तिब्बत में जाने वाले दूसरे रेल मार्ग का निर्माण

2018-07-09 18:38:59
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तिब्बत में जाने वाले दूसरे रेल मार्ग का निर्माण


वर्ष 2006 में चीन के छींगहाई-तिब्बत रेल मार्ग का निर्माण समाप्त किया जाने के बाद चीन के भीतरे इलाकों से तिब्बत जाने की बड़ी सुविधा मिल गयी है । आज तिब्बत में जाने वाले दूसरे रेल मार्ग यानी सिचुआन-तिब्बत रेल मार्ग का निर्माण करने की योजना भी तैयार हो चुकी है।

सिचुआन-तिब्बत रेल मार्ग 1700 किलोमीटर लम्बा होगा जिस के निर्माण से सिचुआन प्रांत से तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की ओर जाने के लिए बहुत सुविधा मिल पाएगी। लेकिन सिचुआन-तिब्बत रेल मार्ग का निर्माण आज तक समाप्त न करने का कारण यही है कि यह मार्ग विश्व में सबसे मुश्किल क्षेत्रों में से गुजर जाएगा। योजनानुसार 1700 किलोमीटर लम्बा सिचुआन-तिब्बत रेल मार्ग सिचुआन प्रांत की राजधानी छंगतू शहर से शुरू होकर याआन, कांगडींग, सिनतुछ्याओ और न्यिंग-ची आदि शहरों से गुजर कर तिब्बत की राजधानी ल्हासा तक जा पहुंचेगा। अब निर्माण का कार्य बड़ी तेज़ी से किया जा रहा है।

सिचुआन-तिब्बत रेल मार्ग के तट पर क्षेत्रों की भूवैज्ञानिक स्थितियां और मौसम की स्थितियां बहुत अलग हैं। जहां भूस्खलन आदि प्राकृतिक आपदाओं से ग्रस्त होते रहते हैं। चीनी विज्ञान अकादमी के जल संसाधन विभाग के माउंटेन आपदा और पर्यावरण संस्थान के चीफ इंजीनियर याऊ योंग ने कहा कि सिचुआन-तिब्बत रेल मार्ग कुल 21 बर्फीले पहाड़ों से गुजरता है, जिन सब की ऊंचाई चार हजार मीटर से ऊपर है। इसके सिवा रेल मार्ग को चिनशा नदी और यालूजांगबू नदी समेत कुल 14 नदियों से भी पारना पड़ेगा। याऊ योंग ने कहा कि रेल मार्ग के निर्माण से इन क्षेत्रों में आपदा और गंभीर बनने का खतरा मौजूद है और इससे निर्माण को भी खतरे में डाला जा सकता है। उन्हों ने कहा,“सिचुआन-तिब्बत रेल मार्ग लूंगमेनशान, गैनत्सी लूहो और यालूजांगबू नदी तीन प्रमुख भूकंपीय क्षेत्रों से पारकर गुजरेगा। इन क्षेत्रों में गंभीर भूकंप अक्सर घटित होता रहा है और भूकंप के साथ भूस्खलन भी चल आएगा। जो रेल मार्ग के निर्माण को भारी चुनौती है। दूसरी तरफ छंगतू शहर की ऊँचाई केवल तीन सौ मीटर है जबकि तिब्बती पठार की ऊँचाई पाँच हजार मीटर तक रहती है। दोनों क्षेत्रों के बीच ऊंचाई का अंतर कई हजार मीटर है। इस के सिवा इस क्षेत्र में वर्षा की मात्रा भी बड़ी होती है जिससे भी रेल मार्ग के निर्माण पर प्रभाव पड़ेगा।”     

चीनी विज्ञान अकादमी ने सिचुआन-तिब्बत रेल मार्ग के निर्माणाधीन क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा की स्थितियां तथा रोकथाम तकनीकी परीक्षण का अनुसंधान किया।  चेंगदू माउंटेन इंस्टीट्यूट, चीनी द्वितीय रेलवे संस्थान और चीनी विज्ञान अकादमी के भूविज्ञान संस्थान ने इसमें शामिल किया। इन संस्थानों ने सिचुआन-तिब्बत रेल मार्ग के निर्माणाधीन क्षेत्रों में भूस्खलन की स्थितियों तथा रोकथाम तकनीकों का पूर्ण रूप से विश्लेषण और अनुसंधान किया और कुल दस से अधिक तकनीकी परामर्श रिपोर्टें प्रस्तुत की गयी हैं। याऊ योंग इस परियोजना के जिम्मेदार विशेषज्ञ हैं, उन के अनुसार अनुसंधान कार्य से सिचुआन-तिब्बत रेल मार्ग के निर्माणाधीन क्षेत्रों में माउंटेन आपदा की रोकथाम के लिए वैज्ञानिक सहायता प्रदान की गयी है। उन्हों ने कहा,  “रेल मार्ग का लाइन तय करने के लिए इस क्षेत्र में भूस्खलन होने वाले खतरे आदि आपदाओं का पूर्वानुमान करना चाहिये। अगर स्थितियां गंभीर हैं, तो हमें सुरंग का निर्माण करने का फैसला लेना पड़ता है। लेकिन सुरंग का निर्माण करने में भारी निवेश लगाना पड़ेगा। अगर भूस्खलन का खतरा नियंत्रित हो सकता है, तो हम पुल बनाकर इस क्षेत्र में से गुजरने का फैसला ले लेंगे। क्योंकि हम यही चाहते हैं कि सिचुआन-तिब्बत रेल मार्ग एक पर्यटन मार्ग बनेगा, और पर्यटक रेल गाड़ी में बैठकर दोनों तटों का सुन्दर दृश्य देख पाएंगे।”

योजनानुसार सिचुआन-तिब्बत रेल मार्ग गैनत्सी तिब्बती स्वायत्त स्टेट के कांगडींग शहर के री-डी घाटी से गुजरेगा। जहां भूस्खलन आदि प्राकृतिक आपदा अक्सर पैदा होते रहे हैं। इसलिए इस क्षेत्र में माउंटेन आपदाओं का मूल्यांकन करने और इन्हें रोकने का अत्यंत महत्व होता है।  सिचुआन-तिब्बत रेल मार्ग के जनरल डिजाइन संस्थान के वरिष्ठ इंजीनियर वांग तुंग ने कहा कि चेंगदू माउंटेन इंस्टीट्यूट ने सिचुआन-तिब्बत रेल मार्ग के कुछ निर्माणाधीन क्षेत्रों में माउंटेन आपदाओं के खतरे की विश्लेषण रिपोर्ट प्रस्तुत की और भिन्न भिन्न स्थितियों में भूस्खलन पैदा होने के पैरामीटर और खतरे की रेंज का पूर्वानुमान भी किया। उनके कार्यों के आधार पर इस रेल मार्ग का लाइन चुना गया। वांग तुंग ने कहा कि चेंगदू माउंटेन इंस्टीट्यूट के मूल्यांकन के मुताबिक इस रेल मार्ग के डिजाइन का वैज्ञानिक आधार भी उपलब्ध है। वांग तुंग ने कहा,“री-डी घाटी के क्षेत्र में दर्जनों किलोमीटर की दूरी में रेलवे को 1,300 मीटर की ऊंचाई पर चढ़ना पड़ेगा। ऐसे क्षेत्र में रेलवे का निर्माण अत्यंत मुश्किल है। और इसी क्षेत्र में भूस्खलन होने और पहाड़ ढहने के खतरों से बचने की बड़ी आवश्यकता है। हम ने पूर्व अनुसंधान के अनुसार इस क्षेत्र में रेल मार्ग का लाइन और पुल की ऊँचाई आदि भी तय किया।”

उधर तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के बासू से न्यिंग-ची तक के क्षेत्र में जलवायु और भूवैज्ञानिक वातावरण और अधिक जटिल है। भारी बारिश गिरने और बर्फ पिघलने से भूस्खलन जन्म होता रहा है। इसी क्षेत्र में रेल मार्ग का निर्माण करना अत्यंत मुश्किल है। चेंगदू माउंटेन इंस्टीट्यूट के सहयोगी शोधकर्ता ल्यू चिनफंग ने कहा कि उन के संस्थान ने इस क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं के किस्म, स्वरूप और पैमाना आदि स्थितियों और आपदाओं को रोकने वाले उपाय का भी अनुसंधान कर दिया। जिससे सिचुआन-तिब्बत रेल मार्ग के इस क्षेत्र में गुजरने के लिए उपयोगी सुझाव पेश किया गया है। उन्हों ने कहा,“अगर एक पुल के माध्यम से मलबे प्रवाह ग्रस्त क्षेत्र से गुजर जाना हो,  तो इस पुल की ऊँचाई कम से कम 12 मीटर तक पहुंचना पड़ता है। कुछ इंजीनियरिंग कदम उठाने के बाद रेल मार्ग मिट्टी-चट्टान प्रवाह से ग्रस्त क्षेत्र में से गुजर सकता है।”

पता चला है कि सिचुआन-तिब्बत रेल मार्ग के न्यिंग-ची से ल्हासा तक, छंगतू से याआन तक भाग का निर्माण किया जा चुका है। कांगडींग से  न्यिंग-ची तक भाग भी निर्माणाधीन है। इस रेल मार्ग का निर्माण चीन में सबसे मुश्किल मार्ग माना जाता है। इतने जटिल वातावरण में एक रेल मार्ग का निर्माण करने में बड़ी मात्रा की वैज्ञानिक व तकनीकी समस्याओं को निपटारना पड़ेगा। उन में माउंटेन आपदाओं का समाधान करना कुंजीभूत तत्व भी है। याऊ योंग ने कहा,“हमारे देश के तकनीकी स्तर का ताल्लुक है, हम इस रेल मार्ग के निर्माणाधीन क्षेत्र में माउंटेन आपदाओं का मुकाबला करने में काफी विश्वस्त हैं। इस क्षेत्र में भूस्खलन, मलबे प्रवाह, मिट्टी-चट्टान प्रवाह और बाढ़ आदि प्राकृतिक आपदाओं के वितरण की काफी जानकारियां प्राप्त हो चुकी हैं। तब तो हम रेल मार्ग का लाइन तय करते समय खतरनाक क्षेत्रों से बच सकेंगे। इस के अतिरिक्त माउंटेन आपदाओं की रोकथाम करने के लिए बहुत सी तकनीकों और उपायों का प्रयोग भी किया जाएगा।”

 

 

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