तिब्बत में काम करने वाला थूच्या टेक्नीशियन

2018-06-06 08:14:22
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तिब्बत में काम करने वाला थूच्या टेक्नीशियन

तिब्बत में काम करने वाला थूच्या टेक्नीशियन

थूच्या जाति मुख्य तौर पर दक्षिणी चीन में फैलने की एक अल्पसंख्यक जाति ही है। देश के आर्थिक विकास में अपना योगदान पेश करने के लिए थूच्या जाति के जवान भी देश के दूसरे क्षेत्रों में काम करने जाते रहते हैं।

तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के न्यिंग-ची शहर में काम करने वाला थूच्या टेक्नीशियन छेन चेन अपनी कृषि सपना को पूरा करने के लिए तिब्बती पठार आकर अपना गाचेनछ्ये कृषि विकास कारोबार स्थापित किया। अपनी कहानी सुनाते हुए छेन चेन ने कहा,“मेरा मानना है कि सफल होने के लिए आदमी को निष्ठा या पागल होने की भावना प्राप्त होना है। मैं ने वर्ष 1995 में अपनी सरकारी नौकरी से त्याग दिया और अपने को छेन चेन का नाम बदल दिया। इस का मतलब है सपना को पूरा करना। मैं हमेशा कृषि में संलग्न होना चाहता था। लेकिन इससे पहले मुझे ऐसा करने का मौका नहीं मिला।”

छेन चेन का घर हूपेइ प्रांत के एनशी थूच्या-मियाओ स्वायत्त प्रीफेक्चर में है। कालेज में से स्नातक होने के बाद उन्हें अपने शहर में एक नौकरी मिली। लेकिन अपनी स्थितियों से संतुष्ट न होने के लिए उन्होंने पद से इस्तीफा दिया। वर्ष 1999 में वे तिब्बत में काम करने गये और वर्ष 2003 में वे स्वायत प्रदेश के विज्ञान व तकनीक विभाग में कृषि विज्ञान व तकनीक आयुक्त बने। वर्ष 2008 से उन्हों ने न्यिंग-ची शहर के मेटोक कांउटी में कृषि तकनीक के मार्ग निर्देशक का पद सँभाला। उन की मदद से मेटोक कांउटी में चावल का पैदावार प्रति मू के लिए पांच सौ किलो तक जा पहुंचा। और सब्जी के उत्पादन से स्थानीय बाजार में सब्जियों की कीमतें भी बहुत गिर पड़ीं। वर्ष 2011 में छेन चेन न्यिंग-ची शहर वापस गये और बड़ी योजना की तैयारियों में काम करना शुरू किया। क्योंकि उस समय न्यिंग-ची शहर में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या निरंतर बढ़ती रही, पर सब्जियों की आपूर्ति अपर्याप्त रही। न्यिंग-ची शहर की मीलीन कांउटी के प्रमुख त्सेवांग निमा ने कहा,“तिब्बत में खासकर न्यिंग-ची क्षेत्र में कृषि का विकास करने की अच्छी शर्तें तैयार हैं। लेकिन पहले हमें सछ्वान, युन्नान और गैनसू आदि प्रांतों से सब्जियां परिवाहित करनी पड़ती थीं। आज हमारे यहां 80 प्रतिशत की सब्जियों की खुद आपूर्ति हो सकती है। दाम निरंतर गिरने के साथ-साथ सब्ज़ियों की गुणवत्ता भी बढ़ती जा रही है।”

मीलीन काउटी की सरकार को जो चाहिये वह है कि अपने किसानों को सब्जियां बोने की क्षमता प्राप्त हो सकी। इसलिए काउटी की सरकार ने किसानों में पूंजी की भत्ता और तकनीक प्रस्तार संबंधी नीतियां पेश की। लेकिन तकनीकी शक्तियां कमजोर होने की वजह से मीलीन काउटी में सब्जियां बोने की स्थिति संतोषजनक नहीं है। काउटी के कृषि मशीनरी संवर्धन स्टेशन के प्रधान त्सेवांग पींगछो ने कहा,“प्रमुख समस्या है कि तकनीक की क्षमता कमजोर है। क्योंकि हमारे किसानों को सब्जियां बोने की कौशल नहीं प्राप्त है। ग्रीनहाउस के बिना सब्जियां बोना मुश्किल है। यहां की जमीन पर केवल आलू, मूली और गोभी आदि की खेती हो सकती है।”

तिब्बत के जैसे प्राकृतिक वातावरण में केवल ग्रीन हाउस के जरिये सब्जियों और फलों की खेती की जा सकती है। मीलीन काउटी की सरकार ने इसी संदर्भ में अनुभवी विशेषज्ञ छेन चेन के साथ संपर्क किया और इन के साथ “कंपनी + अड्डे + किसान”के रूप में " सब्जी की टोकरी" परियोजना लागू करने का फैसला किया। दोनों पक्षों के सहयोग में मीलीन काउटी के दो सौ मू के ज़मीन पर 80 ग्रीन हाउस स्थापित किये गये जहां सब्जियों का रोपण किया जाता है। छेन चेन ने योजना का परिचय देते हुए कहा,“यहां निर्मित ग्रीन हाउस भीतरी इलाकों के से बिल्कुल अलग हैं। हम अपने ग्रीन हाउस के ऊपर डबल प्लास्टिक झिल्लियों का कवर करते हैं। ऐसा ग्रीन हाउस दिन में गर्मी का अवशोषण करता है, जबकि रात को इस के अन्दर में काफी गर्म होता है। यह हमारे दसेक सालों के अनुभवों का परिणाम है।” 

तिब्बती पठार एक ऐसा स्थल है जहां दिन में तेज सूर्य होता है जबकि रात में तापमान काफी निम्न बनता है। लेकिन ग्रीन हाउस में बोई गई सब्जियों के लिए हद से उन्नत या निम्न तापमान दोनों सही नहीं है। उधर तेज हवा चलने से भी भारी नुकसान पैदा हो सकता है। छेन चेन ने न्यिंग-ची क्षेत्र में दसेक सालों के लिए कृषि तकनीकों का परीक्षण किया। कृषि तकनीक जमाते समय उन्हें अपनी तिब्बती पत्नी के साथ भी जानने का मौका मिला। उन्हों ने कहा,“हम ने वर्ष 2006 में विवाह किया। इससे पहले मैं कृषि और पशुपालन ब्यूरो में एक तकनीशियन का काम करता था। मेरी पत्नी एक मेहनती महिला है, हम काम करते एक दूसरे से प्यार करने लगे।”पहले की याद करते हुए छेन चेन ने कहा कि कठोर समय में पत्नी ने उसकी बड़ी मदद की। कड़ी मेहनत के बाद आज उन के अपने कारोबार प्राप्त हो गये हैं।

वर्ष 2016 के अक्टूबर में मीलीन काउटी के सब्जी अड्डे का निर्माण शुरू होता था। यहां उत्पादित सब्जियां ल्हासा शहर तक भी बेची गयी है। मीलीन क्षेत्र की एक पदाधिकारी गैन ली ह्वा ने कहा,“इससे लोग निकट से ही सस्ते व ताज़ा सब्जियां खरीद सकते हैं। पहले हमारे यहाँ सर्दियों के दिन सब्जियां मांस से भी अधिक महंगी थीं। स्थानीय सरकार ने सब्जियों की आपूर्ति की समस्या हल करने के लिए अथक प्रयास किया। दूसरी तरफ सब्ज़ी कंपनी ने किसानों के हाथ से किराए पर जमीन ले लिया, जिससे किसानों को भी बेहत्तर आय प्राप्त हो गयी है।”

मीलीन कांउटी के प्रमुख त्सेवांग निमा के अनुसार किसानों और कृषि कारोबार के बीच सहयोग करने से आधुनिक सब्जी उत्पादन का विकास करने के लिए अच्छा है। उधर सरकार के पास गुणवत्ता का पर्यवेक्षण करने तथा बाजार की कीमतों को समन्वयित करने की जिम्मेदारी है। उन्हों ने कहा,   “सरकार के तहत कृषि उत्पाद परीक्षण केंद्र को सभी उत्पादों की गुणवत्ता और मिट्टी की संरचना का परीक्षण करना चाहिये। और इसके बाद परीक्षण करने के सभी परिणाम को भी पंजीकृत किया जाना चाहिए। साथ ही सरकार ने कारोबार से सब्जियों की कीमतों को गिरवाने का प्रयास भी किया है।”

सब्ज़ी कारोबारों की स्थापना से आसपास क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुविधाएं मिलती हैं। काउटी में रहने वाली तिब्बती महिला यातांग अकसर सब्जी कारोबार के यहां से ताजा सब्जियां और फल खरीदने जाती हैं। उन्हों ने कहा,“यहां से सब्जियां खरीदना आसान है और सस्ता भी। हम रोज़ सब्जी खरीदकर खाना बनाते हैं। लेकिन पहले हमें केवल काउटी नगर से ही गोभी और टमाटर जैसी कई किस्म की सब्जियां खरीदना पड़ा। आज हमारे यहां सब्जियां बहुत हैं और तरबूज भी उपलब्ध है।”

उधर छेन चेन ने भी तिब्बत में कृषि तकनीक के विकास का अपना सपना साकार किया है। अब उन के दो बच्चे भी हैं। वह तिब्बती पठार की इस भूमि के प्रति बहुत आभार रहते हैं और उन्हों ने अपनी कंपनी को गाचेनछ्ये का नाम दिया। उन्हों ने कहा, “मेरी कंपनी का नाम है गाचेनछ्ये, तिब्बती भाषा में इस का मतलब है धन्यवाद। तिब्बत में काम करने से मेरा सपना साकार हो गया है। इसलिए मेरी कंपना का नाम है गाचेनछ्ये।”

 

 

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