सानच्यांगयुवान के पारिस्थितिक रक्षक

2017-12-11 09:06:31
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सानच्यांगयुवान के पारिस्थितिक रक्षक

सानच्यांगयुवान के पारिस्थितिक रक्षक


सानच्यांगयुवान उत्तर पश्चिमी चीन के छींगहाई-तिब्बत पठार पर स्थित है जहां चीन की तीन प्रमुख नदियां यांगत्सी नदी, पीली नदी और लैनत्सांग नदी का स्रोत है । चीनी भाषा में “सानच्यांग” का मतलब है तीन नदियां और “युवान” स्रोत । इस क्षेत्र को सारी एशिया महाभूमि का वॉटर टॉवर माना जाता है, इसलिए इस क्षेत्र के प्राकृतिक वातावरण का संरक्षण करने का विशेष महत्व प्राप्त है ।

38 वर्षीय थाशी त्सेरिंग सानच्यांगयुवान प्राकृतिक वातावरण संरक्षण क्षेत्र के रक्षकों में से एक हैं । थाशी ने कहा कि वे पहले घासमैदान में पशुपालन का काम करते थे । संरक्षण क्षेत्र का रक्षक होने से उन्हें गौरव महसूस होता है । उन्हों ने कहा,“मुझे वर्ष 2013 से घासमैदान की देखभाल करने वाली नौकरी मिली । इधर के वर्षों में घासमैदान की स्थिति बदल नहीं हुई । वर्ष 2017 में अधिक वर्षा होने के कारण घासमैदान के घास और फूलों में काफी वृद्धि हुई है ।”

थाशी त्सेरिंग का कार्यस्थल सानच्यांगयुवान की थ्वोथ्वो नदी क्षेत्र में है । थाशी का घर गोलमुद शहर के उपनगर में स्थित है जहां उन के कार्यस्थल से कई सौ किलोमीटर दूर है । अपने काम का परिचय देते हुए थाशी ने कहा,“मेरी जैसी नौकरी का तनख्वाह ज्यादा नहीं है । गाड़ियों के लिए ईंधन भरने आदि का खर्च भी है । लेकिन तनख्वाह सब से बड़ी बात नहीं है । घासमैदान की रक्षा करना हमारा मिशन है । हमें जरूर ही अच्छी तरह अपना कर्तव्य निभाना चाहिये ।”

वर्ष 2004 में सरकार ने सानच्यांगयुवान क्षेत्र में गरीबी मिटाओ का अभियान शुरू किया और थ्वोथ्वो नदी क्षेत्र में रहने वाले 128 परिवारों को स्थानांतरित किया । इन गरीब चरवाहों के नये घर गोलमुद शहर के उपनगर में रखे गये और सभी लोगों को नौकरियों का परिचय किया गया । नये गांव में रहने वालों के जीवन में काफी सुधार आया है । थाशी त्सेरिंग अब चरवाहा नहीं हैं, वे दुकानदार और बाहर में नौकरी का काम करते थे । वर्ष 2013 में थाशी को घासमैदान की देखभाल करने वाली नौकरी मिली । इसके बाद थाशी का विवाह हुआ और एक बच्चा भी जन्म हुआ । थाशी के पिता जी सेंग्गे को भी बहुत खुशी है क्योंकि अब थाशी को न सिर्फ सरकार की नौकरी मिल पायी है, बल्कि अपनी जन्मभूमि थ्वोथ्वो नदी के घासमैदान की देखभाल का मौका भी प्राप्त है । सेंग्गे ने कहा,“घासमैदान में वातावरण की रक्षा करना सबसे महत्वपूर्ण है । हमारा घर स्थानांतरित हो गया है, पर हमारा दिल वहां सुरक्षित है । क्योंकि हम पीढ़ी दर पीढ़ी घासमैदान में रहते थे । मैं अपने बच्चों को बताता हूं कि अपनी जान को सुरक्षित करने की ही तरह घास मैदान की रक्षा करना चाहिये ।”

थाशी के दैनिक कार्यों में शामिल हैं घास मैदान पर गश्ती करना और अवैध कार्यवाहियों की निगरानी करना । नौकरी का तनख्वाह प्रति वर्ष 21 हजार छह सौ युवान तक रहता है । वर्ष 2016 में सरकार ने घास मैदान पारिस्थितिक संरक्षण सब्सिडी प्रदान करना शुरू किया । छींगहाई प्रांत के यूशू तिब्बती स्वायत्त स्टेट की ज़ाडो काउंटी भी सानच्यांगयुवान नेशनल पार्क में स्थित है । यह नेशनल पार्क वर्ष 2016 के जून में स्थापित हुआ तब चरवाहों ने सौ से अधिक संरक्षण दलों की स्थापना की जो घास  मैदान, जंगल, जल स्रोत, नदियों और झीलों का एकीकृत निरीक्षण करने के जिम्मेदार हैं । इस काउंटी के न्गाम्से कस्बे के प्रमुख थाशी दूंगड्रे ने कहा,“ऐसा तरीका है कि अगर एक परिवार में पारिस्थितिक रक्षक हो तो घर के दूसरे सदस्य भी उस की मदद में काम करते हैं । और रक्षक के कार्यों का प्रति वर्ष दो बार मूल्यांकन किया जाता है ।” 

थाशी दूंगड्रे ने कहा कि वर्ष 2016 में न्गाम्से कस्बे में कुल 468 रक्षक सुरक्षित हुए जो अधिकांश तौर पर गरीब चरवाहे थे । और सरकार की योजना से इस कस्बे में पारिस्थितिक रक्षकों की संख्या 1930 तक जा पहुंचेगी । उधर छींगहाई प्रांत के गोलोक तिब्बती स्वायत्त स्टेट के तीन कस्बे भी सानच्यांगयुवान नेशनल पार्क के दायरे में स्थित है । इसी दायरे में सभी चरवाहे परिवारों को पारिस्थितिक प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गयी है । इस स्टेट के कृषि और पशुपालन ब्यूरो के उप प्रधान वेई ची छ्वान ने कहा, “नेशनल पार्क की प्रबंधन व्यवस्था में रुपांतर करने के बाद पहाड़, जल, जंगल, घास मैदान और झील का एकीकृत प्रबंधन और संरक्षण किया जा रहा है । इस दायरे में रहने वाले सभी परिवारों को नौकरी मिल गयी है । चरवाहे पहले घास मैदानों के इस्तेमाल करने वाले थे, अब वे घास मैदान के रक्षक बन गये हैं ।”  

इस पदाधिकारी का मानना है कि रुपांतर करने से घास मैदान का संरक्षण करने के साथ-साथ गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य भी साकार किया गया है । अब चरवाहों के पशुओं की मात्रा पहले से काफी कम हो गयी है, पर उन की आय बहुत बढ़ी है । और इस तरह पशुपालन उद्योग का पुनर्गठन भी पूरा हो गया है ।

सानच्यांगयुवान चीन में सबसे विशाल पर्यावरण और जल स्रोत संरक्षण क्षेत्र माना जाता है । इसके संरक्षण से सिर्फ चीन नहीं, बल्कि एशिया और यहां तक सारी दुनिया के लिए प्रभाव पड़ेगा । योजना है कि इस क्षेत्र में तमाम पारिस्थितिक रक्षकों की संख्या 42778 तक जा पहुंचेगी । इस के साथ-साथ छींगहाई प्रांत की राजधानी शीनींग शहर में विशेषज्ञों का एक विशेष दल भी सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग और नेटवर्क के माध्यम से सानच्यांगयुवान क्षेत्र की स्वचालित मॉनिटरिंग कर रहा है । इसी व्यवस्था से सानच्यांगयुवान क्षेत्र का प्रतिदिन 24 घंटे के लिए निरीक्षण किया जा सकता है । छींगहाई प्रांत के पर्यावरण सूचना केंद्र के प्रधान ली हूंग छी ने कहा,“सानच्यांगयुवान क्षेत्र मुख्य रूप से छींगहाई प्रांत के दायरे में स्थित है । पर पर्यावरण के संरक्षण के लिए हमारी तकनीकी शक्ति या कर्मचारियों की मात्रा काफी नहीं है । इसलिए हमें आधुनिक तकनीकों के संसाधनों से इसकी पूर्ति करनी चाहिये । अंततः प्रांत भर में पर्यावरण के बड़े डेटा प्रबंधन प्लैटफर्म की स्थापना की जाएगी । जो सरकार के निर्णय लेने और जनता के लिए सूचना की सेवाएं प्रदान कर सकेगा ।”

ली ने कहा कि इधर के वर्षों में सानच्यांगयुवान क्षेत्र में वातावरण का निरंतर सुधार प्राप्त हो गया है । पहाड़ अधिक हरित होते हैं, जल अधिक स्वच्छ होते हैं, और जंगली पशुओं की संख्या भी बहुत बढ़ी है । अपनी जन्मभूमि का परिवर्तन देखकर चरवाहों को भी बहुत खुशी हो गयी है ।  


सानच्यांगयुवान के पारिस्थितिक रक्षक


सानच्यांगयुवान क्षेत्र का एक संक्षिप्त परिचय   

 

सानच्यांगयुवान क्षेत्र उत्तर पश्चिमी चीन के छींगहाई-तिब्बत पठार पर स्थित है जहां चीन की तीन प्रमुख नदियां यांगत्सी नदी, पीली नदी और लैनत्सांग नदी का स्रोत है । चीनी भाषा में “सानच्यांग”का मतलब है तीन नदियां और “युवान”का मतलब है स्रोत । तीन लाख वर्ग किलोमीटर विशाल सानच्यांगयुवान क्षेत्र की औसत ऊंचाई समुद्र सतह से 3500 से 4800 मीटर होती है । इस क्षेत्र को सारी एशिया महाभूमि का वॉटर टॉवर माना जाता है और वहां रहने के कुल 5.5 लाख निवासियों में 90 प्रतिशत तिब्बती हैं । सन 2000 के अगस्त में केंद्र सरकार ने सानच्यांगयुवान प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र स्थापित करने की घोषणा की ।     

सानच्यांगयुवान क्षेत्र को विश्व में सबसे ऊँचा और विशाल आर्द्रभूमि माना जाता है । यांगत्सी नदी के पानी का 25 प्रतिशत भाग, पीली नदी का 49 प्रतिशत भाग और लैनत्सांग नदी का 15 प्रतिशत भाग इस क्षेत्र से आता है । इसलिए सानच्यांगयुवान क्षेत्र को चीन व एशिया का वाटर टावर भी कहलाता है ।

सानच्यांगयुवान क्षेत्र में बहुत सी नदियां, झीलें, दलदली भूमि, बर्फ पर्वत और ग्लेशियर फैलती हैं । इसमें दलदल का क्षेत्रफल 73 हजार वर्गकिलोमीटर विशाल है जो सारे सानच्यांगयुवान का एक चौथाई भाग रहता है । सानच्यांगयुवान क्षेत्र में सैकड़ों किस्म वाले जंगली पशुओं और पक्षियों का अस्तित्व होता है । इस क्षेत्र में तिब्बती मृग, जंगली याक, हिम तेंदुए, रॉक भेड़, तिब्बती गज़ल और भालू आदि पशुओं का अच्छी तरह संरक्षण किया जा रहा है ।   

प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण करने के साथ-साथ सानच्यांगयुवान क्षेत्र में पर्यटन उद्योग का विकास किया गया है । इस क्षेत्र के हिम पर्वत, नदियों, घासमैदान, दलदल तथा विशेष तिब्बती संस्कृति आदि से पर्यटकों को आकर्षित किया जा रहा है । छींगहाई प्रांत की सरकार ने सानच्यांगयुवान क्षेत्र के पारिस्थितिक संरक्षण और निर्माण को प्राथमिकता देती है और इसी उद्देश्य में सानच्यांगयुवान प्राकृतिक वातावरण संरक्षण क्षेत्र स्थापित किया गया है । केंद्र और स्थानीय सरकार सुंदर प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित रखने के लिए अथक प्रयास करती रहेंगी ।  

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