तिब्बत प्राचीन सांस्कृतिक संपत्तियों के संरक्षण पर ज़ोर दे रहा है

2017-09-25 09:40:11
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तिब्बत प्राचीन सांस्कृतिक संपत्तियों के संरक्षण पर ज़ोर दे रहा है

सुंदर पोताला महल

तिब्बत की यात्रा में न सिर्फ शानदार और सुंदर प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलते हैं, बल्कि यहां विशिष्ट और प्रचुर ऐतिहासिक - सांस्कृतिक संसाधनों का आनंद उठाया जा सकता है। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश चीन के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अवशेष संरक्षण वाले प्रांतों - प्रदेशों में शुमार है, जहां विश्व की छत पर रत्न कहा जाने वाला पोताला महल समेत कई हजार ऐतिहासिक अवशेष संरक्षण इकाईयां बसी हुई हैं। तिब्बत की ऐतिहासिक संपत्तियों की सुरक्षा के लिए स्थानीय सरकार ने नाना प्रकार के कदम उठाये ताकि पूर्वजों द्वारा रची गई ऐतिहासिक संपत्तियां हमेशा अच्छी स्तिथि में बनी रहें और विश्व भर के पर्यटक जीवंत इतिहास का अनुभव कर सकें।

ल्हासा नदी घाटी के केंद्र में लाल पहाड़ पर स्थित पोताला महल तिब्बती बौद्ध मठ, महल और केले से गठित वास्तु निर्माण का श्रेष्ठ प्रतिनिधि है और तिब्बत में सबसे बड़ा और संपूर्ण प्राचीन महल समूह है। चीनी मुद्रा रनमिनबी के पांचवें सेट की 50 युआन नोट के पीछे पोताला महल का चित्र बना हुआ है। दिसंबर 1994 में पोताला महल विश्व ऐतहासिक धरोहरों की नाम सूची में शामिल किया गया। बाद में ल्हासा स्थित जोखांग मंदिर और नोर्बुलिंगका उद्यान को भी इस सूची में शामिल किया गया। पोताला महल की बेहतर सुरक्षा के लिए 14 जुलाई 2008 को तिब्बत स्वायत्त प्रदेश सरकार ने एक दिन में पोताला महल की यात्रा करने वाले लोगों की संख्या सीमित कर दी। पर्यटकों को एक दिन पहले टिकट बुकिंग करना ज़रूरी होता है और निर्धारित समय पर यात्रा करना होता है।

ग्रीष्म ऋतु तिब्बत घूमने का सबसे अच्छा मौसम है। हर दिन महज़ 5 हजार लोगों को पोताला महल देखने का मौका मिलता है। पोताला महल प्रबंधन विभाग के उप निदेशक चुएतान ने बताया कि तिब्बत के इस नाम कार्ड की सुरक्षा के लिए पर्यटकों की संख्या सीमित करना पर्यटन के विकास और ऐतिहासिक अवेशष की सुरक्षा दोनों का ख्याल रखने वाला एक उपाय है। उन्होंने कहा, इस सवाल के बारे में हमने भी बहुत सोचा था। लेकिन पोताला महल की वस्तुगत स्थिति वहीं है। उसके पास, सीढियां और कुछ महल बहुत संकीर्ण या छोटे हैं और लकड़ी से बने हैं। अगर यहां पर अधिक लोग आते हैं, तो ढहने का खतरा मौजूद है। हमने सर्वेक्षण और माप कर पर्यटकों की संख्या निर्धारित की है।

चुएतान ने कहा कि हम बहुत दूर दूर से आने वाले पर्यटकों की भावना समझते हैं। पोताला महल प्रबंधन विभाग ने खुलने का समय बढ़ाने पर सोचा था, लेकिन वैज्ञानिक निरीक्षण से पता चला कि कर्मचारी अतिरिक्त ड्यूटी कर सकते हैं, लेकिन ऐतिहासिक अविशेष के लिए अतिरिक्त ड्यूटी नहीं है। पोताला महल का निर्माण 7वीं सदी में थूबो राजवंश के नरेश सोंगत्सेन गामपो के शासन में शुरू हुआ था। अब इस बात को 1300 साल बीत चुके हैं ।सोंगत्सेन गामपो के समय के महल युद्ध में नष्ट हुए थे। वर्तमान पोताला महल की बुनियादी शक्ल 17वीं सदी में पुरननिर्मित और निरंतर विस्तृत किये जाने का परिणाम है। फिर भी वह कई सौ वर्षों से गुज़र चुका है। सीआरआई संवाददाता ने देखा कि महल की ज़मीन पर कई दरारें नज़र आ रही हैं और दीवार पर खोखला होने और उज़डने के भाग दिखाई दे रहे हैं। चुएतान ने बताया कि सरकार पोताला महल के संरक्षण पर बड़ा महत्व देती आई है। नये चीन की स्थापना के बाद सरकार ने दो बार बड़े पैमाने पर पोताला महल का जीर्णोद्धार किया।

तिब्बत प्राचीन सांस्कृतिक संपत्तियों के संरक्षण पर ज़ोर दे रहा है

पोताला महल की दीवार

रिचय देते हुए उन्होंने कहा, पहली बार वर्ष 1989 से 1994 के बीच हुआ। सरकार ने पोताला महल की बड़ी मरम्मत में 5 करोड़ 50 लाख युआन की पूंजी लगायी, जो उस समय एतिहासिक अवशेष संरक्षण में सबसे बड़ी पूंजी निवेश थी। वर्ष 1994 में पोताला महल विश्व सांस्कृतिक धरोहरों में शामिल कराया गया। वर्ष 2001 से पोताला महल की दूसरी बड़ी मरम्मत शुरू हुई। सरकार ने 23 करोड़ युआन की पूंजी लगायी। इस दौरान मुख्य तौर पर महल व इमारत के आंतरिक भाग का जीर्णोद्धार किया गया। पोताला महल का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना है। इधर कुछ साल ल्साहा के आसपास में लगातार भूकंप आता रहता है, जो पोताला महल के लिए बड़ा ख़तरा है। सरकार ने पोताला की बुनियाद को मज़बूत करने में बड़ी धनराशि लगायी।

पोताला महल के प्रबंधन विभाग के उपनिदेशक चुए तान ने कहा कि ऐतिहासिक अवशेषों का उपाय अब निरंतर सुधर रहा है। सूचनाकरण के अधिकाधिक तरीके का प्रयोग किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, पहले पोताला महल के संरक्षण में परंपरागत तरीके से उपाय किया जाता था, यानी कहां खराब हुआ, ढह गया या बारिश का पानी अंदर आया, हम इसे देखने के बाद मरम्मत करते थे। पाँच साल पहले ने हमने वैज्ञानिक उपाय का इस्तेमाल कर पोताला महल के ढांचे का निरीक्षण किया। पहले चरण में हमने लकड़ियों से बने ढांचे का निरीक्षण किया। यात्रियों की भीड़ से लकड़ियों के ढांचे को बड़ा नुकसान हुआ। हमने सर्वे से मिले आंकड़ों के मुताबिक पीक सीजन में दैनिक यात्रियों की संख्या 5 हज़ार निर्धारित कर दी। अगले चरण में हम सटीक माप पूरा करेंगे। पोताला महल के हर गलियारे, कमरे और हर भाग का माप किया जाएगा ताकि सटीक रूप से दरार या डूबने के आंकड़े प्राप्त किये जाएं। आंकड़े इकट्ठा करने के बाद हम पहल कर सकेंगे। हम खराब होने के पहले मरम्मत करेंगे।

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लोपुलिंगका ---रत्न उद्यान

बचाव और रोकथाम दोनों को महत्व देना, प्रगतिशील सूचना तकनीक के इस्तेमाल से निरीक्षण, विश्लेषण, प्रदर्शन, तिब्बती प्राचीन अवशेषों के संरक्षण में लोकप्रिय हो रहा है। लोपुलिंगका ल्हासा के पश्चिमी उपनगर में स्थित है। उसका मतलब रत्न उद्यान है। लोपुलिंगका का निर्माण 18वीं सदी के चालीस वाले दशक में शुरू हुआ था, जो तिब्बती शैली वाला उद्यान है। दो सौ वर्षों के निर्माण और विस्तार के बाद लोपुलिंगका में हरा भरा दिखाई देता है और विभिन्न विशिष्ट इमारतें भी नज़र आती हैं। लोपुलिंगका तिब्बत के मानव निर्मित उद्यानों में सबसे बड़ा और सबसे सुंदर है। वहां मौजूद ऐतिहासिक धरोहरों की संख्या भी सबसे ज्यादा है।

लोपुलिंगका प्रबंधन विभाग के निदेशक लापात्सीरन ने बताया कि केंद्रीय सरकार हमेशा से लोपुलिंगका की सुरक्षा ,विकास ,प्रबंधन और प्रयोग को महत्व देती आयी है।

उन्होंने कहा, इधर कुछ साल हमने देश की विशेष कोष की धनराशि का आवेदन कर ऐतिहासिक अवशेषों का एहतियाती संरक्षण और फर्स्ट एड बचाव किया। लोपुलिंगका में तिब्बत का प्रथम सांस्कृतिक संपत्ति निगरानी केंद्र स्थापित किया गया। केंद्रीय सरकार ने 1 करोड़ युआन लगाकर पूर्व निगरानी योजना लागू की। हमारा निगरानी केंद्र इमारत, भित्ति चित्र के अलावा उद्यान में वनस्पत्ति, जल संसाधन, टिकट खिड़की, यात्रियों की संख्या की निगरानी करता है।

लापात्सीरन ने बताया कि लोपुलिंगका में इमारतों के अलावा 30 हज़ार ऐतिहासिक अवशेष हैं, जिनमें अधिकांश थांगखा, बुद्ध की प्रतिमा, सूत्र पुस्तक हैं। उनका बड़ा मूल्य है। तिब्बत का मौसम सूखा है, इसलिए 80 प्रतिशत से अधिक अवशेष अच्छी तरह सुरक्षित हैं। सबसे बड़ी चिंता है कि सूत्र पुस्तकों की सुरक्षा। अगर तापमान और आर्द्रता अच्छी नहीं है, तो सूत्र पुस्तक खराब हो जाएंगी। वैज्ञानिक निगरानी से संभावित नुकसान न्यूनतम स्तर पर घटाया जाता है।

उन्होंने बताया, हमने एक निगरानी मंच स्थापित किया। ऐतिहासिक अवशेषों के इकट्ठा होने वाली जगह जैसे महल और भंडारण में, सेंसर उपकरण और तापमान और आर्द्रता वाले उपकरण लगाये गये हैं। निगरानी से मिले आंकड़े मंच पर भेजे जाते हैं और मंच में संबंधित आंकड़ों का वर्गीकरण और विश्लेषण किया जाता है। उदाहरण के लिए अलग अलग मौसम के हालात में भित्ति चित्र ज्यादा सूखे या ज्यादा नमी है, ये हम सब जानते हैं।

ऐतिहासिक अवशेषों का संरक्षण एक व्यवस्थित परियोजना है। संभावित खतरे की रोकथाम सबसे महत्वपूर्ण है। नवंबर 2015 में तिब्बती स्वायत्त प्रदेश पोताला महल सांस्कृतिक संपत्ति संरक्षण प्रबंधन नियमावली लागू हुई। इसके बारे में पोताला महल प्रबंधन विभाग के उपनिदेशक चुएतान ने कहा, इस नियमावली का मुख्य विषय पोताला महल के आसपास के पर्यावरण के बारे में है। पोताला महल के पास ऊंची इमारत का निर्माण प्रतिबंधित है। पोताला महल की वाणिज्यिक गतिविधि के बारे में ठोस नियम भी बनाये गये हैं। यह प्रदेश में ऐतिहासिक अवशेषों की सुरक्षा में बनायी गयी पहली नियमावली है।

तिब्बत प्राचीन सांस्कृतिक संपत्तियों के संरक्षण पर ज़ोर दे रहा है

लोपुलिंगका की झलक

पोताला महल, जोखांग मंदिर, लोपुलिंगका के अलावा तिब्बत में पंजीकृत विभिन्न सांस्कृतिक अविशेष स्थलों की संख्या 4277 है। मूल्यवान ऐतिहासिक अवशेषों की सुरक्षा के अलाव उनका अच्छा प्रयोग करना चाहिए। लापात्सीरन ने बताया कि लोपुलिंगका में डिजिटीकरण का कार्य शुरु हो चुका है।

उन्होंने कहा, डिजिटिकरण ऐतिहासिक अवशेष कार्य का भावी रुझान है। बाद में हम 2 हजार वर्गमीटर भित्ति चित्र का डिजिटीकरण करेंगे। फिर पूरी इमारतों का डिजिटीकरण करेंगे। हम वीआर यानी वर्चुअल रियलिटी तरीके से पूरा लोपुलिंगका दिखएंगे।

पोताला महल के चुएतान ने कहा कि पोताला महल का डिजिटीकरण भी किया जाएगा। यह व्यापक देसी विदेशी पर्यटकों और कला प्रेमियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। (वेइतुङ)

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