हुपेइ में 59 दिन तक स्वयंसेवा करने वाले युवा चू रूक्वी की कहानी

2020-05-10 15:20:19
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18वर्षीय चू रूक्वी पश्चिमी चीन के शैनशी प्रांत की मेइ श्येन काउंटी के व्यावहारिक प्रशिक्षण केंद्र का छात्र है ।चालू साल 25 फरवरी को यानी चीन के परंपरागत त्योहार वसंत त्योहार में वे अपनी माता जी से छिपकर कोविड-19 महामारी से गंभीर प्रभावित हुपेइ स्वयंसेवा करने के लिए रवाना हुए ।जब वह 12 वर्ष का था ,उसके पिता जी की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी थी ।माता की चिंता बचाने के लिए उन्होंने माता जी को अपनी यात्रा के बारे में सच्ची बात नहीं कही ।

उस समय यातायात महामारी के कारण बाधित हो गया था ।यात्रा के अंतिम चरण में वह दो दिन और एक रात 110 किलोमीटर पैदल चला ।अंत में वह हुपेइ प्रांत के श्यो कान शहर की श्यो छांग काउंटी पहुंचा और वहां निर्धारित कोविड-19 इलाज अस्पताल में स्वयंसेवा करने लगा ।

उस समय अस्पताल में कर्मचारियों का अत्यंत अभाव था ।आपात प्रशिक्षण मिलने के बाद उस ने पृथक वास में जाकर मरीजों की देखभाल करना शुरू किया ।वह मरीजों के लिए खाना पहुंचाता था ,गंभीर मरीजों का जीवन लक्ष्य देखता था और उन के जीवन का ख्याल रखता था ।मरीजों का हौसला बुलंद करने के लिए उस ने स्थानीय बोली सीखी और चुटकुले सुनाता था ।वह रोज 6 घंटे काम करता था ।उसे मरीजों ,डाक्टरों और नर्सों की खूब प्रशंसा मिली ।

पृथक वास में लगातार 30 से अधिक दिन काम करने के बाद अस्पताल के प्रमुख ने जबरन से उसे आराम करने को कहा।

गृह स्थल लौटकर चिकित्सा निगरानी पूरी होने के बाद वह फिर माता जी के पास वापस आया ।उस की कहानी सुनकर बहुत लोग उसे वीर बताते हैं ।लेकिन उस ने सिर्फ शांति से कहा कि मैं वीर की उपाधि के योग्य नहीं हूं ,मैं ने सिर्फ ऐसा काम किया जो मैं कर सका ।

(वेइतुंग)

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