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ग़रीबी उन्मूलन चीन में मानवाधिकार कार्य के विकास का प्रतीक

2019-08-07 21:00:00
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इस साल नए चीन की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ है। चीनी मानवाधिकार अध्ययन संघ ने कुछ दिन पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 41वें सम्मेलन के मौके पर स्विट्जरलैंड के जेनेवा स्थित पैलेस ऑफ नेशन्स में नए चीन की स्थापना के बाद पिछले 70 सालों में चीन में मानवाधिकार कार्य के विकास के विषय पर बैठक का आयोजन किया। इसमें चीनी मानवाधिकार विशेषज्ञों ने नए चीन की स्थापना के बाद पिछले 70 वर्षों में चीन में मानवाधिकार कार्य में हुए विकास से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि चीन के मानवाधिकार कार्य में उल्लेखनीय प्रगति मिली है, जिसमें गरीबी उन्मूलन सबसे महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों का कहना बिलकुल सही है। पिछले 70 सालों में चीन में 70 करोड़ से अधिक गरीब लोगों ने भीषण निर्धनता से छुटकारा पाया है, जो इसी अवधि में दुनिया के गरीबी उन्मूलन वालों की कुल संख्या का 70 प्रतिशत से भी अधिक है। कहा जा सकता है कि यह मानव के गरीबी उन्मूलन के इतिहास में एक चमत्कार है। चीन में गरीबी उन्मूलन की उपलब्धि चीन के मानवाधिकार कार्य के विकास का सबसे उल्लेखनीय प्रतीक है। बैठक में दक्षिण-पश्चिमी राजनीतिक विज्ञान और कानून विश्वविद्यालय के मानवाधिकार अनुसंधान संस्थान के अध्यापक शांग हाईमिंग ने पिछले 70 सालों में चीन में शिक्षा से गरीबी उन्मूलन में अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने कहाः

“कई दशकों में चीन ने गरीबी उन्मूलन के लिए बहुत कदम उठाए हैं। इसमें शिक्षा से गरीबी उन्मूलन पीढ़ी दर पीढ़ी गरीब लोगों के जीवन में सुधार का मूल मंत्र है। इसमें चीन ने बहुत उपयोगी अनुभव हासिल किए हैं।”

शांग हाईमिंग ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में चीन ने क्रमशः साक्षरता आंदोलन करने और नौ वर्षों की अनिवार्य शिक्षा को सर्वव्यापी बनाने समेत रणनीति अपनाई, जिससे गरीब लोगों का शिक्षा पाने का अधिकार सुनिश्चित किया गया और इससे बहुत अच्छा परिणाम हासिल हुआ। चीन में निरक्षरता दर नए चीन की स्थापना के समय में 80 प्रतिशत से कम होकर 4.08 फीसदी तक जा पहुंची। 99.91 प्रतिशत बच्चे पाठशाला जाने की उम्र में स्कूल में पढ़ाई करते हैं।

व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में चीन ने गरीब परिवार के बच्चों को व्यावसायिक शिक्षा देने और ग्रामीण श्रमिकों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के माध्यम से गरीब लोगों की गरीबी उन्मूलन की क्षमता उन्नत की।

वहीं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में चीन सरकार छात्रों को विश्वविद्यालय में प्रवेश पाने का समान मौका देती है और गरीब छात्रों के उच्च शिक्षा पाने का मौका बढ़ाती है। स्पेन के अख़बार एल पाइस ने चीन की काओखाओ यानी कॉलेज प्रवेश परीक्षा की प्रशंसा करते हुए कहा था कि चाहे छात्र के परिवार की स्थिति या पृष्ठभूमि कैसी भी क्यों न हो, यदि वह मेहनत से पढ़े, तो कॉलेज प्रवेश परीक्षा देकर कॉलेज की शिक्षा पा सकता है।

चीनी मानवाधिकार अध्ययन संघ के सदस्य लो पू ने चीन के तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में गरीबी उन्मूलन के विकास से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में तिब्बत के गरीबी उन्मूलन कार्य में बहुत अच्छी उपलब्धि हासिल हुई है। तिब्बत के कुछ क्षेत्रों में निवास के स्थानांतरण को शहरीकरण के निर्माण से जोड़ा जा रहा है और कुछ क्षेत्रों में बुनियादी संस्थापनों के निर्माण और व्यवसाय के विकास को साथ में बढ़ाया गया है, जिससे व्यवसाय के विकास के ज़रिए गरीब लोगों को रोज़गार का अवसर मिलेगा। इसके साथ साथ विभिन्न क्षेत्रों में तिब्बत की सहायता फंड, सामाजिक फंड और व्यावसायिक फंड के प्रयोग से गरीबी उन्मूलन परियोजना का कार्यांवयन किया जाता है। उद्देश्य है कि गरीब क्षेत्रों में सतत और स्थिरता से गरीबी से छुटकारा पाया जाएगा। लो पू ने कहाः

“पिछले जून तक तिब्बत में गरीब लोगों की संख्या 5.9 लाख से 1.5 लाख तक कम हुई है। गरीब काउंटियों की संख्या 74 से कम होकर 19 रह गई और गरीबी दर 25.2 प्रतिशत से कम होकर 5.6 फीसदी ही रह गई है। तिब्बत ने लक्ष्य पेश किया कि इस साल के अंतर बाकी 1.5 लाख गरीबों को गरीबी से निकालने के बाद उनकी भीषण गरीबी को दूर किया जाएगा।”

लो पू ने कहा कि तिब्बत में गरीबी उन्मूलन और पारिस्थितिकी संरक्षण को जोड़ने पर कायम रहता है, ताकि दोनों का साथ विकास हो सके। तिब्बत में पारिस्थितिकी संरक्षण क्षेत्र का पैमाना लगातार बढ़ रहा है। कुल 47 विभिन्न तरह के प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्रों का निर्माण हो चुका है, जिसका क्षेत्रफल स्वायत्त प्रदेश के कुल क्षेत्रफल का 35 प्रतिशत है। इसके साथ वर्ष 2016 से तिब्बत में पारिस्थितिकी से गरीबी उन्मूलन का कदम उठाया गया। घास के मैदान के निरीक्षण, संरक्षण क्षेत्रों के प्रबंध और पारिस्थितिक वन के संरक्षण समेत आठ प्रकारों के 7 लाख रोज़गार के अवसर पैदा हुए हैं, जो सब गरीबों और कम आय वालों को दिए गए।

चीनी मानवाधिकार अध्ययन संघ की उप महासचिव वांग लिनश्या ने कहा कि चीन में गरीबी उन्मूलन की प्रगति गरीब पर नियंत्रण करने के अनुभव के आधार पर की गई है। पिछले 70 सालों से चीन अपनी विशेषता वाले गरीबी उन्मूलन के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। वांग लिनश्या ने कहाः

“मानवाधिकार के सिद्धांत में चीन ने सबसे पहले यह विचारधारा पेश की कि जीने और विकास का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण मानवाधिकार हैं। यह विश्व मानवाधिकार दृष्टिकोण के लिए बड़ा योगदान है, जिससे विश्व मानवाधिकार के सिद्धांत को समृद्ध बनाया गया। चीन इस सिद्धांत के अनुसार गरीबी उन्मूलन का कार्यांवयन करता है, राष्ट्रीय मानवाधिकार का निर्माण को बढ़ाता है और बड़ी प्रगति की है।”

स्विट्जरलैंड, सिंगापुर, वेनेजुएला और म्यांमार जैसे देशों के कूटनीतिज्ञों और कुछ अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के अधिकारियों समेत 40 से अधिक लोगों ने इस बार की चीन में मानवाधिकार कार्य के विकास के विषय पर बैठक में भाग लिया।

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