तिब्बत के शाननान शहर में वृक्षरोपण में संलग्न "पेड़ बाबू"

2018-05-15 08:48:50
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तिब्बत के शाननान शहर में वृक्षरोपण में संलग्न "पेड़ बाबू"

तिब्बत के शाननान शहर में वृक्षरोपण में संलग्न "पेड़ बाबू"

तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के शाननान शहर की चानांग काउंटी यालूजांगबू नदी के मध्य भाग के तट पर स्थित है। इस क्षेत्र में ज्यादा रेतीली हवा चलती है और कम बरसात होती है। इसलिए इस क्षेत्र में वृक्षरोपण लगाने का विशेष महत्व प्राप्त है। चानांग काउंटी में वर्षों के लिए वृक्षरोपण में संलग्न श्री पैनच्यू को "पेड़ बाबू" का नाम भी अर्पित किया गया। लोगों का कहना है कि बाबू पैनच्यू वर्षों के लिए वृक्ष रोपण लगाने में संलग्न होते रहे और उनके द्वारा लगाये गये पेड़ों की जीवित रहने की दर अधिक है। इस का कारण है कि पैनच्यू ने पेड़ लगाने में अपनी गहरी भावना डाली है।

59 वर्षीय पैनच्यू शाननान शहर की चानांग काउंटी के जूंगत्वेई गांव में रहते हैं। वर्ष 2005 में पैनच्यू को नेशनल वृक्षारोपण मेडल अर्पित किया गया, और दूसरे वर्ष उन्हों ने राष्ट्रीय वृक्षारोपण आदर्श का गौरव भी जीत लिया। अपनी कहानी सुनाते हुए पैनच्यू ने कहा,“जब मैं 17 वर्ष का था,  तो मैं ने पहाड़ों में भेड़ चराई करना शुरू किया। कभी कभार मैं ने पहाड़ों में कुछ छोटे पेड़ों का रोपण किया। कई साल बाद ये पेड़ बड़े हो गये। और मैं पेड़ों के नीचे के छाये में बैठकर चाय बना सकता था। पतझड़ के दिनों में मेरे भेड़ इन पेड़ों के पत्ते भी खा सकते थे। तब मुझे लगा था कि पेड़ लगाने का बहुत लाभ था। इस के बाद मैं ने वृक्षारोपण करना शुरू किया।”

वर्ष 1990 में शाननान शहर के वानिकी ब्यूरो ने यालूजांगबू नदी के तटों पर वृक्षारोपण की परियोजनाएं चलायी। पैनच्यू ने भी इस परियोजना में भाग लिया। उन्हों ने 12 व्यक्तियों का एक दल लेकर पेड़ लगाने, कुआँ खोदने और जंगल में वन संरक्षण घर का निर्माण करने आदि का काम भी कर लिया। वर्ष 1991 में शाननान शहर के वानिकी ब्यूरो ने पैनच्यू को पाँच हैक्टर विशाल सुनसान जमीन सौंप दिया। जहां पर पैनच्यू ने एक नर्सरी स्थापित किया। दूसरे वर्ष में उन्हों ने एक और विशाल नर्सरी का निर्माण किया। वर्ष 2004 में पैनच्यू ने अपने जन्मस्थल में पंद्रह हैक्टर विशाल सुनसान जमीन को अनुबंधित तौर पर ले लिया। उन्हों ने गांव की शासन कमेटी के साथ 50 सालों के ठेके पर हस्ताक्षर किये। पैनच्यू ने वानिकी ब्यूरो की छह लाख युवान की सहायता से इस क्षेत्र में तीन ग्रीन हाउस निर्मित किये और पेड़-पौधों का रोपण करना शुरू किया। लेकिन सुनसान जमीन पर पेड़ लगाने में बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। पैनच्यू ने कहा,“उस समय मुझे बिजली का अभाव पड़ने की समस्या थी। हम ने कुआँ खोदने में सफल किया, पर बिजली की आपूर्ति न होने से पानी खींचना मुश्किल था। इसतरह मुझे ट्रैक्टर चलाकर नदी में से पानी वापस लाना पड़ता था।”

दूसरी समस्या है कि पेड़ लगाने में जीवित रहने की दर केवल 30 प्रतिशत रही। पैनच्यू को भीतरी इलाकों के अनेक क्षेत्रों में जाकर युवा पौधे खरीदना पड़ा। अंततः उन्होंने कुल 56 किस्म पेड़ चुन लिये जो तिब्बती पठार के वातावरण के अनुकूल हैं। अनेक वर्षों के अथक प्रयास से पैनच्यू ने अपने नर्सरी का निरंतर विस्तार किया। आज यह नर्सरी लगभग चालीस हैक्टर विशाल हो गया है। पैनच्यू ने कहा कि नर्सरी का निर्माण करने में इतनी कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद उन्हों ने अपनी कोशिश को छोड़ने पर कभी नहीं सोचा। उन्हों ने कहा,“मैं ने छोड़ने पर कभी नहीं सोचा। मेरा विचार है कि मैं जरूर ही पेड़ लगाने में सफल करूंगा।”पैनच्यू की बातों से यह जाहिर है कि उन्हें पेड़ों के प्रति गहरी भावना मौजूद है। पैनच्यू के छोटे बेटा रोबू ने कहा कि पैनच्यू ने पेड़ों को अपने परिवारजनों से ज्यादा प्यार दिया है। और यहां तक कि उन्होंने खतरे के बावजूद भी पेड़ों की रक्षा की थी। रोबू ने कहा,“मुझे याद है कि बहुत पहले एक दिन पिता जी ने बाढ़ को रोकने के लिए खतरे के बावजूद बुलडोज़र चलाकर पानी में बांध को मजबूत किया।”

पैनच्यू ने नर्सरी के निर्माण में अपनी सभी शक्ति और भावना डाली। आज पैनच्यू की नर्सरी में छोटे पेड़ व पौधे बेचने से प्रति वर्ष बीस लाख युवान की आय प्राप्त हो सकती है। लेकिन पैनच्यू ने अपनी आय का जन्मभूमि के दूसरे लोगों की मदद में प्रयोग किया है। उन के नर्सरी में कार्यरत मजदूरों की संख्या दो तीन सौ रहती है, उन का तनख्वाह एक दिन दो तीन सौ युवान हो सकता है। नौकरी प्रस्तुत करने के अलावा पैनच्यू ने निवासियों को पेयजल, बिजली आपूर्ति और खेती करने आदि के संदर्भ में भी सहायता प्रदान की है। उन्होंने कहा,“वर्ष 2005 में मैं ने अपने नर्सरी के पास रहे तीन गरीब परिवारों को पहाड़ से मैदान में स्थानांतरित किया। हम इन तीन परिवारों को जल व बिजली की आपूर्ति भी प्रदान कर रहे हैं। और आसपास के गांव के 79 परिवारों की पेयजल की आपूर्ति भी हमारे नर्सरी के द्वारा प्रदान की जाती है। यह सब निशुल्क है।”भविष्य में पैनच्यू पहाड़ों में और अधिक पेड़ लगाएंगे और जूंगत्वेई गांव के नर्सरी के आधार पर एक पार्क रखेंगे। उन्होंने कहा,“यहां के और कुछ पहाड़ों में हरियाली नहीं हुई है। मेरा विचार है कि जहां प्राकृतिक स्थितियां अच्छी है, मैं दूसरों को पेड़ लगाने दूंगा। जहां की स्थितियां खराब है, तो मैं वहां खुद जाऊंगा। और मैं नर्सरी के आधार पर एक जन पार्क स्थापित करूंगा और इसे एक पर्यटन स्थल बनाऊंगा।”

पैनच्यू के छोटे बेटा, 26 वर्षीय रोबू नर्सरी में कंपनी के वित्तीय कार्य के जिम्मेदार है। वह भी अपने पिता जी से पेड़ लगाना सीख रहा है। रोबू ने कहा,“कालेज़ से स्नातक होने के बाद मैं अध्यापक का काम चुना। पिता जी की उम्र बढ़ने की चिन्ता में मैं ने त्यागपत्र दिया। अब मैं ने भी पेड़ रोपण के काम में शामिल किया है। पिता जी ने नर्सरी के निर्माण में पूरी शक्ति डाली है, मैं भी उनके कार्य जारी रखूंगा।”   

 

 


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