथोलिक आदि दूसरे धर्म भी चलते हैं। तिब्बत में धार्मिक स्थलों की संख्या 1787 तक जा पहुंची है, भिक्षुओं और भिक्षुणियों की संख्या 46 हजार तक रही है। सभी बौद्धिक गतिविधियों का संरक्षण किया गया है।

 

 

 

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