सौ वर्षों में चीनी रेलगाड़ी के इंजन का विकास

2017-08-18 12:43:06
Comment
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

चीनी रेलवे संग्रहालय में प्रदर्शित इंजन

26 जून को पूरे बौद्धिक संपत्ता अधिकार संपन्न चीनी मानक वाली हाई स्पीड़ ट्रेन का संचालन पेइचिंग और शांगहाई के बीच शुभारंभ हुआ। यह चीनी रेलगाड़ी के इतिहास में एक नया मील-पत्थर है। करीब सौ वर्ष पहले चीन को विदेशी इंजन का निर्यात करना पड़ा था। अब चीन ने विश्व में सबसे बड़ी बुलेट ट्रेन नेटवर्क का निर्माण किया और अपनी शक्ति से हाई स्पीड ट्रेन का इंजन बनाने में महारत हासिल की।

चीनी रेलवे संग्रहालय पूर्वी पेइचिंग में बना है, जिसका क्षेत्रफल 10 हज़ार वर्गमीटर से अधिक है। इसमें 120 से अधिक रेलगाड़िओं के इंजन प्रदर्शित किये गए हैं। भाप के इंजन से डीज़ल इंजन तक, बिजली से चलने वाले इंजन से बुलेट ट्रेन के इंजन तक ,अलग अलग किस्मों के इंजन चीनी रेगलाड़ी के विकास के इतिहास के साक्षी हैं। संग्रहालय में काम करने वाले गाइड यांग लिंग ने बताया, हमारे संग्रहालय में सबसे पुराना इंजन और चीन में अब तक मौजूद सबसे पुराना इंजन यह शून्य नंबर भाप से चलने वाला इंजन है। वह वर्ष 1881 में ब्रिटेन में बना था।

चीन में अब तक मौजूद सब से पुराना इंजन शून्य नंबर भाप-इंजन

परिचय के अनुसार वर्ष 1865 में रेलगाड़ी पहली बार चीन में नज़र आयी। एक ब्रिटिश व्यापारी ने पेइचिंग में एक किलोमीटर लंबा परीक्षात्मक रेलवे मार्ग बनाया। उनका लक्ष्य था कि लोगों में रेलवे के प्रति रूचि जगाना। लेकिन इतनी तेजी से दौड़ने वाली रेलगाड़ी को देखकर स्थानीय लोगों में रुचि के बजाये डर पैदा हुआ। लोगों के विचार में यह रेलगाड़ी राजधानी के फंगश्वै को नष्ट करेगी। अंत में स्थानीय सरकार ने यह परीक्षा बंद कर दी। वर्ष 1876 में ब्रिटिश कंपनी यी ह यांग हांग ने शांगहाई में तीस किलोमीटर लंबे रेलवे का संचालन शुरू किया। यह चीन में संचालित होने वाली पहली रेलवे लाइन थी। लेकिन इस रेलवे लाइन के निर्माण को तत्कालीन छिंग राजवंश सरकार की मंजूरी नहीं मिली, जो चीन की प्रभुसत्ता का उल्लंघन था। इस रेलवे को लेकर बड़े वाद विवाद और मुठभेड़ भी हुई। अंत में छिंग सरकार ने बड़ी कीमत अदाकर इस रेलवे को खरीदकर उसका नाश कर दिया। चीनियों द्वारा बनाई गई पहली रेलवे थांगशान से शू क चुआंग तक चलती थी। उसका निर्माण वर्ष 1881 में पूरा हुआ, जिसकी लंबाई सिर्फ 11 किलोमीटर थी।

वर्ष 1949 से पहले चीन के भाप इंजन मुख्य तौर पर विदेशों से मंगवाए जाते थे। उस समय कई देशों से आये 140 से अधिक किस्मों के भाप इंजन चीनी रेल की पटरियों पर दौड़ते थे। यांगशी ने बताया,

नये चीन की स्थापना के पहले वास्तव में चीन के पास इंजन डिजाइन करने और बनाने की क्षमता नहीं थी। चीनी रेलवे को विदेशी इंजन का मेला कहा जाता था। हमारे हॉल में प्रदर्शित ये भाप के इंजन 7 देशों से आये हैं। उस समय चीन के साजो सामान विनिर्माण का स्तर काफी पीछे था।

वर्ष 1949 में नये चीन की स्थापना के बाद केंद्रीय सरकार ने रेलवे के विकास को बड़ा महत्व दिया। वर्ष 1952 में सीफांग रेलगाड़ी कारखाने ने विदेशी इंजन के मुताबिक चीन का पहला भाप का इंजन बनाने में सफलता पाई, जिसने इतिहास रचा था। वर्ष 1956 में चीन ने खुद से पहला भाप इंजन बनाया। उसका नाम छिएन चिन नंबर 0001 था। छिएन चिन का अर्थ चीनी भाषा में आगे बढ़ना है। यांग शी ने बताया,वर्ष 1956 से पहले चीन या तो दूसरे देशों के इंजन की नकल बनाता था या दूसरे देशों द्वारा चीन में छोडे गये इंजन की मरम्मत करता था। डिजाइन से निर्माण तक यह चीन से अपनी शक्ति पर निर्भर रहकर बनाया गया पहला इंजन था, जिसकी स्मृति का महत्व है।

शोशान नाम का बिजली-इंजन

युग विकास और तकनीकी प्रगति के साथ अंतरदहल इंजन की भूमिका अधिक अहम हो गयी। चीन ने वर्ष 1958 में डीज़ल इंजन बनाना शुरू किया। इस श्रृखलात्मक इंजन का तुंग फंग नाम रखा गया। तुंग फंग का अर्थ पूर्वी हवा है। यांगशी के अनुसार अंतरदहल इंजन का उत्तर-पश्चिमी चीन के गोबी क्षेत्र, उत्तर-पूर्वी चीन के ता शिंग एन लिंग जैसे सूखे क्षेत्र और दक्षिण पश्चिमी चीन के पहाड़ी क्षेत्र में व्यापक प्रयोग होता था। उन्होंने बताया, यह इंजन तुंग फंग 4सी है। हमारे रेलवे में उसे प्यार से नीली बिल्ली बुलाते हैं। देखने में उसके अगले भाग की सजावट बिल्ली के कान की तरह है। तुंग फंग इंजन बिजली से चलता है।

बिजली के व्यापक प्रयोग से बिजली के इंजन चीनी रेलवे के मुख्य इंजन बने। वर्ष 1969 में शोशान नाम का बिजली का इंजन चीनी यात्री और माल रेलगाडियों के मुख्य इंजन बना। शोशान अध्यक्ष माओ का गृहस्थान है।

फू शिंग हाई स्पीड ट्रेन

21वीं सदी में दाखिल होने के बाद चीन ने रेलगाड़ी के आधुनिकीकरण पर ज़ोर लगाया। वर्ष 2007 में चीनी हाई स्पीड ट्रेन का औपचारिक संचालन शुरू हुआ। चीनी रेलवे ने बुलेट ट्रेन के युग में प्रवेश किया। 26 जून 2017 को फूसिंग नाम की चीनी मानक वाली हाई स्पीड ट्रेन का संचालन आरंभ हुआ, जिसका मतलब है कि चीनी रेलवे तकनीक विश्व में अग्रसर रहती है। यांग शी ने बताया, अब हम पूरी रेलगाड़ी के बौद्धिक संपदा अधिकारी हैं। हम गर्व से बता सकते हैं कि चीनी रेलवे की समग्र व्यवस्था विदेशों को निर्यात कर सकते हैं, क्योंकि सारी तकनीक पूरी तरह से हमारे पास है।

क्वी हुआ एक रेलगाडी चालक हैं। उनके पिता और दादा भी रेलगाड़ी चालक थे। उनके दादा का एक सपना था कि एक दिन चीन भी अपना इंजन बना सकेगा। उनके दादा का सपना पूरा हो चुका है। क्वी हुआ ने बताया ,मेरे दादा जापानी अतिक्रमण विरोधी युद्ध के समय रेलगाडी चलाते थे। उस समय सारे इंजन विदेशी थे। उस समय उनकी एक अभिलाषा थी कि जितनी जल्दी हो सके ही चीन अपने इंजन खुद बनाए।

(वेइतुङ)

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories