तिब्बती चिकित्सा की स्नान विधि गैर भौतिक सांस्कृतिक विरासतों की सूची में शामिल

2018-12-06 15:00:27
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तिब्बती चिकित्सा की स्नान विधि गैर भौतिक सांस्कृतिक विरासतों की सूची में शामिल

तिब्बती चिकित्सा की स्नान विधि गैर भौतिक सांस्कृतिक विरासतों की सूची में शामिल

28 नवंबर को चीनी संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय ने जानकारी दी कि परंपरागत तिब्बती चिकित्सा की स्नान विधि---स्वास्थ्य और रोग की रोकथाम पर चीनी तिब्बती जाति के ज्ञान और अभ्यास युनेस्को की मानव गैर भौतिक सांस्कृतिक विरासतों की नाम सूची में शामिल करायी गयी है। इस तरह चीन में कुल 40 गैर भौतिक सांस्कृतिक विरासत युनेस्को की सूची में शामिल कराये जा चुके हैं।

युनेस्को गैर भौतिक सांस्कृतिक विरासतों की सुरक्षा पर अंतर सरकारी समिति की 13वीं बैठक 26 नवंबर से 1 दिसंबर तक मॉरिशस की राजधानी लुइज़ बंदरगाह में हुई। 28 नवंबर को समिति ने समीक्षा करने के बाद प्रस्ताव पारित कर चीन से निवेदित परंपरागत तिब्बती चिकित्सा की स्नान विधि को युनेस्को की नामसूची में शामिल कराया।

तिब्बती चिकित्सा की स्नान विधि गैर भौतिक सांस्कृतिक विरासतों की सूची में शामिल

तिब्बती चिकित्सा की स्नान विधि गैर भौतिक सांस्कृतिक विरासतों की सूची में शामिल

तिब्बती चिकित्सा की स्नान विधि प्राकृतिक गरम झील या जड़ी बूटियों में उबाले गये पानी या भाप में स्नान करने से शारीरिक और मानसिक संतुलन का समायोजन कर स्वास्थ्य सुनिश्चित करने और रोग की रोकथाम का ज्ञान और अभ्यास है।

यह विरासत तिब्बत के स्थानीय धर्म बोन और तिब्बती बौद्ध धर्म से प्रभावित थी। वह तिब्बती जनता के जीवन की अवधारण से भी घनिष्ठ रूप से जुड़ी है। तिब्बत के परंरागत दर्शन में जीवन के पाँच स्रोत यानी धरती ,जल ,अग्नि ,आकाश और वायु हैं। वह एक तरफ तिब्बत में स्नान करने से रोग का इलाज और उसकी रोकथाम का अनुभव प्रतिबिंबित करता है और दूसरी तरफ पंरपरागत तिब्बती चिकित्सकीय सिद्धांतों का वर्तमान स्वास्थ्य कार्य में अभ्यास और विकास भी है।

युनेस्को की महासभा में भाग लेने वाले चीनी प्रतिनिधि मंडल के नेता और चीनी उप संस्कृति और पर्यटन मंत्री चांग शू ने बताया कि तिब्बती चिकित्सा की स्नान विधि का जन्म तिब्बतियों के जीवन से हुआ और इसमें जीवनी शक्ति भरी है।

उन्होंने बताया, तिब्बती चिकित्सा की स्नान विधि चीन के तिब्बतियों के स्वास्थ्य और रोग के इलाज और उसके रोकथाम से जुड़े परंपरागत ज्ञान हैं, जो उनके जीवन से घनिष्ठ रूप से जुड़ी है। यह विरासत परियोजना स्नान से रोग के इलाज और रोकथाम के आम लोगों के अनुभव को प्रतिबिंबित करती है। दूसरी तरफ़ वह वास्तव में आधुनिक काल में परंपरागत तिब्बती चिकित्सक सिद्धांतों का पालन और विकास भी है।

तिब्बती चिकित्सा की स्नान विधि गैर भौतिक सांस्कृतिक विरासतों की सूची में शामिल

तिब्बती चिकित्सा की स्नान विधि गैर भौतिक सांस्कृतिक विरासतों की सूची में शामिल

चांग शू के विचार में तिब्बती चिकित्सा की स्नान विधि को युनेस्को के विरासतों की नामसूची में शामिल करने के बाद आम लोग इस परंपरागत चिकित्सक उपाय के बारे में अधिक जागरूक होंगे और विश्व में इसके प्रचार को बढ़ावा भी मिलेगा, जिससे अधिकतर लोगों को लाभ मिल सके।

उन्होंने बताया, हमें विश्वास है कि युनेस्को की नामसूची में तिब्बती चिकित्सा की स्नान विधि को शामिल कराने से यह गैर भौतिक सांस्कृतिक विरासत अधिक लोकप्रिय होगी। लोगों में इसका महत्व बढ़ जाएगा और जीवन स्वास्थ्य और प्रकृति के समादर पर विभिन्न जातियों के वार्तालाप को बढ़ावा मिलेगा। एक ओर वह मानव और पर्यावरण के बीच बरकरार संबंधों को प्रतिबिंबित करता है, दूसरी ओर यह ज़ाहिर है कि परंपरागत ज्ञान और गैर भौतिक सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय बहुत महत्व देता है। चीन सक्रियता से अपना वायदा लागू कर इस विरासत की परियोजना का सतत विकास बनाए रखेगा ताकि इस मूल्यवान परंपरागत ज्ञान और अभ्यास को अधिकाधिक लोगों तक लाभ पहुंचाया जाए।

सूत्रों के अनुसार तिब्बती चिकित्सा की स्नान विधि चीन के तिब्बती इलाकों में काफी लोकप्रिय है, जो तिब्बती जनता के स्वास्थ्य की गारंटी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।चीन के भीतरी मंगोलिया और शिनच्यांग में उसका प्रचार भी होता है।

(वेइतुंग)

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