शांगरी-ला का स्वप्न पूरा करने वाला सोनाम धूनद्रप

2017-11-27 08:44:57
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शांगरी-ला का स्वप्न पूरा करने वाला सोनाम धूनद्रप

  सोनाम धूनद्रप

सोनाम धूनद्रप दक्षिणी चीन के यूननान प्रांत के पालागाजूंन क्षेत्र की पर्यटन कंपनी के निदेशक हैं जो प्रांत की शांगरी-ला काउंटी के पाला गांव में जन्म हुआ था । पाला गांव इस काउटी के सुनसान पहाड़ों में स्थित है । पहले बहुत सालों के लिए पाला गांव को बाहर के दुनिया के साथ जुड़ने का सिर्फ एक छोटा पहाड़ी मार्ग था । गांव से काउंटी नगर जाने के लिए तीन दिन का रास्ता नापना पड़ा । मार्ग और बिजली की आपूर्ति न होने की वजह से गांवासियों का जीवन बहुत मुश्किल था और गांवासियों को भी दूसरे यहां जाना पड़ा था ।

पाला गांव 3300 मीटर ऊंचे पहाड़ पर स्थित है जहां शांगरी-ला में सबसे सुन्दर बर्फ पर्वत और घाटी में साफ साफ नदियां बहती रहती हैं । अपने जन्म भूमि का परिचय देते हुए सोनाम ने कहा,“हमारे यहां ऊंचाई में बड़ा अंतर होने के कारण मौसम और वातावरण भी अलग अलग होते हैं । घाटी के अन्दर में जब उष्ण क्षेत्र के वृक्ष उगते हैं तब पहाड़ की चोटी पर बर्फ से ढ़की हुई है ।”

पालागाजूंन क्षेत्र का असाधारण प्राकृतिक दृश्य प्राप्त है । लेकिन रास्ता प्रशस्त नहीं होने के कारण यहां के तिब्बती लोग दीर्घकाल तक गरीबी से ग्रस्त रहे । गाववासियों को बाहर जाने के लिए एक मीटर चौड़े पहाड़ी मार्ग पर तीन दिनों के लिए रास्ता नापना पड़ता था । सोनाम ने कहा,“रास्ता प्रशस्त नहीं होने के कारण हमारे उत्पादों का बाहर तक पहुंचाना मुश्किल था और कुछ गांववासियों को अपने सेब पशुओं को खिलाना पड़ता था । परिवहन घोड़ों पर निर्भर होता था और गांव वासियों की आय भी बहुत निम्न रही थी ।”

सोनाम ने याद करते हुए कहा, जब मैं छोटा था , तब मुझे दुकान और सड़क जैसे कभी नहीं देखा । गांव में रहने वालों में अगर कोई बीमार हुए , तो अस्पताल में जाना भी असंभव था । सोनाम ने अपनी नौ साल होने की उम्र तक प्रथम बार शांगरी-ला काउंटी के नगर में गया और वहां उन्हों ने प्रथम बार मोटर गाड़ी देखा । तब उन के मन में ऐसा विचार आने लगा कि एक दिन अपने गांव के लोगों के लिए भी बाहर जाने का एक रास्ता निर्मित किया जाएगा ।  

जब सोनाम 13 साल बड़ा था तब उन्हों ने पहाड़ों के बाहर जाकर काम करना शुरू किया । उस के बाद कई सालों के लिए उन्हों ने बड़े या छोटे शहरों में असंख्य बार हार खाने और जीत पाने के बाद कई करोड़ युआन की पूंजी जमा की है । अब सोनाम एक अमीर और सफल व्यवसायी बने हैं, पर वह हमेशा अपनी जन्मभूमि के गांवासियों की मुश्किलों पर ध्यान दिया करते हैं । वर्ष 1999 में सोनाम ने अपने धन के साथ जन्मभूमि वापस जाकर पहाड़ों में मार्ग बनाने का काम शुरू किया । 35 किलोमीटर लम्बे इस पहाड़ी मार्ग से पाला गांव के लोगों को इतिहास में प्रथम बार बाहर की दुनिया तक जाने का द्वार खोला गया । यही नहीं , पाला गांव के आसपास स्थित पालागाजूंन घाटी भी अपनी अद्भुत दृश्य से राष्ट्रीय पार्क बना , पाला गांव एक बंद व पिछड़ा हुआ पहाड़ी गांव से मशहूर तीर्थस्थल बनाया गया है ।    

सोनाम की जन्मभूमि पालागाजूंन घाटी यूननान प्रांत की शांगरी-ला कांउटी के नेसी प्रिफेक्चर में स्थित है जहां घाटी, नदी, बर्फीले पर्वत, घासमैदान, झील और रंगबिरंगी संस्कृति से प्राकृति और संस्कृति का शानदार रत्न बनाया गया है । सोनाम की आशा है कि अधिक परदेशी लोग मार्ग से यहां आएंगे और पालागाजूंन की सुन्दरता देख पाएंगे । पर यह भी समझते हैं कि पर्यटन के जरिये जन्मभूमि का विकास करते समय प्राकृतिक वातावरण का अच्छी तरह संरक्षण किया जाना ही चाहिये ।  


शांगरी-ला का स्वप्न पूरा करने वाला सोनाम धूनद्रप

 

सोनाम ने कहा कि मेरे दिल में हमेशा ऐसा विचार मौजूद है कि जन्मभूमि का पुराना रुख जरूर ही सुरक्षित किया जाएगा । हमारे यहां पहाड़ों में रजत और स्वर्ण का खान भी है, पर इन की खुदाई करने से वातावरण को नष्ट किया जाएगा । कुछ क्षेत्रों में पन बिजली घर और खानन का हद से ज्यादा विकास करने से प्राकृतिक दृश्य को बरबाद किया गया है, इसमें जो सबक है हमें जरूर सीखना ही पड़ेगा । इसलिए गांवासियों को अमीर बनाने के लिए सबसे अच्छा रास्ता है पर्यटन का चयन करना । क्योंकि पर्यटक प्राकृतिक दृश्य का दर्शन करने आते हैं , पर इन्हें वापस नहीं ले सकते । प्राकृतिक दृश्य हमारे संतानों के लिए सुरक्षित रहेगा ।  

सोनाम बहुत पहले ही अपनी जन्मभूमि के लिए रास्ते का निर्माण करना चाहते थे । रुपांतर और खुली नीति अपनाने के बाद सोनाम बिजनेस करने के लिए दूसरे क्षेत्र गये और उल्लेखनीय मुनाफा जीत लिया । वर्ष 1999 में उन्हों ने घर वापस लौटकर पालागाजूंन पर्यटन कंपनी स्थापित की । उन्हों ने अपनी जन्मभूमि में एक रास्ता निर्मित करने और पर्यटन का विकास करने की घोषणा की । लेकिन लोगों में उन की योजनाओं पर बहुत ही संदेह लगाये गये क्योंकि इतने उबड़-खाबड़ पहाड़ में एक चौड़ी सड़क निर्मित करना कोई आसान काम नहीं था । सोनाम ने कहा,“किसी ने कहा कि मैं पागल था । मुझे भी अपने पर संदेह लगा । इसके बाद में मैं यूननान प्रांत के लीच्यांग नगर के एक होटल में दस दिन रहा । वहां मैंने अपनी मन की सफाई की । दस दिनों के बाद मैंने साफ-साफ निष्कर्ष निकाला और मैं वापस लौटा ।”

सड़क निर्माण के लिए आवश्यक 28 करोड़ युआन की धनराशि एकत्र करने के लिए सोनाम ने अपने दुकान और रेस्टोरेंट बेचा दिये । ऋण लेने के लिए उन्होंने अपने मकान और कारों को भी बंधक के रूप में दिया । वर्षों के कठोर प्रयासों से इस मार्ग का निर्माण समाप्त हुआ । पालागाजूंन क्षेत्र से काउंटी नगर तक जाने के लिए चार दिन का समय लगना पड़ता था, रास्ता प्रशस्त होने के बाद केवल डेढ़ घंटा चाहिए । 35 किलोमीटर लम्बे रास्ते के दोनों तटों पर बर्फ़ीले पहाड़, जंगल, घास मैदान, घाटी जैसे सुन्दर सुन्दर दृश्य नजर आ रहे हैं । पालागाजूंन में रहने वालों के जीवन में भी भारी परिवर्तन आया है ।

सोनाम ने कहा,“इस मार्ग के निर्माण से पर्यटन उद्योग के विकास को बढ़ाया गया है । अब हमारे गांव वासियों की प्रति परिवार की आय 80 हजार से एक लाख युवान तक रही है । हरेक परिवार में दो तीन गाड़ियां खरीदी हैं ।”

गांववासियों को और अमीर बनाने के लिए सोनाम ने अथक प्रयास किया । उन्हों ने गांव की खेती को किराये पर लेकर आधुनिक कृषि का विकास करना शुरू किया । गांवासियों में हरेक परिवार को प्रति साल दस हजार युआव की भत्ता मिलती है । पहाड़ों पर जो पुराने वाले मकान हैं, उन्हें पुनःनिर्मित कर पर्यटकों को रहने वाले होटल बनाया गया । गांवासियों को इसी से भी प्रति साल तीन पाँच हजार युआन की आय मिलती है । साथ ही गांवासी तीर्थस्थल में काम करते प्रति वर्ष कई हजार युआन का तनख्वाह भी प्राप्त कर सकते हैं ।  

सोनाम ने बताया कि अगर गांवासी लोग पहाड़ में रहे , तो उन्हें निधन होने के बाद पहाड़ में ही दफनाया जाता है । पर अब मैदान में रहने से बूढ़ों के अंतिम संस्कार में जीवित बौद्ध भी आकर प्रार्थना कर सकते हैं जो तिब्बती श्रद्धालुओं के लिए अति महत्वपूर्ण है । सोनाम ने कहा कि गांववासियों को निम्न ऊंचाई क्षेत्र में स्थानांतरित करने के बाद पहाड़ों के पुराने मकानों में पर्यटन उद्योग का विकास किया गया, और साथ ही किसानों की भूमियों को सामूहिक तौर पर किराये पर दिया गया जिससे गांववासियों की आय बहुत बढ़ गयी है । सोनाम ने कहा,“भूमियों को किराये पर देने के बाद गांववासियों को नियमित आय प्राप्त होने लगी है जिसकी मात्रा कम से कम बीस तीस हजार युवान तक रहती है । गांव में बुजुर्गों को काम किये के बिना भी पैसा मिल सकता है ।”

इसी बीच में सोनाम ने पहाड़ियों में पशुपालन भी शुरू किया और इस तरह भी कुछ गांवासियों को नौकरी का मौका दिया । दूसरे गांवासियों को भी पर्यटन के विकास में नौकरी मिली । अब सोनाम की पालागाजूंन पर्यटन कंपनी में कुल डेढ़ सौ से अधिक गांवासी लोग कार्यरत हैं , वे अपने गांव के नजदीक ही नौकरी करते हैं । पाला गांव के लोग सोनाम के प्रति बहुत आभारी हैं क्योंकि सोनाम ने अपनी कोशिश से उन्हें अमीर बनाया । सोनाम को विश्वस्त है कि पालागाजूंन पर्यटन क्षेत्र का अधिक विकास होने के बाद अपने गांवासियों का नया सपना भी साकार हो जाएगा ।   

मार्ग का निर्माण करने के जरिये गांववासियों को अमीर बनाने का स्वप्न साकार होने के बाद सोनाम ने अनवरत विकास की योजना पर सोचना शुरू किया है । सोनाम का विचार है कि पालागाजूंन क्षेत्र में सुन्दर प्राकृतिक दृश्य बनाये रखने के साथ-साथ इस की विशेष संस्कृति का विकास किया जाएगा । और इसी के आधार पर ऐसे पर्यटन उद्योग का विकास किया जाएगा जिसमें तीर्थयात्रा, संस्कृति और स्वास्थ्य सब शामिल होंगे । सोनाम ने कहा, “भविष्य में हम अपने क्षेत्र में तिब्बती बौद्ध धर्म की संस्कृति का अड्डा बनाएंगे ।” 

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