जातीय एकता का फूल

2017-11-20 08:43:18
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जातीय एकता का फूल

जातीय एकता का फूल

उत्तर पश्चिमी चीन स्थित छींगहाई प्रांत के हाईशी मंगोलियाई तिब्बती स्वायत्त स्टेट एक बहु-जातीय क्षेत्र होता है जहां मंगोलियाई, तिब्बती, हुवेई, थू और सालार समेत तीसेक जातियां रहती हैं । विभिन्न जातियों का अपना अपना कलात्मक जीवन है और उनके बीच एक दूसरी की संस्कृति व कला का आदान प्रदान भी किया जा रहा है ।   

तूलैन काउंटी के जातीय मिडिल स्कूल के छात्र हर बुधवार और गुरुवार के अवकाश समय में ड्रामोन्ये नामक संगीत वाद्ययंत्र सीखने जाते हैं । इस स्कूल के 1305 छात्रों में मंगोलियाई भी हैं और तिब्बती भी, जो 20 तिब्बती और 11 मंगोलियाई कक्षाओं में पढ़ते हैं । छात्रों को अपनी पारंपरिक संस्कृति सिखाने के लिए स्कूल में संगीत के अलावा लिखावट और चित्रकारी आदि विशेष कक्षाएं भी खोली गयी हैं । 16 वर्षीय लड़की सोनाम यांगकी स्कूल की 9वीं कक्षा में पढ़ती है । संगीत सुनाते हुए यांगकी ने बताया,“देहातों में दूध दुहते समय यह गाना गाते हैं और मैं भविष्य में एक गायक बनना चाहती हूं ।”

यांगकी की सहपाठियों ने कहा कि स्कूल से स्नातक होने के बाद अध्यापक का काम करना सबसे अच्छा होगा । क्योंकि होम टाउन का निर्माण करने में हमें योगदान देना चाहिए । तूलैन काउंटी के जातीय मिडिल स्कूल में सभी छात्रों को ट्यूशन और आवास फीस से मुक्त किया गया है जिससे छात्रों को बड़ी मदद मिली है ।   

ह्वा-एर नामक ट्यून उत्तर पश्चिमी चीन में रहने वाले हान, ह्वेई, तिब्बती और मंगोलियाई आदि जातियों में लोकप्रिय संगीत माना जाता है । ह्वा-एर गाने वाली महिला गायक यांग श्वून लान को यह संगीत कला बहुत पसंद है और वे अपनी कलात्मक प्रदर्शन से जातीय एकता का प्रसार कर रही हैं । यांग ने कहा,“हम ने वर्ष 2013 से एक कारवां से कलात्मक प्रदर्शन शुरू किया । हम ह्वा-एर के प्रदर्शन में जातीय एकता जैसे मुद्दों का प्रसार भी करते रहे हैं । हमारे ग्रुप में अधिकांश लोग स्वयंसेवक हैं और वे सब बुनियादी इकाइयों से आते हैं । हम बुनियादी इकाइयों के जन जीवन से परिचित हैं और इस तरह हम आम लोगों के साथ संपर्क रखने का ढंग जानते हैं । अब वेबसाइट पर हमें कई हजार प्रशंसक भी प्राप्त हो गये हैं ।”   


जातीय एकता का फूल

 

मंगोलियाई संगीत में जो लॉन्ग ट्यून है, इसका नाम है ऊरथूद । इस राग में आम तौर पर घास मैदान, घोड़े, भेड़ समूह व नीले आकाश आदि का वर्णन किया जाता है । तूलैन काउंटी के हासिवा गांव के लोग सब मंगोलियाई जाति के हैं जो प्राचीन काल से ही यह राग गाते हुए चराई करते रहे हैं । गांव के मुखिया ने बताया,“हमारे गांववासी चराई का काम करते रहे थे । बाद में जब मैं ने कृषि उत्पादन कोआपरेटिव स्थापित करना चाहा तब गांववासियों ने इसका समर्थन नहीं दिया । उन्हों ने कहा कि उनके पूर्वज पीढ़ी दर पीढ़ी चरवाहे रहे थे, अब उन्हें खेती में काम करवाना अस्वीकरणीय है ।”

पर मुखिया के नेतृत्व में हासिवा गांव ने चराई के अलावा कृषि, प्रसंस्करण और पर्यटन का भी विकास करना शुरू किया है । कई वर्षों की कोशशों से हासिवा गांव के घासमैदान की पारिस्थितिकी धीरे-धीरे बहाल हो गयी है और चरवाहों की आय में भी बढ़ोतरी संपन्न हुई है । गांव के मुखिया ने कहा,“हम ने केवल चराई करने से बदलकर कृषि का विकास करना भी शुरू किया है जिससे वातावरण संरक्षण के लिए अच्छा है । हमारा घास मैदान चालीस हजार मवेशियों और भेड़ों के लिए काफी विशाल नहीं था । इसलिए हम ने वर्ष 2009 से पारिस्थितिकी कृषि और पशुपालन कोऑपरेटिव स्थापित किया और उस समय से अभी तक हमारे घासमैदान की काफी बहाली हो चुकी है । अब हमें फसलों के रोपण से तीस लाख युआन की आय प्राप्त है और गांववासियों की औसत आय 36 हजार युआन तक रही है ।”

आर्थिक विकास की प्रगतियों ने विभिन्न जातीय लोगों को उत्साहित किया । घास मैदान में जातीय एकता के फूल खिल रहे हैं । यांग श्वून लान और सोनाम यांगकी आदि का स्वप्न जरूर साकार हो जाएगा ।  

( हूमिन )

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