रेगोंग में थांगका कला का विकास और गरीबी उन्मूलन

2017-08-29 11:03:14
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रेगोंग में थांगका कला का विकास और गरीबी उन्मूलन


थांगका चित्र कला चीन की तिब्बती जातीय संस्कृति का सार माना जाता है और थांगका तिब्बती जातीय संस्कृति की जानकारी प्राप्त करने की कुंजी भी है । छींगहाई प्रांत के ह्वांगनान तिब्बती स्वायत्त प्रिफेक्चर में केंद्र सरकार की मदद से थांगका चित्र कला के विकास से गरीबी उन्मूलन करवाने की कोशिश की जा रही है ।

ह्वांगनान प्रिफेक्चर के तहत थूंगरेन काउटी में तिब्बती और दूसरी जातियां साथ-साथ रहती हैं । यहां थांगका चित्र कला का जन्म स्थल माना जाता है और वह तिब्बती बौद्ध धर्म, महाकाव्य और तिब्बती ऐतिहासिक संस्कृति से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है । इस क्षेत्र और आसपास क्षेत्रों के साथ-साथ मिलकर तिब्बती संस्कृति का रेगोंग कला कहलाता है । इसमें थूंगरेन काउटी की थांगका चित्र कला विश्व भर सुप्रसिद्ध है ।

थूंगरेन काउटी की एक लाख जनसंख्या में 20 हजार थांगका चित्रकार शामिल हैं । यहां स्थापित रेगोंग जातीय संस्कृति भवन में हर रोज़ सौ से अधिक छात्र अध्यापकों से थांगका कला का अध्ययन करते रहे हैं । 23 वर्षीय तिब्बती लड़का दानजंग सांगतींग ने रेगोंग जातीय संस्कृति भवन में चार सालों के लिए थांगका चित्र कला का अध्ययन किया है । यहां स्नातक होने के बाद वे अपने थांगका चित्रों के साथ राजधानी पेइचिंग और दूसरे शहरों में प्रदर्शनी में भाग लेंगे । उन्हों ने कहा,“प्राइमरी स्कूल से स्नातक होने के बाद मैं ने छोड़ दिया । इस के बाद मुझे थांगका चित्र कला पसंद होने लगा । पहले चित्रकारी आम तौर पर मिट्टी के पिगमेंट का इस्तेमाल करते थे, पर आज हम ने खनिज पदार्थों से बने पिगमेंट का चयन किया है । थांगका के कई किस्म भी हैं जैसे काला, स्वर्ण, लाल या रंगीन वाला । मुझे रंगीन वाला पसंद है । मेरा यहां का खर्च सब अध्यापक और स्कूल की तरफ से आता है । खान पान और पिगमेंट आदि सब स्कूल के खर्च में शामिल हैं । वर्ष 2015 में मैं ने छींगहाई प्रांत के जातीय विश्वविद्यालय के थांगका गैर-भौतिक विरासत प्रशिक्षण केंद्र में अध्ययन किया । एक महीने के अध्ययन में अनेक तिब्बती अध्यापकों ने हमें थांगका चित्र कला के आधार और अनुभव आदि का कोर्स सिखाया और मैं ने बहुत से सीख लिया ।”

रेगोंग जातीय संस्कृति भवन के डाइरेक्टर कल्सांग के अनुसार वर्ष 2012 में संस्कृति भवन की स्थापना से अभी तक 130 तिब्बती छात्रों ने यहां थांगका चित्र कला सीखा और उन के लिए आवास और खान पान आदि सब निशुल्क रहे हैं । संस्कृति भवन देश के दूसरे क्षेत्रों में भी छात्रों की भर्ती करता है और हर साल अनेक राष्ट्रीय या प्रांतीय थांगका कलाकार यहां व्याख्यान करने आते रहे हैं । कल्सांग ने कहा,“प्रिफेक्चर और प्रांत से आये अध्यापकों ने हमारे छात्रों का बुनियादी प्रशिक्षण किया है । इस के बाद राष्ट्र स्तरीय कलाकारों ने भी हमारे प्रशिक्षण में भाग लिया है । इधर के पाँच सालों में हम ने कुल 400 छात्रों का प्रशिक्षण किया । वर्तमान में हमारे यहां सात अध्यापक हैं और उनका तनख्वाह भी प्रति माह आठ हजार युवान तक रहा है । हमारा उद्देश्य है कि थांगका संस्कृति के विकास से तिब्बती संस्कृति का प्रसार किया जाएगा ।”

पता चला है कि एक थांगका चित्रित करने में कई महीने और यहां तक कई साल का समय चाहिये । थांगका चित्रों में जो श्रेष्ठ वाले हैं, उन का दाम अनेक हजार युवान तक रहा है । और थांगका चित्रकारों की वार्षिक आय एक लाख युवान से भी अधिक है । 

इधर के वर्षों में छींगहाई प्रांत के ह्वांगनान प्रिफेक्चर में कुल 28 सांस्कृतिक विरासत अध्ययन केंद्र स्थापित किये गये हैं । उन में बीस केंद्रों में रेगोंग कला का अनुसंधान किया जाता है । इन केंद्र के निर्माण में कुल तीस करोड़ युवान की पूंजी लगायी गयी है । हरेक केंद्र में प्रति वर्ष पचास थांगका चित्रकार प्रशिक्षित किये जा सकते हैं । यहां के थांगका चित्रकार सरकार की मदद में देश के पूर्वी शहरों जैसे शांघाई और थिएनचिन आदि में अपनी प्रदर्शनी का आयोजन करते हैं ताकि अपनी रचनाएं बेच सके ।

ह्वांगनान प्रिफेक्चर के रेगोंग सांस्कृतिक संरक्षण आयोग में कार्यरत युवैन युवनछंग ने कहा कि इधर के वर्षों में केंद्र सरकार और प्रांतीय सरकार के सांस्कृतिक विभागों ने थूंगरेन काउटी में थांगका कला के संरक्षण और युवा कलाकारों के प्रशिक्षण में भारी सहायता प्रदान की है । उन्हों ने कहा, “सरकार ने थांगका के विकास में भारी सहायता प्रदान की है और संबंधित कंपनियों को वित्तीय समर्थन दिया । थांगका कला के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए हम ने गैर-भौतिक विरासत केंद्र की स्थापना की और केंद्र के संस्कृति मंत्रालय ने भी प्रति वर्ष छह करोड़ युवान की भत्ता दी है । इस के अलावा कुछ थांगका कलाकारों की जीवन स्थितियां मुश्किल हैं, सरकार ने उन के जीवन सुधार में भी भारी सहायता दी है । मिसाल है कि सरकार ने ह्वांगनान आदि क्षेत्रों में गैर-भौतिक विरासत संग्रहालय स्थापित किये हैं और साथ ही सरकार ने थांगका कला के विकास को गरीबी उन्मूलन के साथ जोड़ दिया है ।”

वर्ष 2006 में थांगका कला समेत रेगोंग कला को देश की गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत नामसूची में शामिल करवाया गया । वर्ष 2008 के अगस्त में ह्वांगनान प्रिफेक्चर में रेगोंग सांस्कृतिक वातावरण संरक्षण क्षेत्र रखा गया है । वर्ष 2009 के अक्तूबर में रेगोंग कला को संयुक्त राष्ट्र के मानव गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत नामसूची में शामिल कराया गया ।

उधर छींगहाई प्रांत के गरीबी उन्मूलन व विकास ब्यूरो के प्रधान मा फंग शेंग ने कहा कि छींगहाई प्रांत की सरकार ने प्रति वर्ष थूंगरेन काउटी में थांगका चित्र कला के अध्यापकों के प्रशिक्षण के लिए विशेष खर्च प्रदान किया है । सरकार ने थांगका के विकास में गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य भी साकार किया है । अब थांगका चित्र एक उद्योग बन गया है । बहुत से स्थानीय चरवाहों ने भी थांगका चित्र के विकास में भाग लिया है जिससे गरीब परिवारों को रोजगार का मौका मिला है । मा फंग शेंग ने कहा,“वर्ष 2016 में हमारी थूंगरेन काउटी में 13 हजार थांगका चित्रकार हैं जबकि काउटी की योजना के अनुसार 13वीं पंचवर्षीय योजना के अंत थांगका चित्रकारों की संख्या 40 हजार तक जा पहुंचेगी और उद्योग का उत्पादन मूल्य चार अरब युवान तक जा पहुंचेगा । क्योंकि थांगका चित्र एक किस्म का कला भी है, और हस्तशिल्प भी माना जाता है । थांगका के विकास से लोगों को अधिक रोजगार दिलाया जाएगा । इसलिए हमें अधिक छात्रों का प्रशिक्षण करेंगे । प्रांतीय गरीबी उन्मूलन ब्यूरो प्रति वर्ष हमें बीस लाख युवान खर्च प्रदान करेगा और अध्यापकों व छात्रों को भी अधिक भत्ता मिल पाएगा ।”

( हूमिन )

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