प्रथम राष्ट्रीय युवा तिब्बती अध्ययन सम्मेलन समाप्त

2018-10-01 15:48:32
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प्रथम राष्ट्रीय युवा तिब्बती अध्ययन सम्मेलन समाप्त

प्रथम राष्ट्रीय युवा तिब्बती अध्ययन सम्मेलन  

वर्ष 2018 के 21 सितंबर को प्रथम राष्ट्रीय युवा तिब्बती अध्ययन सम्मेलन चीन की राजधानी पेइचिंग में समाप्त हुआ। देश के विभिन्न क्षेत्रों, उनमें थाइवान और हांगकांग भी शामिल हैं, के युवा विद्वानों ने सम्मेलन में अपने अपने शोध परिणाम और विचार का परिचय दिया।

चीन के तिब्बती विज्ञान अनुसंधान केंद्र के तहत युवा तिब्बत अनुसंधान विभाग के प्रधान लाशांका ने कहा कि सम्मेलन में भाग लिये जो विद्वान हैं, वे सब 30-40 साल के बीच में युवा हैं। पर उन का शोध का काम मजबूत है। ये विद्वान हांगकांग व थाइवान समेत देश के विभिन्न क्षेत्रों के कालेज़ों, अनुसंधानशालों से आये हैं। और उन का अनुसंधान राजनीति, अर्थव्यवस्था, कानून, समाज, जन जीवन, धर्म, इतिहास, भाषा, कला और चिकित्सा आदि सभी पहलुओं से संबंधित हैं।  

आज चीन में तिब्बत का अनुसंधान करने के कुछ युवा विद्वानों ने तीन चार भाषाओं में महारत हासिल की है, जो तिब्बत के अनुसंधान करने में बहुत मददगार है। सम्मेलन में अनेक विद्वानों ने तिब्बती भाषा में ही रिपोर्ट प्रस्तुत की है। युवा तिब्बत अनुसंधान विभाग की महासचिव चांग ली वेन ने कहा कि सम्मेलन के आयोजन से चीन में युवा अनुसंधानकर्ताओं के कार्यों का मूल्यांकन किया गया है। इस के बाद सभी युवा विद्वानों के थीसिस को तिब्बती अध्ययन सेमिनार के संग्रह में शामिल कराया जाएगा, और सम्मेलन में जारी किये गये थीसिस को अगले साल के राष्ट्रीय तिब्बती अध्ययन सम्मेलन को भी प्रस्तुत किया जाएगा। 

चीन के तिब्बती विज्ञान अनुसंधान केंद्र के महासचिव झेंग त्वेई ने कहा कि युवा अनुसंधानकर्ताओं को तिब्बत और देश के विकास से संबंधित समस्याओं का समाधान करने के लिए पूरी कोशिश करनी चाहिये। चीनी सोशल अकादमी के आधुनिक इतिहास पर शोधकर्ता शू ची मीन ने कहा कि बीते साठ सालों में केंद्र ने तिब्बत के विकास के लिए भारी सहायता प्रदान की है, जिससे तिब्बत के प्रति भीतरी इलाकों की जनता की विशेष भावना तथा तिब्बत से संबंधित कार्यों का महत्व जाहिर हो गया है। केंद्र ने दीर्घकाल तक तिब्बत में पार्टनर सहायता की नीति अपनायी है, जो तिब्बत के आर्थिक व सामाजिक विकास के लिए कारगर साबित है। कुछ युवा विद्वानों ने बताया कि तिब्बत में सामाजिक परिवर्तन आर्थिक विकास से आधारित होना चाहिये, साथ ही तिब्बत में आर्थिक विकास इस क्षेत्र के इतिहास, समाज तथा संस्कृति के आधार पर किया जाना चाहिये। तिब्बत की संस्कृति बौद्ध धर्म से जुड़ी हुई है। तिब्बती समाज का भावी विकास भी इस पृष्ठभूमि से अलग नहीं हो सकेगा।

चीन के तिब्बती विज्ञान अनुसंधान केंद्र के तहत युवा तिब्बत अनुसंधान विभाग के प्रधान लाशांका ने कहा कि पार्टी की 19वीं राष्ट्रीय कांग्रेस ने युवा पीढ़ी से हार्दिक आशा जतायी कि वे देश के पुनरोद्धार के लिए यथासंभव कोशिश करेंगे। युवा तिब्बत अनुसंधान विभाग की स्थापना भी इसी सिद्धांत के मुताबिक वर्ष 2017 में की गयी है। इस संस्थान ने युवा विद्वानों का संगठन कर तिब्बत के अनुसंधान में अनेक प्रगतियां हासिल की हैं। रुपांतर और खुली नीति अपनाने से अभी तक पार्टी और केंद्र सरकार ने तिब्बत में जातीय संस्कृति के संरक्षण और उत्तराधिकार के बारे में अनेक नीतियों का कार्यान्वयन किया। चीन में बहुत से विद्वानों ने तिब्बत के आर्थिक निर्माण और सामाजिक परिवर्तन के बारे में अपना अपना रचनात्मक शोध परिणाम पेश किया है। जिससे विश्व में चीन के तिब्बत अनुसंधान कार्यों का प्रभाव बढ़ाया गया है।   

 

चीन में तिब्बती विज्ञान अनुसंधान केंद्र के बारे में

 

चीनी तिब्बती विज्ञान अनुसंधान केंद्र(China Tibetology Research Center) की स्थापना वर्ष 1986 के मई में हुई थी। जो मुख्य रूप से तिब्बती जाति की संस्कृति तथा चीन में तिब्बती बहुल क्षेत्रों के इतिहास, मौजूदा स्थिति तथा विकास पर शोध करने का मिशन निभाता है। चीनी तिब्बती विज्ञान अनुसंधान केंद्र के महासचिव और उपमहासचिव का पद सुरक्षित है, जो इस संस्था के शासन विभाग के प्रमुख हैं। केंद्र के तहत भिन्न भिन्न विभाग भी हैं, जो अकादमिक समिति, परामर्श और मूल्यांकन एजेंसी, प्रशिक्षण, अकादमिक विनिमय, डेटा सेवा, प्रकाशन तथा सांस्कृतिक प्रदर्शन आदि के जिम्मेदार हैं।  

पार्टी व केंद्र सरकार इस संस्था को महत्व देती हैं। वर्ष 2010 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय कमेटी तथा राज्य परिषद ने देश के पांचवें तिब्बती कार्य सम्मेलन के आयोजन के दौरान यह आग्रह किया कि चीन में तिब्बत विज्ञान के अनुसंधान पर जोर लगाना चाहिये और चीनी तिब्बती विज्ञान अनुसंधान केंद्र की लीडिंग और समन्वय की भूमिका अदा करवाना चाहिये। केंद्र की अकादमिक समिति कुछ जाने माने विद्वानों से गठित है, जो अकादमिक परामर्श और समीक्षा करने का काम करते हैं। 174 व्यक्तियों से गठित इस समिति में हान जाति और तिब्बती जाति के अलावा मंगोलिया, ह्वेई, नाशी, ई और पाई आदि जातियों के लोग भी शामिल हैं।  

चीनी तिब्बती विज्ञान अनुसंधान केंद्र के तहत सोशल इकोनॉमिक्स संस्थान, इतिहास संस्थान, धर्म संस्थान, समकालीन अध्ययन संस्थान, तिब्बती चिकित्सा संस्थान, पुस्तकालय और तिब्बती विज्ञान प्रकाशन हाउस आदि विभाग भी हैं। केंद्र का एक वेबसाइट भी है, जिस पर केंद्र की सभी जानकारियां दिखती हैं। चीनी तिब्बती विज्ञान अनुसंधान केंद्र अपनी स्थापना से अभी तक बहुत काम कर चुके हैं। वर्ष 2013 के जुलाई माह में केंद्र ने चीनी शब्दकोश-तिब्बती स्क्रॉल का संशोधन शुरू किया। केंद्र सरकार ने भी इस काम का जोरों पर समर्थन किया। योजनानुसार कुल मिलाकर पंद्रह सालों के भीतर तिब्बती इतिहास, राजनीति, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और सेना के बारे में हजारों किस्म किताबें इस संग्रह में शामिल किया जाएगा।

वर्ष 2011 के मई माह में चीनी तिब्बती विज्ञान अनुसंधान केंद्र ने अपना प्रथम चीनी तिब्बती अध्ययन ईयर-बुक प्रकाशित किया। इस ईयर-बुक में वर्ष 1949 से 2008 तक चीन में तिब्बती अध्ययन  के परिणाम का सारांश किया गया है। चीनी तिब्बती विज्ञान अनुसंधान केंद्र के तहत तिब्बती विज्ञान प्रकाशन हाउस ने भी कुल 645 किस्म पुस्तकों का प्रकाशन किया है। इस के अधीन चीनी, तिब्बती और अंग्रेजी तीन भाषाओं से चीनी तिब्बती अध्ययन नामक एक पत्रिका भी है। पत्रिका के अभी तक 140 से अधिक मुद्दे प्रकाशित हो चुके हैं।

 

 

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