फिल्म निदेशक लू छ्वान:चीन की कहानी सुनाएं

2017-12-03 21:13:06
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फिल्म निदेशक लू छ्वान:चीन की कहानी सुनाएं

फिल्म निदेशक लू छ्वान महोत्सव में भाषण देते हुए

हाल में तीसरा चीन-युरोपीय संघ फिल्म महोत्सव ब्रसेल्स में आयोजित हुआ। मशहूर चीनी फिल्म निदेशक लू छ्वान ने“हमारा जन्म चीन में हुआ”शीर्षक प्रकृति संबंधि फिल्म को लेकर महोत्सव में भाग लिया और उनकी फिल्म को हार्दिक स्वागत मिला। उन्होंने चाइना रेडियो इन्टरनेशनल के संवाददाता को दिए एक इन्टरव्यू में कहा कि फिल्म “हमारा जन्म चीन में हुआ” की शूटिंग और इसे बनाना एक उत्तम अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्रक्रिया है। अंतरराष्ट्रीय टीम ने श्रेष्ठ तकनीकी गारंटी दी। चीनी फिल्म निदेशक के रूप में उन्होंने फिल्म में एक सुन्दर चीनी कहानी सुनाई। सुनिए एक रिकोर्डिंग रिपोर्ट विस्तार से

“प्रकृति की फिल्म” अमेरिकी डिज्नी कंपनी ने सबसे पहले बनाई, जो डॉक्यूमेंटरी के तरीके से प्रकृति संबंधि शूटिंग के बाद फीचर फिल्म के रूप में सामग्रियों की एडिटिंग की जाने वाली फिल्म है, इस प्रकार की फिल्म में वाणिज्यिक फिल्म के अपरिहार्य प्रमुख तत्व भी शामिल है। फिल्म “हमारा जन्म चीन में हुआ” में चीन में तीन विशेष जंगली जानवर के परिवारों को दिखाया गया है, यानी पांडा, हिम तेंदुए और गोल्डन बंदर। इन तीन प्रमुख पात्रों में पांडा और गोल्डन बंदर दक्षिण पश्चिमी चीन के सछ्वान प्रांत में रहने वाले जानवर हैं, जबकि हिम तेंदुए सानच्यांगयुआन क्षेत्र में पाये जाते हैं।

यहां मैं सानच्यांगयुआन के बारे में जानकारी देना चाहूंगी। चीन की सभ्यता और मां समान नदी के रूप में ह्वांग हो यानी पीली नदी, छांगच्यांग नदी यानी यांत्सी नदी और छह एशियाई देशों से गुज़रने वाली लान छांगच्यांग नदी (एशिया के दूसरे देशों में इसे मेकोंग नदी भी कहा जाता है) का उद्गम स्थल छिंगहाई तिब्बत पठार पर स्थित है। ये तीन नदियां छिंगहाई प्रांत से गुज़रती हैं और इनका उद्गम स्थान इसी प्रांत में स्थित है। इस तरह तीन नदियों के उद्गम स्थल को चीनी लोग सानच्यांग युआन कहते हैं। चीनी भाषा में “सान” का अर्थ “तीन”, “च्यांग” का अर्थ “नदी” और “युआन” का अर्थ “स्रोत” होता है। कुल मिलाकर कहा जाए, तो “सानच्यांगयुआन” का अर्थ “तीन नदियों का उद्गम स्थल” होता है। सानच्यांगयुआन क्षेत्र चीन के लिए ही नहीं, विश्व भर के पारिस्थितिकी और जलवायु के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

फिल्म निदेशक लू छ्वान:चीन की कहानी सुनाएं

फिल्म“हमारा जन्म चीन में हुआ”में पांडा, हिम तेंदुए और गोल्डन बंदर के अपने-अपने प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र में जन्म होने, बड़े होने और जीवन चक्र की कहानी सुनाई गई। अमेरिका, ब्रिटेन और चीन से आए तीन टीमों ने सहयोग करके तीन सालों में इस फिल्म का निर्माण पूरा किया।

इस फिल्म की शूटिंग की चर्चा करते हुए फिल्म निदेशक लू छ्वान ने कहा कि यह उनकी कल्पना के बाहर है कि डिज़्नी कंपनी ने एक प्रकृति संबंधि फिल्म की शूटिंग के लिए उन्हें आमंत्रित किया। शुरु में उन्होंने प्रयत्न करने के विचार से फिल्म के बारे में अपना विचार व्यक्त किया, शीघ्र ही उन्हें डिज़्नी कंपनी का जवाब मिला। लू छ्वान ने कहा:

“अगर एक ही जानवर को लेकर तीन सालों में शूटिंग करके एक ही फिल्म एडिटिंग करनी होती, तो मैं बिलकुल भी स्वीकार नहीं करता। मैं चाहता हूँ कि चीन में कुछ किस्मों वाले जानवरों को लेकर जीवन विश्वास के बारे में एक कहानी सुनाना चाहता हूँ। चीनी लोग प्रकृति से सीखने वाला विचार मानते हैं। पाँच पक्षियों का कूंगफू, चीनी चिकित्सीय दलील और यिन यांग जैसे वस्तुओं में प्रकृति से बहुत नज़दीक है। इसमें हम अनंत वाले शब्द को विश्वास करते हैं। इस तरह मैं कुछ किस्मों वाले जानवरों के चार ऋतुओं में जीवन-चक्र के माध्यम से जीवन विश्वास का वर्णन करना चाहता हूँ। इस प्रकार का विषय शुरु में निश्चित किया गया था।”  

फिल्म निदेशक लू छ्वान:चीन की कहानी सुनाएं

लू छ्वान फिल्म निदेशक ही नहीं इस फिल्म में पटकथा लेखकों में से एक भी है। अच्छी कहानी सुनाने के लिए उन्होंने जंगली जानवरों से जुड़ी सामग्रियों का सख्त रूप से चुनाव किया। उदाहरण के लिए “तावा” नाम के हिम तेंदुए के अपने दो बच्चों के पालन के लिए खतरे का सामना करने वाली कहानी। इसकी शूटिंग के लिए कुल 9 हिम तेंदुओं का प्रयोग किया गया। लेकिन फिल्म बनाने के अंतिम काल में लू छ्वान के कहानी सुनाने के तरीके के प्रति फिल्म निर्माता के रूप में बीबीसी के कर्मचारी ने शंका जताया। इसकी चर्चा करते हुए लू छ्वान ने कहा:

 “यह सच है कि फिल्म बनाने के अंतिम समय में हमारे बीच तीव्र विचार-विमर्श हुआ। मैं 4 फिल्म निर्माताओं में से एक हूँ, बाकी दो बीबीसी से हैं। उन्हें मेरी कहानी सुनाने के तरीके पर आशंका थी। उनके विचार में मैंने कहानी सुनाने पर ज्यादा ध्यान दिया। लेकिन मैं मानता हूँ कि फिल्म के माध्यम से विचार का स्थानांतरण करना है। लगता है कि उन्हें एक टीवी फिचर फिल्म चाहिए, लेकिन मैं केवल एक फिचर फिल्म चाहता हूँ। अंत में हमने हमारे अलग-अलग विचार को डिज़्नी कंपनी के सामने पेश किया। डिज़्नी ने मेरा समर्थन किया और कहा कि फिल्म में कहानी नम्बर एक है।”

लू छ्वान ने कहा कि बीबीसी के कर्मचारियों ने उन्हें बहुत ज्यादा मदद दी। लेकिन कहानी कैसी सुनाई जाएगी, वो निश्चित करना जरूरी था। वजह है कि यह चीन की कहानी। इस कहानी को पांडा द्वारा सुनाई जा सकती है, यांगत्सी नदीं में मगरमच्छ और पूर्वोत्तर बाघ द्वारा भी सुनाई की जा सकती है। लेकिन कहानी के विषय नहीं बदलना चाहिए। लू छ्वान अंत के परिणाम के प्रति संतुष्ट है। उन्होंने कहा:

“मुझे लगा कि इस बार का सहयोग बहुत परिपूर्ण है। अमेरिकी और ब्रिटिश टीमों ने उत्तम तकनीकी गारंटी दी। मैं इस फिल्म में फिल्म निदेशक, पटकथा लेखक और फिल्म निर्माता की भूमिका निभाई। हम एक चीनी कहानी सुना रहे हैं, इस तरह हम अपनी आत्मा और अपने प्रारंभिक विचार पर डटे रहते हुए एक बिलकुल चीनी रस वाली फिल्म सुनाने में सफल रहे।”

प्रकृति फिल्म “हमारा जन्म चीन में हुआ” इस वर्ष अप्रैल में उत्तर अमेरिकी क्षेत्र में रिलिज़ हुई, जिसका बॉक्स ऑफिस क्लेकशन 1.4 करोड़ डॉलर रहा। इसके पूर्व लू छ्वान द्वारा बनाई गई “लापता गन (The Missing Gun)”, “ख ख शी ली” और “नानचिंग, नानचिंग” आदि फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में हार्दिक स्वागत मिला और लू छ्वान कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हुए।  

फिल्म निदेशक लू छ्वान:चीन की कहानी सुनाएं

फिल्म बनाने में अपने पदचिह्न की चर्चा करते हुए लू छ्वान ने कहा कि दस से अधिक सालों में वह मानवता के रहस्य की खोज करने में प्रयासरत है। मसलन् फिल्म “नानचिंग, नानचिंग” शूटिंग करने के समय वह नानचिंग में हुए नरसंहार से जुड़े तथ्यों को सारी दुनिया में फैलाना चाहता था। लेकिन केवल इसी लक्ष्य के लिए फिल्म को शुद्ध जापानी विरोधी आक्रमण युद्ध से जुड़ी फिल्म को नहीं बनाया जाना चाहिए। वह नानचिंग में नरसंहार करने वाले जापानी सैनिकों के मानव की दृष्टि से सोच विचार करके फिल्म में युद्ध के प्रति मानवता के फर्क तो दिखाना चाहता है। ताकि मानव जाति सार्थक अनुभव प्राप्त कर सके। लू छ्वान की इसी आत्मा को प्रकृति की फिल्म “हमारा जन्म चीन में हुआ” में भी दिखाई जाती है। लू छ्वान ने कहा:

“फिल्म ‘हमारा जन्म चीन में हुआ’में चाहे पाँच किस्मों के जानवर हो या चार किस्मों के, हम ज्यादा तौर पर मानव की कहानी खोजते हैं। इसमें भले ही वर्तमान चीनियों के प्रतीक वाली कहानी सुनाते हैं। उदाहरण के लिए हिम तेंदुए वर्तमान जमाने में गांव से निकल कर शहर में मज़बूर बने किसान की तरह हैं। पांडा तो अमीरों की दूसरी पीढ़ी के लोग जैसे हैं, शायद उन्हें जीवन के बारे में कोई चिंता नहीं है, लेकिन उनके पास अपनी-अपनी चुनौतियां भी मौजूद हैं। वहीं गोल्डन बंदर देश में दूसरे बच्चे के जन्म देने वाली नीति के प्रति पैदा सवाल का प्रतिबिंब है। परिवार में पहले जन्म हुए बच्चे ने अपना पारिवारिक केंद्र का स्थान खो दिया है। यह चीनियों की कहानी भी है।”   

 फिल्म निदेशक लू छ्वान के अनुसार दिसम्बर 2017 में वे मेक युद्ध (Mech war) के बारे में एक फिल्म बनाएंगे। इसके संदर्भ में संबंधित टीम ने दो साल तक अनुसंधान किया है। लू छ्वान ने कहा कि चीन के विज्ञान-प्रेमी बच्चों को स्वदेशी “ट्रान्सफ़ॉर्मर” और मेक युद्ध फिल्म देखना है।    

(श्याओ थांग)

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