तिब्बत में नए पेशेवर किसान और चरवाहे उभरे हुए हैं

2018-11-13 16:01:53
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तिब्बत में नए पेशेवर किसान और चरवाहे उभरे हुए हैं

तिब्बत में नए पेशेवर किसान  

तिब्बत में किसान और चरवाहे दीर्घकाल तक प्राकृतिक स्थितियों में खेती और पशुपालन करते थे। लेकिन इधर के वर्षों में उन्होंने अधिकाधिक तौर पर अपने रोजाना कार्यों में विज्ञान व तकनीक का इस्तेमाल करना शुरू किया है।

तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के ल्हासा शहर के उपनगर स्थित चमबारांग गांव में रहने वाले किसान दोर्चे का मानना है कि गाय का पालन करने के लिए विज्ञान और नयी तकनीकों का जरूर ही इस्तेमाल किया जाना चाहिये। पहले गांव में लोग अपने अपने घर में एक दो गाय का पालन करते थे, तब ऐसा करते अधिक आय और पैदावार नहीं प्राप्त कर सकते थे। दोर्चे ने प्रदेश के फार्म और पशुपालन विभाग द्वारा आयोजित पेशेवर किसान और चरवाहे प्रशिक्षण कक्षा में सीखने गये। अध्ययन करने के बाद दोर्चे ने गांव वासियों को वैज्ञानिक तौर पर गाय पालन करने के अनुभवों का प्रसारण किया। उन्नतिशील तकनीकों के इस्तेमाल से चमबारांग गांव में लोगों की औसत आय पहले के दो हजार युआन से बढ़कर दस हजार युआन तक जा पहुंची है। दोर्चे ने कहा कि पार्टी की सही नीतियों से हम ने घर में ही बहुत पैसा कमाया है। 

तिब्बत में किसानों और चरवाहों का ज्ञान स्तर और कौशल निम्न होता है। इसी वजह से उन की रोजगार की स्थिति भी अच्छी नहीं है। इसे बदलने के लिए सरकार ने यथासंभव मौका तैयार कर किसानों और चरवाहों को अपने क्षेत्र के आर्थिक विकास में अमीर बनाने की कोशिश की है। प्रदेश के फार्म और पशुपालन विभाग ने 46 काउंटियों में नये किस्म वाले किसानों व चरवाहों का प्रशिक्षण करना शुरू किया। साथ ही तिब्बत में खेती और पशुपालन की जरूरतों से प्रदेश के फार्म और पशुपालन विभाग ने तिब्बती कृषि तकनीशियनों के प्रशिक्षण को भी जोर लगाया। ताकि पूरे प्रदेश में बड़ी संख्या के कृषि तकनीशियनों, जो तिब्बती भाषा और हान भाषा बोलते हैं, को प्रशिक्षित किया जाए। अभी तक कई सौ ऐसे तकनीशियनों का प्रशिक्षण समाप्त किया गया है। उनमें रोपण, पशुपालन और आधुनिक कृषि के तकनीशियन सब शामिल हैं। और इन तकनीशियनों और कृषि प्रतिभाओं को तिब्बत में बनाए रखने के लिए स्थानीय सरकार ने किसानों और चरवाहों के विकास वातावरण में सुधार लाने और पेशेवर किसानों और चरवाहों का निरंतर प्रशिक्षण लगाने का प्रयास किया। इधर के वर्षों में स्थानीय सरकारों ने नये किस्म वाले पेशेवर किसानों के उत्पादन का समर्थन करने में भारी भत्ता प्रदान की। पेशेवर किसानों में जो श्रेष्ठ हैं, उन्हें बैंक ऋण की अधिक सहायता दी गयी है। और उन्हें उत्पादन मार्गदर्शक का काम भी सौंपा गया। फार्म और पशुपालन विभाग के अनुसार तिब्बत की उन 46 काउंटियों में कुल दस हजार से अधिक नये किस्म वाले पेशेवर किसानों व चरवाहों का प्रशिक्षण किया जा चुका है। योजनानुसार वर्ष 2020 तक प्रदेश की सभी 74 काउंटियों में यह काम पूरा किया जाएगा। ये पेशेवर किसान व चरवाहे प्रदेश के उत्पादन और आधुनिक कृषि व पशुपालन के विकास में सकारात्मक भूमिका अदा करेंगे।

 

चरवाहों को पारिस्थितिकी रक्षक बदला गया है

 

तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के उत्तर में स्थित नाग्छू प्रिफेक्चर में विशाल प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र फैलते हैं। प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्रों के कार्यों को बढ़ाने के लिए स्थानीय सरकार ने पारिस्थितिकी रक्षकों के प्रशिक्षण को बहुत महत्व दिया है। उन्हों ने विश्वविद्यालय के अध्यापकों से प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्रों के प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण, पारिस्थितिक सभ्यता निर्माण, दलदल भूमि के संरक्षण और अन्य ज्ञान सीखा। नाग्छू शहर के वानिकी ब्यूरो प्रति वर्ष पारिस्थितिकी रक्षकों का प्रशिक्षण आयोजित करता है। अब नाग्छू शहर के अधीन तीन राष्ट्रीय प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र स्थापित हैं। इन के अलावा एक प्रदेश स्तरीय प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र, छह राष्ट्रीय वेटलैंड पार्क और दस काउंटी स्तरीय प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र भी स्थापित हैं। इन प्राकृतिक क्षेत्रों में कुल 36 विशेष रक्षा स्टेशन भी सुरक्षित हैं और इन में कुल 390 रक्षक कार्यरत हैं। ये रक्षक पहले आसपास के किसान या चरवाहे थे। वर्ष 2015 में इन का संगठन कर विशेष रक्षक दल स्थापित किया गया। और रक्षकों ने अपने रिश्तेदारों को भी बुलाकर संयुक्त तौर पर वातावरण का संरक्षण किया है। ये रक्षक अवैध शिकार के विरूद्ध कदम उठाने के सिवा पारिस्थितिक सद्भावना और प्राकृतिक संरक्षण का प्रसार भी करते हैं। नाग्छू शहर के वानिकी ब्यूरो ने आधुनिक संरक्षण विचार कायम करने के लिए दूसरे क्षेत्रों में से सहायता खोजने का प्रयास भी किया। अब रक्षा स्टेशन एसएलआर कैमरा, जीपीएस लोकेटर, सैटेलाइट फोन और हाई पावर टेलीस्कोप आदि के साथ सुसज्जित हैं। डिजिटल प्रबंधन करने से संरक्षण कार्यों की दक्षता में बहुत सुधार लाया है।

नाग्छू शहर के एक पदाधिकारी के अनुसार तिब्बती पठार के उत्तरी भाग में तिब्बती एंटीलोप, जंगली याक, बर्फ तेंदुए और जंगली गधा आदि पशु जीतिव हैं। लेकिन मानव के लिए यहां का वातावरण अत्यंत मुश्किल है। वर्ष 2017 के अप्रैल में तिब्बती सरकार ने इस क्षेत्र के कुछ लोगों का स्थानांतरण करने का फैसला कर लिया। नव निर्मित निवास में आधुनिक मकान, किंडरगार्टन, चौक और प्रबंधन इमारत आदि सब शामिल हैं। पर इन तिब्बती परिवारों को केवल दस प्रतिशत खर्च उठाना है। और जो गरीब परिवार हैं, उन्हें निःशुल्क तौर पर मकान दिया जाता है। गरीब लोगों का स्थानांतरण करने के बाद प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्रों में जंगली पशुओं को अधिक विशाल घास मैदान प्राप्त होने लगा है। प्राकृतिक संरक्षण की वजह से उत्तरी तिब्बत के संरक्षण क्षेत्रों में जंगली पशुओं की संख्या बहुत बढ़ गयी है। लेकिन ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण से कुछ क्षेत्रों में जंगली पशुओं की हद से ज्यादा वृद्धि होने लगी है। जो पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित किया जा रहा है। अब चीनी वैज्ञानिकों ने तिब्बती पठार पर दूसरा व्यापक सर्वेक्षण शुरू किया है। तिब्बती पठार पर प्रकृति संरक्षण कार्य की नई स्थितियां दिखती रहेंगी। 

 

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