तिब्बती पठार पर अपना स्वप्न साकार हो

2017-09-25 19:43:43
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तिब्बती पठार पर अपना स्वप्न साकार हो

चीन में प्रति वर्ष अस्सी लाख छात्र विभिन्न कालेजों से स्नातक होते रहते हैं और देश के बड़े शहरों में नौकरी मिलने के लिए जवानों की भीड़ नज़र में आ रही है । लेकिन देश में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में प्रतिभाओं की बड़ी आवश्यकता दिख रही है जहां जवानों के लिए अपना सपना साकार करने का विशाल मंच तैयार हो गया है । इधर के वर्षों में अधिकाधिक युवकों ने तिब्बत में अपनी क्षमता दिखाने का विकल्प चुना है ।

तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की काउंटियों और टाउनशिपों का दौरा करते समय यह पता लगा है कि वहां के बहुत से कर्मचारी युवक हैं । ये युवक काम करने में भी बहुत क्रियाशील हैं । देश के विभिन्न प्रांतों से गये ये जवानों ने कालेजों से स्नातक होने के बाद तिब्बत के बुनियादी इकाइयों में नौकरी करना शुरू किया है । उन में बहुत से लोग तिब्बत में दस से अधिक सालों के लिए काम कर चुके हैं और वे अपने कामकाज में महत्वपूर्ण पात्र भी निभा रहे हैं ।   

वर्ष 1987 में ल्हासा शहर में जन्म नाज़ीन फूंत्सोक सछ्वान प्रांत के दक्षिण-पश्चिम जातीय विश्वविद्यालय से स्नातक होने के बाद तिब्बत के बुनियादी इकाइयों में अनेक साल काम करने के बाद शिगाज़े शहर की कांगशूंग टाउनशिप का प्रमुख बने । कांगशूंग टाउनशिप तिब्बती पठार पर बहती यालूजांबू नदी के घाटी में स्थित है । इस क्षेत्र की औसत ऊँचाई 4100 मीटर है और वह चीन-नेपाल मार्ग के तट पर स्थित है । 286 वर्ग किलोमीटर विशाल कांगशूंग टाउनशिप में केवल चार हजार लोग रहते हैं । यहां के किसान पशुपालन के सिवा मुख्य तौर पर जौ, गेहूं, मटर और गोभी आदि फसलों का रोपण भी करते हैं ।

फूंत्सोक ने कहा कि कांगशूंग टाउनशिप के सामने सबसे प्रथम काम है गरीबी उन्मूलन और आर्थिक विकास करना । अब टाउनशिप के सभी छह सौ परिवारों में 213 परिवारों की स्थिति मुश्किल है । प्रदेश की सरकार द्वारा निर्धारित गरीबी रेखा है यानी कि प्रति व्यक्ति की वार्षिक आय 3311 युवान तक रहती है । इसलिए अब टाउनशिप में गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य साकार करना सभी कार्यों का फोकस ही है । फूंत्सोक ने कहा,“हमारे गरीबी उन्मूलन कार्यों में प्रति परिवार और प्रति व्यक्ति के लिए सटीक तौर पर कदम उठाना पड़ता है । यानी प्रति व्यक्ति के स्थानांतरण, शिक्षा और मेडिकल सुविधा आदि सब का ध्यान लगाना पड़ेगा । हमारे यहां का काम है यानी कि उद्योग, स्थानांतरण और वातावरण संरक्षण आदि की शामिली है । हमारा लक्ष्य है कि वर्ष 2018 तक सभी गरीब परिवारों को हल किया जाएगा ।”

फूंत्सोक ने यह भी कहा कि वर्ष 2013 से उन्हों ने किसान व चरवाहे पेशेवर कोऑपरेटिव की स्थापना की और ऊन उत्पादों, जेड एवं मक्खन फूल बनाने वाले उद्योगों का विकास शुरू किया । जिससे रोजगारी और आय वृद्धि की समस्याओं को हल किया गया है । फूंत्सोक ने कहा कि आर्थिक विकास करने और जन जीवन का सुधार करने के साथ-साथ सामाजिक सामंजस्य को बढ़ावा दिया जाना पड़ता है । इसी सिद्धांत के मुताबिक काम भी सुभीते से किया जा रहा है । उन्हों ने कहा,“बुनियादी इकाइयों में सबसे मुश्किल काम है लोगों की शिक्षा करना, अंतर्विरोध की मध्यस्थता करना और मानसिक कार्य करना । हमारे यहां मध्यस्थता कमेटी भी स्थापित की गयी है जो विशेष तौर पर अंतर्विरोधों की मध्यस्थता करने में जिम्मेदार है । हमारे कर्मचारियों में जो अनुभवी हैं, वे अक्सर लोगों में ऐसा काम करने जाते हैं ।”

तिब्बती पठार पर अपना स्वप्न साकार हो

तिब्बत प्रदेश के बुनियादी इकाइयों में जो काम कर रहे हैं, उन में कुछ तिब्बती हैं और कुछ हान जातीय के हैं । फूंत्सोक तिब्बती जाति के हैं और उन के लिए स्थानीय लोगों के साथ संपर्क रखने में अधिक सुविधा मिलती है । लेकिन दूसरे हान जातीय कार्यकर्ताओं के लिए रोजाना कार्यों में कभी कभी दिक्कत मिलती है । कांगशूंग टाउनशिप की उप प्रधान फ़ंग मेई ने वर्ष 2011 में श्यैनशी प्रांत के तिब्बती जातीय विश्वविद्यालय में स्नातक होने के बाद तिब्बती प्रदेश में सिविल सेवक की नौकरी चुनी । उन के लिए स्थानीय लोगों के साथ सही तौर पर संपर्क रखना कोई आसान काम नहीं है । उन्हों ने कहा,“मुझे पहले यहां के जीवन से आदत नहीं थी । उस समय मुझे स्थानीय लोगों के साथ संपर्क रखने में बहुत मुश्किल था । क्योंकि दोनों की भाषा और जीवन स्टाइल अलग है । बाद में मैं भी धीरे धीरे बदल गयी । अब हम एक दूसरे की समझ में आ सकते हैं और मुझे भी स्थानीय लोगों में से एक बनाया गया है ।”

फ़ंग मेई ने कहा कि चार सालों के लिए बुनियादी इकाइयों में काम करने से उन्हें बिल्कुल बदला गया है । वर्ष 2011 से तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की सरकार ने कुल एक लाख कर्मचारियों को कार्य दल के रूप में विभिन्न बुनियादी इकाइयों में भेज दिया है । तिब्बत के भिन्न भिन्न गांवों में तैनात ये कार्य दल स्थानीय लोगों के साथ-साथ काम करते हैं और उन की समस्याओं को हल करने में मदद करते हैं । फ़ंग मेई ने कहा,“हम कांगशूंग टाउनशिप में कई साल काम कर चुके हैं । पहले गांववासियों की आंखों में हम जैसे लोग सरकार के अफसर थे , और दोनों पक्षों के बीच घनिष्ठता नहीं थी । अब सबकुछ बदल गया है । हम एक दूसरे का समादर करते हैं और हमारे बीच में विश्वास भी बिठाया गया है ।”

फ़ंग मेई ने संवाददाता को यह बताया कि बुनियादी इकाइयों के कामकाज में सभी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है । चुनौतियों के मुकाबले में उन्हें भी काफी अनुभवी बनाया गया है । उन्हों ने कहा,“मैं ने नेता और सहपाठियों के साथ-साथ काम करते समय बहुत सीख लिया है । हाल ही में हम ने बाढ़ से ग्रस्त क्षेत्रों में राहत कार्य किया । और हमारे कार्यों से स्थानीय लोगों को संतोष लगा है ।”

तिब्बत के बुनियादी इकाइयों में जो कामकाज हैं, वो कार्य दल के जवानों के लिए एक गंभीर परीक्षा माना जाता है । लेकिन जवानों को गांवों में प्राप्त प्रगतियों से गौरव भी लगता है । कांगशूंग टाउनशिप में एक दूसरा वरिष्ठ कार्यकर्ता चांग चाओ काई भी तिब्बती जातीय विश्वविद्यालय से स्नातक हुआ । उन्हें वर्ष 2015 में कांगशूंग टाउनशिप में काम करने के लिए भेजा गया । अपनी टाउनशिप में प्राप्त प्रगतियों का परिचय देते हुए चांग ने कहा,“कांगशूंग टाउनशिप में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है । हम ने यहां पुल और राज मार्ग का निर्माण किया । अब इस टाउनशिप में सर्कुलर मार्ग भी निर्मित हो चुका है ।”

चांग के अनुसार अब टाउनशिप के सभी गांवों तक मार्ग प्रशस्त किया गया है । पुल के निर्माण से स्थानीय लोगों को भी बड़ी सुविधा तैयार की गयी है । वर्ष 2012 से सरकार ने बुनियादी उपकरणों के निर्माण में भारी खर्च डाला है और जल संरक्षण की सुविधाओं का निर्माण करने के बाद बाढ़ नियंत्रण को भी बढ़ावा मिला है । भविष्य में सरकार इस क्षेत्र में जन जीवन का सुधार करवाने के लिए पर्यावरण के अनुकूल वाले अर्थतंत्र का जोरों पर विकास कर देगी । चांग ने कहा,“हम पर्यावरण के अनुकूल वाले अर्थतंत्र का विकास करने के लिए पर्यटन उद्योग पर ज्यादा ध्यान देते हैं । अभी तक हम ने पर्यटन मुद्दों पर 49 लाख युवान खर्च किया और पर्यटन संसाधनों का पंजीकरण कार्य भी समाप्त किया है ।”

युवा कार्यकर्ताओं ने तिब्बत के विकास के लिए ठोस लक्ष्य व योजना बनायी है और योजना लागू करने के लिए ठोस कार्यवाहियां भी की हैं । सरकार के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 तक तिब्बत में 24 वर्षों के लिए दोहरे अंकों की वृद्धि बनी रही है । वर्ष 2017 में तिब्बत ने 11 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य बनाया है । अभी तक आर्थिक विकास सुभीते से चल रहा है और लक्ष्य तक जा पहुंचने का कोई संदेह नहीं है । तिब्बती पठार भीतरी इलाकों के जवानों के लिए विकास करने का विशाल मंच तैयार किया गया है और अधिकाधिक युवक अपना जीवन का मूल्य साकार करने के लिए वहाँ जाने को तैयार हैं ।   

 

शिगाज़े शहर के बारे में कुछ जानकारियां

 

शिगाज़े चीन के तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की एक प्रिफेक्चर स्तरीय शहर है जो तिब्बती पठार के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित है । शिगाज़े क्षेत्र 1.82 लाख वर्ग किलोमीटर विशाल होता है और जनसंख्या 7.2 लाख होती है ।

शिगाज़े में विश्व में सबसे ऊंची जूमूलांगमा चोटी यानी माउंट एवरेस्ट, यांगजोयूंग झील, ताशिलुनपो मंदिर और शाक्य मठ आदि तीर्थस्थल मौजूद हैं और इस के सीमांत क्षेत्र में यादोंग, झांगमु और जियालूंग बंदरगाह आदि भी खोले गये हैं ।

वर्ष 2014 के जून में चीन सरकार ने शिगाज़े प्रिफेक्चर को हटा कर इसे शिगाज़े शहर (Shigatse City) घोषित किया ।  

आम तौर पर कहा जाता है कि शिगाज़े की आर्थिक संरचना में कृषि और पशुपालन का वर्चस्व है । इस क्षेत्र का अनाज उत्पादन तिब्बत में 40 प्रतिशत भाग रहता है । पशुपालन का उत्पादन मूल्य भी स्वायत्त प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहता है । शिगाज़े के तहत 18 जिलों में से 9 सीमांत जिले भी हैं जो नेपाल, भूटान और भारत से जुड़ते हैं । इन की सीमा रेखा 1573 किलोमीटर लम्बी होती है । पड़ोसी देशों के साथ जुड़ने वाली सीमाओं पर कुल 3 बंदरगाह तथा 28 व्यापार स्टेशन भी खोले गये हैं ।     

शिगाज़े तिब्बत में मशहूर पर्यटन स्थल भी है । वर्ष 2011 में कुल 13.4 लाख देशी विदेशी पर्यटकों ने इस का दौरा किया । पर्यटन आय भी 1.1 अरब युवान तक रही । शांतिपूर्ण मुक्ति से पहले शिगाज़े में केवल पुराने पहाड़ी मार्ग निर्मित थे । जन सरकार के अथक प्रयासों से अब शिगाज़े में राजमार्ग का जाल फैला हुआ है और तिब्बत की राजधानी ल्हासा से शिगाज़े तक जाने वाला रेल मार्ग का निर्माण भी समाप्त हो चुका है ।    

अपेक्षाकृत नए आंकड़ों के मुताबिक शिगाज़े शहर के सभी जिलों में मिडिल स्कूल स्थापित हैं । शहर के प्राइमरी स्कूलों में छात्रों की संख्या 86 हजार तक रही है और मिडिल स्कूलों में यह मात्रा 22 हजार तक रही है । अनिवार्य शिक्षा की कवरेज दर शत प्रतिशत तक रह चुकी है ।  

 ( हूमिन )

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