वुहान के युवाओं का महामारी की रोकथाम में अनुभव

2020-05-06 21:00:00
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32 वर्षीय यांग श्याओ वुहान विश्वविद्यालय के अधीनस्थ चोंगनान अस्पताल के आईसीयू विभाग की डॉक्टर है। महामारी फैलने के बाद वह अपने डेढ़ साल की उम्र के बेटे को मां-बाप के पास छोड़कर मरीजों को बचाने में जुटी रही। काम में काफी व्यस्त होने की वजह से यांग श्याओ का दिल और शारीरिक शक्ति बड़ी परीक्षा में खरी उतरी, जो काम करने के बाद कभी सामने नहीं आई। इस कठिन काम में यांग श्याओ को बहुत अनुभव मिला। उसने कहा कि इलाज के दौरान मरीजों से आया भरोसा उसे गहन रूप से महसूस हुआ। उसका करियर आदर्श और दृढ़ बना रहा। यांग श्याओ ने कहाः

“मैं एक वरिष्ठ डॉक्टर बनना चाहती हूं। किस पद पर रहना है मैंने कभी नहीं सोचा। मेरे लिए मरीज़ों का भरोसा और इलाज में पर्याप्त क्षमता काफी है।”

35 वर्षीय वू श्वेन वुहान के तीसरे अस्पताल के न्यूनैटॉलॉजी विभाग की नर्स है, जो लगातार 10 वर्षों से नर्सिंग का काम कर रही है। महामारी फैलने क बाद उसने चिनयिनथान अस्पताल में सहायता करने के लिए नाम लिखवाया। वहां पर वू श्वेन और सहकर्मी रोज़ करीब 50 मरीजों की देखभाल करती थी। व्यस्त समय में उन्हें दसेक घंटों तक काम करना पड़ा।

वू श्वेन का बच्चा सिर्फ़ तीन साल का है। उसने कहा कि परिजनों के समर्थन और प्रोत्साहन से वह चिंता के बिना जी-जान से महामारी की रोकथाम में शामिल हो सकती है। वू श्वेन ने कहाः

“मेरे पिता जी सेवानिवृत्त सैनिक हैं। उन्होंने मुझे बताया था कि सेना में जो भी मिशन आता है, चाहे कितना मुश्किल क्यों न हो, सैनिकों को अदम्य भावना और अतुलनीय सहन-शक्ति से पूरा करना पड़ता है। कर्तव्य अवश्य ही पूरा हो जाता है। मेरे परिजन मेरा बड़ा समर्थन करते हैं। मेरे नेता ने भी कहा कि अगर समस्या है, तो वे समय पर मेरे लिए समाधान करेंगे। मैं सामान्य नौकरी पर असाधारण उपलब्धि प्राप्त करना चाहती हूं और मैंने ऐसा किया। मैं बहुत खुश हूं।”

साल 1986 में पैदा फंग चिंग वुहान शहर के वुछांग जिले स्थित श्वेआनशिनछंग रिहायशी क्षेत्र की प्रमुख है। इस रिहायशी क्षेत्र में 4300 से अधिक परिवार रहते हैं। महामारी के दौरान आंकड़ों की गिनती करना, मरीजों की संख्या संबंधित विभाग को रिपोर्ट देना, निवासियों के लिए दैनिक आवश्यकताएं खरीदना, घर-घर जाकर सामान पहुंचाना और अस्पताल में रहने वाले निवासियों के लिए पालतू जानवर की देखभाल करना जैसे छोटे-बड़े काम की फंग चिंग और उसके अन्य 11 सहकर्मियों ने जिम्मेदारी उठाई।

महामारी फैलने के शुरुआत समय में फंग चिंग और रिहायशी क्षेत्र के कर्मचारियों को हर दिन सौ से अधिक फोन उठाना पड़ते थे। रात को वे लोग सिर्फ़ चार-पांच घंटे तक सो पाते थे। महामारी पर काबू पाने के बाद रोकथाम का काम सामान्य स्थिति में आया। अपने काम पर फंग चिंग और विश्वस्त है। उसने कहाः

“पहले मुझे लगता था कि रिहायशी क्षेत्र के कर्मचारी सिर्फ़ निवासी कमेटी का काम करते हैं, जो विविध और नगण्य है। महामारी फैलने के बाद मुझे महसूस हुआ कि हमारा काम बहुत महत्वपूर्ण है। हम अपना काम अच्छी तरह करते हैं, तो कारगर से महामारी की रोकथाम की जा सकती है। निवासियों ने हमारी प्रशंसा की। हम बहुत गौरव महसूस करते हैं।”

23 वर्षीय ली यू वुहान शहर के कोंगशान जिले में दूध चाय की दुकान चलाता है। उसकी दुकान पिछले साल नवंबर में खुली थी। हालांकि अब नई दुकान की आमदनी ज्यादा नहीं है, लेकिन इस युवा मालिक ने फिर भी निर्णय लिया कि महामारी के दौरान काम करने वाले चिकित्सकों, डिलीवरी मैन और स्वयंसेवकों को मुफ्त में दूध की चाय दी जाती है। ली यू ने कहाः

“मैं वुहान का रहने वाला हूं। मैंने वेबसाइट और सोशल मीडिया में बहुत सक्रिय और उत्साहपूर्ण बातें देखीं। मुझे लगा कि वुहान वासी होने के नाते मुझे भी समर्थन करना चाहिए। इसलिए मैंने प्रेम के साथ महामारी की रोकथाम में शामिल लोगों की सहायता की।”

वुहान के युवा लोग अपनी व्यावहारिक कार्यवाही से समाज में योगदान करते हैं। वुहान की सड़क पर वे सामान्य जवान हैं, पर महामारी की रोकथाम में वे अपना भारी दायित्व निभाते हैं। वे युवावस्था में प्रयास करते हैं, उनकी ज़िंदगी अवश्य समृद्ध होगी।

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