तिब्बत के सीमांत क्षेत्रों में भी हीटिंग व्यवस्था कायम हुई है

2018-10-15 08:39:40
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तिब्बत के सीमांत क्षेत्रों में भी हीटिंग व्यवस्था कायम हुई है

तिब्बत के सीमांत क्षेत्रों में भी हीटिंग व्यवस्था कायम हुई है 

तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के शाननान प्रिफेक्चर की त्सोना काउंटी 4400 मीटर ऊंचे पठार पर स्थित है। यहां का वार्षिक औसत तापमान शून्य से नीचे 0.6 डिग्री सेल्सियस है। और सबसे कम तापमान शून्य से 37 डिग्री सेल्सियस है। त्सोना काउंटी तिब्बत में सबसे ठंडा क्षेत्र माना जाता है। निवासियों को एक बेहतर जीवन वातावरण तैयार करने के लिए सरकार ने काउंटी नगर में हीटिंग व्यवस्था का निर्माण शुरू किया। अभी तक काउंटी में हीटिंग मकानों का क्षेत्रफल दो लाख 20 हजार वर्ग मीटर तक रहा है। सर्दियों में कमरे में तापमान 26 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। तिब्बती पठार के विशेष वातावरण में लोगों को ऑक्सीजन की आपूर्ति करने के लिए स्थानीय सरकार ने अस्पताल, स्कूल और सार्वजनिक संस्थानों में 24 ऑक्सीजन स्टेशनों का निर्माण भी किया गया, जिससे लोगों के जीवन वातावरण में बहुत सुधार आया है।  

त्सोना काउंटी के पुलिस थाने में कार्यरत थाशी नोर्बू ने कहा कि ठंडा मौसम की वजह से उन्हें ज्यादा कपड़े पहनना पड़ते थे। और गर्मियों के दिनों में भी मोटे मोटे जैकेट पहनना पड़ते थे। पूर्व में कमरे में गर्म बनाने के लिए कोयला या गोबर जलना पड़ता था। वर्ष 2017 में काउंटी नगर के निवासियों में हीटिंग व्यवस्था कायम होने लगी, हर वर्ष अक्टूबर से मई महीने तक हीटिंग की आपूर्ति उपलब्ध होती है। अब घर में गर्म और आरामदायक महसूस होता है। उन्हों ने कहा,“यहां सर्दियों या गर्मियों के दिनें में मौसम हमेशा ठंडा रहता था। हीटिंग व्यवस्था का निर्माण करने के बाद हमारा जीवन बहुत बदल गया है। त्सोना काउंटी के मकानों में तापमान शून्य से 20 डिग्री कम था, आज यह तापमान तीस डिग्री तक जा पहुंचता है। हम कमरे में टी-शर्ट पहनते हैं।”

त्सोना काउंटी के विकास व रुपांतर आयोग के उप प्रधान फू वेन कांग ने कहा कि खराब मौसम की वजह से सरकारी संस्थाओं में कार्यरत अनेक व्यक्तियों ने त्यागपत्र दिया था। लोगों की निवास स्थितियों में सुधार लाने के लिए काउंटी सरकार ने वर्ष 2015 में पाँच करोड़ युवान की पूंजी डालकर हीटिंग व्यवस्था का निर्माण शुरू किया। दो साल बाद निर्माण पूरा करने के बाद लोगों को हीटिंग की आपूर्ति उपलब्ध हो चुकी थी। गौर तलब है कि इस हीटिंग व्यवस्था में स्थलीय गर्मी यानी भूमिगत गर्मी का संसाधन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फू वेन कांग ने कहा,“हमारे यहां एक भूकंपीय क्षेत्र है, पर इस का मतलब है कि यहां के भूमिगत क्षेत्र में भू-तापीय संसाधन मौजूद है। वर्ष 2013 में सरकार ने हीटिंग व्यवस्था का निर्माण करने की तैयारियां शुरू की थी। तब चीनी राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और चीनी इंजीनियरिंग अकादमी ने हमें तकनीकी सहायता प्रदान की। उन्हों ने तकनीकी माध्यम से भू-तापीय संसाधन की साफ जानकारियां खोजने में मदद की, और कुल 28 कुओं की खुदाई की। कुएं से निकाले गये पानी का तापमान 64 डिग्री तक जा पहुंचता है, जो काफी गर्म है।”

फू वेन कांग ने कहा कि अभी तक त्सोना काउंटी में कुल दो लाख वर्ग मीटर के रिहायशी क्षेत्रफल में हीटिंग व्यवस्था कायम हो चुकी है जहां कुल 3200 लोग रहते हैं। उन्हों ने कहा,“हीटिंग व्यवस्था स्थापित करने के बाद लोगों के जीवन में स्पष्ट सुधार आया है। अब हम घर में ही फूलों की देखभाल करते हैं या किताबें पढ़ते हैं। पर पहले हम अकसर चाय घर में बातचीत करने जाते थे, क्योंकि वहां अधिक गर्म था। लेकिन आज हम अपने घर में ही आराम से रहते हैं।”

त्सोना काउंटी में हीटिंग व्यवस्था का निर्माता, हनान प्रांत की हाईह्वा कंपनी की तिब्बती शाखा के प्रमुख फ़ांग चिन ने कहा कि त्सोना काउंटी में हीटिंग व्यवस्था के निर्माण में भू-तापीय तथा जल स्रोत ताप पंप के उपकरण का इस्तेमाल किया गया है। परियोजना में कुल बाईस जल स्रोत ताप पंप का प्रयोग किया गया है। फ़ांग ने कहा,“ऐसी व्यवस्था से जल का तापमान उन्नत स्तर तक पहुंचाया जा सकता है। आम तौर पर हम जल का तापमान 45 डिग्री तक पहुंचाते हैं, और घर में जल तापमान 42 से 45 डिग्री तक हो सकता है। हीटिंग दिलाने के दो मोड चलते हैं यानी हीटर और तल हीटिंग व्यवस्था।”

लेकिन यह बात भी उल्लेख करना है कि त्सोना काउंटी की ऊँचाई 4400 मीटर तक रही है, वहां की हवा पतली होती है। ऑक्सीजन की मात्रा मैदानों का 65% भाग रहती है। वर्ष 2017 में त्सोना काउंटी ने नौ करोड़ युआन की पूंजी डालकर 24 ऑक्सीजन स्टेशनों का निर्माण किया और 35 संस्थानों तथा एक हजार से अधिक निवासियों को ऑक्सीजन की आपूर्ति प्राप्त होने लगी। ऑक्सीजन की आपूर्ति परियोजना के मैनेजर क्वो ड-छ्वान ने कहा ,“आम तौर पर हवा में ऑक्सीजन का 21 प्रतिशत भाग रहता है, शेष में नाइट्रोजन आदि भी शामिल हैं। हम मशीनों से नाइट्रोजन को निकालकर ऑक्सीजन का भंडार करते हैं। फिर पाइप से ऑक्सीजन की घर घर तक आपूर्ति करते हैं। हमारी तकनीक से ऑक्सीजन की एकाग्रता 93% तक पहुंच सकती है। जो अस्पताल में प्रयुक्त ऑक्सीजन के बराबर है।” 

ऑक्सीजन के अभाव से लोगों को चक्कर, सिरदर्द, टिनिटस, मतली, उल्टी, दिल के तेज धड़कन और कमजोरी आदी लगती है।  उनमें कुछ लोग सांस लेने में मुश्किल होने से मर जाते हैं।  ऑक्सीजन की आपूर्ति परियोजना पूरा करने से लोगों को स्वास्थ्य लाने के साथ साथ कार्य क्षमता भी बढ़ी है। त्सोना काउंटी में एक ऐसा वृद्धाश्रम भी स्थापित है, जहां सौ से अधिक तिब्बती बूढ़े आदमी रहते हैं जिन के कोई बच्चे नहीं है और श्रम क्षमता भी नहीं है। इन के कमरों में भी ऑक्सीजन की आपूर्ति उपलब्ध होने लगी है। इन बूढ़ों की औसत आयु 68 साल है और उनकी सेवा में दस कर्मचारी भी हैं। 64 वर्षीय बूढ़ी त्सामचो ने ऑक्सीजन की आपूर्ति उपकरण की चर्चा करते हुए कहा,“ऑक्सीजन आने के बाद हमारा जीवन और अच्छा हो गया है। आज हम आराम से रहते हैं और रात को सर्दी भी नहीं लगती है।”

75 वर्षीय बूढ़े कोनचो त्सेरिंग भी इस वृद्धाश्रम में अनेक साल रह चुके हैं। उन्हों ने कहा कि यहां बूढ़ों का जीवन बहुत आरामदेह है। रोजाना खाना में सब्जियां, सूप और घी व मक्खन चाय समेत पारंपरिक भोजन सब शामिल हैं। बूढ़े ने कहा,“यहां की सेवा बहुत अच्छी है, यहां के कुक,रसोइया और सेवक सब अच्छे हैं।  वे बहुत सावधानी से हमारा ख्याल रखते हैं। कमरे की सफाई हम कभी कभी खूद करते हैं, लेकिन वे जरूर ही रोज कमरे की सफाई करते हैं।”

अब इस वृद्धाश्रम में हीटिंग व्यवस्था, ऑक्सीजन की आपूर्ति, क्लिनिक, वाचनालय, हेयरड्रेसिंग रूम और शतरंज रूम आदि भी स्थापित हैं। बूढ़े लोग मनोरंजन के लिए कभी कभी ग्रीन हाउस में सब्जियों का रोपण करते हैं। कोनचो त्सेरिंग ने कहा कि उन का जीवन बहुत मंगलमय है। 

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