तिब्बत में आपदा राहत कार्य की प्रगति

2018-10-24 15:36:27
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तिब्बत में आपदा राहत कार्य की प्रगति

 

हाल ही में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश और सिचुआन प्रांत की सीमा पर बहती चिनशा नदी पर गंभीर भूस्खलन होने से भरवां झील पैदा हुई। और इस झील के फटने से नदी के तटों पर रहने वाले लोगों को गंभीर खतरा पैदा होता है। आंकड़े बताते हैं कि आपदा से ग्रस्त हुए डेढ़ लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित किया गया है। संबंधित आपदा राहत कार्य सुभीते से चलाया जा रहा है।

तिब्बत के नागरिक मामले विभाग के सामाजिक कल्याण कार्यालय के प्रधान के अनुसार न्यिंग-ची शहर में अभी तक मिलिन काउंटी और मेडोग काउंटी में आपदा ग्रस्त लोगों के पुनर्वास के लिए 25 अस्थायी केंद्र स्थापित किये गये हैं। स्थानीय सरकार ने आपदा ग्रस्त लोगों के लिए पेयजल, खाद्य पदार्थ और तंबू आदि की खूब आपूर्ति की गयी है।  इन के अलावा आपदा ग्रस्त लोगों को सर्दियों में पास करवाने के लिए बहुत से बिस्तर, कपड़े, ईंट चाय और अन्य दैनिक आवश्यकताओं की तैयारी भी की गयी है। सरकारी पदाधिकारी का कहना है कि आपदा ग्रस्त लोगों के रोजाना जीवन की गारंटी के लिए सभी पुनर्वास केंद्रों को सुनिश्चित करना चाहिये। साथ ही आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में उत्पादन की बहाली करने वाले कार्यों पर भी विचार विमर्श किया जा रहा है। विशेषज्ञों ने आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में पुनः डिजाइनिंग करने का काम शुरू किया है ताकि इन क्षेत्रों में रहने वालों को जल्द ही सामान्य जीवन प्राप्त हो सके। सरकार और आपदा राहत विभागों ने तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में आपातकालीन बचाव की व्यवस्था में सुधार लाने तथा व्यापक आपदा राहत क्षमताओं को उन्नत करने पर भी विचार किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार चिनशा नदी पर भूस्खलन से पैदा भरवां झील में प्रति सेकंड 1700 क्यूबिक मीटर पानी का भंडारण संरक्षित किया गया है। इस झील के आसपास रहने वालों के  मकानों, सड़कों, पुलों, और कृषि भूमि आदि को बाढ़ से डूबा गया है। अगर झील फटा हुआ हो, तो नदी के नीचले क्षेत्रों में गंभीर आपदा जन्म दिया जाएगा। आपदा राहत कार्यों की गारंटी के लिए स्थानीय सरकार ने देश के जल संसाधन मंत्रालय और मौसम विज्ञान ब्यूरो आदि संस्थानों के साथ साथ लोगों के स्थानांतरण, भूगर्भीय खतरों की जांच-पड़ताल तथा भरवां झील के खतरे पर विचार विनिमय किया और संयुक्त रूप से राहत कार्य योजनाएं तैयार कीं। केंद्र ने भी चिनशा नदी के गंभीर भूस्खलन के प्रति चौथे स्तरीय आपदा राहत प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया। अभी तक भरवां झील में पानी प्राकृतिक तौर पर बाहर निकलने लगा है, जिससे बांध तोड़ने का खतरा कम होने लगा है। इस के बाद सरकार के राहत कार्यों का केंद्र आपदा ग्रस्त लोगों के पुनर्वास पर बदल गया है। केंद्र और तिब्बत की स्थानीय सरकार, सेना और नागरिक आपदा राहत दलों ने आपदा ग्रस्त लोगों को भारी सहायता प्रदान की। सेना ने अपने बचाव दल, चिकित्सा बचाव टीम और  हेलीकॉप्टर आदि भी आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में भेजा है। अभी तक आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में कोई हताहत की घटना नहीं हुई।  

भूस्खलन होने के बाद तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के नेताओं ने राहत कार्यों को महत्व दिया और उच्च स्तरीय नेताओं ने खुद भी घटनास्थल का दौरा किया। नागरिक मामले विभागों ने आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में बड़ी मात्रा की आपदा राहत सामग्रियों की आपूर्ति की। उन में तंबू, रज़ाई, बिच्छू, कपास कोट, सोने का थैला, जूते, आपातकालीन प्रकाश व्यवस्था और जनरेटर आदि सब शामिल हैं। इन के अलावा नदी के पास रहने वाले लोगों को लाइफ जाकेट, लाइफबॉय तथा चावल एवं सब्जियां आदि भी प्राप्त हैं।

भूस्खलन होने के बाद स्थानीय सरकार ने आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में से सभी लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों तक स्थानांतरित किया और भूस्खलन स्थल को बंद किया। सभी लोगों को खतरनाक क्षेत्रों में प्रवेश होने के लिए मना दिया गया। आपातकालीन राहत दलों ने लोगों को बचाने के साथ साथ सड़क, संचार और बिजली आदि व्यवस्था की बहाली करने में भरसक कोशिश की। 

   

तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में आपदा राहत प्रणाली

 

ध्यान रहे कि तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में प्राकृतिक आपदा निरंतर पैदा होता रहा है। भूकंप, भूस्खलन, बर्फ और बाढ़ आदि प्राकृतिक आपदा अकसर लोगों को परेशान किया गया है और इससे आर्थिक व सामाजिक विकास को भी रोका गया है। प्राकृतिक आपदाओं के मुकाबले में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की सरकार ने हाल ही में आपदा रोकथाम और राहत प्रणाली में सुधार के बारे में एक दस्तावेज़ प्रकाशित की। इस दस्तावेज के मुताबिक पार्टी की 19वीं राष्ट्रीय कांग्रेस में पारित सिद्धांत तथा महासचिव शी चिनफिंग के सिलसिलेवार आदेश से आपदा की रोकथाम के बारे में कामकाजों का विन्यास किया जाएगा। और तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में आपदा की रोकथाम तथा राहत कार्यों की व्यवस्था में सुधार करने का नया उपाय पेश किया जाएगा। इस दस्तावेज ने यह मांग की है कि सरकार के तहत विभिन्न स्तरीय संस्थाओं में आपदा की रोकथाम तथा राहत कार्यों का व्यापक समन्वय किया जाना चाहिये और इसी उद्देश्य में विभिन्न स्तरीय संस्थाओं की संयुक्त सभा की व्यवस्था स्थापित की जानी चाहिये। आपातकालीन विभाग और बाढ़, सूखा,भूकंप, जंगल अग्नि और मौसम संबंधी आपदा की रोकथाम के विभागों, तथा सेना व पुलिस के बीच समन्वय प्रणाली लागू की जाएगी। सरकार आपदा की रोकथाम से संबंधित कार्यों को अपनी आर्थिक व सामाजिक विकास योजना में शामिल कराएगी। इस के अतिरिक्त आपदा की रोकथाम को गरीबी उन्मूलन के साथ भी जोड़ा जाएगा। अंत में स्कूलों, सरकारी संस्थाओं, कारोबारों, समुदाय, ग्रामीण क्षेत्रों और सभी परिवारों में आपदा की रोकथाम पर प्रसार किया जाएगा।

दस्तावेज ने यह भी मांग की है कि आपदा की रोकथाम पर सरकार के विभिन्न विभागों और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के अधिकार और जिम्मेदारी भी साफ़ साफ़ करवानी चाहिये। सेना और पुलिस बल भी आपदा के राहत कार्यों में भाग लेते हैं और इसी संदर्भ में संयुक्त अभ्यास करना चाहिये। ताकि सेना और स्थानीय विभागों के बीच समन्वय की क्षमता को मजबूत किया जाए। दस्तावेज ने यह भी प्रस्तुत किया है कि आपदा के राहत कार्यों में सामाजिक शक्ति और बाजार की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाना चाहिये। मिसाल के तौर पर आपदा की रोकथाम, मुआवजे और पुनर्निर्माण में बीमा उद्योग जैसे बाजार तंत्र की सकारात्मक भूमिका को सुदृढ़ करना चाहिये। और इसी के बारे में कानूनों की स्थापना को भी जोर करना पड़ेगा।

दस्तावेज के मुताबिक आपदा कमी की क्षमता को पूर्ण रूप से बढ़ाने की बड़ी आवश्यकता है। प्रदेश की विभिन्न सरकारों को आपदा की रोकथाम के लिए एकीकृत नेतृत्व विभाग रखना चाहिये। इन में विशेषज्ञ कमेटी भी सुरक्षित होनी चाहिये ताकि विद्वानों और थिंक टैंक की भूमिका को उजागर किया जाए। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों और विभागों के बीच आपदा चेतावनी सूचनाओं का वितरण और साझा करने वाली व्यवस्था भी रखनी चाहिये। राहत सामग्री आरक्षित व्यवस्था का निर्माण करना चाहिये। ताकि आपदा राहत सामग्रियों की गारंटी को मजबूत किया जाए। और इसी संदर्भ में सरकारी नीतियों तथा दीर्घकालीन तंत्र की तैयारी की बड़ी आवश्यकता है।  

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