तिब्बत में पर्यटन का जोरों पर विकास

2018-10-08 15:28:49
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तिब्बत में पर्यटन का जोरों पर विकास


तिब्बती पठार विश्व में तीसरा ध्रुव माना जाता है। यहां का विशेष वातावरण और असाधारण प्राकृतिक दृश्य हमेशा देशी विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया जा रहा है।

वर्ष 2018 में तिब्बत में "शीतकालीन यात्रा" शीर्षक बाजार पदोन्नति गतिविधि का आयोजन किया गया। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की सरकार ने वर्ष 2018 से पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अधिमान्य नीति पेश करने का फैसला कर लिया। जिसके मुताबिक तिब्बत के तीर्थस्थलों में टिकट, होटल, वाहन और आयरलैंस आदि सब का अधिमान्य कीमत प्रस्तुत की जाएगी। जो विशेष ट्रेन या चार्टर विमान से पर्यटकों को संगठित कर तिब्बत का दौरा करता है, उन्हें विशेष इनाम भी मिल पाएगा।

हाल ही में तिब्बत में आयोजित एक पर्यटन सेमिनार में भाग लिये विद्वानों ने कहा कि तिब्बत को विश्व का तीसरा ध्रुव कहलाता है। यहां पर्यटन का विकास करने के लिए सबसे अधिक आकर्षण भी मौजूद है। पर तीसरे ध्रुव का विकास करने से पूर्व इस क्षेत्र का संरक्षण करने का विशेष महत्व भी है। तिब्बत में पर्यटन और सांस्कृतिक उद्योग के विकास में असंख्यक मौका मिलेगा। इसमें निजी कारोबारों को अपनी क्षमता दिखाने का सुअवसर मिलेगा। वे लक्ज़री पर्यटन, संस्कृति पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन, पर्वत पर्यटन और एडवेनट्यूरे पर्यटन आदि सेवाएं प्रदान कर सकेंगे। जिनसे तिब्बत में अधिक रोजगार भी तैयार किया जा सके।

उधर कुछ विशेषज्ञों ने अपने अनुसंधान से यह पता लगाया कि तिब्बती पठार में जलवायु के वातावरण में असंतुलन नजर आने लगा है। तिब्बत में गरीबी उन्मूलन दिलाने के साथ साथ पारिस्थितिक संसाधन संरक्षण भी जोरों पर करने की बड़ी जरूरत है। दोनों लक्ष्य साकार करने के लिए तिब्बत में तीसरा ध्रुव नेशनल पार्क रखा जाना चाहिये। साथ ही तिब्बत के शिक्षा कार्यों में पर्यटन संबंधी विशेष प्रशिक्षण पर भी ध्यान रखना चाहिये। अभी तक तिब्बत का दौरा करने वाले पर्यटक मुख्य रूप से कुछ जाने माने तीर्थस्थल जाते रहे हैं। लेकिन यह काफी नहीं है, और वह अरक्षणीय भी रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि तिब्बत में पर्यटन का विकास करने में संस्कृति, स्वास्थ्य और छुट्टी बिताने के मुद्दों को जोर लगाना चाहिये। तिब्बत को विश्व में अद्भुत प्राकृतिक संसाधन, सांस्कृतिक कला और विशेष स्टाइल प्राप्त है। इसलिए तिब्बत में पर्यटन का विकास करने में विशेष रास्ता अपनाना चाहिये। साथ ही तिब्बत में पर्यटन के विकास में इंटरनेट जैसे आधुनिक माध्यम का इस्तेमाल करना चाहिये। बिग डाटा के अनुसार वर्ष 2018 में तिब्बत का दौरा करने वाले पर्यटकों के तिब्बत में ठहरने के समय औसतन लगभग दस दिन तक रहा, जब कि उन का औसत खर्च नौ हजार आठ सौ युआन तक रहा है। तिब्बत का दौरा करने वाले पर्यटकों की संख्या बड़ी तेज़ी से बढ़ती जा रही है।   

हर साल 9 से 15 सितंबर तक तिब्बती लोगों का“स्नान त्यौहार”कहलाता है। तब तिब्बती लोग, बूढ़े या युवक, सब नदियों में स्नान करने जाते रहे हैं। तिब्बती परंपरा के मुताबिक“स्नान त्यौहार”मनाने से न सिर्फ शरीर की सफाई होती है, बल्कि रोगों व आपदाओं की सफाई भी कर सकते हैं। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार प्राचीन काल से ही तिब्बत में लोग हर पाँच दिन के लिए स्नान करते थे। और ऐसी आदत अपनाने से शरीर में से बीमारियों से छुटकारा पाएगा। और नदियों में स्नान करने की आदत तिब्बत में दूसरी आदत यानी औषधीय स्नान से भी जुड़ा हुआ है। औषधीय स्नान को भी अपनी सैद्धांतिक प्रणाली और ऑपरेटिंग नियम प्राप्त है।

दूसरी तरफ तिब्बत में तरह तरह के जंगली पौधों से लोगों के लिए स्वस्थ भोजन तैयार है। तिब्बत के न्यिंग-ची क्षेत्र में हर साल माट्सूटेक भोजन त्योहार की गतिविधि भी चलायी जाती है। माट्सूटेक नामक मशरूम आम तौर पर पाइन पेड़ के नीचे उगने वाला है। हर साल की गतिविधियों में हजारों पर्यटकों को आकर्षित किया जाता है।

न्यिंग-ची क्षेत्र में एक छोटा नगर लुलांग आज भी पर्यटकों को आकर्षित करने का एक तीर्थस्थल बना है। वर्ष 2016 से लुलांग नगर में दस लाख से अधिक देशी विदेशी पर्यटकों का सत्कार किया गया है।

तिब्बत में पर्यटन उद्योग के विकास के दौरान प्राकृतिक वातावरण के संरक्षण को हमेशा से जोर लगाया गया है। उदाहरण के लिए तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के नाग्छू प्रीफेक्चर में अभी तक 14 प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र स्थापित हो चुके हैं और संरक्षण से जुड़े उपकरणों के निर्माण में कुल कई अरब युआन की पूंजी डाली गयी है। नाग्छू की सरकार ने पेयजल स्रोतों की सुरक्षा को सुदृढ़ किया है और जल स्रोत में कई पर्यावरण संरक्षण परियोजनाएं लागू की हैं। नाग्छू क्षेत्र में शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोत संरक्षण कार्यों को मजबूत किया गया है। स्थानीय सरकार का मानना है कि तिब्बत में आर्थिक निर्माण करते समय वातावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिये। आजकल यह सभी लोगों की आम सहमति बन गयी है। सरकार अपने कार्यों में तिब्बत इस दुनिया में अंतिम शुद्ध भूमि का यथासंभव संरक्षण करने की जिम्मेदारी उठाती रही है।    

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