भारत और चीन को एक दूसरे से सीखना चाहिए : आईएएस किरण सोनी गुप्ता

2019-07-10 15:21:23
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इस साल युवा एक्सचेंज 2019 समारोह के तहत भारत सरकार के खेल मंत्रालय की ओर से 200 भारतीय युवाओं का प्रतिनिधिमंडल चीन दौरे पर आया। इस युवा प्रतिनिधिमंडल ने पेइचिंग, लानचो और तुंगह्वांग की यात्रा की। यात्रा के दौरान, प्रतिनिधिमंडल ने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थानों के अलावा विश्वविद्यालयों, उद्योग और वाणिज्यिक निकायों, मीडिया संगठनों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का दौरा किया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारत सरकार के युवा मामलों एवं खेल मंत्रालय में अपर सचिव एवं वित्तीय सलाहकार किरण सोनी गुप्ता (आईएएस अधिकारी) ने किया।

आईएएस किरण सोनी गुप्ता ने चाइना रेडियो इंटरनेशनल (सीआरआई) के साथ ख़ास बातचीत करते हुए कहा, “साल 2006 से हर साल चीन का प्रतिनिधिमंडल भारत जाता है, और भारत का प्रतिनिधिमंडल चीन आता है। मैं समझती हूं कि इस युवा एक्सचेंज का मुख्य उद्देश्य भारत और चीन को समझना, विकास पर एक आम सहमति बनाना, और तो और हमारे युवाओं और युवा नेताओं को यह समझना है कि दुनिया किधर जा रही है और हमारा इस वैश्विकरण युग में क्या रोल है। यह सीखने का सबसे बड़ा अनुभव है।”

उन्होंने यह भी कहा कि साल 2014 में दोनों देशों के बीच एक एमओयू हुआ था जिसमें 200 लोगों का प्रतिनिधिमंडल तय हुआ। यह भारत सरकार के खेल मंत्रालय का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल है। उनका कहना है कि जब दोनों देशों के युवाओं के बीच आदान-प्रदान होता है तो दोनों देशों के युवा एक दूसरे से आनंदपूर्ण तरीके से सीखते हैं, और प्रत्यक्ष रूप से अनुभव प्राप्त करते हैं। इससे पूर्वाग्रह व परिकल्पना की संभावना नहीं रह पाती।

किरण सोनी गुप्ता ने सीआरआई के साथ आगे बातचीत में कहा कि भारत और चीन दोनों ही बहुत ही अलग तरह से संयोजित हैं और दोनों ही अपने-अपने तरीकों से सफल हैं। चीन ने विनिर्माण केंद्र बनाकर पूरी दुनिया में अपनी एक अलग जगह बनायी है। वहीं, भारत की भी अपनी ताकतें हैं, जिन्हें मजबूत करते हुए आगे बढ़ा है। दोनों ही देश लोगों के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन अपने अलग-अलग तरीकों से।

उन्होंने यह भी कहा, “विश्व व्यापार की बात करें, तो भारत और चीन दोनों अपनी जनसंख्या के हिसाब से बहुत बड़ी घरेलू मांग आधार हैं। जब भारत और चीन दोनों इकट्ठा होते हैं, तो देखते हैं कि दुनिया का कोई भी देश इन दोनों देशों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। इस क्षेत्र में अगर स्थिरता, एकमत और समृद्धि है तो मैं कहने में संकोच नहीं करूंगी कि दुनिया में जो भावी प्रवत्ति है वो भारत-चीन संबंध द्वारा निर्धारित होगा।”

चीन और भारत के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर देते हुए किरण सोनी गुप्ता ने सीआरआई से कहा कि आज वैश्वीकरण के युग में भारत और चीन के बीच परस्‍पर संबद्ध बढ़ गया है। दोनों देशों की कंपनियां एक दूसरे देशों में अपना संयंत्र स्थापित कर रही हैं। चीन विश्व में अपने तीन गुणों के लिए जाना जाता है- स्किल (कौशल), स्पीड (गति) और स्केल (पैमाना)।

उन्होंने यह भी कहा, “भारत को चीन से बहुत कुछ सिखने की जरूरत है, और चीन भी भारत से बहुत कुछ सीख सकता है। भारत और चीन को हर क्षेत्र में सहयोग करना चाहिए। सीमा-पार ऐसी बहुत-सी चीज़े हैं जो अपनी मौजूदा विकास मॉडल के भी पार जाकर हम और अधिक समृद्धि ला सकते हैं। यह अभिनव भावना है, जो दोनों देशों के युवाओं को ग्रहण करना चाहिए ताकि अपने देश के लिए एक विजन बना सकें।”

खेल के क्षेत्र में आदान-प्रदान व सहयोग पर बात करते हुए भारत सरकार के युवा मामलों एवं खेल मंत्रालय में अपर सचिव किरण सोनी गुप्ता ने कहा कि जब वुहान शिखर बैठक हुई थी तो सहयोग करने के लिए खेल का क्षेत्र भी उनमें से एक था। भारत खेल के क्षेत्र में भी बहुत आगे जाना चाहता है और उसका खेलों पर फोकस भी है। उन्होंने कहा कि चीन ने बहुत सफलतापूर्वक ओलंपिक खेलों का आयोजन कर पूरे विश्व को दिखा दिया था कि कितना खूबसूरत तरीके से आयोजित कर सकते हैं। चीन किस तरह से ओलंपिक मेडल विजेता को ट्रेनिंग देता है, वो सिखने लायक है। खेल के क्षेत्र में भारत को चीन से सीखने की जरूरत है।

उन्होंने आगे कहा, “हमें खुले विचारों के साथ चीन से बहुत कुछ सीखना है, और हम भी सीखा सकते हैं। जब हम एक दूसरे की ताकत बन जाते हैं तो संबंधों को मजबूत करते हुए खुशहाली की ओर आगे बढ़ सकते हैं।” उन्होंने बातचीत में यह भी बताया कि भारत और चीन के बीच खेल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए इस महीने भारत के खेल सचिव और “खेलों इंडिया” के डिप्टी डायरेक्टर के चीन आने की संभावना है।

(अखिल पाराशर)

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