सूचना:चाइना मीडिया ग्रुप में भर्ती

भारत स्थित चीनी राजदूत के साथ इंडियन ट्रिब्यून ने विशेष साक्षात्कार किया

2018-10-17 10:00:00
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

भारत स्थित चीनी राजदूत के साथ इंडियन ट्रिब्यून ने विशेष साक्षात्कार किया

भारत स्थित चीनी राजदूत के साथ इंडियन ट्रिब्यून ने विशेष साक्षात्कार किया

हाल में चीनी राष्ट्रीय दिवस से पहले भारतीय अख़बार इंडियन ट्रिब्यून ने भारत स्थित चीनी राजदूत ल्वो चाओह्वेई के साथ साक्षात्कार किया। मौके पर ल्वो चाओह्वेई ने चीन-भारत संबंध, क्षेत्रीय स्थिति, एक पट्टी एक मार्ग, चीन-अमेरिका व्यापारिक विवाद, सुधार व खुलेपन की 40वीं वर्षगांठ और शिनच्यांग में धार्मिक स्वतंत्रता आदि मुद्दों पर पत्रकार के सवालों का जवाब दिया। विस्तृत रूप से सुनिए इस साक्षात्कार का सारांश।

ल्वो चाओह्वेई ने चीन-भारत संबंधों की चर्चा में कहा कि उन्हें भारत में राजदूत के तौर पर काम करते हुए दो साल हो चुके हैं। इस बीच चीन-भारत संबंध खराब भी हुए। 2016 में दोनों देशों के संबंध न्यूक्लियर सप्लाई देशों के समूह आदि मुद्दों की वजह से खराब हुए। 2017 में डोकलाम सैन्य टकराव से द्विपक्षीय संबंधों में शिथिलता आयी।

2017 के सितंबर को चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने श्यामन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भेंटवार्ता की, जिस ने बिगड़े द्विपक्षीय संबंधों में सुधार किया। दोनों ने अनौपचारिक भेंटवार्ता करने पर सहमति प्राप्त की।

 इस साल के अप्रैल माह में चीन और भारत के नेताओं ने वूहान में अनौपचारिक भेंटवार्ता की। वूहान भेंटवार्ता ने द्विपक्षीय संबंधों का पुनःनिर्माण किया। हाल में चीन-भारत संबंधों का स्थिर विकास हो रहा है। कम्युनिकेशन, कॉरपरेशन, कांटेक्ट्स, कोआर्डिनेशन और कंट्रोल एंड मैनेजमेंट चार सी वूहान भेंटवार्ता की सहमति का सार है।

 पिछले चार महीनों में दोनों देशों के नेताओं ने तीन बार मुलाकातें कीं। वे नवम्बर में जी-20 के शिखर सम्मेलन में भी मुलाकात करेंगे। चीनी स्टेट काउंसलर एवं रक्षा मंत्री ने अगस्त माह में भारत की यात्रा की, जबकि चीनी स्टेट काउंसलर एवं सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री भी अक्तूबर माह में भारत की यात्रा पर जाएंगे। इस साल दोनों पक्ष उच्च स्तरीय सांस्कृतिक आदान प्रदान प्रणाली की पहली बैठक बुलाएंगे। दोनों देशों की सीमा समस्या के विशेष प्रतिनिधियों की भेंटवार्ता भी चीन में आयोजित होगी। चीन-भारत संबंधों के भविष्य के प्रति वे आशावान हैं।

वूहान भेंटवार्ता के बाद दोनों देश चार क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करेंगे। पहला, सहयोग के केक का विस्तार करेंगे। इस साल की जनवरी से जुलाई माह तक द्विपक्षीय व्यापार 55 अरब अमेरिकी डॉलर था, जिसमें पिछले साल की तुलना में 15 प्रतिशत की वृद्धि आयी है। चीन द्विपक्षीय व्यापार के असंतुलन सवाल को बड़ा महत्व देता है और कुछ भारतीय उत्पादों के चीन में आयात करने की टैरिफ को कम किया है। भविष्य में चीन भारत से और ज्यादा चीनी, अनाज और दवाओं का आयात करेगा। चीन भारत के साथ स्वतंत्र व्यापार समझौते की वार्ता को पुनः शुरू करेगा। चीन भारत से हाई स्पीड रेल, उद्योग उद्यान आदि के सहयोग का विकास करना चाहता है, नयी ऊर्जा, विज्ञान व तकनीक आदि क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग का विस्तार करना चाहता है। चीन और भारत ने 14 मैत्री शहरों को जोड़ने की स्थापना की है। स्थानीय सहयोग ओतप्रोत से किया जा रहा है।

दूसरा, दोनों पक्ष अंतर्राष्ट्रीय व क्षेत्रीय सवालों के समन्वय को मजबूत करेंगे। अमेरिका ने एकतरफा तौर पर व्यापारिक विवाद छेड़ा और रूस के खिलाफ हथियार बेचने पर पाबंदी लगायी। साथ ही अमेरिका ने विभिन्न देशों से ईरान से तेल के आयात को बंद करने की मांग भी की। चीन और भारत इस से क्षति पहुंचायी गयी है। अब दोनों देश समन्व को मजबूत कर समान हितों की रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं।

वूहान अनौपचारिक भेंटवार्ता की उपलब्धियों में से एक अफगानिस्तान में चीन-भारत प्लस सहयोग करना है। निकट भविष्य में दोनों पक्ष अफगानिस्तान के राजनीतिज्ञों को प्रशिक्षित करेंगे। इस तरह के सहयोग का नया फार्मूल भी नेपाल, भूटान और मालदीव समेत दक्षिण एशियाई देशों तक विस्तृत किया जा सकता है, जो चीन-भारत आपसी विश्वास के लिए हितकारी साबित होगा।

ल्वो चोओह्वेई ने साक्षात्कार में आगे बताया कि भारत आतंकवाद विरोधी समस्या पर बड़ी नजर रखता है। चीन और भारत दोनों आतंकवाद के शिकार हैं। चीन भारत और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ आतंकवाद का विरोध करना चाहता है। आतंकवाद की कोई राष्ट्रीय सीमा नहीं होती। विभिन्न देशों को सहमति प्राप्त कर एक साथ कार्यवाई करनी चाहिए।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शांगरिला वार्तालाप पर जोर दिया कि भारत की नीति किसी भी देश के खिलाफ नहीं है। भारत खुलेपन, समावेशी और नियम पर आधारित सहयोग का पक्ष लेता है। चीन इस की सराहना करता है।

 चीन भारत के शांगहाई सहयोग संगठन के औपचारिक सदस्य देश बनने का स्वागत करता है। चीन शांगहाई सहयोग संगठन के ढांचे में चीन-भारत आतंकवाद विरोधी और आपसी संपर्क सहयोग को प्रगाढ़ करना चाहता है। चीन चीन-भारत-पाकिस्तान त्रिपक्षीय सहयोग पर विचार भी करेगा। चीन भारत-पाक संबंधों के सुधार में भूमिका अदा करना चाहता है।

नवोदित बड़े देश होने के नाते चीन और भारत को संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व व्यापार संगठन, ब्रिक्स, जी-20 ग्रुप, पूर्वी एशियाई शिखर सम्मेलन के ढांचे में जलवायु परिवर्तन, स्वतंत्र व्यापार, विकासशील देशों के हितों, ऊर्जा सहयोग, समुद्री सहयोग आदि मुद्दों पर संपर्क बरकरार रखना चाहिए और समान हितों की रक्षा करनी चाहिए।

तीसरा, चीन और भारत देश के प्रशासन के अनुभवों को मज़बूत करेंगे। चीन और भारत दोनों बड़े विकासशील देश हैं। चीनी विशेषता वाला समाजवाद नये युग में प्रवेश हो चुका है। चीनी जनता चीनी सपने की खोज कर रही है। भारत ने नये भारत का विजन प्रस्तुत किया है। चीन और भारत को विकास नीति को जोड़कर प्रशासन के अनुभवों का उपभोग करना चाहिए। दोनों पक्षों को गरीबी उन्मूलन, भ्रष्टाचार विरोधी, ग्रामीण क्षेत्र, रोजगार, शहरीकरण और पर्यावरण संरक्षण आदि क्षेत्रों में एक दूसरे से सीखना चाहिए और एक दूसरे के राष्ट्रीय आधुनिकीकरण प्रक्रिया का समर्थन करना चाहिए।

चौथा, दोनों देश सीमा समस्या का हल करने की कोशिश करेंगे। सीमा समस्या का हल करने के चीन की इच्छा स्पष्ट है और चीन का रुख सक्रिय है। भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार इस साल चीन में सीमांत समस्या के विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता में भाग लेंगे। दोनों पक्ष सीमांत समस्या का हल करने के ढांचे पर चर्चा करेंगे और कुछ प्रगति पाने की कोशिश करेंगे। इस साल के अगस्त माह में चीनी रक्षा मंत्री की भारत यात्रा के दौरान दोनों ने सैन्य हॉट लाइन की स्थापना पर संपर्क बरकरार रखने पर सहमति प्राप्त की थी।

अपनी भूटान यात्रा की चर्चा में ल्वो चाओह्वेई ने कहा कि इस साल के जुलाई माह में उन्होंने चीनी उप विदेश मंत्री खोंग श्वेनयो के साथ भूटान की यात्रा की। भूटान एकमात्र ऐसा देश है, जो चीन के साथ राजनीतिक संबंध की स्थापना नहीं करता है। लेकिन भूटान चीन का अच्छा पड़ोसी देश और अच्छा मित्र देश है। दोनों पक्ष आर्थिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक आदि क्षेत्रों में कुछ सहयोग कर चुके हैं। चीन आशा करता है कि भूटान में आम चुनाव सफल रूप से आयोजित होंगे। भूटान में राष्ट्रीय स्थिरता बरकरार रखी जाएगी, विकास और समृद्धि प्राप्त की जा सकेगी। यह चीन और भारत दोनों देशों के लिए हितकारी है। चीन शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के पाँच सिद्धांतों के आधार पर यथाशीघ्र ही भूटान के साथ राजनयिक संबंधों की स्थापना करना चाहता है और सीमा समस्या का हल करना चाहता है। चीन को आशा है कि भारत इस में सक्रिय भूमिका अदा कर सकेगा। यह भी चीन-भारत प्लस सहयोग की दिशा बन सकेगा।

 एक पट्टी एक मार्ग पहल के बारे में ल्वो ने कहा कि एक पट्टी एक मार्ग द्विपक्षीय या बहुपक्षीय सहयोग इवेंट है, जो आर्थिक सहयोग और आपसी संपर्क का पहल है, जबकि भूराजनीतिक सामरिक साधन नहीं है। चीन और पड़ोसी देशों के साथ एक पट्टी एक मार्ग के ढांचे में आपसी लाभ वाले सहयोग करता है, जो क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण के लिए लाभदायक है।

मालदीव में चीन पुलों और मकानों का निर्माण करता है। ये सब जनता के जीवन से संबंधित परियोजनाएं हैं। क्या एक पट्टी एक मार्ग ने साझेदारी देशों को ऋण जाल में फंसा है, साझेदारी देशों के पास बोलने का अधिकार है। पाकिस्तान, श्रीलंका और मालदीव आदि देशों के नेता इस दलील का खंडन कर चुके हैं।

12MoreTotal 2 pagesNext

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories